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February 8, 2021
ज़िले में भाजपा के भाग्य का छींका टूटा: काँग्रेस के कुप्रबंधन और बड़बोले नेताओं ने भाजपा के लगाए सुरख़ाब के पर
भाऊ को पटखनी देकर नीरज जैन का उपमहापौर बनना लगभग तय
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
नगर निगम अजमेर में वही हुआ जो होना था,जैसा कोई भी समझदार इंसान मान कर चल रहा था।मैंने तो एक महीने पहले ही भावी मेयर ब्रजलता को बधाई दे दी थी लेकिन सच कहूँ तो मुझे भी यक़ीन नहीं था कि उनको 48 भाजपाई पार्षद के साथ क्रोस वोटिंग का फ़ायदा भी मिल जाएगा।यह तो कमाल ही हुआ कि नगर निगम महापौर पद पर ब्रजलता हाड़ा की ऐतिहासिक जीत हुई।
भाजपा के 48 पार्षद होने पर भी उनको 61 वोट मिले।बेचारी कांग्रेस 19 वोट लेकर सिमट गई।
कांग्रेस के 18 पार्षद जीते थे और कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माने जाने वाले मुस्लिम बाहुल्य वार्ड 11, 12 , 13 में जहां कांग्रेस ने किसी को भी यह मानकर टिकट नही दिया था कि इन वार्डो से जो भी प्रत्याशी विजयी होगा वो कांग्रेस का ही होगा।अब महापौर पद के लिए भाजपा को 61 वोट मीले तो कांग्रेस का ये भ्रम भी टूट गया है । यदि काँग्रेस का सोचा हुआ हो जाता तो 18 कांग्रेस और 3 वार्डो के विजयी मुस्लिम प्रत्याशी, 1 रालोपा का विजयी प्रत्याशी मिल जाते तो महापौर के कांग्रेस प्रत्याशी को कम से कम 22 वोट मिलते।
यहाँ सिर्फ़19 वोट मिलने का मतलब 18 तो कांग्रेस और 1 रालोपा का ही वोट मिले हैं और यदि ऐसा नही है तो कांग्रेस में जबरदस्त क्रॉस वोटिंग हुई है।
अब उपमहापौर को लेकर भारी कशमकश चल रही है। अचानक सुरेन्द्र सिंह शेखावत (लाला बना) का सक्रिय होकर अस्तबल (बाड़े बंदी) में पहुंचना और अप्रत्याशित रूप से नीरज जैन के लिए लामबंदी चालू कर देना खेल को और रोचक बना रहा है।
जब पार्षद वोट देने निगम आए तो नीरज जैन ने सार्वजनिक रूप से भाऊ को इग्नोर कर जिस तरह अनिता को वैटेज दिया तभी से शहर में ये चर्चा चल निकली थी कि अब भाऊ और बहनजी फिर एक बार तलवारें लेकर मैदान में दिखेंगे।
अब भाऊ की तरफ से रमेश सोनी ही उनकी प्राथमिकता है। भाऊ किसी भी हालत में नीरज को अब उपमहापौर देखना नही चाहते। अगर कहीं वे रमेश सोनी को बनवाने में असफल भी होते हैं तो वे धर्मेंद्र गहलोत गुट के ज्ञान सारस्वत या अजय वर्मा के लिए सहमत हो जाएंगे परंतु नीरज अब उनकी लिस्ट में कहीं नही होगा
इधर जुझारू नेता नीरज अब भी पार्टी में अपने निजी संबंधों के दम पर हार मानने को तैयार नहीं ।इनका दावा है कि दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के विजयी पार्षद उनके पक्ष में हाईकमान को अपनी राय रखेंगे और अनिता भदेल उनके नाम पर अड़ेंगी।
यहां मुझे बहनजी बाज़ी मारती दिख रही हैं क्योंकि नीरज अपने संबंधों के दम पर ये प्रतियोगिता जीत लेंगे ऐसा मेरा अनुमान है।
कांग्रेस की इतनी बुरी हार के बाद भी गजेन्द्र सिंह रलावता अभी भी ये भ्रम पाले हुए हैं कि वे अपने निजी संबंधों के दम पर भाजपा खेमे में तोड़फोड़ कर सकते हैं। और तो और नौरत गुर्जर भी उपमहापौर के लिए ताल ठोके बैठे हैं।
अब किशनगढ़ की भी बात हो जाए। यहाँ कुल 60 पार्षदों में से 34 भाजपा के पार्षद विजयी हुए थे। कांग्रेस के 17 और सुरेश टांक के 6 के अलावा 3 निर्दलीय पार्षद भी विजयी हुए ।यहां भी भाजपा को स्पष्ट बहुमत होने के बाद भी सुरेश टांक भारी उलटफेर का दावा कर रहे थे।उनका दावा था कि वे येन केन प्रकारेण अपने पुराने दुश्मन ,नए दोस्त प्रदीप अग्रवाल को सभापति बनाकर अपना वर्चस्व साबित कर देंगे। उन्होंने कहा बहुत कुछ, हुआ कुछ नहीं।रेतीले टीलों में सिंघाड़े की बेल नहीं उगी। भाजपा प्रत्याशी दिनेश राठौड़ को 34 की जगह 36 वोट मिले। ये हवा में उड़ रहे सुरेश टांक के अहम पर करारा तमाचा है।
मैने अपने ब्लॉग में स्पष्ट लिख दिया था कि प्रदीप अग्रवाल की हार तो तय ही है ।
मंत्री रघु शर्मा के केकड़ी विधानसभा की 40 पार्षदों की नगर पालिका में अध्यक्ष के चुनाव में 21 कांग्रेसी पार्षदों के विजयी होने के बावजूद तीन वोट ज्यादा मतलब 24 वोट मिले और कमलेश साहू अध्यक्ष चुने गए।इनका नाम पहले से ही तय माना जा रहा था।
सरवाड़ पालिका में भी 25 में से कांग्रेस के 15 पार्षद विजयी हुए थे और स्पष्ट बहुमत था। यहां भी अध्यक्ष उम्मीदवार छगन कंवर को 2 मत ज्यादा मतलब 17 वोट मिले।
बात अगर बिजयनगर की करें तो यहाँ 35 पार्षदों की नगर पालिका में भाजपा के 19 पार्षद विजयी हुए थे और अध्यक्ष की उम्मीदवार अनिता मेवाड़ा को मोनिका रावत के बगावती तेवर के कारण मिले 18 वोट। पर जैसे तैसे भाजपा यहाँ भी अपना अध्यक्ष बनाने में सफल हो गयी।
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