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राजस्थान

राजस्थान न्यूज़: बीकानेर मेयर चुनाव में कांग्रेस में बगावत, अनिल कल्ला के खिलाफ नवरतन डागा मैदान में, भाजपा से सुरेंद्र सिंह शेखावत ने भरा पर्चा

राजस्थान न्यूज़: बीकानेर। नगर निगम में मेयर पद के चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर बगावत खुलकर सामने आ गई है। पार्टी ने वार्ड नंबर 73 से निर्वाचित अनिल कल्ला को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है, जबकि टिकट की दावेदारी कर रहे वार्ड नंबर 50 के कांग्रेस पार्षद नवरतन डागा ने भी चुनाव मैदान में उतरते हुए नामांकन दाखिल कर दिया। दूसरी ओर भाजपा ने वार्ड नंबर 13 से निर्वाचित सुरेंद्र सिंह शेखावत को मेयर प्रत्याशी बनाया है। इस तरह नामांकन के बाद बीकानेर में तीन चेहरे मेयर पद की दौड़ में सामने आए हैं। स्थानीय रिपोर्टों में भी अनिल कल्ला को कांग्रेस और सुरेंद्र सिंह शेखावत को भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी बताया गया है, जबकि डागा के बागी होकर मैदान में उतरने की पुष्टि हुई है। बीकानेर नगर निगम में इस बार कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। 80 वार्डों में कांग्रेस के 42 पार्षद, भाजपा के 27, निर्दलीय 10 और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का एक पार्षद निर्वाचित हुआ है। यानी बहुमत के लिए आवश्यक 41 मतों से कांग्रेस एक सीट आगे है। इसके बावजूद पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ अपने ही पार्षद के मैदान में उतरने से कांग्रेस के सामने अपने पार्षदों को एकजुट रखने की राजनीतिक चुनौती खड़ी हुई है। अनिल कल्ला कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार कांग्रेस ने लंबे मंथन और पार्षदों से रायशुमारी के बाद अनिल कल्ला के नाम पर मुहर लगाई है। अनिल कल्ला वार्ड नंबर 73 से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद चुने गए हैं। चुनाव परिणाम में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को हराकर यह सीट जीती थी। मेयर प्रत्याशी को लेकर कांग्रेस में अनिल कल्ला के अलावा नवरतन डागा, जावेद पड़िहार, दिलीप बांठिया, मकसूद अहमद और अन्य नेताओं के नाम भी चर्चा में रहे थे। बुधवार को अधिकृत पार्टी सिंबल अनिल कल्ला को मिलने के बाद पार्टी का फैसला साफ हो गया। टिकट नहीं मिला तो नवरतन डागा ने खोला मोर्चा वार्ड नंबर 50 से निर्वाचित नवरतन डागा भी कांग्रेस की ओर से मेयर पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे। पार्टी की ओर से अनिल कल्ला को अधिकृत प्रत्याशी बनाए जाने के बाद डागा ने अलग रास्ता अपनाते हुए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। डागा वार्ड 50 से कांग्रेस के टिकट पर 312 मतों के अंतर से चुनाव जीतकर पार्षद बने हैं। डागा ने टिकट वितरण पर सवाल उठाते हुए कल्ला परिवार को बार-बार राजनीतिक अवसर मिलने का मुद्दा उठाया है। स्थानीय राजनीतिक रिपोर्टों में उनकी नाराजगी को मेयर टिकट से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि उनके मैदान में बने रहने या नाम वापसी की अंतिम स्थिति 18 सितंबर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद साफ होगी। नवरतन डागा ने भरे दो नामांकन नामांकन प्रक्रिया में नवरतन डागा की ओर से दो पर्चे जमा किए गए हैं। एक नामांकन में उन्होंने स्वयं को कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में और दूसरे में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में प्रस्तुत किया है। चूंकि कांग्रेस का अधिकृत चुनाव चिह्न अनिल कल्ला को दिया गया है, इसलिए डागा के कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में दाखिल पर्चे की स्थिति नामांकन पत्रों की जांच के दौरान निर्वाचन अधिकारी द्वारा तय की जाएगी। नामांकन संबंधी सामने आए विवरण के अनुसार डागा के दोनों पर्चों में निर्दलीय पार्षद प्रस्तावक बने हैं। एक नामांकन में वार्ड 72 की निर्दलीय पार्षद निशा पारीक और दूसरे में वार्ड 63 के निर्दलीय पार्षद दीपक तंवर प्रस्तावक बताए गए हैं। दोनों का निर्दलीय पार्षद के रूप में निर्वाचन हुआ है। वहीं कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी अनिल कल्ला के प्रस्तावक कांग्रेस पार्षद नवल किशोर पुरोहित बताए गए हैं। भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत के प्रस्तावक के रूप में दीपक व्यास का नाम सामने आया है। भाजपा ने सुरेंद्र सिंह शेखावत को बनाया प्रत्याशी भाजपा ने वार्ड नंबर 13 से निर्वाचित सुरेंद्र सिंह शेखावत को बीकानेर मेयर चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। वार्ड 13 में शेखावत भाजपा के टिकट पर 1,628 मत प्राप्त कर विजयी हुए थे। भाजपा के पास निगम में 27 पार्षद हैं, इसलिए मेयर चुनाव में उसे अपने पार्षदों के अतिरिक्त दूसरे निर्वाचित सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होगी।भाजपा की ओर से इससे पहले भगवान सिंह मेड़तिया सहित कुछ अन्य नाम भी चर्चा में थे, लेकिन आखिरकार पार्टी ने सुरेंद्र सिंह शेखावत को अधिकृत प्रत्याशी बनाया। सिंबल को लेकर नामांकन के समय बनी असहज स्थिति भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत के नामांकन के दौरान पार्टी सिंबल से जुड़ी एक स्थिति भी चर्चा में रही। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार शेखावत नामांकन दाखिल करने पहुंचे तो अधिकृत पार्टी सिंबल तत्काल उनके साथ नहीं था। इसके चलते उन्हें प्रक्रिया पूरी करने के लिए कुछ समय इंतजार करना पड़ा। बाद में भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्यप्रकाश आचार्य अधिकृत दस्तावेज लेकर पहुंचे, जिसके बाद नामांकन प्रक्रिया पूरी हुई। कांग्रेस के पास बहुमत, लेकिन बगावत ने बढ़ाई चुनौती संख्या के लिहाज से बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस की स्थिति स्पष्ट है। उसके 42 निर्वाचित पार्षद हैं और बहुमत का आंकड़ा 41 है। लेकिन नवरतन डागा का अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ मैदान में उतरना पार्टी के लिए अब संगठनात्मक अनुशासन और पार्षदों की एकजुटता का सवाल बन गया है। दूसरी ओर भाजपा के पास 27 पार्षद हैं। ऐसे में उसे मेयर पद के लिए आवश्यक संख्या तक पहुंचने के लिए काफी अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। निर्दलीय पार्षदों और कांग्रेस के भीतर पैदा हुई असहमति के कारण दोनों दलों की राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं, लेकिन वास्तविक समर्थन का पता मतदान में ही चलेगा। वार्ड 50 पहले भी रहा था चर्चा में नवरतन डागा जिस वार्ड नंबर 50 से निर्वाचित हुए हैं, वहां कांग्रेस टिकट वितरण के समय भी विवाद सामने आया था। डागा अंततः कांग्रेस उम्मीदवार बने और चुनाव जीतकर निगम पहुंचे। चुनाव परिणामों में उन्हें 1,288 वोट मिले और उन्होंने 312 वोट से जीत हासिल की। अब मेयर टिकट नहीं मिलने के बाद उनका निर्दलीय पर्चा दाखिल करना कांग्रेस के भीतर असंतोष को औपचारिक चुनावी मुकाबले तक ले आया है। 17 को नामांकन की जांच, 18 तक नाम वापसी मेयर चुनाव के कार्यक्रम के अनुसार 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। इसके बाद 18 सितंबर दोपहर 3 बजे तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। इसलिए अभी यह तय नहीं है कि 21 सितंबर के मतदान तक तीनों प्रत्याशी मैदान में बने रहेंगे या किसी स्तर पर राजनीतिक समझौता होगा। बीकानेर में महापौर पद के लिए मतदान 21 सितंबर को निर्धारित है। फिलहाल कांग्रेस के अनिल कल्ला, भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत और बागी नवरतन डागा के नामांकन ने बीकानेर मेयर चुनाव को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया है। अंतिम मुकाबले की तस्वीर नामांकन जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।

Read more 16th Sep 2026

राजस्थान न्यूज़: खैरथल में बोर्ड गठन से पहले कांग्रेस में टूट, विक्रम चौधरी ने थामा भाजपा का दामन, पार्षदों के पाला बदलने से बदला संख्या गणित

राजस्थान न्यूज़: खैरथल। नगर परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद खैरथल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस से सभापति पद के संभावित दावेदारों में शामिल रहे पूर्व नेता प्रतिपक्ष विक्रम चौधरी ‘विक्की’ ने भाजपा का दामन थाम लिया है। दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर चौधरी की भाजपा में एंट्री हुई। उनके साथ कई निर्वाचित पार्षदों के भी भाजपा खेमे में आने की खबर है, जिससे नगर परिषद में बोर्ड गठन का संख्या गणित बदल गया है।खैरथल नगर परिषद में कुल 45 वार्ड हैं। चुनाव परिणाम में कांग्रेस ने 20, भाजपा ने 8 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 17 वार्डों में जीत दर्ज की थी। बोर्ड के लिए 23 पार्षदों का समर्थन आवश्यक है। चुनाव परिणाम के तुरंत बाद कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई थी, लेकिन किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। दिल्ली पहुंचकर भाजपा में शामिल हुए विक्रम चौधरी विक्रम चौधरी की भाजपा में एंट्री दिल्ली में हुई। सामने आई रिपोर्टों के अनुसार केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने उनका पार्टी में स्वागत किया। चौधरी इससे पहले खैरथल की स्थानीय कांग्रेस राजनीति में सक्रिय रहे हैं और नगर निकाय में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभा चुके हैं। इस बार उन्हें कांग्रेस की ओर से सभापति पद के संभावित चेहरों में गिना जा रहा था। पार्टी बदलना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव में कांग्रेस 20 पार्षदों के साथ सबसे बड़ा दल बनी थी और उसे बोर्ड बनाने के लिए केवल तीन अतिरिक्त पार्षदों का समर्थन चाहिए था। अब चौधरी के भाजपा में शामिल होने तथा उनके साथ अन्य पार्षदों के जाने की खबर ने राजनीतिक समीकरण को नए सिरे से खड़ा कर दिया है। 11 पार्षदों को लेकर रिपोर्टों में अलग-अलग विवरण चौधरी के साथ कितने पार्षद भाजपा में आए हैं, इसे लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में थोड़ा अंतर है। एक रिपोर्ट में विक्रम चौधरी के अलावा 11 अन्य पार्षदों के भाजपा में जाने का दावा किया गया है और इनमें पांच से छह कांग्रेस पार्षद बताए गए हैं, हालांकि उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। दूसरी रिपोर्टों में चौधरी सहित 11 पार्षदों के भाजपा खेमे में आने की बात कही गई है। इसलिए बोर्ड के चुनाव से पहले वास्तविक दलीय संख्या संबंधित पार्षदों की औपचारिक स्थिति से ही स्पष्ट होगी।यदि कांग्रेस के कुछ निर्वाचित पार्षद वास्तव में भाजपा के साथ चले गए हैं और कुछ निर्दलीयों ने भी भाजपा का समर्थन किया है, तो मूल चुनाव परिणाम में बने 20-8-17 के समीकरण में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा। लेकिन सभापति का अंतिम फैसला निर्वाचित पार्षदों की मतदान प्रक्रिया से ही होगा। चुनाव में कांग्रेस 20 सीटों के साथ बनी थी सबसे बड़ी पार्टी खैरथल नगर परिषद में मतगणना पूरी होने के बाद कांग्रेस ने 20 वार्ड जीते थे। भाजपा को आठ सीटें मिलीं, जबकि 17 निर्दलीय जीतकर आए। यानी निर्दलीयों की संख्या भी किसी एक बड़े दल की तुलना में काफी महत्वपूर्ण थी।कारण था कि चुनाव परिणाम आने के साथ ही निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बोर्ड गठन में महत्वपूर्ण हो गई थी। कांग्रेस को बहुमत तक पहुंचने के लिए तीन अतिरिक्त मत चाहिए थे, जबकि भाजपा को अपने मूल आठ निर्वाचित पार्षदों के अतिरिक्त काफी समर्थन जुटाना था। अब विक्रम चौधरी के भाजपा में जाने के बाद दोनों राजनीतिक दलों की रणनीति बदलना तय है। निर्दलीयों के साथ-साथ दलों के टिकट पर जीते पार्षदों का रुख भी सभापति चुनाव तक महत्वपूर्ण रहेगा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष बोले— पार्षदों से संपर्क की कोशिश खैरथल-तिजारा कांग्रेस जिलाध्यक्ष बलराम यादव ने विक्रम चौधरी के भाजपा में शामिल होने की जानकारी मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि चौधरी से तत्काल संपर्क नहीं हो पाया और कांग्रेस अपने निर्वाचित पार्षदों की स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के कई पार्षद एक साथ रखे गए हैं। कांग्रेस के सामने अब चुनौती अपने निर्वाचित पार्षदों को एकजुट रखने की है। वहीं भाजपा उन पार्षदों के समर्थन को औपचारिक रूप देने की कोशिश करेगी, जिनके उसके साथ आने का दावा किया जा रहा है। सभापति चुनाव तक जारी रहेगा संख्या का खेल खैरथल में वर्तमान राजनीतिक गतिविधि का केंद्र अब सभापति पद है। 45 सदस्यीय परिषद में 23 मतों का आंकड़ा निर्णायक होगा। चुनाव नतीजे और उसके बाद हुए दल परिवर्तन अलग-अलग चरण हैं, इसलिए किसी दल का बोर्ड बनना अभी औपचारिक मतदान से पहले तय नहीं माना जा सकता।राजस्थान के कई नगरीय निकायों की तरह खैरथल में भी निर्दलीय पार्षद बड़ी संख्या में निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में राजनीतिक संपर्क और पार्षदों की खेमाबंदी जारी रहने की संभावना है। अंतिम तस्वीर सभापति चुनाव के समय पार्षदों के वास्तविक समर्थन और मतदान से स्पष्ट होगी।

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राजस्थान न्यूज़: जयपुर मेयर के लिए भाजपा में लॉबिंग तेज, वैश्य-जैन चेहरे चर्चा में, डिप्टी मेयर पर ब्राह्मण, राजपूत और OBC समीकरण पर मंथन

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा के बहुमत का आंकड़ा पार करने के बाद अब पार्टी के भीतर मेयर और डिप्टी मेयर के नाम को लेकर मंथन तेज हो गया है। अभी 150 में से 146 वार्डों के परिणाम घोषित हुए हैं, जिनमें भाजपा 78 सीटें जीत चुकी है। कांग्रेस के खाते में 53 और निर्दलीयों के पास 15 सीटें हैं। चार वार्डों में EVM संबंधी तकनीकी समस्या के कारण पुनर्मतदान कराया जा रहा है, लेकिन 76 के बहुमत के आंकड़े को भाजपा पहले ही पार कर चुकी है। पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं में इस बार मेयर पद के लिए वैश्य समाज, विशेष रूप से जैन समुदाय से किसी नेता को मौका देने का सामाजिक समीकरण सामने आया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में सुनील कोठारी और पुनीत कर्णावट के नाम प्रमुखता से चर्चा में बताए गए हैं। हालांकि भाजपा ने अभी आधिकारिक रूप से मेयर प्रत्याशी घोषित नहीं किया है और अंतिम फैसला प्रदेश नेतृत्व को करना है। सुनील कोठारी के नाम पर क्यों हो रही चर्चा सुनील कोठारी वार्ड नंबर 112 से भाजपा के निर्वाचित पार्षद हैं। वह पार्टी संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और प्रदेश उपाध्यक्ष तथा जयपुर शहर भाजपा अध्यक्ष जैसी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। चुनाव से पहले भी भाजपा ने वार्ड 112 से उन पर भरोसा जताया था और उन्होंने यहां जीत दर्ज की। पार्टी के भीतर चल रही सोशल इंजीनियरिंग की चर्चाओं में उनका नाम वैश्य-जैन प्रतिनिधित्व से जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्टों ने उन्हें मेयर पद की चर्चाओं में आगे बताया है, लेकिन इसे भाजपा का आधिकारिक निर्णय नहीं माना जा सकता। पुनीत कर्णावट भी चर्चा में पूर्व डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावट भी मेयर पद को लेकर चल रही आंतरिक चर्चा का हिस्सा हैं। भाजपा ने उन्हें वार्ड नंबर 76 से उम्मीदवार बनाया था। पार्टी संगठन और नगर निगम की राजनीति का अनुभव उनके पक्ष में चर्चा का एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों में उन्हें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निकट माने जाने वाले नेताओं में भी शामिल किया गया है, हालांकि राजनीतिक निकटता संबंधी ऐसे आकलन संबंधित रिपोर्टों के हैं। टिकट वितरण के दौरान पुनीत कर्णावट के वार्ड को लेकर स्थानीय स्तर पर खींचतान की खबरें भी सामने आई थीं। इसी कारण मेयर प्रत्याशी के अंतिम चयन में संगठन, स्थानीय विधायक और प्रदेश नेतृत्व के बीच संतुलन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधायकों की राय भी बनी चर्चा का विषय भाजपा के अंदर एक और दिलचस्प राजनीतिक चर्चा यह है कि जयपुर शहर के कुछ विधायक चाहते हैं कि मेयर उनके अपने विधानसभा क्षेत्र से न बनाया जाए और उस विधानसभा क्षेत्र को प्राथमिकता मिले जहां भाजपा का विधायक नहीं है। इस संबंध में पार्टी स्तर पर आधिकारिक प्रस्ताव सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन स्थानीय राजनीतिक रिपोर्टों में इस तरह की राय सामने आने की बात कही गई है। इसे लेकर यह राजनीतिक व्याख्या भी की जा रही है कि विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में दूसरा बड़ा सत्ता केंद्र खड़ा होने से बचना चाहते हैं। हालांकि यह केवल एक राजनीतिक आकलन है; संबंधित विधायकों ने सार्वजनिक रूप से ऐसा कारण नहीं बताया है। डिप्टी मेयर के लिए ब्राह्मण चेहरे पर भी मंथन यदि मेयर पद के लिए वैश्य या जैन समाज से प्रत्याशी चुना जाता है तो डिप्टी मेयर के लिए ब्राह्मण समाज से किसी पार्षद को अवसर दिए जाने की चर्चा है। जयपुर शहर में भाजपा के कई ब्राह्मण पार्षद चुनाव जीते हैं और पार्टी में सामाजिक प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाए रखने को लेकर अलग-अलग विकल्पों पर विचार चल रहा है। इस चर्चा में शैलेन्द्र भार्गव का नाम भी सामने आया है। वह वार्ड नंबर 43 से निर्वाचित हुए हैं और भाजपा के जयपुर शहर अध्यक्ष रह चुके हैं। संगठन में लंबे अनुभव के कारण मीडिया रिपोर्टों में उनका नाम मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पदों की चर्चाओं में शामिल किया गया है। प्रतिभा शर्मा और शशि प्रकाश शर्मा के नाम भी चर्चा में भाजपा यदि डिप्टी मेयर के लिए किसी नए या अपेक्षाकृत युवा चेहरे पर विचार करती है तो प्रतिभा शर्मा और शशि प्रकाश शर्मा के नाम भी स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में हैं। प्रतिभा शर्मा वार्ड नंबर 87 और शशि प्रकाश शर्मा वार्ड नंबर 97 से भाजपा उम्मीदवार थे और चुनाव परिणाम में दोनों के नाम विजेताओं की सूची में दर्ज हैं। हालांकि पार्टी ने इनमें से किसी भी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है। इसलिए फिलहाल इन सभी नामों को संभावित दावेदारी अथवा आंतरिक चर्चा के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए। राजपूत समाज की ओर से भी प्रतिनिधित्व की मांग डिप्टी मेयर को लेकर राजपूत समाज से जुड़े नेताओं की ओर से भी प्रतिनिधित्व की मांग की चर्चा है। पार्टी के सामने सवाल यह है कि मेयर और डिप्टी मेयर के दो पदों के जरिए शहर के विभिन्न सामाजिक समूहों को किस तरह प्रतिनिधित्व दिया जाए। इसी समीकरण में मूल OBC समुदाय से किसी पार्षद को डिप्टी मेयर बनाए जाने का विकल्प भी आंतरिक चर्चाओं में बताया जा रहा है। हालांकि उम्मीदवार का चयन केवल जातीय समीकरण से तय होगा, ऐसा कोई आधिकारिक संकेत भाजपा नेतृत्व की ओर से नहीं दिया गया है। बाड़ेबंदी में पार्षदों से रायशुमारी निकाय चुनाव परिणाम से पहले ही भाजपा ने अपने कई प्रत्याशियों को एक साथ रखने की व्यवस्था की थी। पार्टी ने इसे प्रशिक्षण और संगठनात्मक समन्वय से जोड़ा, जबकि राजनीतिक तौर पर इसे बाड़ेबंदी के रूप में देखा गया। परिणाम आने के बाद भी निर्वाचित पार्षदों के साथ मेयर और अन्य पदों को लेकर रायशुमारी किए जाने की खबर है।प्रदेश नेतृत्व के सामने अब संगठनात्मक अनुभव, सामाजिक प्रतिनिधित्व, स्थानीय विधायकों की राय और निर्वाचित पार्षदों के बीच स्वीकार्यता जैसे कई पहलू हैं। इसी आधार पर अंतिम उम्मीदवार का नाम तय होने की संभावना है। जयपुर में मेयर चुनाव का कार्यक्रम फिलहाल टला जयपुर में मेयर चुनाव की तारीख को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। वार्ड 9, 18, 25 और 34 के पांच बूथों पर पुनर्मतदान के कारण राज्य निर्वाचन आयोग ने जयपुर नगर निगम के मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव की पूर्व निर्धारित प्रक्रिया स्थगित कर दी है। इन वार्डों के वोटों की गिनती 17 सितंबर को पूरी होने के बाद आयोग संशोधित चुनाव कार्यक्रम जारी करेगा। इसलिए भाजपा के पास उम्मीदवार के चयन के लिए अब कुछ अतिरिक्त समय है। चार लंबित वार्डों का परिणाम भाजपा के मौजूदा बहुमत को समाप्त नहीं करता, लेकिन सभी 150 पार्षदों की अंतिम तस्वीर साफ होने के बाद ही मेयर चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।फिलहाल सुनील कोठारी, पुनीत कर्णावट, शैलेन्द्र भार्गव और अन्य नाम पार्टी की आंतरिक चर्चाओं और मीडिया रिपोर्टों में हैं। अंतिम उम्मीदवार कौन होगा, यह भाजपा नेतृत्व की औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

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अजमेर

अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु

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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार

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राष्ट्रीय - अंतर्राष्ट्रीय

अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़: झांग यिमिंग बने एशिया के सबसे अमीर शख्स, 1 माह में पाया 12 अरब डॉलर का उछाल; जानिए अदाणी की पोजीशन

अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़: टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइटडांस (ByteDance) के संस्थापक झांग यिमिंग एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं. ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, इस महीने उनकी संपत्ति में 12 अरब डॉलर का जोरदार इजाफा हुआ है. झांग यिमिंग बने एशिया के सबसे अमीर शख्स वैश्विक अरबपतियों की सूची में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है. शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म टिकटॉक (TikTok) की मूल कंपनी बाइटडांस (ByteDance) के संस्थापक झांग यिमिंग (Zhang Yiming) एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं. भारतीय उद्योगपति गौतम अदाणी इनके बाद दूसरे नंबर पर हैं ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स (Bloomberg Billionaires Index) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, झांग यिमिंग और गौतम अडानी दोनों की कुल संपत्ति लगभग 105 अरब डॉलर के आसपास दर्ज की गई है, लेकिन उच्च मूल्यांकन के चलते झांग सूची में शीर्ष स्थान पर पहुंच गए हैं. इस महीने झांग की व्यक्तिगत संपत्ति में करीब 12 अरब डॉलर का भारी उछाल देखने को मिला. असेसमेंट और AI टूल्स से मिला बड़ा बूस्ट झांग की संपत्ति में आई इस तेजी के पीछे बाइटडांस के सेल्फ असेसमेंट में हुआ सुधार मुख्य वजह है. ब्लूमबर्ग ने ब्लैकरॉक (BlackRock) और फिडेलिटी (Fidelity) की हालिया फाइलिंग के आधार पर कंपनी की वैल्यूएशन को अपडेट किया है. इसके साथ ही, अमेरिका में टिकटॉक से जुड़े विवाद के समाधान (ओरेकल और सिल्वर लेक संयुक्त उद्यम) के बाद कंपनी के रिस्क डिस्काउंट को 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया. इसके अलावा, बाइटडांस के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उत्पादों — विशेष रूप से ‘डौबाओ’ (Doubao) चैटबॉट और ‘सीडांस’ (Seedance) वीडियो मॉडल — ने निवेशकों का भरोसा और उत्साह बढ़ाया है. उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 के बाद से झांग यिमिंग की संपत्ति में आठ गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है.

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राष्ट्रीय न्यूज़: गुरुग्राम में महिला बाइकर को टक्कर मारने का आरोपी कल्याण बैंसला राजस्थान के दौसा से गिरफ्तार, हत्या के प्रयास की धारा जोड़ी

राष्ट्रीय न्यूज़: गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर महिला बाइकर सिया को कार से टक्कर मारने के मामले में पुलिस ने आरोपी कल्याण बैंसला को राजस्थान के दौसा से गिरफ्तार किया है। सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद एफआईआर में हत्या के प्रयास की धारा भी जोड़ी गई है। महिला ने जानबूझकर टक्कर मारने का आरोप लगाया है, जबकि आरोपी ने इसे दुर्घटना बताया है। गुरुग्राम के चर्चित महिला बाइकर मामले में पुलिस ने मंगलवार, 15 सितंबर को आरोपी कल्याण बैंसला को दौसा से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे गुरुग्राम लाए जाने की जानकारी दी। गोल्फ कोर्स रोड पर हुई घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर सेक्टर-56 थाने में मामला दर्ज किया था। सीसीटीवी की जांच के बाद बढ़ाई धारा पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करने के बाद मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109, यानी हत्या के प्रयास का आरोप जोड़ा गया। शुरुआत में लापरवाही से वाहन चलाने और दूसरों की जान को खतरे में डालने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ था। महिला का आरोप—पीछा किया, फिर बाइक को टक्कर मारी सिया के अनुसार, वह रविवार तड़के अपने साथियों के साथ बाइक चला रही थीं। आरोप है कि सफेद कार का चालक उनके करीब गाड़ी चलाने लगा और बार-बार रुकने के इशारे किए। उन्होंने चालक से दूरी बनाए रखने को कहा, लेकिन इसके बाद कार ने बाइक को टक्कर मार दी। सिया ने कार सवारों के नशे में होने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि टक्कर अनजाने में लगी थी तो चालक उनकी मदद करने के लिए क्यों नहीं रुका। आरोपी का दावा—जानबूझकर नहीं मारी टक्कर दिए गए बयान में बैंसला ने टक्कर होने की बात स्वीकार की, लेकिन जानबूझकर ऐसा करने से इनकार किया। उसका दावा है कि वाहन पर नियंत्रण खोने से दुर्घटना हुई और मौके पर मौजूद लोगों से मारपीट के डर से वह वहाँ से चला गया। आरोपी के वकील ने भी घटना को दुर्घटना बताते हुए महिला बाइकर की ड्राइविंग पर सवाल उठाए हैं। ये बचाव पक्ष के दावे हैं; घटना की परिस्थितियों और जिम्मेदारी की जांच पुलिस कर रही है। पुलिस पूछताछ के लिए मांगेगी रिमांड गुरुग्राम के डीसीपी ईस्ट संदीप कुमार के मुताबिक, आरोपी को अदालत में पेश कर आगे की पूछताछ के लिए रिमांड मांगी जाएगी। पुलिस घटना के समय उसके साथ मौजूद अन्य व्यक्ति की भूमिका की भी जांच कर रही है।

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क़लमकार

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#Being Positive

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Read more 23rd Jan 2021

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#मधुकर कहिन

गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... 

गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...  * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक

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