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June 21, 2026
आबूराज । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आबूराज के पर्यटन, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय महत्व को ध्यान में रखते हुए इसके सर्वांगीण विकास के लिए विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आबूराज का विकास इस प्रकार किया जाए कि यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलें और क्षेत्र की सांस्कृतिक, धार्मिक तथा प्राकृतिक विरासत भी संरक्षित रहे।
मंत्री रविवार को आबूराज में आबूपर्वत विकास समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में मुख्यमंत्री ने शहरी विकास, सड़क, पार्किंग, आवागमन और पर्यटक सुविधाओं को विश्वस्तरीय स्तर पर विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आबूराज में सुविधाओं का विस्तार इस तरह हो कि अधिक से अधिक पर्यटक यहां आएं और उन्हें स्वच्छ, व्यवस्थित और सुगम वातावरण मिले।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विकास कार्यों को विभागों के परस्पर समन्वय के साथ समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए। उन्होंने संभागीय आयुक्त और मुख्य सचिव को इन कार्यों की निरंतर मॉनिटरिंग करने के लिए भी निर्देशित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आबूराज के विकास से जुड़े कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने नक्की झील के सौंदर्यकरण, प्रकाश व्यवस्था, रंग-रोगन, सीढ़ियों की मरम्मत, सीवरेज व्यवस्था और अन्य आधारभूत सुविधाओं को लेकर विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नक्की झील आबूराज की पहचान है, इसलिए इसके आसपास की व्यवस्थाओं को सुंदर, सुरक्षित और पर्यटक अनुकूल बनाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आबूराज ऋषि-मुनियों की भूमि रही है और इसका धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व अत्यंत विशेष है। उन्होंने धार्मिक पर्यटन को नई गति देने के लिए क्षेत्र के मंदिरों का सूचीकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मंदिरों और धार्मिक स्थलों के विकास से श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने आबूराज को क्लीन और ग्रीन सिटी के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आबूराज स्वच्छता युक्त और अतिक्रमण मुक्त रहे। इसके लिए नियमित निगरानी, प्रभावी व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर समन्वित प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थल की पहचान उसकी स्वच्छता, अनुशासन और प्राकृतिक सौंदर्य से होती है।
मुख्यमंत्री ने आबूराज की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विशिष्टता को संरक्षित रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने टोकन कार्य में ऑनलाइन प्रणाली को पूर्ण पारदर्शिता के साथ लागू करने और निर्माण सामग्री के आवागमन पर निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के दौरान पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय विरासत से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आबूराज में ‘विकास भी, विरासत भी’ के मूल मंत्र पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विकास का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य करना नहीं है, बल्कि आबूराज की मूल पहचान, आध्यात्मिकता और पर्यावरणीय सुंदरता को सुरक्षित रखते हुए उसे आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना है।
बैठक में विवेकानंद पार्क के सौंदर्यकरण, गुरु शिखर के सौंदर्यकरण एवं सुदृढ़ीकरण, अर्बुदा माता मंदिर और दत्तात्रेय मंदिर के विकास कार्यों पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही ईवी व्हीकल को बढ़ावा देने और भारत माता नमन स्थल को नमो उद्यान के रूप में विकसित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को लेकर भी मुख्यमंत्री ने दिशा-निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि आबूराज को इको फ्रेंडली, क्लीन-ग्रीन और स्पिरिचुअल पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न विकास कार्य प्रस्तावित हैं। उन्होंने कहा कि इन कार्यों के पूर्ण होने से आबूराज में पर्यटन को नई गति मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने पूर्व बैठकों में दिए गए निर्देशों की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आबू पर्वत विकास समिति की नियमित बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि विकास कार्यों की निरंतर समीक्षा हो सके और समय पर आवश्यक निर्णय लिए जा सकें। इससे पहले मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
बैठक में पंचायतीराज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी, उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री केके विश्नोई, सांसद मदन राठौड़, लुंबाराम चौधरी, विधायक समाराम, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण आनंद कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव नगरीय विकास आलोक गुप्ता, स्वायत्त शासन विभाग के शासन सचिव रवि जैन, पर्यटन विभाग की शासन सचिव शुचि त्यागी सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। संबंधित मंत्रीगण और विभागीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी बैठक में जुड़े।
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