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June 21, 2026
बीकानेर से साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के मुख्य कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राजस्थान केंद्रित रेलवे के भविष्य के बड़े प्रोजेक्ट्स की रूपरेखा जनता के सामने रखी। रेल मंत्री ने एक नक्शे के माध्यम से बताया कि केंद्र सरकार भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राजस्थान के आखिरी गांवों तक रेल कनेक्टिविटी पहुंचाने के बड़े संकल्प पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस रोडमैप के धरातल पर उतरने के बाद पश्चिमी राजस्थान के बॉर्डर एरिया की पूरी तस्वीर और आर्थिक भूगोल बदल जाएगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में रेल लाइनों का विस्तार केवल आम यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक बड़ा सामरिक महत्व भी है। भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे क्षेत्रों में बेहतर रेल नेटवर्क देश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रेल पहुंचने से सेना, सीमा सुरक्षा बल और आवश्यक सैन्य सामग्री के त्वरित परिवहन में बड़ी सहायता मिलेगी।
रेल मंत्री द्वारा साझा किए गए रोडमैप के अनुसार, राजस्थान के बॉर्डर क्षेत्रों में नई रेल लाइनों के माध्यम से अनूपगढ़, खाजूवाला, जैसलमेर और बाड़मेर जैसे महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने की योजना है। इन क्षेत्रों को राज्य के प्रमुख रेल जंक्शनों से जोड़ने पर काम किया जा रहा है, जिससे रक्षा व्यवस्था के साथ-साथ आम नागरिकों, किसानों, व्यापारियों और स्थानीय उद्योगों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रेल नेटवर्क के विस्तार से आपातकालीन परिस्थितियों में देश की रक्षा व्यवस्था को मजबूत आधार मिलेगा। इसके साथ ही यह नेटवर्क स्थानीय स्तर पर दैनिक यात्रा, कृषि उत्पादों के परिवहन, क्षेत्रीय व्यापार, लघु उद्योगों और पर्यटन को भी नई दिशा देगा। थार रेगिस्तान के दूरस्थ इलाकों में रेल पहुंचने से पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार व स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
रेल मंत्री ने बताया कि अनूपगढ़ और खाजूवाला जैसे महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों को नए रेल ट्रैक के जरिए आपस में जोड़ते हुए बीकानेर जंक्शन से सीधे लिंक करने की योजना है। इससे बीकानेर संभाग के उन इलाकों को विशेष लाभ मिलेगा, जो अब तक रेल कनेक्टिविटी के मामले में अपेक्षाकृत पीछे रहे हैं। बेहतर रेल नेटवर्क से सीमावर्ती गांवों तक आवागमन आसान होगा और स्थानीय लोगों को व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए बड़े शहरों से बेहतर संपर्क मिलेगा।
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