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January 3, 2020
#मधुकर कहिन 2206
अंधविश्वास से नहीं वैज्ञानिक नजरिये से समझें सूर्य ग्रहण
नरेश राघानी
सूर्य ग्रहण के धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व को समझना जरूरी है साल के अंत में लगने वाले इस सूर्य ग्रहण को रिंग ऑफ फायर का नाम दिया गया है. इसे लेकर कई लोगों में डर है. हालांकि वैज्ञानिक के नजरिए से यह एक खगोलीय घटना से ज्यादा कुछ नहीं है। नासा ने सूर्य ग्रहण लगने से पहले एक चेतावनी जारी की है कि इसे नग्न आंखों से देखने का प्रयास न करें। इसे देखने के लिए सनग्लास का इस्तेमाल करना सही होगा। इसके अलावा इसे ऑनलाइन भी देखा जा सकता है.
अंध विश्वास : ग्रहण पड़े तो घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।
सच - प्राचीन समय में ऋषि-मुनियों द्वारा यह बात फैलाई गई थी की ग्रहण के वक्त घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। प्राचीन समय में लोगों को ज्यादा ज्ञान नहीं होता था और भय के सहारे उनसे काम करवाया जाता था। यह परंपरा आज तक चली आ रही है मगर आज लोग पढ़े लिखे हैं। प्राचीन समय में इलेक्ट्रिकसिटी नहीं हुआ करती थी इसलिए कहा जाता था कि अंधेरे में घर से बाहर नहीं निकला चाहिए। मगर आज प्रकाश लाने के ढेरों विकल्प ऐसे में ग्रहण पड़ने पर भी काम नहीं रुकते। जो लोग आज भी मानते हैं कि ग्रहण के वक्त घर से बाहर निकलने पर अनर्थ हो जाएगा वह अंधविश्वास के शिकार हैं।
अंधविश्वास - प्रेगनेंट महिलाओं पर ग्रहण का साया नहीं पड़ना चाहिए, यह भी एक अंध विश्वास
सच - यह एक बहुत बड़ा अंधविश्वास है। इससे जुड़ी लोगों की अलग-अलग मान्यताएं भी हैं। कोई कहता है कि ग्रहण का साया प्रेगनेंट महिला पर पड़ से बच्चे अपंग पैदा होते हैं , आज भी ग्रहण वाले दिन भी कई बच्चों का जन्म होता है और वह तंदुरुस्त भी होते हैं। डॉक्टर की सलाह से प्रेगनेंट महिलाओं चलना चाहिए न कि ग्रहण की दशा के अनुसार।
अन्धविश्वास :- ग्रहण में बना खाना जहर जैसा होता है।
सच - यह भी मिथ है , इसका संबंध भी प्रकाश से है। पहले के समय में कहा जाता था कि खाना हमेशा रौशनी में पकाया जाए ताकि साफ सुथरा पके और खाया भी रौशनी में चाहिए ताकि अन्न के साथ कुछ गलत चीज मुंह में न जाए। मगर आज ऐसा कुछ भी नहीं है। हर घर बिजली है और भरपूर रौशनी भी है। ऐसे में ग्रहण के वक्त खाना पकाया भी जा सकता है और खाया भी जा सकता है।
मान्यता : ग्रहण के वक्त भगवान का ध्यान करना चाहिए।
सच : अगर ग्रहण पूरे दिन रहेगा तो क्या पूरे दिन सारे काम छोड़ कर व्यक्ति को भगवान का ध्यान करना पड़ेगा। प्राचीन समय में ग्रहण पड़ने से प्रकाश में कमी होती थी इसलिए सारे काम ठप हो जाते थे। लोग खाली वक्त में क्या करें इसलिए उन्हें पूजा पाठ करने को कहा जाता था। मगर आज की जीवनशैली में ऐसा संभव नहीं है।
जय श्री कृष्ण
नरेश राघानी
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