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November 4, 2026
नई दिल्ली। SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से जिनका नाम कट गया है, वे फॉर्म-6 भरकर दोबारा नाम जुड़वा सकते हैं, चाहे वे 10 साल से वोटर क्यों न रहे हों। चुनाव आयोग ने मंगलवार को साफ किया कि ऐसे पुराने वोटरों के फॉर्म-6 भरने को झूठा शपथ पत्र नहीं माना जाएगा और इस पर कोई केस नहीं होगा। दिक्कत यह थी कि फॉर्म-6 में लिखना पड़ता है कि "मेरा नाम पहली बार वोटर लिस्ट में जोड़ा जा रहा है"। उसी फॉर्म पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 का हवाला भी होता है, जिसके तहत गलत जानकारी देने पर एक साल तक की सजा हो सकती है। पुराने वोटरों को डर था कि ‘पहली बार’ वाला कॉलम भरते ही उन पर झूठा बयान देने का केस बन जाएगा। आयोग ने माना कि इसी डर से लाखों लोग फॉर्म नहीं भर रहे थे। आयोग ने कहा कि यह डर निकाल दीजिए, इसे फॉल्स डिक्लेरेशन नहीं माना जाएगा।
30 राज्यों में 13 करोड़ से ज्यादा नाम कटे
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान 2025-26 में बिहार और दिल्ली समेत 30 राज्यों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए। अकेले दिल्ली में 1.45 करोड़ वोटरों में से 47 लाख नाम हटे, यानी करीब 32 फीसदी, लगभग हर तीसरा नाम। आयोग का यह फैसला ऐसे ही लोगों के काम आएगा, जिनका नाम SIR में कट गया।
अब नाम जुड़वाने के लिए क्या करें
सबसे पहले voters.eci.gov.in पर अपने EPIC नंबर से नाम चेक करें। नाम नहीं है तो फॉर्म-6 भरें और उसके साथ डिक्लेरेशन और दस्तावेज लगाएं। BLO घर-घर जाकर भी फॉर्म-6 भरवा रहे हैं। किसे कौन-से दस्तावेज देने होंगे, यह जन्म के साल पर निर्भर है:
| जन्म | फॉर्म-6 के साथ क्या देना होगा |
|---|---|
| 1987 से पहले | अपना एक दस्तावेज |
| 1987 से 2004 के बीच | अपना एक दस्तावेज और माता या पिता में से किसी एक का एक दस्तावेज |
| 2004 के बाद | अपना दस्तावेज और माता-पिता दोनों के दस्तावेज |
फॉर्म-6 से 2003 वाला सवाल पहले ही हट चुका
जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, उनके लिए आयोग अक्टूबर में फॉर्म-6 में एक और बड़ा बदलाव कर चुका है। SIR में नाम कटने के बाद दोबारा नाम जुड़वाने के लिए अब 2003 की वोटर लिस्ट की जानकारी नहीं देनी होगी। आवेदक को यह नहीं बताना होगा कि उसका, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस लिस्ट में था या नहीं। इससे जुड़ा अतिरिक्त घोषणा पत्र फॉर्म-6 से हटा दिया गया है।राजस्थान भी उन राज्यों में है, जहां SIR पूरा हो चुका है। यहां छूटे हुए पात्र वोटरों और पहली बार वोट देने लायक हुए युवाओं के नाम जोड़ने के लिए 1 अक्टूबर से विशेष अभियान चलाने का एलान हुआ था, जिसमें फॉर्म-6 ऑनलाइन और BLO दोनों के जरिए भरा जा सकता है।फॉर्म-6 की घोषणा पर विवाद भी रहा है। 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उसने किसी संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी है, और रिकॉर्ड आने पर वह देखेगी कि फॉर्म में बदलाव किसने किया।
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