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January 3, 2020
मधुकर कहिन* 2206
पुराना साल जा रहा है !!! नया आ रहा है
इस से पहले की नेट बन्द हो जाये ....आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं
नरेश राघानी मधुकर
पुराना साल जा रहा है और उम्मीद है साथ ले जाए सारे बोझ। जो लोगों ने दिलों में पाल रखे हैं। मैं तो कहता हूँ यह जा ही रहा है , तो लगे हाथ इस पुराने साल की *जाती हुई गाड़ी की बैकसीट* पर हम सबअपने मन के भीतर रखे हुए बोझ को रख आएं। और *इस तकलीफ से पिंड छुड़ाएं।* होता क्या है कि हम एक दूसरे के लिए छोटी छोटी बातों को लेकर मन में इतना लोड पाल कर बैठ जाते हैं , की कमबख्त ये *खांमखां का बोझ* हमारे दिमाग की *हार्ड डिस्क* भर देता है। साला *बिजली के बिल की तारीख याद रखें बच्चों की स्कूल की फीस भरने का दिन याद रखें बीवी के खर्चे याद रखें* इतना ही डाटा बहुत होता है दिमाग भरने के लिए। उस पर *कमबख्त अब यह भी याद रखें कि किसने कब क्या कह दिया था ? और उसकी कैसे वाट लगानी है ??? अपने से तो हो नहीं होगा भाई !!! अपुन तो अपनी हार्ड डिस्क फॉरमैट कर रहे हैं भाई ...* *वैसे ही इन दिनों हिंदुस्तान में जिंदगी बड़ी कशमकश में है। सरकार नेट बन्द कर देती है, घर देर से जाओ तो बीवी दरवाजा बंद कर देती है। मोबाइल ने लोगों की आपस में बोलचाल बंद कर रखी है , जनता बात बात पर मार्किट बंद कर देती हैं। स्टूडेंट्स ने आंदोलन पकड़ कर पढ़ाई बन्द कर रखी है और मंदी ने कमाई बन्द कर रखी है। कमबख़्त दिमाग की माँ का रामू काका हो रखा है।* जवानों को अपना दर्द है, बुड्ढों को अपना दर्द है और बुड्ढे जवानों को अपना दर्द है। अब यह दर्द जैसे है सब वैसे ही रहेंगे अपनी जगह। लेकिन फिर भी मेरा यह मानना है कि साला कितना भी अपनी तरफ से ट्रैक पर ज़िन्दगी की गाड़ी धकेलो पटरी से उतर ही जाती है। *सो जाते हुए साल के आखरी हफ्ते में जिस किसी भाई बहन की शान में* *मुझसे कोई गुस्ताखी हो गई हो और उनके मन में मधुकर के प्रति कोई बोझ लद गया हो ... वो प्लीज़ जाते हुए साल की गाड़ी की बैकसीट पर डाला दो भाई !!! और उसको जाने दो। क्योंकि मधुकर भी वही कर रहा है।*
देश की ऐसी खस्ता हालत देख कर भी कमबख़्त कोई यह मानने को तैयार नहीं है कि *हिंदुस्तान का अर्थतंत्र भूखा मर रहा है।* कल फेसबुक पर एक सुपर पोज़िटिव मैसेज देखा । *जिसमें लिखा था लड़कियां भाव खा रही हैं, लड़के जहर खा रहे हैं, नेता पैसे खा रहे हैं , अधिकारी कमीशन खा रहे हैं , राजनेता श्रेय खा रहे हैं , फर्जी संत मूसली खा रहे है और कुर्सी के कीड़े देश कुरेद कुरेद कर खा रहे हैं । कमबख्त कौन कहता है हिंदुस्तान भूखा मर रहा है ? पढ़ कर वाकई मेरी पाव भर की खोपडी में छेद हो गया ....* ऊपरवाले से प्रार्थना करता हूं कि आने वाला साल में देश के *कर्णधार देशभक्तों* को सद्बुद्धि दें । और उनके दिमाग में पल रहे घातक विचारों को सही दिशा प्रदान करे ।
*बात हमारे अजमेर वासियों की !!! तो ईश्वर करे नए साल में ऊपर वाला आप सभी को भंवरसिंह पलाड़ा जैसी ताक़त डॉ रघु शर्मा जैसी हैसियत , भगीरथ चौधरी जैसी मोहब्बत अनिता भदेल जैसी किस्मत, वासुदेव देवनानी जैसा दम डॉ बाहेती जैसा संयम, हेमंत भाटी जैसी दौलत ललित भाटी जैसी सदाक़त,शिवशंकर हेडा जैसी हँसी धर्मेश जैन जैसी खुशी , प्रियशील हाड़ा जैसी खबर महेंद्र सिंह रलावता जैसा हुनर, राजकुमार जयपाल जैसा रुतबा बी पी सारस्वत जैसा बुद्धिजीवी कुनबा , धर्मेंद्र गहलोत जैसी ज़िम्मेदारी , कुंवर राष्ट्रदीप जैसी ईमानदारी, विश्वमोहन शर्मा जैसी समझदारी और चिन्मयी गोपाल जैसा सबसे भारी व्यक्तित्व प्रदान करे।*
*आप आने वाले साल में मौज करें , जात-पात , धर्म-अधर्म , भक्त अंधभक्त के साये से कोसों दूर रहें। और आपका आने वाला समय मंगलमय हो।*
*पुनः हो सके तो मधुकर की दिल पर आई हुई किसी भी बुरी बात को अंतर्मन से विदा कर दीजियेगा ..क्योंकि वह पहले ही विदा कर चुका है *
*नए साल की पूर्व संध्या से पहले ही ... सबको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं क्योंकि ...*
*कमबख़्त कल नेट हो ना हो ....
*जय श्री कृष्ण*
नरेश राघानी
प्रधान संपादक
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