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madhukarkhin

#मधुकर कहिन: ये इंसान ही है जो किसी के काम नहीं आते

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January 3, 2020

#मधुकर कहिन 2208

ये इंसान ही है जो किसी के काम नहीं आते !!!

कंबल और तौलिये का काल्पनिक संवाद ...


नरेश राघानी


कंबल और तौलिये में झगड़ा हो गया । तौलिया कंबल से बोला - तुम क्या संदूक में पड़े पड़े 7 महीने सड़ते रहते हो ? जिसके बाद दो-तीन महीने के लिए तुम्हें निकाल कर बेडरूम में क्या रख दिया जाता है .. तुम ऐसे भगवान बने फिरते हो जैसे तुम्हारे सिवा किसी का काम ही नहीं चलेगा !!! 


 कंबल तपाक से बोला - भाई यह कॉन्फिडेंस मैंने गऊ माता से सीखा है । क्योंकि स्वाभाविक है जब किसी को मालूम है कि उसका महत्व क्या है ? तो उसका कॉन्फिडेंस तो आसमान ही छुएगा न ???  अब गाय को ही देख लो।  जब से भाजपा की सरकार आई है , गाय का कॉन्फिडेंस भी  आसमान छू रहा है । पहले मुझे याद है बचपन में जब गाय सिग्नल पर कोने में चारों टांगे फोल्ड करके गोल मटोल होकर बैठ जाया करती थी। तो ऐसे लगता था जैसे की ज़रा सी जगह मांग रही हो . 

की भैया !!! बस इतनी सी जगह दे दो मैं बैठ जाऊंगी आराम से । बस शांति में  बैठ कर धूप खानी है। और आजकल ??? कुछ दिनों पहले खबर छपी थी कि पंजाब के एयरपोर्ट पर गाय पहुंच गई  । फ्लाइट लैंड होने वाली थी की पायलट ने एयरपोर्ट पर चलती गाय देखी । डर के मारे फ्लाइट मोड ली । शायद यह सोचकर कि गऊ रक्षा हेतु तो सैकड़ों लोग सड़क पर आकर , किसी को भी देशद्रोही करार देकर पकड़ लेते हैं। और पीट पीट कर मार डालते हैं , तो अपनी क्या बिसात ?? फिर सैकड़ों लोग  जिसका  मूत्र अमृत समझ कर पीते हो और  मुट्ठी भर लोग यह प्रचारित करने पर तुले हो कि इस अमृत से कैंसर और एड्स जैसे घातक रोगों का इलाज हो जाता है  तो इस से आगे क्या है ???  सुनकर शायद सैकड़ों डॉक्टरों ने अपनी डिग्री सर पर मार ली होगी !!! और सोचा होगा कि इतने साल मेडिकल की पढ़ाई बेकार ही कर रहे थे  इससे तो बेहतर होता गाय पर ही शोध कर लेते 


तभी आवारा पशुओं की चहलकदमी पर नियंत्रण करने की जीतोड़ कोशिश करने वाली नरक निगम के क्रांतिकारी अधिकारी गणों की भरसक कोशिशों के बावजूद भी गाय शहर के हर चौराहे पर कॉन्फिडेंस से भरपूर धरना लगा कर बैठी पाई जाती है । ये लाज़मी भी है क्योंकि गाय को पता है कि उसके मूत्र पर शोधार्थी मूत्र चख चख कर कैंसर और एड्स का इलाज ढूंढनें में लगे हैं। और जब किसी का मूत्र इतने काम का है तो भैया !!! इतनी बहुत आज़ादी पे तो हक़ है उसका । सो जब किसी को भी मालूम होता है कि  वह कुछ भी कर ले  वक्त उसी का है। और साहब !!! चलेगी तो बस उसी की चलेगी। ऐसे वक्त में तो भैया वह फायदा उठाएगा ही न ... तो यह सब मैंने गौमाता से सिखा है ।


इस से आगे कंबल गुस्से में तमतमाता हुआ तौलिये से बोला - और तुम तुम्हारा क्या है ? तुम कौन से बड़े नवाब हो ? मैं तो चलो 4 महीने ही इज्जत पाता हूं । तुम्हें तो 12 महीने लोग इस्तेमाल करते हैं और फिर भी सड़े बदबूदार बाथरूम में टांगे रखते हैं। जब भी कोई नहाने धोने या कोई और अन्य क्रिया करने आता है , तभी तुम्हारी जरूरत महसूस होती है। और तुम्हें इस्तेमाल करके वहीं मैले कपड़ों की टोकरी में पटक देता है। वहां से गाहे-बगाहे तुम्हें कोई चांस लग जाए तो निकाल कर धो लेता हैं। और थोड़ी देर की धूप खाकर पुनः बाथरूम में टांग दिए जाते हो । कभी सोचा है ??? तुम्हारे जीवन का लक्ष्य क्या है ???? सुनकर तौलिया बहुत दुखी होकर बोला - बिल्कुल सही कहा तुमने !!! मैंने कभी अपने बारे में नहीं सोचा। और यह सब मैंने कांग्रेसियों की सहनशीलता से सीखा है । क्योंकि एक आम कांग्रेसी हमेशा से ही अपने नेताओं के लिए मरता रहता है। जब भी कोई नेता आना होता है , तब उसे भीड़ की तरह इस्तेमाल कर लिया जाता है। नारे लगवाए जाते हैं , मिठाई खिलाई जाती हैं , उस पर मुकदमे लगवाए जाते हैं। जब नेताओं के प्रदर्शन और उनका मतलब पूरा हो जाता है ? बिल्कुल मेरी तरह अपने कार्यकर्ता को पटक देते हैं। लेकिन फिर भी देखो जहां देखो , सैकड़ों लोग कांग्रेस जिंदाबाद, सोनिया गांधी जिंदाबाद के नारे लगाते दिखाई देते हैं। ऐसे ही  लोग हैं जो इस देश की इस हालत के लिए जिम्मेदार हैं। इन्होंने कभी भी सही को सही और गलत को गलत कहने की हिम्मत नहीं जुटाई । बस लगे रहे अपने नेताओं की सेवा करने में । जब कांग्रेस जैसी विशाल पार्टी को इतने सैकड़ों निर्विरोध गुलाम मिल गए ... तो उस पार्टी का कॉन्फिडेंस भी आसमान छूने लगा । और जब वह कॉन्फिडेंट इतना ज्यादा बढ़ गया कि लोगों को राहुल गांधी में भी नेता दिखाई देने लग गया। और लोग अंधे होकर उसके पीछे दौड़ने लगे । जब राहुल गांधी में ही नेता दिखाई देने लगा तो हर प्रदेश में एक-एक राहुल गांधी पैदा हो गया । जो अपने आप को मुख्यमंत्री का दावेदार बताने लगा और वरिष्ठ नेताओं की बैंड बजाने में जुट गया । और जब इतना सब कुछ हो गया तो देश में सेक्युलरिज्म का झंडा चमचों के हाथ में आ गया । और चमचे ??? चमचे तो चमचे है साहब !!! वह किसी भी सोच को दिशा देने में सक्षम तो है नहीं।इसी वजह से इस देश में आज ऐसी सामंतवादी सरकार जड़े जमा कर खूब पनप रही है । लोगों को मालूम है कि केंद्र सरकार के फैसले गलत है । उनसे नाराज भी हैं लोग , लेकिन लोगों के पास प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी के अलावा विकल्प दिखाई नहीं दे रहा। एक गांव में मुझे मेरे मालिक कुछ रोज़ पहले लेकर गया था। वहां तार पर सूखते सूखते मैन देखा कि जब वहां किसी से पूछा गया कि - भैया !!! मोदी जी के आने से तुम को क्या फायदा हुआ ? तो वह बोला कि भैया हमारे गांव में इंग्लिश सबको आ गई है । उस से पूछा गया कि कैसे ?? तो उसने पास बैठे एक मैले कुचले छोटे बच्चे को बुलाया और कहा - बेटा इंग्लिश बोल कर दिखाओ ? तो वह इंग्लिश में बोल - CAA - CAB - NRC - NPR - GDP - GST - RBI - EVM सुनकर कमबख्त मैं दंग रह गया   बच्चे से पूछा गया कि - भाई तुम इन सब में से किसी एक शब्द का मतलब पता है ??? बच्चा बोला- साहब !!! मतलब मतलब से हमें कोई मतलब नहीं है। ये सब अंग्रेजी के शब्द मैंने अभी हाल ही में पिछले 1 साल में सीखें हैं। कांग्रेस की क्या मजाल जो इतने साल तक राज करने के बाद हमें इतना शिक्षित कर देती है ? 


यह सुनकर कंबल बोला - जाने दे यार !!! मैं तो तेरा दोस्त हूँ और तेरा दर्द भी समझता हूँ। जब तक यह धरा है तब यही सब इस देश में चलता रहेगा। हम जैसे सैकड़ों तौलिये और कंबल जब तक सलामत है , इन इंसानों के काम आते ही रहेंगें। ये इंसान ही है जो कमबख़्त किसी के भी काम नहीं आते और न ही किसी का दर्द समझते हैं।

आ दोस्त गले लग जा !!!  ऐसा कहकर तौलिया और कंबल दोनों एक दूसरे के गले लग गए और हाथ में हाथ डालकर चल वहाँ से चल दिये।


जय श्री कृष्ण


नरेश राघानी 

9829070307


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