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April 13, 2026
दुनिया में अद्वितीय यज्ञ — पुष्कर से स्वामी, अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती का बड़ा बयान “मंदिर दुकान नहीं, आराधना का केंद्र” — पुष्कर में शंकराचार्य की सख्त टिप्पणी
तीर्थ नगरी पुष्कर में आयोजित शत गायत्री पुरुषचरण महायज्ञ के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती के आगमन ने पूरे आयोजन को नई आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान की। उन्होंने यज्ञशाला का अवलोकन किया, परिक्रमा की और यजमानों व श्रद्धालुओं से संवाद करते हुए इसे वर्तमान समय का अद्वितीय धार्मिक आयोजन बताया।
मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य ने आयोजन की भव्यता पर जोर देते हुए कहा कि एक-एक पुरुषचरण करना ही अत्यंत कठिन होता है, जबकि यहां सौ पुरुषचरण एक साथ विधि-विधान और अनुशासन के साथ संपन्न हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं यज्ञशाला में जाकर भगवती के दर्शन किए और परिक्रमा की, जहां हर श्रद्धालु के चेहरे पर प्रसन्नता साफ दिखाई देती है। उन्होंने स्वयं को इस यज्ञ का साक्षी बनने को सौभाग्यशाली बताया।उन्होंने इस आयोजन को “अध्यात्म की ऊर्जा का समुद्र” बताते हुए कहा कि यहां जितनी भी आध्यात्मिक शक्ति है, उसे कोई भी व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार ग्रहण कर सकता है। हिंदू राष्ट्र के प्रश्न पर उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे आयोजन, जिनसे देवता प्रसन्न होते हैं, वही दैवी संपदा की स्थापना करते हैं और जहां दैवी गुण होते हैं, वहीं सच्चे अर्थों में हिंदू राष्ट्र की अवधारणा साकार होती है। गौ माता के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यज्ञ बिना गौ घृत के संभव नहीं है और गौ माता हमारे लिए अनिवार्य हैं। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि देश का हर नागरिक इस बात को लेकर आवाज उठाए कि भारत ऐसा देश बने जहां गौ हत्या न हो और इस पर गर्व किया जा सके। मंदिरों की व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि देश में मंदिरों को कमाई का जरिया बनाया जा रहा है, जबकि वे आराधना के केंद्र हैं, कोई दुकान या शोरूम नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिरों का प्रबंधन हिंदू समाज के हाथों में होना चाहिए। अपने पूरे दौरे के दौरान शंकराचार्य ने इस महायज्ञ को अनुशासन, श्रद्धा और वैदिक परंपराओं का अद्भुत संगम बताते हुए इसे आध्यात्मिक दृष्टि से ऐतिहासिक करार दिया, जिससे पुष्कर में चल रहा यह आयोजन व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।
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