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March 12, 2018
राजेन्द्र सिंह हीरा
अजमेर
एक बार फिर यह बात साफ़ हो गई कि राजनीति के अखाड़े में कूएँ के मेंढक ही टर्र टर्र करेंगे साफ सुथरी और ईमानदार छवि वाले सामाजिक जीवन के व्यक्तियों की इसमें कोई जगह नहीं है ?
राजनीती सेवा नहीं सत्ता में बने रहने का नाम है।
इसीलिये तो उपचुनावों में तीनों सीट गंवाने वाली वसुन्धरा सरकार बैकफुट पर आ गई और वोटों की राजनीती के चलते किरोड़ीलाल मीणा से हाथ मिला लिया।
सुना जा रहा है कि भाजपा किरोड़ीलाल मीणा को राज्यसभा में भेजने का मन बना चुकी है और उन्हें कैबिनेट में केंद्रीय मन्त्री बनाया जा सकता है।
यह भी खबर है कि राजपा के एक सदस्य को राज्य में मन्त्री बनाया जा सकता है।
इतना तो स्पष्ट है कि यह विलय वसुन्धरा और किरोड़ीलाल मीणा के आपसी हितों को साधता है पर देखने वाली बात यह होगी की जनता इसमें अपने आपको कहाँ खड़ा पाती है।
मेरा ऐसा मानना है कि जनता अब काफी समझदार हो चुकी है और जरुरत पड़ने पर वह जातीय समीकरणों को भी अपने हितों के लिये ताक पर रखने से नहीं हिचकिचाती है।
एक बात और क्या पता किरोड़ीमल को साथ लेने पर भाजपा के किन्हीं विधायकों के भीतर दबी चिंगारी सुलग उठे और वह विकराल आग का रूप ले ले।
किरोड़ीलाल मीणा जी राज्यसभा जाएंगे तो किसी की उम्मीदों पर तो पानी फेर कर ही जाएंगे न!
राजनीती सत्ता की महत्वकांक्षाओं का खेल है।
इस खेल में हार के चलते कौन कहाँ अतिरेक कर बैठे कुछ कहा नहीं जा सकता ?
एक बात और राजस्थान की जनता भी समझ रही है कि वसुन्धरा जी जनता का दिल जीतकर , जनता के लिये काम करके सरकार बनाने के अपेक्षा जोड़तोड़ करके सरकार बनाने में विश्वास रख रही हैं।
राजस्थान की जनता का फैसला आगामी चुनावों का इतिहास तय करेगा।
जयहिन्द।
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