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January 6, 2020
#मधुकर कहिन 2210
*आखिर कब बंद होगा अतिवाद का नंगा नाच ???*
*मोदी और शाह का विरोध करने वाले क्या सभी देशद्रोही गद्दार है ?*
️ *नरेश राघानी*
सुबह अखबार खोला तो सभी अखबारों में जेएनयू में हुई *हिंसा की तस्वीरें* थी। जिस तरफ देखो *फटे हुए सर, छात्रों और अध्यापकों के साथ मारपीट* की तस्वीरें। छात्र संघ अध्यक्ष ईशा घोष सहित कई छात्रों और *अध्यापकों तक को सशस्त्र अतिवादी गुंडों द्वारा पीटा गया। पीटने वाले लोग राष्ट्रवाद के नारे लगा रहे थे ।* घायलों को ऐसे आपातकाल में लेने आई *एंबुलेंस तक को उन नकाब धारी गुंडों ने नहीं बख्शा। समझ नहीं आता कि आखिर किस तरह का राष्ट्रवाद है ??*
एक कानून जो लगभग पूरे देश को समझ में नहीं आ रहा है। उसका शांतिपूर्ण विरोध करने वाले छात्रों पर *ऐसी बर्बरता आखिर क्यों की जा रही है ??* *ऐसा कौनसा हित है सरकार का इस कानून में जिसके लिए सरकार इसे जबरदस्ती डंडे के जोर पर भी लागू करवाने पर तुली है ??? क्या समाज में व्याप्त बुद्धिजीवी वर्ग को इस बात के बारे में नहीं सोचना चाहिए ??? क्या सरकार को पुनर्विचार नहीं करना चाहिए ??? कि आखिर इतने सैकड़ों की तादाद में युवा इस कानून के खिलाफ क्यों हैं ??? क्या यह सब छात्र और आम लोग जो भी विरोध कर रहे हैं राष्ट्रविरोधी आतंकवादी हैं ???? बिल्कुल नहीं !!!*
पढ़े-लिखे बुद्धिजीवी वर्ग को अगर देश में सरकार की कोई बात समझ में नहीं आ रही है, तो उसे *समझाने का यह कौन सा तरीका है भला ???* कहने वाले कह रहे हैं की - *नकाब धारी लोग एक अतिवादी भावना से ग्रस्त है । जो कि इस देश में नागरिकता के नाम पर चल रही बहस में एक मत विशेष के समर्थक दिखाई हैं। और यह अतिवादी मत केंद्र में बैठी भाजपा सरकार द्वारा ही प्रचारित किया जा रहा है और सैकड़ों लोगों पर थोपा जा रहा है ।* जिसमें *मीडिया जगत के कुछ बड़े घराने भी शामिल है।* अखबारों में छपी खबर के अनुसार यह दो छात्र गुटों की लड़ाई है। जो कि यह बिल्कुल नहीं है । क्योंकि *छात्र होते तो नक़ाब पहन कर नहीं लड़ते। ये लोग दरअसल छात्र नहीं यूनिवर्सिटी में बाहर से भेजे गए असामाजिक तत्व हैं जो छात्र आंदोलन की कमर तोड़ने के लिए भेजे गए है। यह अब सभी को दिखाई दे रहा है । लेकिन कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी लोग अतिवाद के इस नंगे नाच पर पर्दा डाल रहे हैं। क्या इस देश के लोगों को ऐसे ही माहौल में जीना होगा ???*
सरकार के खिलाफ कोई भी खड़ा हो उसके लिए *इस अतिवाद ने नफरत फैलाने वाले नाम सोच रखे है।*
यदि आप *दलित हैं और सरकार के निर्णयों के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं तो आपको मनु विरोधी कह दिया जाता है।*
*यदि आप पढ़े लिखे और प्रगतिशील विचारधारा से जुड़े हैं और सरकार की कोई बात आपको समझ में नहीं आ रही है तो आपको अर्बन नक्सल का तमगा पहना दिया जाता है।*
*यदि आप बुद्धिजीवी साहित्यकार हैं और सरकार का विरोध कर रहे हैं तो आपको अवार्ड वापसी गैंग कहा जाएगा ।*
*यदि आप मीडिया से हैं और सरकार के खिलाफ खबर चला रहे हैं तो आपको टुकड़े-टुकड़े गैंग कहां जाएगा।*
*हद तो तब है !!! जब अतिवाद से ग्रस्त और मानसिक रूप से बीमार लोगों के बीच खड़ें है और हिंदू हैं !!! और सरकार का विरोध करते हुए पकड़े जाते है तो , आपको राष्ट्र विरोधी या गद्दार की संज्ञा दे दी जाती है । ये नफरत बोने वाली भाषा शैली का अत्याचार आखिर कब तक ???*
अतिवादी दलों के साथ जुड़े युवाओं को भटकाया जा रहा है। उनको सिर्फ एक ही *चश्मा पहना दिया गया है कि जो भी केंद्र सरकार के मत का विरोध कर रहा है वह देशद्रोही गद्दार है। और गद्दारों के साथ कोई भी सुलूक जायज है।*
मानो या ना मानो या देश धीरे धीरे *डिक्टेटरशिप* की तरफ बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। जहां पर प्रधानमंत्री मंच पर खड़े होकर *बच्चों की तरह झूठ बोलते है। और कह देते है कि डिटेंशन कैंप जैसी कोई चीज इस देश में है ही नहीं !!!!*
वहीं गृहमंत्री बयान देते है की *डिटेंशन कैंप सतत प्रक्रिया के तहत बनाए गए हैं।*
*शर्मनाक हदों तक जा चुके इस जातिवाद भरे विवाद को अब रोकना होगा। हमें यह समझना होगा कि हम हमारे बच्चों को कैसा हिंदुस्तान देना चाहते हैं ? वह जलता हुआ हिंदुस्तान जो भूखा नंगा होने के बावजूद, नफरत बोता हुआ राष्ट्रवाद के नारे लगा रहा है ? या फिर वह हिंदुस्तान जहाँ सब के बच्चे सुख शांति से प्रेम पूर्वक साथ साथ रहें और प्रगति करें ?*
*हिंदू मुस्लिम जैसे ओछे विवादों में इस देश के युवाओं को भटका रहे इस सरकारी तंत्र को यदि जवाब देना है ? तो बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। सब लोगों को मिलकर अल्पसंख्यक मुसलमानों के आगे उनकी रक्षा में खड़ा होना होगा। और सीना ठोक के कहना होगा कि यह मुसलमान बाद में है पहले मेरा भाई है !!! तब जाकर इस अतिवाद की बोली बंद होगी। अन्यथा !!! कल जब हम आने वाली पीढ़ी को जलता हुआ नफरत भरा देश देंगें तब शायद हम अपने बच्चों को मूँह दिखाने के काबिल नहीं रहेंगें।*
जय श्री कृष्ण
नरेश राघानी
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