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January 7, 2020
#मधुकर कहिन 2211
एक पत्र आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के नाम
आखिर !!! सिंधी समुदाय के भविष्य का एनआरसी में क्या होगा ?
परम आदरणीय मोहन भागवत जी
सादर प्रणाम
मैं इस देश में रह रहे सिंधी समुदाय के एक सदस्य होने की हैसियत से आपसे कुछ सवाल पूछना चाहता हूँ। मेरा नाम नरेश राघानी है। मेरा जन्म भारत देश , राजस्थान प्रांत के अजमेर शहर में हुआ है। मेरे पास मेरा बर्थ सर्टिफिकेट है। मेरे पिता का जन्म अजमेर के पहाड़गंज में हुआ है । उनके पास उनका बर्थ सर्टिफिकेट नहीं है । उम्मीद करता हूँ कोई अन्य दस्तावेज ज़रूर निकल आएगा जिस से मैं अपनी नागरिकता एनआरसी के दौरान सुनिश्चित कर लूँगा।
परंतु जिनके पिता का जन्म सिंध (पाकिस्तान) में हुआ है। ऐसे सैकड़ों लोग सिंधी समाज में मौजूद है । जो इस देश में रह रहे हैं। उनकी नागरिकता का क्या होगा ?
एनआरसी मैं क्या सिंधी समाज के ऐसे सैकड़ों लोगों को जगह मिलेगी जिनके पिता का जन्म अविभाजित हिंदुस्तान के सिंध प्रांत में हुआ है ?
जिनके दस्तावेज़ विभाजन के जमाने में सिंध से आने के वक्त खो गए हैं। या फिर उन पर सिंध लिखा होगा। उनका क्या होगा ?
मेरी जानकारी के अनुसार एनआरसी के दौरान हर किसी से 1970 से पहले का कोई ऐसा दस्तावेज मांगा जा रहा है। जो कि उनके पिता की जन्मभूमि भारत होने की पुष्टि करता हो । या कोई ऐसा दस्तावेज जो यह साबित करता हो कि उनके पिता भारत देश के में निवास करते थे ।
फिर सवाल यह भी है कि उनका क्या होगा ? जो 1947 से पहले जन्में है ?
कोई भारत में पैदा हुआ था , तो कोई पाकिस्तान में । क्या उनके पिता के दस्तावेज भी मांगे जाएंगे जो यह प्रमाणित करते हो कि उनके पिता कहां पैदा हुए थे ?
उनके दस्तावेज़ तो होंगें नहीं। हुए भी तो उस पर सिंध लिखा होगा। ऐसे लोगों का क्या होगा ?
फिर सिंधी समाज को तो वैसे भी 70 वर्ष पहले पाकिस्तान से हिन्दू मान कर निकाला गया था। संभवतः उसी तरह से जैसे आज 70 साल बाद फिर एनआरसी की लाइन में खड़ा कर के कागज़ न होने पर निकल दिया जाएगा।
राष्ट्र स्वयंसेवक संघ में सैकड़ों की तादाद में सिंधी समुदाय के लोग मौजूद है । क्या उन सब का भी वही हश्र होना है ???
जो आसाम में कुछ सिंधी समाज के लोगों का हुआ है ।
कृपया सिंधी समाज की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करें । मैं कई ऐसे लोगों को जानता हूं जिनके खुद के पासपोर्ट पर और पुराने दस्तावेजों पर उनका जन्म स्थान मुशीराबाद , टंडो आदम , टंडो इल्हियार , सखररपुर , मीरपुर आदि सिंध के गांवों के नाम लिखा हैं। और इस के आगे ब्रैकेट में इंडिया लिखा है।
यह सब वह लोग हैं जिनकी पैदाइश पाकिस्तान के विभाजन से पहले हुई है । यानी कि जिनका जन्मदिन पाकिस्तान के जन्मदिन से पहले आता है। और वे सभी अविभाजित हिंदुस्तान के नागरिक थे । क्या उनको भी एनआरसी में अपना नाम शामिल करने के लिए फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के अधिकारियों के आगे लाइन में खड़ा होना होगा ??? और खड़ा होना होगा तो उनको कैसे देश की नागरिकता मिलेगी ?
आप यह सोच रहे होंगे कि मैं इस चीज का उत्तर आपसे क्यों चाहता हूँ ? आपको ससम्मान बताना चाहता हूँ कि भाजपा से जुड़े सैकड़ों सिंधी समुदाय के नेताओं से भी मैं इस विषय पर बात कर चुका हूँ। कोई भी इस सवाल पर की
आखिर !!! सिंधु समुदाय के भविष्य का एनआरसी में क्या होगा ? संतोषजनक उत्तर नहीं दे पा रहा है । सबके मन में कहीं न कहीं इस बात पर संशय बना हुआ है। परंतु वह अपनी राजनीतिक मजबूरियों के चलते खुल कर नहीं बोल पा रहे हैं।
कृपया सिंधी समुदाय की इन सभी जिज्ञासाओं का उत्तर दें। ताकि यह कर्मठ समुदाय अपने आप को इस देश में सुरक्षित महसूस कर सके। और एनआरसी और सीएआए पर स्पष्ट रूप से अपनी स्थिति का आकलन कर सकें।
सादर
जय श्री कृष्ण
नरेश राघानी
9829070207
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