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October 16, 2026
जयपुर। जल जीवन मिशन (जेजेएम) से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के दर्ज मुकदमे में उनकी नियमित जमानत मंजूर कर ली। एसीबी ने उन्हें 7 मई 2026 को जयपुर स्थित आवास से गिरफ्तार किया था, यानी वे करीब पांच महीने से हिरासत में हैं। रिहाई अदालती शर्तों और कानूनी औपचारिकताओं के पूरा होने पर होगी।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने 12 अक्टूबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर फैसला सुरक्षित रख लिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसी मामले में एक अन्य आरोपी मुकेश पाठक को भी राहत मिली है।
हाईकोर्ट ने अगस्त में खारिज की थी जमानत
इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने 13 अगस्त को जोशी समेत आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। जस्टिस चंद्रप्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने 5 अगस्त को सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा था। उस सुनवाई में पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल सहित अन्य आरोपियों को भी राहत नहीं मिली थी। हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद जोशी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
ईडी के मामले में भी हो चुकी है गिरफ्तारी
जेजेएम से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जोशी को 24 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया था। करीब सात महीने न्यायिक हिरासत में रहने के बाद 3 दिसंबर 2025 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। इसके बाद एसीबी के अलग मुकदमे में 7 मई 2026 को उनकी दोबारा गिरफ्तारी हुई। एसीबी ने 9 अप्रैल 2026 को जलदाय विभाग के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल को भी गिरफ्तार किया था, जिन पर मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति मांगी जा चुकी है।
फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र से टेंडर लेने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार मामला वर्ष 2021 का है, जब श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी और मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के ठेकेदारों पदमचंद जैन और महेश मित्तल ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र दिखाकर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) से करोड़ों रुपये के टेंडर हासिल किए। जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की वह योजना है, जिसका मकसद ग्रामीण इलाकों के हर घर तक नल से पेयजल पहुंचाना है। राजस्थान में इसके तहत पाइपलाइन, पानी की टंकियों और जलापूर्ति परियोजनाओं के बड़े पैमाने पर टेंडर निकाले गए थे।
टेंडर का गणित
एफआईआर में कौन-कौन
एसीबी की एफआईआर में जेजेएम के वित्तीय सलाहकार सुनील शर्मा, तत्कालीन मुख्य अभियंता रामकरण मीणा और दिनेश गोयल, अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरुण श्रीवास्तव, रमेश चंद मीणा तथा परितोष गुप्ता के नाम हैं। अधीक्षण अभियंता निरिल कुमार, विकास गुप्ता, महेंद्र प्रकाश सोनी, भगवान सहाय जाजू और जितेंद्र शर्मा तथा अधिशासी अभियंता विशाल सक्सेना के नाम भी इसमें शामिल बताए गए हैं। एसीबी का कहना है कि जेजेएम के कामों और निविदाओं में अनियमितताएं हुईं, जिनसे राजकोष को नुकसान पहुंचा। एसीबी अदालत ने इस मामले में 13 आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाई थी, जबकि जितेंद्र शर्मा, मुकेश गोयल और संजीव गुप्ता को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है।
जमानत से मुकदमा खत्म नहीं होता
एसीबी महेश जोशी और संजय बड़ाया के खिलाफ करीब तीन हजार पन्नों का चालान विशेष अदालत में पेश कर चुकी है और उस समय अदालत को बताया गया था कि अनुसंधान अभी जारी है। जमानत मिलने का मतलब आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं है। जोशी को अदालत की तय शर्तों का पालन करना होगा और आरोप तय करने से लेकर साक्ष्य तक की कार्यवाही संबंधित अदालत में आगे चलती रहेगी।
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