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May 10, 2026
जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की विशेष जांच टीम (SIT) ने जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में गिरफ्तार पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी से शनिवार को करीब 8 घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ के दौरान एसआईटी ने उनके सामने 40 से अधिक सवाल रखे, जिनमें मुख्य रूप से टेंडर प्रक्रिया और कथित तौर पर चहेती कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
जांच एजेंसी ने विशेष रूप से 960 करोड़ रुपए के उन टेंडरों को लेकर सवाल किए, जिनमें ‘इरकॉन’ के कथित फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र के आधार पर ठेके हासिल किए गए थे। एसीबी यह पता लगाने में जुटी है कि टेंडर आवंटन के दौरान किन अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी की और निर्णय प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका रही।
सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान महेश जोशी ज्यादातर सवालों पर अपना बचाव करते नजर आए। एसीबी अब उनके बयानों का विभाग से जब्त दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड से मिलान कर रही है। माना जा रहा है कि जांच के आधार पर जल्द ही मामले से जुड़े अन्य बड़े अधिकारियों और व्यक्तियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
जांच का प्रमुख केंद्र इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड की ओर से भेजी गई वह गोपनीय ई-मेल है, जिसमें कथित फर्जीवाड़े और फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्रों को लेकर चेतावनी दी गई थी। एसीबी अब यह कड़ियां जोड़ रही है कि गोपनीय चेतावनी के बावजूद संबंधित कंपनियों को करोड़ों रुपए के वर्क ऑर्डर कैसे जारी किए गए।
सूत्रों के मुताबिक, पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल से पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर महेश जोशी की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। एसआईटी के सुपरविजन अधिकारी डॉ. रामेश्वर सिंह मामले के हर पहलू की निगरानी कर रहे हैं।
एसीबी की प्रारंभिक जांच और चार्जशीट के आधार पर संकेत मिले हैं कि यदि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप सिद्ध होते हैं तो महेश जोशी, सुबोध अग्रवाल और अन्य आरोपियों को अधिकतम 10 वर्ष तक की कठोर कारावास की सजा हो सकती है।
गौरतलब है कि बहुचर्चित 960 करोड़ रुपए के JJM घोटाले में एसीबी ने महेश जोशी को 7 मई को गिरफ्तार किया था। अदालत ने उन्हें 11 मई तक एसीबी रिमांड पर भेज रखा है। इससे पहले 9 अप्रैल को सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी भी इसी मामले में हो चुकी है और वे फिलहाल जेल में हैं।
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