For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 139301297
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: देवनानी से श्रीमती सिंह व श्री पूनिया मिले, देवनानी की मुख्यमंत्री शर्मा व अजेय कुमार से मुलाकात |  Ajmer Breaking News: भाजपा विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आह्वान, विकास कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने का करें प्रयास |  Ajmer Breaking News: साइबर ठगों को कमीशन पर अकाउंट देने वाला एक आरोपी गिरफ्तार, अकाउंट से 17 लाख रुपए का मिला ट्रांजैक्शन, पुलिस कर रही है मामले की जांच |  Ajmer Breaking News: फर्जी दस्तावेजों से चरक प्रेस लाइसेंस बनवाने के मामले में ई-मित्र संचालक गिरफ्तार |  Ajmer Breaking News: होकरा पुलिया पर भीषण हादसा: पेट्रोल-डीजल से भरा टैंकर दो ट्रेलरों से भिड़ा, एक चालक की मौत |  Ajmer Breaking News: अजमेर जिला पुलिस ने सांसी बस्ती में दी दबिश, मादक पदार्थ की खरीद बिक्री वाले ठिकानो पर दी गई दबिश, |  Ajmer Breaking News: दहेज प्रताड़ना का आरोप, पुलिस अधीक्षक से की कठोर कार्रवाई की मांग, |  Ajmer Breaking News: टोंक निवासी पीड़िता ने रेंज आईजी कार्यालय पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार |  Ajmer Breaking News: बूढ़ा पुष्कर में वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान का समापन, उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने किया श्रमदान और वृक्षारोपण |  Ajmer Breaking News: 18 जून 2024 को दर्ज हुए मुकदमें में पॉक्सो कोर्ट ने किया सजा का ऐलान .मासूम को दरिंदगी का शिकार बनाने वाले दुराचारी को 20 वर्ष  कठोर कारावास,26,500 के अर्थ दंड से किया दंडित | 

क़लमकार: ज़िन्दा हूँ मैं हिलता डुलता रहता हूँ, दीवारों से बातें करता रहता हूँ।

Post Views 71

October 11, 2021

हिंदी की मैं रूह से ज़िन्दा हूँ लेकिन, उर्दू से भी मिलता जुलता रहता हूँ।

ज़िन्दा हूँ मैं हिलता डुलता रहता हूँ,

दीवारों से बातें करता रहता हूँ।

हिंदी की मैं रूह से ज़िन्दा हूँ लेकिन,

उर्दू से भी मिलता जुलता रहता हूँ।

लहू के हर कतरे से मेरा रिश्ता है,

जिस्म के अंदर चलता फिरता रहता हूँ।

ख़ुद पर इतरा ले सूरज चाहे जितना,

अपनी आग में मैं भी जलता रहता हूँ।

बाहर से पुख़्ता दिखने की ख़ातिर ही,

अंदर से मैं हर पल ढहता रहता हूँ।

मिल जाएं बादल तो लगता हूँ उड़ने,

यूँ दरिया के साथ में बहता रहता हूँ।

इश्क़ की ख़ुश्बू से वाकिफ़ हूँ तभी तो मैं,

रूहानी ग़ज़लें ही कहता रहता हूँ।

सुरेन्द्र चतुर्वेदी


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved