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July 9, 2021
इस सफ़र में बेरुख़ी का सिलसिला है किसलिए,
कोई चलता ही नहीं तो रास्ता है किसलिए।
मेरी ख़ुद्दारी को आख़िर तोलता है किसलिए,
जब ज़रूरत ही नहीं तो ढूँढता है किसलिए।
तूने जब ईमान का दरिया कभी देखा नहीं,
तू नहीं समझेगा प्यासी कर्बला है किसलिए।
घर से जाऊँ मैं निकल जब तय ये तूने कर लिया,
टोकता है किसलिए फिर रोकता है किसलिए।
है नहीं तेरा अगर सच्चाई से रिश्ता कोई,
आईनों से तेरा चेहरा बोलता है किसलिए।
मैं उजालों की तरफ़दारी अगर करता नहीं,
तू अंधेरे में ही मुझको सोचता है किसलिए।
लोग तो रस्ता समझते थे मुझे लेकिन बता,
उम्र भर सीने पे मेरे तू चला है किसलिए।
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