Post Views 11
October 31, 2022
वैसे तो पुष्कर सरोवर के 52 घाटों का धार्मिक महत्व एक ही है लेकिन आजादी के पहले से ही गांधी परिवार सहित दूसरे नेता, अधिकारी पवित्र सरोवर के गऊ घाट पर ही पूजा अर्चना करते आये है ।इतना ही नही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी,प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद, पूर्व पीएम पंडित जवाहरलाल नेहरू,इंदिरा गांधी,राजीव गांधी,अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियों का भी गऊ घाट में ही विसर्जन किया गया ।यह बात अलग है कि राहुल गांधी की पिछली पुष्कर यात्रा से ब्रह्म घाट पर ही पूजा अर्चना का कार्यक्रम रखा जाने लगा ।कल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का भी ब्रह्म घाट पर ही पूजा अर्चना का कार्यक्रम रखा गया है ।ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि अब प्रशासन बरसो पुरानी परंपरा को तोड़ने में लगा हुआ है।
गऊ घाट के बाहर और अंदर हालात बदतर
पुष्कर मेले के दौरान रोज हजारो श्रदालु मुख्य गऊ घाट पर ही आस्था की डुबकी लगाएंगे लेकिन घाट के बाहर और अंदर जो हालात है शायद इसी कारण प्रशासन भी नही चाहता कि मुख्यमंत्री घाट की अव्यवस्थाओं से रूबरू हो ।हाल ही मे जो ब्रह्मा मंदिर अस्थाई समिति में मंदिर में श्रदालुओ के दान से आई राशि से धौलपुरी पत्थरो की जो सड़क बनाई गई वो निर्माण के समय ही टूट गयी ।अब तो गऊ घाट के बाहर सड़क दर्जनों पत्थर बाहर आ चुके है ।दिन भर श्रदालुओ को इन पत्थरों की ठोकरे नसीब होती है ।मेले में यदि श्रदालुओ की भीड़ ज्यादा हुई तो भगदड़ मच सकती है ।बच्चे, बुजुर्ग,महिलाएं घायल हो सकती है ।घाट के अंदर भी हालात अच्छे नही है क्योकि घाट पुरोहितों की संस्था तीर्थ पुरोहित संघ ट्रस्ट की उपेक्षा का शिकार है ।जानकारों का मानना है कि इस कारण प्रशासन मुख्यमंत्री के आखों की किरकिरी नही बनना चाहता और ब्रह्म घाट को ही प्राथमिकता दी गयी ।
प्रशासन के लिये सहूलियत
प्रशासन के लिए गऊ घाट की अपेक्षा ब्रह्म घाट पर मुख्यमंत्री के काफिले को लाना और वापस निकालना ज्यादा आसान है इसलिये प्रशासन ने अपनी सहूलियत को देखते हुए पुरानी परंपरा को तोड़कर नई बना रहा है ।
प्रशासन कुछ भी सोचे लेकिन पुरोहितों और स्थानीय लोगो का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री गऊ घाट आये तो शायद वहा के हालातो को देखकर प्रशासन को लताड़ लग सकती है इसलिए प्रशासन मुख्यमंत्री को फील गुड कराने के लिए ऐसा कर रहा है ।
© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved