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January 15, 2018
जहां तक सवाल स्वच्छता का है यह बेशक एक क्रान्ताकारी व्यवस्था है। जिस के अच्छे परिणाम नज़र आ रहे है । जिसके लिए अजमेर के मेयर धर्मेंद्र गहलोत बधाई के पात्र हैं।परंतु इस व्यवस्था में एक बहुत बड़ी कमी ऐसी है जिसको शायद निगम नज़र अंदाज़ कर गया है । वह कमी यह है कि यह गाड़ियां रोज़ सुबह 7 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक स्वच्छता अभियान से जुड़ा एक गाना ज़ोर ज़ोर से लाउडस्पीकर पर बजा बजा कर शहर भर में घूमते हैं। और आम नागरिक न चाहते हुए भी यह गाना लगातार सुनते रहने को मजबूर नज़र आता है। कानूनी व्यवस्था के अनुसार आम नागरिक यदि किसी समारिह का आयोजन करता है तो उसे लाउडस्पीकर बजाने के लिए एडीएम सिटी से स्वीकृति लेनी पड़ती है । परंतु वहीं निगम की यह कचरा उठाने वाली गाड़ियाँ रोज़ 7 घंटे सुबह 7 से दोपहर 2 बजे तक जम के पूरी आवाज़ खोल कर ज़ोर ज़ोर से यह गाना बजाती है बिना यह सोचे समझे कि बच्चों के इम्तिहान भी होते है और आम नागरिक इस ध्वनि प्रदूषण का शिकार हो रहा है । जनता का भला करने वाले किसी भी तथाकथित बुद्धीजीवी नेता को इस बात का अब तक होश नहीं आया है कि निगम यह गाना बजाना रोज़ 7 घंटे किस कानून के तहत कर रहा है ?
बात स्वच्छता की तो मैं पहले भी कह चुका हूँ की इस अभियान के तहत वाकई सड़कें साफ दिखाई दे रहीं है।लेकिन यदि इस अभियान को बिना शोर शराबे और गाने बजाने के यदि किया जाएगा तो शायद बेहतर होगा। क्योंकि इस से आम लोगों में यह संदेश जा रहा है कि निगम को काम करने से ज्यादा काम के प्रचार में रूचि है। आखिर काम ही है जो जनता की नज़र में मायने रखता है यह गाना बजाना महज़ योजना के प्रचार का माध्यम है जो कि आम लोगों के लिए रोज़ 7 घंटे की सिरदर्दी बन चुका है ।
जय श्री कृष्णा
नरेश राघानी
प्रधान संपादक
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