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अंदाजे बयां: मेयर गहलोत के कुत्ते -सुरेन्द्र चतुर्वेदी

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August 13, 2019

मेयर गहलोत के कुत्ते  -सुरेन्द्र चतुर्वेदी


जहां गली -गली में कुत्ते ,सूअर, गायें करें बसेरा,वो  अजमेर शहर है मेरा। जी हाँ  दोस्तों ! कुत्ते अजमेर की शान, गायें  मेहमान और सूअर पहचान हैं।यदि अंग प्रदर्शन ही फ़ैशन है तो हम बहुत अभागे हैं, क्यों कि जानवर इस दौड़ में हमसे बहुत आगे हैं। नगर निगम ने भले ही शहर के दूसरे अलग  कोने में कांजी हाउस की स्थापना कर रखी हो लेकिन सच तो ये है कि अब पूरा अजमेर ही एक कांजी हाउस में तब्दील हो चुका है।जानवरों के लिए  यहां परिवार नियोजन जैसी स्कीम  कोई मायने नहीं रखती ।मेयर गहलोत का जानवर प्रेम इस शहर में देखते ही बनता है ।वैसे तो अजमेर में और भी बहुत सी चीजें लोकप्रिय हैं जैसे सड़कों पर खुदाई और घरों में चुनवाई (ठीक समझे) हमेशा चलती रहती है। 

      जानवरों के लिए अजमेर राज्य की सबसे उपयुक्त जगह है ।अब ऐसे रबर के उपकरण तो धर्मेंद्र गहलोत जी के पास हैं नहीं जो इन आवारा जानवरों को बांट दिए जाएं और उनकी जनसंख्या पर ब्रेक  लग जाए। वैसे गहलोत जी वकील हैं,किसी भी मामले में स्टे ला सकते हैं मगर जानवरों की शहर में बढ़ती आबादी पर वे स्टे नहीं ला पा रहे ।यही वजह है की  दिन- रात जानवर सड़कों पर ओलंपिक क्रीड़ाएं करते  नज़र आ जाते हैं।गहलोत जी के कई कुत्तों,पिल्लों सूअरों और गाय भैंसों को में व्यक्तिगत रूप से जानता हूँ।सब    खा कमा रहे हैं।अन्य जानवरों की तरह फ्री का चारा पानी पा कर मस्त हैं।

       गहलोत जी की नज़र में कुत्ते, सूअर और गाय क्या हैं  मैं नहीं जानता मगर इन सब की नजर में गहलोत साहब माई बाप हैं। उनकी कृपा पर ही  वे सब फल-फूल रहे हैं।फूल कम रहे हैं फल ज़्यादा रहे हूं।वैसे इतना हक़ तो उनका भी बनता ही है।

    मुझे याद आ रहा है कुछ समय पहले गहलोत जी ने कहा था कि कुत्तों के इंजेक्शन लगाकर उन्हें बधिया किया जा रहा है ।बधिया का मतलब है जानवरों को रतिक्रिया  लायक ही ना छोड़ना ।नगर निगम में कई लोगों को पिछले दिनो एक महिला अधिकारी ने   हाँ ....किसी लायक नहीं छोड़ा।गहलोत जी ने शहर के कुत्तों की बाक़ायदा नसबंदी  करवा दी।मगर कमाल की बात है कि नसबंदी का कहीं कोई परिणाम सामने नहीं आ रहा ।मानो  उनकी नसें और मजबूत हो रही हों।जिस गली में देखो कुत्ते और सूअर की औलादें  गुलांचे मार रही हैं।लादेन बने हुए हैं सब।सब के सब अपनी आबादी बढ़ाने के एक सूत्री कार्यक्रम में  प्रयासरत हैं। समझ में नहीं आता कि नसबंदी के बाद कुत्तों की फीमेल गर्भ कैसे धारण कर लेती हैं❓ कोई मुझे यह बताए कि जब अजमेर के कुत्तों को किसी लायक छोड़ा ही नहीं जा रहा तब क्या किशनगढ़, नसीराबाद ,ब्यावर से बलिष्ट कुत्ते अजमेर आ रहे हैं  या इनकी फीमेल इन  शहरों में जाकर लौट रही हैं।यही हाल सुअरों का भी है।   स्थिति यह है कि सड़कों पर कुत्ते , गाय भैंसे  और सूअर की औलादें आराम से फ्री वर्कशॉप  करती देखी जा सकती हैं।

अजमेर में एक नेताजी हुआ करते थे। ज़िन्दा तो वो अब भी हैं मगर कहाँ क्या कर रहे हैं मुझे पता नहीं।औंकार सिंह जी लखावत। उन्होंने कभी घोषणा की थी कि अजमेर में गाय भैंसों को पालने के लिए अलग से गोकुलधाम बनाया जाएगा। बहुत अच्छी योजना थी मगर इस योजना को वो लागू करने से पहले ही  किसी अन्य  धाम पधार गए। नतीजा ये है कि पूरा शहर ही गोकुलधाम हो गया है। गली -गली गोकुल की गली हो गई है।दुनिया में  शायद ही कोई ऐसा शहर हो  जहां मकानों के अंदर  भी गाय बैल पाले  जाते हों।। बड़ी-बड़ी पॉश कॉलोनियों के बीच में गाय भैंसों का पालन हो रहा है। उनकी वजह से नागरिकों को जो परेशानी होती है वो काश !मेयर साहब जान पाते।बस्ती के बीचो-बीच जानवर पसर जाते हैं। आने जाने वाले लोगों के टक्कर होती हैं। लोग घायल हो जाते हैं ।वाहनों में टूट-फूट होती है ।कुछ कहो तो पशुपालक जानवरों से ज्यादा हमलावर हो जाते हैं। मदार गेट, वैशाली नगर ,पुलिस लाइन के बाजारों में सड़कों के बीच जानवरों का कुनबे पल  रहे हैं।कौन सा ऐसा बाज़ार है जहां जानवर न हों।

   कहने को  शहर में एक  कांजी हॉउस भी है मगर वहां सिर्फ जेब गर्म करने का कारोबार चलता है ।उसका संचालन करने वाले प्रदीप गुप्ता का तो भगवान ही मालिक है। जानवरों के साथ रहते रहते  उनका व्यवहार और कार्यशैली भी वैसी ही हो गई है।

      मेयर गहलोत जी वैसे तो आपके कुत्ते शहर भर में फैले हुए हैं ।जानवरों की तरह आवारा भी है मगर अब वक्त आ गया है जबकि आपको कोई पुख़्ता कार्यवाही इस दिशा में करनी होगी। पूरा शहर आपको गालियां दे रहा है। उनका वश नहीं चलता वरना लोग  आपको बता दें   कि शहर के जानवरों के साथ कैसा सलूक किया जा सकता है ।आप बेहद संवेदनशील हैं ।अनुभवी भी है।इसलिए आपसे प्रार्थना है कि आप अपने और शहर के कुत्तों पर लगाम  लगाएं। ज़रा देखें कि  आपका यह मित्र


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