For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 126964778
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: पति पत्नी का अपहरण कर पति से मारपीट करने और दांतली से नाक काटने के साथ उसका वीडियो बनाकर वायरल करने के मामले में जिला न्यायालय ने आठ आरोपियों को सुनाई सजा, |  Ajmer Breaking News: 16 साल से फरार चल रहे हत्या के आरोपी को जिला पुलिस ने पकड़ने में हासिल की कामयाबी, पुलिस अधीक्षक ने किया मामले का खुलासा |  Ajmer Breaking News: पुष्कर घाटी बस हादसे में घायल लोगों से मिलने पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, |  Ajmer Breaking News: अजमेर पुलिस को मिली बड़ी सफलता, अंतरराज्यीय चोर गिरोह का पर्दाफाश, |  Ajmer Breaking News: पुष्कर घाटी,अजमेर में अनियंत्रित होकर बस खाई में गिरने की दुखद सूचना |  Ajmer Breaking News: विधानसभा अध्यक्ष देवनानी के आदेश बेअसर—अजमेर में खुलेआम मटन-चिकन बिक्री, सूचना केंद्र चौराहे पर जाम से लोग परेशान |  Ajmer Breaking News: अजमेर से पीसांगन मायरा भरने जा रही सवारियों से भरी बस पुष्कर घाटी से खाई में गिरी, एक महिला की मौत  |  Ajmer Breaking News: राजस्थान सर्व ब्राह्मण महासभा अजमेर के द्वारा भगवान परशुराम जन्मोत्सव के दो दिवसीय कार्यक्रम के तहत आज रविवार को विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। |  Ajmer Breaking News: अजमेर में ऑनलाइन सट्टेबाजी गिरोह का भंडाफोड़, 5 आरोपी गिरफ्तार |  Ajmer Breaking News: अक्षय तृतीया पर आस्था का सैलाब: 500 साल पुरानी परंपराओं से गूंजा पुष्कर,बद्रीनाथ से जुड़ा पुष्कर: अक्षय तृतीया पर दिखी अद्भुत श्रद्धा | 

क़लमकार: ज़िन्दा हूँ मैं हिलता डुलता रहता हूँ, दीवारों से बातें करता रहता हूँ।

Post Views 71

October 11, 2021

हिंदी की मैं रूह से ज़िन्दा हूँ लेकिन, उर्दू से भी मिलता जुलता रहता हूँ।

ज़िन्दा हूँ मैं हिलता डुलता रहता हूँ,

दीवारों से बातें करता रहता हूँ।

हिंदी की मैं रूह से ज़िन्दा हूँ लेकिन,

उर्दू से भी मिलता जुलता रहता हूँ।

लहू के हर कतरे से मेरा रिश्ता है,

जिस्म के अंदर चलता फिरता रहता हूँ।

ख़ुद पर इतरा ले सूरज चाहे जितना,

अपनी आग में मैं भी जलता रहता हूँ।

बाहर से पुख़्ता दिखने की ख़ातिर ही,

अंदर से मैं हर पल ढहता रहता हूँ।

मिल जाएं बादल तो लगता हूँ उड़ने,

यूँ दरिया के साथ में बहता रहता हूँ।

इश्क़ की ख़ुश्बू से वाकिफ़ हूँ तभी तो मैं,

रूहानी ग़ज़लें ही कहता रहता हूँ।

सुरेन्द्र चतुर्वेदी


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved