For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 172766055
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: अजमेर: सीआरपीएफ ब्रिज की भुजाओं और सड़कों के नवीनीकरण कार्य का शिलान्यास |  Ajmer Breaking News: विद्या भारती हॉकी प्रतियोगिता में शामिल हुईं उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी, खेल और खिलाड़ियों के विकास को सराहा   |  Ajmer Breaking News: ​अजमेर जिले में पंचायत चुनाव का पहला चरण: मतदान शांतिपूर्ण जारी |  Ajmer Breaking News: अजमेर की 122 ग्राम पंचायतों में मतदान जारी, दिव्यांगों और बुजुर्गों में दिखा लोकतंत्र के प्रति उत्साह। |  Ajmer Breaking News: रावण दहन की ड्यूटी से लौट रहे कांस्टेबल शंकरलाल टेपन की सड़क हादसे में मौत, ट्रक ने बाइक को मारी टक्कर; किशनगढ़ के मुंडोती गांव में अंतिम विदाई |  Ajmer Breaking News: उदयपुर के होटल में वीजा खत्म होने के बाद रह रहीं तीन थाई महिलाएं डिटेन, एक पहले भी हो चुकी डिपोर्ट; होटल संचालक पर इमिग्रेशन एक्ट में कार्रवाई |  Ajmer Breaking News: अजमेर के वैशाली नगर में डीपी में लगी भीषण आग, करीब 15 मिनट तक होते रहे डीपी में धमाके, मची अफरा-तफरी |  Ajmer Breaking News: अजमेर रेलवे स्टेशन पर 'रेल जन संवाद' अभियान शुरू; यात्रियों की समस्याओं और सुरक्षा पर दिया जा रहा है विशेष जोर |  Ajmer Breaking News: अजमेर: म्यूल हंटर अभियान में पुलिस की कार्रवाई, 14 लाख की साइबर ठगी में मुख्य आरोपी साबिर आलम गिरफ्तार |  Ajmer Breaking News: अजमेर के चिकित्सा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि: डॉ. बुनकर ने रोबोटिक तकनीक द्वारा किया जटिल हायटस हर्निया का सफल ऑपरेशन | 

विशेष: छठ पूजा कथा , महत्व एवं पूजन विधि

Post Views 171

October 30, 2020

चैत्र शुक्ल षष्ठी व कार्तिक शुक्ल षष्ठी इन दो तिथियों को यह पर्व मनाया जाता है।

              छठ पूजा

नवरात्र, दूर्गा पूजा की तरह छठ पूजा भी हिंदूओं का प्रमुख त्यौहार है। क्षेत्रीय स्तर पर बिहार में इस पर्व को लेकर एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। छठ पूजा मुख्य रूप से सूर्यदेव की उपासना का पर्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छठ को सूर्य देवता की बहन हैं। मान्यता है कि छठ पर्व में सूर्योपासना करने से छठ माई प्रसन्न होती हैं और घर परिवार में सुख शांति व धन धान्य से संपन्न करती हैं।

कब मनाया जाता है छठ पूजा का पर्व

सूर्य देव की आराधना का यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। चैत्र शुक्ल षष्ठी व कार्तिक शुक्ल षष्ठी इन दो तिथियों को यह पर्व मनाया जाता है। हालांकि कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाये जाने वाला छठ पर्व मुख्य माना जाता है। कार्तिक छठ पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व को छठ पूजा, डाला छठ, छठी माई, छठ, छठ माई पूजा, सूर्य षष्ठी पूजा आदि कई नामों से जाना जाता है।

क्यों करते हैं छठ पूजा

छठ पूजा करने या उपवास रखने के सबके अपने अपने कारण होते हैं लेकिन मुख्य रूप से छठ पूजा सूर्य देव की उपासना कर उनकी कृपा पाने के लिये की जाती है। सूर्य देव की कृपा से सेहत अच्छी रहती है। सूर्य देव की कृपा से घर में धन धान्य के भंडार भरे रहते हैं। छठ माई संतान प्रदान करती हैं। सूर्य सी श्रेष्ठ संतान के लिये भी यह उपवास रखा जाता है। अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिये भी इस व्रत को रखा जाता है।

कौन हैं देवी षष्ठी और कैसे हुई उत्पत्ति

छठ देवी को सूर्य देव की बहन बताया जाता है। लेकिन छठ व्रत कथा के अनुसार छठ देवी ईश्वर की पुत्री देवसेना बताई गई हैं। देवसेना अपने परिचय में कहती हैं कि वह प्रकृति की मूल प्रवृति के छठवें अंश से उत्पन्न हुई हैं यही कारण है कि मुझे षष्ठी कहा जाता है। देवी कहती हैं यदि आप संतान प्राप्ति की कामना करते हैं तो मेरी विधिवत पूजा करें। यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को करने का विधान बताया गया है।

पौराणिक ग्रंथों में इस रामायण काल में भगवान श्री राम के अयोध्या आने के पश्चात माता सीता के साथ मिलकर कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्योपासना करने से भी जोड़ा जाता है, महाभारत काल में कुंती द्वारा विवाह से पूर्व सूर्योपासना से पुत्र की प्राप्ति से भी इसे जोड़ा जाता है।

सूर्यदेव के अनुष्ठान से उत्पन्न कर्ण जिन्हें अविवाहित कुंती ने जन्म देने के बाद नदी में प्रवाहित कर दिया था वह भी सूर्यदेव के उपासक थे। वे घंटों जल में रहकर सूर्य की पूजा करते। मान्यता है कि कर्ण पर सूर्य की असीम कृपा हमेशा बनी रही। इसी कारण लोग सूर्यदेव की कृपा पाने के लिये भी कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्योपासना करते हैं।

छठ पूजा के चार दिन

छठ पूजा का पर्व चार दिनों तक चलता है –

  1. छठ पूजा का पहला दिन नहाय खाय – छठ पूजा का त्यौहार भले ही कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है लेकिन इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय खाय के साथ होती है। मान्यता है कि इस दिन व्रती स्नान आदि कर नये वस्त्र धारण करते हैं और शाकाहारी भोजन लेते हैं। व्रती के भोजन करने के पश्चात ही घर के बाकि सदस्य भोजन करते हैं।

  2. छठ पूजा का दूसरा दिन खरना – कार्तिक शुक्ल पंचमी को पूरे दिन व्रत रखा जाता है व शाम को व्रती भोजन ग्रहण करते हैं। इसे खरना कहा जाता है। इस दिन अन्न व जल ग्रहण किये बिना उपवास किया जाता है। शाम को चाव व गुड़ से खीर बनाकर खाया जाता है। नमक व चीनी का इस्तेमाल नहीं किया जाता। चावल का पिठ्ठा व घी लगी रोटी भी खाई प्रसाद के रूप में वितरीत की जाती है।

  3. षष्ठी के दिन छठ पूजा का प्रसाद बनाया जाता है। इसमें ठेकुआ विशेष होता है। कुछ स्थानों पर इसे टिकरी भी कहा जाता है। चावल के लड्डू भी बनाये जाते हैं। प्रसाद व फल लेकर बांस की टोकरी में सजाये जाते हैं। टोकरी की पूजा कर सभी व्रती सूर्य को अर्घ्य देने के लिये तालाब, नदी या घाट आदि पर जाते हैं। स्नान कर डूबते सूर्य की आराधना की जाती है।

अगले दिन यानि सप्तमी को सुबह सूर्योदय के समय भी सूर्यास्त वाली उपासना की प्रक्रिया को दोहराया जाता है। विधिवत पूजा कर प्रसाद बांटा कर छठ पूजा संपन्न की जाती है।



© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved