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Rajasthan News:

May 23, 2026

राजस्थान न्यूज़: राजस्थान हाईकोर्ट में 1 से 28 जून तक ग्रीष्मावकाश घोषित, वेकेशन जजों की ड्यूटी तय

राजस्थान न्यूज़: जयपुर/जोधपुर | राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने वर्ष 2026 के लिए ग्रीष्मकालीन अवकाश की अधिसूचना जारी कर दी है। रजिस्ट्रार (प्रशासन) शिवानी सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ और जयपुर पीठ में 1 जून से 28 जून 2026 तक ग्रीष्मावकाश रहेगा। इस अवधि के दौरान नियमित अदालती कार्यवाही बंद रहेगी तथा अदालतें पुनः 29 जून 2026, सोमवार से नियमित रूप से संचालित होंगी। हालांकि अवकाश अवधि के दौरान आवश्यक और अत्यावश्यक मामलों की सुनवाई जारी रहेगी। इसके लिए हाईकोर्ट प्रशासन ने जोधपुर मुख्यपीठ और जयपुर पीठ में वेकेशन जजों की नियुक्ति की है, जो अवकाशकाल में जरूरी मामलों की सुनवाई करेंगे। जोधपुर मुख्यपीठ में वेकेशन जजों की व्यवस्था हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार जोधपुर मुख्यपीठ में अलग-अलग अवधि के लिए न्यायाधीशों की ड्यूटी निर्धारित की गई है। एकल पीठ के लिए 1 जून से 5 जून तक न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित, 8 जून से 12 जून तक न्यायमूर्ति संदीप शाह, 15 एवं 16 जून तथा 18 एवं 19 जून को न्यायमूर्ति मुकेश राजपुरोहित और 22 जून से 25 जून तक न्यायमूर्ति बलजिंदर सिंह संधू अवकाशकालीन मामलों की सुनवाई करेंगे। ग्रीष्मावकाश के दौरान खंडपीठों के गठन और अन्य आवश्यक न्यायिक व्यवस्थाओं को लेकर भी विस्तृत कार्यक्रम जारी किया गया है, ताकि जरूरी मामलों में न्यायिक प्रक्रिया बाधित न हो। हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अवकाशकाल में केवल अत्यावश्यक प्रकृति के मामलों पर ही सुनवाई की जाएगी। इसके लिए संबंधित पक्षों और अधिवक्ताओं को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन प्रस्तुत करना होगा। हर वर्ष की तरह इस बार भी ग्रीष्मावकाश के दौरान हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई स्थगित रहेगी, जबकि जरूरी मामलों के लिए विशेष व्यवस्थाएं लागू रहेंगी। अधिवक्ताओं और पक्षकारों को भी अदालतों के अवकाश कार्यक्रम के अनुसार अपनी तैयारी और मामलों की पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

May 23, 2026

राजस्थान न्यूज़: राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी खर्चों पर सख्ती, सरकारी वाहनों से लेकर बैठकों तक जारी हुए नए निर्देश

राजस्थान न्यूज़: जयपुर | राजस्थान सरकार ने सार्वजनिक खर्चों में वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के कुशल प्रबंधन को लेकर बड़ा कदम उठाया है। वित्त विभाग ने 22 मई 2026 को विस्तृत परिपत्र जारी करते हुए सरकारी विभागों, निगमों, बोर्डों, विश्वविद्यालयों और स्वायत्तशासी संस्थाओं के लिए खर्च नियंत्रण संबंधी नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं। सरकार ने ईंधन बचत, सरकारी खर्चों में कटौती, डिजिटल कार्यप्रणाली को बढ़ावा और ऊर्जा संरक्षण पर विशेष जोर दिया है। सरकारी काफिलों में वाहन कम, ई-व्हीकल को बढ़ावा वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार मुख्यमंत्री कार्यालय ने पहले ही अपने काफिले में वाहनों की संख्या सीमित कर दी है। अब मंत्रियों, निगमों, आयोगों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों को भी न्यूनतम आवश्यक वाहनों का ही उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल और डीजल आधारित सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की योजना भी बनाई है। पहले चरण में शहरों के भीतर काम करने वाले अधिकारियों के लिए खरीदे जाने वाले नए वाहन ई-व्हीकल ही होंगे। संविदा वाहनों में भी ई-व्हीकल को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। कार पूलिंग और विदेश यात्राओं पर भी सख्ती सरकार ने एक ही दिशा में जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को कार पूलिंग अपनाने के निर्देश दिए हैं। सरकारी खर्च पर विदेश यात्राओं पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके साथ ही राज्यभर में ई-व्हीकल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। सरकारी कार्यक्रम और बैठकों में भी बदले नियम परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी विभागों, स्वायत्तशासी संस्थाओं और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों और समारोहों का आयोजन यथासंभव सरकारी भवनों में ही किया जाए। सरकार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित बैठकों को बढ़ावा देने और अनावश्यक फिजिकल बैठकों को कम करने के निर्देश भी दिए हैं।डिजिटल कार्यप्रणाली पर विशेष जोर वित्त विभाग ने सभी कार्यालयों को ई-ऑफिस और ई-फाइल प्रणाली का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। भौतिक पत्राचार की जगह राज-काज पोर्टल के माध्यम से डिजिटल संचार को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी ऑनलाइन माध्यम और iGOT कर्मयोगी पोर्टल के उपयोग पर जोर दिया गया है। ऊर्जा बचत और सोलर सिस्टम को बढ़ावा सरकार ने सभी राजकीय भवनों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। कार्यालय समय के दौरान बिजली उपकरणों के सीमित उपयोग और कार्यालय समय के बाद उन्हें बंद करना अनिवार्य किया गया है। ऊर्जा विभाग को पीएम सूर्यघर योजना के तहत घरेलू सौर ऊर्जा संयंत्रों को प्राथमिकता देने को कहा गया है।

May 23, 2026

राजस्थान न्यूज़: फेम इंडिया सर्वे में राजस्थान के 6 कलक्टर देश के टॉप 100 में शामिल, नवाचार और गवर्नेंस मॉडल की देशभर में चर्चा

राजस्थान न्यूज़: सीकर | फेम इंडिया पत्रिका द्वारा देशभर के लगभग 800 जिला कलक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों पर किए गए सर्वे में राजस्थान के छह आईएएस अधिकारियों ने देश के टॉप 100 कलक्टरों में जगह बनाई है। प्रशासनिक क्षमता, प्रभावी गवर्नेंस, नवाचार, जवाबदेह कार्यशैली, संकट प्रबंधन कौशल और जनसंवेदनशीलता जैसे दस प्रमुख मानकों के आधार पर यह रैंकिंग तैयार की गई। फेम इंडिया द्वारा यह सर्वे वर्ष 2011 से लगातार किया जा रहा है। चयन प्रक्रिया में जनता की प्रतिक्रिया, सत्ताधारी और विपक्षी नेताओं के सुझाव, जमीनी सर्वेक्षण और वरिष्ठ नौकरशाहों के मूल्यांकन को भी शामिल किया गया। राजस्थान के 6 कलक्टर टॉप 100 में शामिल फेम इंडिया सर्वे में राजस्थान से जिन अधिकारियों को टॉप 100 में स्थान मिला है, उनमें आईएएस अधिकारी आलोक रंजन, अंकित, अरुण गर्ग, जितेंद्र कुमार सोनी, मुकुल शर्मा और टीना डाबी शामिल हैं। इन अधिकारियों के विभिन्न जिलों में किए गए नवाचार और प्रशासनिक मॉडल पहले भी व्यापक चर्चा का विषय रहे हैं। सीकर के पूर्व कलक्टर मुकुल शर्मा के नवाचार चर्चा में सीकर के तत्कालीन जिला कलक्टर मुकुल शर्मा को उनके कई नवाचारों के लिए विशेष पहचान मिली। डिजिटल साक्षरता अभियान, खाटूश्यामजी में भक्तों के लिए “खाटू मॉडल” के तहत सुगम दर्शन व्यवस्था, नगर परिषद क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान और बिना विवाद सड़क चौड़ीकरण जैसे प्रयासों को व्यापक सराहना मिली। टीना डाबी का जल संचय मॉडल बना पहचान बाड़मेर की जिला कलक्टर रहीं टीना डाबी को जल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण अभियानों के लिए पहचान मिली। सरहदी क्षेत्र में उनके “जल संचय मॉडल” को प्रथम पुरस्कार भी मिला। साथ ही बालिका शिक्षा और मिशन सुरक्षा चक्र जैसे अभियानों को भी व्यापक समर्थन मिला। जयपुर के जितेंद्र कुमार सोनी के अभियान रहे चर्चित आईएएस अधिकारी जितेंद्र कुमार सोनी ने अलवर और जयपुर में कई नवाचार लागू किए। “नो बैग डे”, “दिशा”, “चरण पादुका” जैसे अभियानों के साथ जयपुर में आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करना चर्चा में रहा। पर्यटन, स्वरोजगार और शिक्षा पर विशेष फोकस चित्तौड़गढ़ के आलोक रंजन ने पर्यटन विकास, औद्योगिक विस्तार और आईटी आधारित मॉनिटरिंग मॉडल पर काम किया। झुंझुनूं के अरुण गर्ग ने महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और जल संरक्षण अभियानों को गति दी। डूंगरपुर के जिला कलक्टर अंकित ने आदिवासी क्षेत्र में ड्रॉपआउट बच्चों को पुनः स्कूलों से जोड़ने, स्वास्थ्य सेवाओं और जनकल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सराहना प्राप्त की। देशभर के अधिकारियों की सूची में राजस्थान का प्रभाव फेम इंडिया सर्वे में विभिन्न राज्यों के आईएएस अधिकारियों को शामिल किया गया है। राजस्थान के छह अधिकारियों का चयन प्रदेश के प्रशासनिक मॉडल और नवाचार आधारित गवर्नेंस की बढ़ती पहचान को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नवाचार न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाते हैं, बल्कि आमजन और प्रशासन के बीच विश्वास भी मजबूत करते हैं।

May 22, 2026

राजस्थान न्यूज़: राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, पंचायत और निकाय चुनाव 31 जुलाई तक कराने के निर्देश

राजस्थान न्यूज़: जयपुर | राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव टालने को लेकर राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को बड़ा झटका देते हुए 31 जुलाई 2026 तक चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने सरकार और राज्य चुनाव आयोग की ओर से दिसंबर तक चुनाव स्थगित करने के लिए दिए गए प्रार्थना पत्र को स्वीकार नहीं किया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने 11 मई को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि तय समय सीमा के भीतर चुनाव नहीं कराए गए, जिसके बाद राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट में चुनाव आगे बढ़ाने के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया। राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी थी कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए न्यायसंगत आरक्षण तय करने और नए वार्डों के परिसीमन का कार्य अभी प्रक्रियाधीन है। सरकार का कहना था कि बिना इन प्रक्रियाओं को पूरा किए चुनाव कराना भविष्य में कानूनी और प्रशासनिक विसंगतियों को जन्म दे सकता है। मामले में लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 11 मई 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सार्वजनिक करते हुए सरकार को राहत प्रदान की गई है। हालांकि अदालत ने केवल समय सीमा नहीं बढ़ाई, बल्कि ओबीसी आयोग को भी सख्त समयसीमा में बांध दिया है। खंडपीठ ने निर्देश दिया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में ओबीसी वर्ग की वास्तविक आबादी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक पिछड़ेपन का “इम्पिरिकल डेटा” तैयार कर 20 जून 2026 तक अपनी रिपोर्ट हर हाल में सरकार को सौंपे। इसी रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार यह तय करेगी कि जिला परिषद, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत, नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में ओबीसी वर्ग के लिए कितनी सीटें आरक्षित की जाएंगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित “ट्रिपल टेस्ट” की पालना के लिए यह प्रक्रिया अनिवार्य मानी जा रही है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब पंचायत और निकाय चुनावों की पूरी प्रक्रिया मानसून सीजन तक खिसक गई है। इससे चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों को अतिरिक्त समय मिल गया है। पिछले कई महीनों से जनसंपर्क में जुटे दावेदारों को अब करीब ढाई महीने और इंतजार करना होगा। वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य सरकार जानबूझकर पिछले डेढ़ वर्ष से पंचायत और निकाय चुनाव टाल रही है। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनाव समय पर होना संवैधानिक आवश्यकता है और सरकार इसमें अनावश्यक देरी कर रही है।

May 22, 2026

राजस्थान न्यूज़: कांग्रेस में राज्यसभा टिकट को लेकर हलचल तेज, दावेदारी के लिए लॉबिंग शुरू

राजस्थान न्यूज़: जयपुर | राजस्थान से खाली हो रही कांग्रेस की राज्यसभा सीट को लेकर पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। टिकट की दौड़ में कई बड़े नेता सक्रिय हो गए हैं और आलाकमान तक अपनी दावेदारी मजबूत करने के प्रयास शुरू हो चुके हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार फिलहाल तीन नेता वर्तमान राज्यसभा सांसद नीरज डांगी, कांग्रेस नेता दिनेश खोड़निया और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा सक्रिय रूप से लॉबिंग में जुटे हुए हैं, जबकि वरिष्ठ नेता पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी बिना किसी लॉबिंग के सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। नीरज डांगी फिर से राज्यसभा पहुंचने की कोशिश में वर्तमान राज्यसभा सांसद नीरज डांगी अपना कार्यकाल बढ़वाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। वे दूसरी बार राज्यसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार डांगी कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से लगातार संपर्क साध रहे हैं। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का करीबी माना जाता है। नीरज डांगी मेवाड़ और वागड़ क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और क्षेत्रीय प्रभाव का दावा भी कर रहे हैं। कांग्रेस के भीतर उनकी पहचान संगठनात्मक और क्षेत्रीय नेता के रूप में मानी जाती है। दिनेश खोड़निया भी सक्रिय, पहले विवादों में आ चुका नाम राज्यसभा की संभावित दावेदारी को लेकर कांग्रेस नेता दिनेश खोड़निया का नाम भी चर्चा में बना हुआ है। वे डूंगरपुर के पूर्व जिला अध्यक्ष रह चुके हैं और आदिवासी क्षेत्रों में राजनीतिक पकड़ का दावा करते हैं। हालांकि पेपर लीक मामले में आरपीएससी के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा की गिरफ्तारी के बाद दिनेश खोड़निया का नाम भी विवादों में आया था। उस दौरान प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उनके और उनके रिश्तेदारों के ठिकानों पर छापेमारी भी की गई थी। इसके बावजूद वे संगठन स्तर पर सक्रिय बने हुए हैं। पवन खेड़ा राहुल गांधी के जरिए साध रहे समीकरण कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा भी राज्यसभा टिकट की दौड़ में माने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार वे राहुल गांधी के माध्यम से अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। पवन खेड़ा खुद को राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र से जुड़ा बताते हैं, क्योंकि उनका जन्म उदयपुर में हुआ था। हालांकि उनकी शिक्षा और राजनीतिक सक्रियता मुख्य रूप से दिल्ली केंद्रित रही है। राजस्थान की राजनीति में वे कभी प्रत्यक्ष रूप से सक्रिय नजर नहीं आए, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ताओं में होती है। बिना लॉबिंग सबसे मजबूत माने जा रहे डॉ. सीपी जोशी कांग्रेस की ओर से राज्यसभा की खाली हो रही सीट के लिए सबसे मजबूत और गंभीर दावेदार पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी को माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार उनका नाम शीर्ष स्तर पर गंभीरता से विचाराधीन है। विशेष बात यह मानी जा रही है कि डॉ. जोशी किसी प्रकार की लॉबिंग या दबाव की राजनीति से दूर रहकर अपनी राजनीतिक योग्यता और अनुभव के आधार पर दौड़ में आगे बताए जा रहे हैं। डॉ. सीपी जोशी विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस संगठन में कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। मेवाड़ क्षेत्र में उन्हें कांग्रेस का बड़ा चेहरा माना जाता है।

May 21, 2026

राजस्थान न्यूज़: जयपुर में डीआरआई की बड़ी कार्रवाई, विदेशी महिला से 2.56 करोड़ रुपए के मादक पदार्थ बरामद

राजस्थान न्यूज़: जयपुर | जयपुर में राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अफ्रीकी मूल की एक विदेशी महिला को भारी मात्रा में मादक पदार्थों के साथ गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार बरामद नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 2.56 करोड़ रुपए आंकी गई है। डीआरआई अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई खुफिया सूचना के आधार पर की गई। 19 मई को मुंबई जाने वाली एक बस में यात्रा कर रही विदेशी महिला की गतिविधियां संदिग्ध पाए जाने पर उसे जयपुर में रोककर पूछताछ की गई। इसके बाद महिला के सामान की गहन जांच की गई। तलाशी के दौरान महिला के ट्रॉली बैग से बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार बैग से 2256 ग्राम मेथामफेटामाइन, 142 ग्राम कोकीन तथा 46 ग्राम एमडीएमए बरामद किया गया है। बरामद नशीले पदार्थों को जब्त कर लिया गया है। डीआरआई अधिकारियों का कहना है कि मामले में महिला से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि मादक पदार्थों की यह खेप कहां से लाई गई थी तथा इसे कहां पहुंचाया जाना था। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि यह मामला संगठित मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। डीआरआई द्वारा महिला के यात्रा दस्तावेजों, संपर्कों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच की जा रही है।

May 21, 2026

राजस्थान न्यूज़: नीट पेपर लीक के विरोध में जयपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन, पुलिस से धक्का-मुक्की और पानी की बौछार

राजस्थान न्यूज़: जयपुर | नीट पेपर लीक मामले को लेकर गुरुवार को जयपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय का घेराव करने के लिए मार्च निकाला। इस दौरान शहीद स्मारक के पास पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोका। प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स पर चढ़कर आगे बढ़ने का प्रयास करने लगे, जिसके बाद पुलिस ने पानी की बौछार छोड़कर उन्हें रोकने की कार्रवाई की। मौके पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को कंधे पर बैठा लिया। वहीं विधायक मनीष यादव बैरिकेड्स पर चढ़कर आगे जाने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें पुलिसकर्मियों ने नीचे उतार दिया। दरअसल, कांग्रेस कार्यकर्ता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय से पैदल मार्च करते हुए शहीद स्मारक के रास्ते भाजपा मुख्यालय की ओर बढ़ रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नीट पेपर लीक मामले में कार्रवाई की मांग की। गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि कांग्रेस केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों से लगातार नीट परीक्षा में पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी पर छात्रों का विश्वास खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि एनटीए को भंग किया जाना चाहिए। डोटासरा ने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। उन्होंने कहा कि 22 लाख छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को दी गई है, लेकिन इसकी निगरानी न्यायालय के तहत होनी चाहिए ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच कई बार तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। भारी पुलिस बल तैनात कर स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखा गया।

May 21, 2026

राजस्थान न्यूज़: राहुल गांधी की टिप्पणी पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का पलटवार, बोलीं- यह भाषा लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ

राजस्थान न्यूज़: जयपुर | कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लेकर दिए गए कथित बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी क्रम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी राहुल गांधी की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है। वसुंधरा राजे ने सोशल मीडिया पर जारी अपने विस्तृत बयान में कहा कि भारतीय लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद और नीतियों का विरोध स्वाभाविक है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि राजनीतिक नेता देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए अभद्र और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करें। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने बयान में कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के प्रति राहुल गांधी की अमर्यादित टिप्पणी अत्यंत निंदनीय और आपत्तिजनक है।” उन्होंने कहा कि इस प्रकार की शब्दावली भारत की सभ्य और समृद्ध राजनीतिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को अपनी भाषा और व्यवहार की मर्यादा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। लोकतंत्र में स्वस्थ आलोचना और राजनीतिक विरोध स्वीकार्य है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणी और अपमानजनक भाषा का प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता। वसुंधरा राजे के इस बयान के बाद राजस्थान की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है। भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के बयान को लेकर कांग्रेस पर लगातार हमले तेज कर दिए हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से भी भाजपा नेताओं के बयानों पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। राजनीतिक हलकों में इस बयान को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है और दोनों दलों के कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर भी एक-दूसरे के खिलाफ लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

May 20, 2026

राजस्थान न्यूज़: प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का हमला, बोले- सरकार जारी करे श्वेत पत्र

राजस्थान न्यूज़: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति, बढ़ते कर्ज और विकास कार्यों पर घटते खर्च को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए, ताकि जनता को वास्तविक हालात की जानकारी मिल सके। नेता प्रतिपक्ष जूली ने कहा कि विधानसभा में उन्होंने लगातार जिन मुद्दों को उठाया था, अब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने उन पर पूरी तरह मुहर लगा दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने पांच साल और दो साल की तुलना को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की, लेकिन अब सच्चाई सामने आ चुकी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान आज विकास में नहीं बल्कि कर्ज लेने में सबसे आगे पहुंच गया है। कैग की रिपोर्ट सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन को उजागर कर रही है। जूली के अनुसार राज्य सरकार विकास के दावों के बावजूद पूंजीगत खर्च करने में विफल रही है। नेता प्रतिपक्ष जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपने विकास बजट का केवल 51.82 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च कर पाई है। उन्होंने कहा कि जब अस्पताल, स्कूल और सड़कें नहीं बनेंगी तो युवाओं को रोजगार कैसे मिलेगा। उनके अनुसार प्रदेश में विकास कार्य पूरी तरह ठप हो चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष जूली ने दावा किया कि सरकार ने बजट अनुमान से 65 प्रतिशत अधिक यानी करीब 71 हजार 261 करोड़ रुपए का अतिरिक्त कर्ज लिया है, जो प्रदेश के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों जैसे तेलंगाना और कर्नाटक विकास खर्च के मामले में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि राजस्थान को कर्ज के बोझ में धकेला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने राजकोषीय घाटा कम दिखाने के लिए पूंजीगत खर्च में लगभग 28 प्रतिशत की कटौती कर दी। उनके अनुसार इससे भविष्य की आधारभूत संरचनाओं और विकास परियोजनाओं का निर्माण प्रभावित होगा और इसका असर लंबे समय तक प्रदेश को भुगतना पड़ेगा। नेता प्रतिपक्ष जूली ने कहा कि सरकार बड़े-बड़े विकास दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की गति धीमी पड़ चुकी है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार आर्थिक स्थिति और कर्ज प्रबंधन को लेकर पूरी पारदर्शिता बरते और जनता के सामने वास्तविक आंकड़े रखे।

May 20, 2026

राजस्थान न्यूज़: डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने ली अपराध समीक्षा बैठक, साइबर अपराध, सड़क सुरक्षा और संगठित अपराध पर दिए सख्त निर्देश

राजस्थान न्यूज़: जयपुर में मंगलवार को पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा की अध्यक्षता में प्रदेशभर के रेंज महानिरीक्षक, पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों की अपराध समीक्षा बैठक आयोजित की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस बैठक में कानून-व्यवस्था, संगठित अपराध, साइबर अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक के दौरान पुलिस अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए गए। बैठक में डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार अवैध खनन, बजरी परिवहन और भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाने, पुलिस की फील्ड विजिबिलिटी बढ़ाने और हर स्तर पर सतर्कता बनाए रखने पर जोर दिया। डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगले तीन महीने में उनके स्तर पर एक साल से अधिक लंबित कोई भी प्रकरण नहीं रहना चाहिए। उन्होंने झूठे मुकदमों के खिलाफ भी प्रभावी कार्रवाई करने को कहा। बैठक में राजस्थान पुलिस की प्राथमिकताओं के आधार पर संगठित अपराध, गैंगस्टर्स के खिलाफ चल रही कार्रवाई और विभिन्न गंभीर आपराधिक मामलों की समीक्षा की गई। डीजीपी ने प्रभावित जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर फोकस्ड कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने अपराध से अर्जित संपत्ति की कुर्की और जब्ती की कार्रवाई तेज करने को भी कहा।इसके साथ ही नए आपराधिक कानूनों में सूचना और संचार तकनीक के उपयोग, ई-सम्मन और वारंट की तामील तथा ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। बैठक में डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के साथ अनिल पालीवाल, आनंद श्रीवास्तव, वी. के. सिंह, बिपीन कुमार पांडे, प्रशाखा माथुर, बीजू जॉर्ज जोसफ तथा लता मनोज कुमार सहित पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। केस ऑफिसर स्कीम में शामिल होंगे महत्वपूर्ण प्रकरण डीजीपी शर्मा ने जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि महत्वपूर्ण प्रकरणों को केस ऑफिसर स्कीम में शामिल कर गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक में रेंजवार एरिया डोमिनेशन अभियान और मालखानों में जब्त सामान के निस्तारण की भी समीक्षा की गई। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने पर जोर बैठक में सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी गई। भीलवाड़ा और उदयपुर क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं में अधिक मृत्यु दर पर चिंता जताते हुए संबंधित जिला पुलिस अधीक्षकों को विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए गए। डीजीपी ने हाईवे और ग्रामीण क्षेत्रों में हेलमेट के अनिवार्य उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक सप्ताह दो दिन विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने इंटरसेप्टर और ब्रेथ एनलाइजर के अधिकतम उपयोग के जरिए प्रभावी चेकिंग करने को कहा। साथ ही पुलिसकर्मियों द्वारा बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने पर रोक लगाने के लिए पुलिस लाइन और कार्यालय परिसरों में विशेष व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए। साइबर अपराध नियंत्रण पर विशेष फोकस बैठक में साइबर अपराधों की रोकथाम और बेहतर अनुसंधान की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर प्राप्त, निस्तारित और लंबित शिकायतों की समीक्षा करते हुए सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए। डीजीपी ने कहा कि पुलिस थानों पर आने वाले परिवादियों को ऑनलाइन परिवाद दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि उन्हें अपने मामलों की कार्रवाई की नियमित जानकारी मिलती रहे और समीक्षा प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी हो सके।

May 20, 2026

राजस्थान न्यूज़: जेजेएम घोटाला मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी, पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल सहित 13 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 1 जून तक बढ़ी

राजस्थान न्यूज़: जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) मामले में एसीबी मामलों की विशेष अदालत ने पूर्व मंत्री महेश जोशी, पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल सहित 13 आरोपियों की न्यायिक हिरासत अवधि 1 जून तक बढ़ा दी है। अदालत ने यह आदेश वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी के दौरान जारी किया। जिन आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई है, उनमें महेश जोशी, सुबोध अग्रवाल, दिनेश गोयल, कृष्णदीप गुप्ता, शुभांशु दीक्षित, सुशील शर्मा, विशाल सक्सेना, अरुण श्रीवास्तव, डी. के. गौड़, महेंद्र प्रकाश सोनी, मुकेश पाठक, निरिल कुमार और संजय बड़ाया शामिल हैं। वहीं मामले में फरार चल रहे आरोपी जितेंद्र शर्मा, मुकेश गोयल और संजीव गुप्ता को अदालत पहले ही भगोड़ा घोषित कर चुकी है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस मामले में प्रारंभिक जांच के बाद 30 अक्टूबर 2024 को मुकदमा दर्ज किया था। जांच में आरोप सामने आए कि वर्ष 2021 में जल जीवन मिशन के तहत श्री श्याम ट्यूबवेल और श्री गणपति ट्यूबवेल के संचालकों ने कथित रूप से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर करोड़ों रुपए के सरकारी टेंडर हासिल किए थे। मामला सामने आने के बाद एसीबी ने विस्तृत जांच शुरू की थी। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी धनशोधन से जुड़े पहलुओं को लेकर अलग से मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। जांच एजेंसी ने पूर्व मंत्री महेश जोशी और संजय बड़ाया सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, पूर्व मंत्री महेश जोशी को बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। मामले की जांच अभी जारी है और एजेंसियां कथित वित्तीय अनियमितताओं, टेंडर प्रक्रिया और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही हैं।

May 20, 2026

राजस्थान न्यूज़: राजस्थान राज्यसभा चुनाव: भाजपा में नामों पर मंथन तेज, ओबीसी और महिला चेहरे पर फोकस

राजस्थान न्यूज़: राजस्थान में अगले महीने राज्यसभा की तीन सीटें खाली होने जा रही हैं। मौजूदा विधानसभा संख्या बल के अनुसार तीन में से दो सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और एक सीट पर कांग्रेस की जीत लगभग तय मानी जा रही है। ऐसे में भाजपा केवल दो उम्मीदवार मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है और इसे लेकर पार्टी के भीतर मंथन तेज हो गया है। इस संबंध में 16 मई को प्रदेश कोर कमेटी की बैठक आयोजित हुई, जिसमें संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की गई। बैठक के बाद कोर कमेटी ने प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को अंतिम पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजने के लिए अधिकृत कर दिया। राजनीतिक और जातीय समीकरणों को देखते हुए भाजपा इस बार एक सीट पर मूल ओबीसी वर्ग से किसी नेता को राज्यसभा भेज सकती है। वहीं दूसरी सीट पर केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा मौका दिए जाने की चर्चा भी बनी हुई है। हालांकि अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। सतीश पूनिया, राजेंद्र राठौड़ और अलका गुर्जर के नाम चर्चा में प्रदेश कोर कमेटी की बैठक में जिन नेताओं के नामों पर प्रमुखता से चर्चा हुई, उनमें पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और भाजपा की राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर शामिल हैं। सतीश पूनिया और राजेंद्र राठौड़ विधानसभा चुनाव हारने के बाद से लगातार राज्यसभा के संभावित दावेदार माने जा रहे हैं। दोनों नेताओं को लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला था। बाद में हुए विधानसभा उपचुनावों में भी उनके नाम चर्चा में रहे, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। फिलहाल सतीश पूनिया को भाजपा ने हरियाणा का प्रदेश प्रभारी बनाकर संगठनात्मक जिम्मेदारी दी हुई है। वहीं राजेंद्र राठौड़ के पास वर्तमान में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं है। ऐसे में पार्टी उनके नाम पर गंभीरता से विचार कर सकती है। अलका गुर्जर का नाम भी मजबूत दावेदारों में माना जा रहा है। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि वर्तमान में भाजपा की ओर से राज्यसभा में कोई महिला सांसद नहीं है। ऐसे में पार्टी महिला प्रतिनिधित्व और जातीय संतुलन दोनों को ध्यान में रखते हुए अलका गुर्जर को मौका दे सकती है। आदिवासी अंचल से सामान्य वर्ग के चेहरे पर भी विचार भाजपा के भीतर इस बार आदिवासी क्षेत्र से किसी सामान्य वर्ग के नेता को राज्यसभा भेजने पर भी चर्चा चल रही है। उदयपुर क्षेत्र में पंचायत से लेकर संसद तक अधिकांश सीटें आरक्षित वर्ग के पास होने के कारण लंबे समय से सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं हो पाया है। पार्टी इससे पहले वर्ष 2016 में डूंगरपुर के पूर्व राजपरिवार से जुड़े हर्षवर्धन सिंह को राज्यसभा भेज चुकी है। इसी तर्ज पर इस बार उदयपुर से प्रमोद सामर के नाम पर भी चर्चा हो रही है। प्रमोद सामर भाजपा संगठन में प्रदेश मंत्री और युवा मोर्चा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वर्तमान में वे सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक हैं।हालांकि राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि उनके नाम पर अंतिम सहमति के लिए वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। प्रभुलाल सैनी और नरसी कुलरिया के नाम भी चर्चा में मूल ओबीसी वर्ग से भाजपा प्रभुलाल सैनी के नाम पर भी विचार कर सकती है। प्रभुलाल सैनी संगठन और सरकार दोनों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। वे वसुंधरा राजे सरकार में मंत्री रहे हैं और संगठन में प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।