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Rajasthan News:

July 10, 2026

राजस्थान न्यूज़: फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट से प्रैक्टिस का मामला, राजस्थान में 88 और डॉक्टरों पर गिरफ्तारी की हो रही है तैयारी

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। कजाकिस्तान से एमबीबीएस कर राजस्थान में प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों के फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट मामले में एसओजी की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। जांच में सामने आया है कि राज्य में सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस कर रहे 88 और डॉक्टरों के फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन यानी एफएमजीई सर्टिफिकेट संदिग्ध या फर्जी पाए गए हैं। इन डॉक्टरों की गिरफ्तारी की तैयारी की जा रही है। इस मामले में अब तक 27 डॉक्टर गिरफ्तार किए जा चुके हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, अधिकतर डॉक्टर कस्बों और छोटे शहरों में प्रैक्टिस कर रहे थे। विदेश से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को भारत में पंजीयन से पहले निर्धारित एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा पास करना जरूरी होता है, लेकिन आरोप है कि कई लोगों ने फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करवा लिया। करीब डेढ़ सौ डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन पर संदेह एसओजी एफएमजी डेटा और राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रेशन डेटा का मिलान कर रही है। प्रारंभिक जांच में करीब डेढ़ सौ डॉक्टरों के दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आने की बात कही जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि कई डॉक्टरों ने फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। 25 से 30 लाख में पढ़ाई से रजिस्ट्रेशन तक का सौदा अब तक गिरफ्तार 27 डॉक्टरों से पूछताछ में एसओजी को महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। पूछताछ में सामने आया कि नीट क्वालिफाई नहीं करने वाले कुछ युवकों से दलालों ने संपर्क किया था। आरोप है कि कजाकिस्तान से एमबीबीएस कराने और बिना वास्तविक एफएमजीई पास किए राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करवाने का सौदा 25 से 30 लाख रुपए में किया जाता था। जांच एजेंसी के अनुसार, एक युवक को कजाकिस्तान भेजने के बाद उसी नेटवर्क के जरिए कई अन्य लोगों को विदेश से एमबीबीएस करवाया गया। इसके बाद कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रेशन करवाया गया। इस पूरे नेटवर्क में करीब 25 करोड़ रुपए के लेन-देन या खर्च की आशंका जताई जा रही है। मास्टरमाइंड पर रिश्तेदारों को भी एमबीबीएस करवाने का आरोप एसओजी की जांच में गिरोह के मास्टरमाइंड के रूप में भानाराम माली का नाम सामने आया है। आरोप है कि उसने पहले अपने रिश्तेदारों को एमबीबीएस करवाया और बाद में उनके संपर्क में आए अन्य युवकों को भी इस नेटवर्क के जरिए विदेश भेजा गया। इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्रेशन करवाने की प्रक्रिया पूरी कराई गई। जल्द और गिरफ्तारियां संभव एसओजी एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, विदेश से एमबीबीएस कर भारत लौटे सौ से ज्यादा डॉक्टरों के एफएमजी रजिस्ट्रेशन में फर्जीवाड़ा सामने आया है। विदेश से एमबीबीएस कराने और फर्जी रजिस्ट्रेशन करवाने में एक बड़ा गिरोह सक्रिय था, जिसका खुलासा किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि एफएमजी डेटा और आरएमसी डेटा की जांच जारी है। डेटा मिलान और दस्तावेजों की जांच के आधार पर जल्द ही कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। फिलहाल एसओजी यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में दलालों, दस्तावेज तैयार करने वालों और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में सहयोग करने वाले अन्य लोगों की क्या भूमिका रही। मामले ने चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रैक्टिस करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

July 10, 2026

राजस्थान न्यूज़: हाईकोर्ट के आदेश से शिक्षा विभाग में 5 वर्षों की प्रिंसिपल पदोन्नतियों की होगी समीक्षा

राजस्थान न्यूज़: बीकानेर। राजस्थान हाईकोर्ट के एक महत्वपूर्ण आदेश के बाद शिक्षा विभाग में पिछले पांच वर्षों के दौरान हुई प्रिंसिपल पदोन्नतियों की समीक्षा का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने 1 अप्रैल 2021 की आधार तिथि के अनुसार वरिष्ठता सूची की समीक्षा करते हुए रिव्यू डीपीसी करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश का असर वर्ष 2021-22 से लेकर अब तक हुई प्रिंसिपल पदोन्नतियों पर पड़ सकता है। साथ ही भविष्य में जिला शिक्षा अधिकारी और उपनिदेशक स्तर तक की पदोन्नतियों पर भी इसका प्रभाव पड़ने की संभावना है। वर्ष 2021-22 में राज्य सरकार द्वारा नियमों में संशोधन के बाद व्याख्याताओं और हेडमास्टर्स की संयुक्त वरिष्ठता सूची तैयार की गई थी। इस वरिष्ठता सूची में प्रशासनिक अनुभव यानी वेटेज को महत्व दिए जाने के कारण कई जूनियर हेडमास्टर्स वरिष्ठ व्याख्याताओं से ऊपर आ गए थे। इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए अनेक व्याख्याताओं ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि पदोन्नति प्रक्रिया में वास्तविक वरिष्ठता और लागू नियमों का पालन सर्वोपरि है। यदि वरिष्ठता निर्धारण में किसी प्रकार की त्रुटि हुई है, तो उसे सुधारते हुए पात्र कार्मिकों को उनके वैधानिक अधिकारों का लाभ दिया जाना चाहिए। अदालत के निर्देशों के अनुसार सबसे पहले वर्ष 2021-22 और 2022-23 की प्रिंसिपल डीपीसी की समीक्षा की जाएगी। चूंकि बाद के वर्षों की पदोन्नतियां भी इन्हीं वरिष्ठता सूचियों और डीपीसी के आधार पर आगे बढ़ी थीं, इसलिए वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की डीपीसी भी पुनरीक्षण के दायरे में आ सकती है। इससे शिक्षा विभाग को पूरी पदोन्नति प्रक्रिया को दोबारा व्यवस्थित करना पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार इस आदेश से उन व्याख्याताओं को राहत मिल सकती है, जो वरिष्ठ होने के बावजूद संशोधित संयुक्त वरिष्ठता सूची में पीछे चले गए थे। रिव्यू डीपीसी के बाद ऐसे कार्मिकों को वरिष्ठता के अनुरूप प्रिंसिपल पदोन्नति का लाभ मिल सकता है। वहीं, प्रशासनिक वेटेज के आधार पर वरिष्ठता में ऊपर आए हेडमास्टर्स की रैंकिंग में बदलाव संभव है, जिससे उनकी आगामी पदोन्नतियां भी प्रभावित हो सकती हैं। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है। विभाग को अब वरिष्ठता सूची, पूर्व डीपीसी और आगामी पदोन्नति प्रक्रिया की गहन समीक्षा करनी होगी, ताकि पदोन्नति में नियमों और वास्तविक वरिष्ठता का सही अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

July 10, 2026

राजस्थान न्यूज़: राजस्थान में UCC पर जनसुनवाई शुरू, धर्मगुरुओं ने रखे सुझाव; लिव-इन संबंधों पर सख्त कानून की मांग

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान में समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रस्तावित कानून के मसौदे को व्यावहारिक, सर्वसमावेशी और जन-भावनाओं के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को जयपुर कलेक्ट्रेट सभागार में दो दिवसीय जयपुर संभाग स्तरीय जनसुनवाई शुरू हुई। जनसुनवाई में आमजन, विभिन्न धार्मिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों से सुझाव लिए जा रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से गठित सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता वाली समिति इन सुझावों का अध्ययन कर समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करेगी और अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। जनसुनवाई के दौरान अलग-अलग धर्मों के धर्मगुरुओं और प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विचार रखे। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने मुस्लिम पर्सनल लॉ का हवाला देते हुए धार्मिक रीति-रिवाजों और मान्यताओं से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करने की मांग की। वहीं, हिंदू समाज के धर्मगुरुओं ने सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने का समर्थन किया। लिव-इन रिलेशनशिप पर कड़े प्रावधानों की मांग बैठक के दौरान लगभग सभी धर्मगुरुओं ने लिव-इन संबंधों को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि ऐसे संबंध सामाजिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। उन्होंने मांग की कि लिव-इन संबंधों में विवाद की स्थिति में महिलाओं और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए स्पष्ट और मजबूत कानूनी प्रावधान किए जाएं। धर्मगुरुओं और सामाजिक प्रतिनिधियों ने लिव-इन संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण करने, संबंधित पक्षों के अधिकार और दायित्व तय करने तथा महिला और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे सुझाव भी समिति के सामने रखे। ऑनलाइन भी भेजे जा सकेंगे सुझाव समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि दो दिवसीय जनसुनवाई के माध्यम से विभिन्न वर्गों से सुझाव लिए जा रहे हैं। इसके साथ ही आमजन ऑनलाइन माध्यम से भी अपने सुझाव भेज सकते हैं। समिति प्राप्त सुझावों का अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसे राज्य सरकार को सौंपा जाएगा। राज्य सरकार इस रिपोर्ट और सुझावों के आधार पर समान नागरिक संहिता के प्रस्तावित मसौदे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। इस जनसुनवाई को राजस्थान में UCC को लेकर जनमत, सामाजिक दृष्टिकोण और कानूनी व्यवहार्यता समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

July 10, 2026

राजस्थान न्यूज़: नीरजा मोदी स्कूल में शिक्षक योग्यता पर गंभीर सवाल, हाईकोर्ट ने CBSE को निरीक्षण रिपोर्ट व शो-कॉज नोटिस देने के निर्देश दिए

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। नीरजा मोदी स्कूल प्रकरण अब केवल एक छात्रा की मृत्यु के मामले तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि विद्यालय की शिक्षक नियुक्तियों, शिक्षकों की योग्यता, स्टाफिंग पारदर्शिता और नियामकीय अनुपालन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध CBSE निरीक्षण अभिलेखों और न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर दावा किया गया है कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 के बीच विद्यालय में शिक्षकों की संख्या में बड़ा बदलाव दर्ज हुआ, लेकिन इसका संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया। दस्तावेजों के अनुसार निरीक्षण के दौरान कई शिक्षकों के नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक योग्यता संबंधी अभिलेख भी उपलब्ध नहीं कराए गए। इससे विद्यालय की प्रशासनिक पारदर्शिता और नियामकीय अनुपालन को लेकर प्रश्न उठे हैं। दावे के अनुसार वर्ष 2024-26 के दौरान नियुक्त 102 नए शिक्षकों में केवल 17 शिक्षक ही निर्धारित योग्यता के अनुरूप पाए गए, जबकि 85 शिक्षक, यानी लगभग 83 प्रतिशत, नॉन-कंप्लायंस श्रेणी में बताए गए हैं। प्राथमिक शिक्षक यानी PRT श्रेणी में 52 में से सभी 52 शिक्षकों के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होने का दावा किया गया है। वहीं, वर्तमान में कार्यरत 151 शिक्षकों में से 115 शिक्षकों, यानी लगभग 76 प्रतिशत, की योग्यता अनुपालन को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। हाईकोर्ट ने CBSE को दिए निर्देश इस मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय ने 25 मई 2026 को पारित आदेश में CBSE को निर्देश दिया कि वह निरीक्षण रिपोर्ट और शो-कॉज नोटिस की प्रति सात दिनों के भीतर याचिकाकर्ता विद्यालय को उपलब्ध कराए। न्यायालय ने विद्यालय को 21 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने का अवसर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। संयुक्त अभिभावक संघ ने उठाए सवाल संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि यदि इतने बड़े स्तर पर शिक्षक योग्यता, नियुक्ति प्रक्रिया और स्टाफिंग से जुड़े सवाल सामने आ रहे हैं, तो यह केवल प्रशासनिक अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि अभिभावकों के विश्वास और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि यदि निरीक्षण में सामने आए तथ्यों की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों, स्कूल प्रबंधन और जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। संघ ने पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की है। दिवंगत छात्रा के पिता ने की निष्पक्ष जांच की मांग दिवंगत छात्रा अमायरा के पिता विजय मीणा ने कहा कि बेटी के साथ हुई घटना के बाद लगातार सामने आ रहे तथ्य बेहद पीड़ादायक हैं। उन्होंने कहा कि यदि विद्यालय में शिक्षक नियुक्ति, योग्यता, स्टाफिंग और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका परिवार केवल अमायरा के लिए नहीं, बल्कि हर बच्चे की सुरक्षा, जवाबदेही और न्याय के लिए यह लड़ाई लड़ रहा है। संघ ने स्वतंत्र जांच और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की संयुक्त अभिभावक संघ ने राज्य सरकार, CBSE और शिक्षा विभाग से मांग की है कि नीरजा मोदी स्कूल प्रकरण में शिक्षक योग्यता, स्टाफिंग, बाल सुरक्षा व्यवस्था और सभी नियामकीय मानकों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। संघ ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की है, ताकि अभिभावकों का शिक्षा व्यवस्था पर विश्वास बना रहे। 1200 से अधिक विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने का दावा संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने दावा किया कि अमायरा प्रकरण के बाद विद्यालय प्रबंधन की कार्यशैली, बच्चों की सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर अभिभावकों में चिंता बढ़ी है। उनके अनुसार घटना के समय विद्यालय में लगभग 5500 विद्यार्थियों के अध्ययनरत होने का दावा किया जाता था, जबकि वर्तमान में यह संख्या घटकर लगभग 4300 रह गई है।

July 10, 2026

राजस्थान न्यूज़: वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री संजय शर्मा के नाम से फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, निवेश के नाम पर ठगी की कोशिश

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान के वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री संजय शर्मा के नाम और फोटो का दुरुपयोग कर सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाए जाने का मामला सामने आया है। इस फर्जी अकाउंट के जरिए लोगों को संदेश भेजकर अलग-अलग ग्रुपों, निवेश योजनाओं और अन्य गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री संजय शर्मा ने स्वयं सोशल मीडिया के माध्यम से आमजन को सतर्क किया। उन्होंने कहा कि उनके नाम और फोटो का दुरुपयोग कर एक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट संचालित किया जा रहा है। यह अकाउंट लोगों को मैसेज भेजकर विभिन्न ग्रुपों, निवेश योजनाओं और अन्य गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। फर्जी अकाउंट से कोई संबंध नहीं: संजय शर्मा वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री संजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि इस फर्जी अकाउंट से उनका किसी भी प्रकार का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे किसी भी संदेश, लिंक, निवेश संबंधी प्रस्ताव या वित्तीय लेनदेन के अनुरोध पर भरोसा न करें। उन्होंने आमजन को आगाह करते हुए कहा कि बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, आधार नंबर या अन्य व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या अकाउंट के साथ साझा नहीं की जानी चाहिए। ऐसे मामलों में थोड़ी सी असावधानी भी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। फर्जी अकाउंट को रिपोर्ट करने की अपील वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री संजय शर्माने लोगों से अनुरोध किया कि यदि उनके नाम से संचालित कोई फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट दिखाई दे, तो उसे तत्काल संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करें। इससे साइबर ठगों के खिलाफ कार्रवाई में मदद मिलेगी और अन्य लोगों को ठगी का शिकार होने से बचाया जा सकेगा। साइबर ठगी के नए तरीके अपना रहे अपराधी वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री संजय शर्मा ने कहा कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध प्रोफाइल, लिंक, ग्रुप या निवेश योजना पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। प्रदेश में इन दिनों तबादलों का दौर चल रहा है। ऐसे समय में साइबर ठग मंत्री, अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम का दुरुपयोग कर लोगों से संपर्क साधने और ठगी करने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में आमजन को सोशल मीडिया पर मिलने वाले संदेशों और वित्तीय प्रस्तावों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। जानकारी के अनुसार मंत्री के नाम से ठगी की कोशिश करने वाले फर्जी अकाउंट को लेकर संबंधित स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है।

July 9, 2026

राजस्थान न्यूज़: राजस्थान कांग्रेस संगठन में जल्द बदलाव की सुगबुगाहट, कई प्रदेश पदाधिकारियों की जगह युवा चेहरों को मिल सकता है मौका

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान कांग्रेस संगठन में जल्द बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की प्रदेश संगठन पदाधिकारियों की टीम में आने वाले दिनों में फेरबदल होने के संकेत मिल रहे हैं। चर्चा है कि संगठन में सक्रियता, दोहरी जिम्मेदारियों और आगामी चुनावी तैयारियों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश पदाधिकारियों की नई टीम तैयार की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस प्रदेश पदाधिकारी रहते हुए जिलाध्यक्ष या संगठन में अन्य पदों पर नियुक्त हो चुके करीब एक दर्जन नेताओं को वर्तमान प्रदेश पदाधिकारी पद से मुक्त किया जा सकता है। इसके अलावा तीन से चार निष्क्रिय प्रदेश पदाधिकारियों की जगह नए और युवा नेताओं को मौका दिए जाने की चर्चा है। संगठनात्मक बदलाव में मौजूदा दो प्रदेश उपाध्यक्षों और आधा दर्जन से अधिक प्रदेश सचिवों को पद से मुक्त किए जाने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस राष्ट्रीय संगठन नेतृत्व राजस्थान में पार्टी को आगामी नगर निकाय और पंचायत राज चुनावों से पहले अधिक सक्रिय और संतुलित रूप देना चाहता है। सूत्रों के मुताबिक, बदलाव में ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी जा सकती है, जो संगठनात्मक रूप से सक्रिय हों और क्षेत्रीय स्तर पर पार्टी को मजबूत करने की क्षमता रखते हों। युवा चेहरों, सामाजिक संतुलन और चुनावी उपयोगिता को भी नई नियुक्तियों में महत्व दिए जाने की संभावना है। इधर, एआईसीसी के उच्च स्तर पर यह भी संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को फिलहाल उनके पद पर यथावत रखा जा सकता है। आगामी नगर निकाय और पंचायत राज चुनावों तक डोटासरा के नेतृत्व में ही प्रदेश संगठन को आगे बढ़ाए जाने की संभावना जताई जा रही है। राजस्थान में आने वाले समय में स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनाव कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ऐसे में पार्टी संगठन में बदलाव को चुनावी तैयारी और जमीनी सक्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, संगठनात्मक बदलाव को लेकर अभी तक कांग्रेस की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अब सभी की नजर कांग्रेस राष्ट्रीय नेतृत्व और प्रदेश संगठन की आगामी सूची पर टिकी है। नई नियुक्तियों के बाद यह स्पष्ट होगा कि पार्टी किस क्षेत्र, वर्ग और नेतृत्व समूह को संगठन में अधिक महत्व देती है।

July 9, 2026

राजस्थान न्यूज़: करौली में पांचना बांध विवाद से जुड़ा गतिरोध खत्म, संघर्ष समिति ने किया धरना और चक्का जाम समाप्त

राजस्थान न्यूज़: करौली। जिले में पिछले कुछ दिनों से पांचना बांध के मुद्दे और सामाजिक तनाव को लेकर बना गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। पांचना बांध संघर्ष समिति ने सरकार और जिला प्रशासन के सकारात्मक रुख तथा त्वरित कार्रवाई के बाद अपने आंदोलन, गुड़ला में चल रहे धरने और चक्काजाम को पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा कर दी है। संघर्ष समिति के अध्यक्ष अशोक सिंह धाभाई ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए आंदोलन में एकजुटता दिखाने और सहयोग करने वाले क्षेत्रवासियों व समाज के लोगों का आभार व्यक्त किया। धरना समाप्त होने की घोषणा के बाद फिलहाल करौली जिले में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और सभी मार्गों पर आवागमन सुचारू कर दिया गया है। सरकार और प्रशासन के सामने रखी थीं मांगें संघर्ष समिति के अध्यक्ष अशोक सिंह धाभाई ने बताया कि समिति ने क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने को लेकर सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने प्रमुख मांगें रखी थीं। इनमें सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से अभद्र, अपमानजनक और अमर्यादित टिप्पणियां करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग प्रमुख थी। समिति का कहना था कि ऐसे मामलों में तुरंत मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए, ताकि भविष्य में सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास न हो। इसके अलावा खंडीप, कुसाय सहित विभिन्न स्थानों पर अवरुद्ध मार्गों को तुरंत खुलवाने की मांग भी रखी गई थी। संघर्ष समिति ने इन मांगों को लेकर सरकार और जिला प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद समाप्त हुआ आंदोलन समिति के अनुसार, प्रशासन और पुलिस ने तय समय सीमा के भीतर संवेदनशील स्थानों पर लगे जाम हटवाए और यातायात व्यवस्था को बहाल कराया। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर वैमनस्य फैलाने और अमर्यादित टिप्पणियां करने के आरोपों से जुड़े मामलों में पुलिस ने मुकदमे दर्ज किए हैं। प्रशासन ने संघर्ष समिति को आश्वस्त किया है कि चिन्हित आरोपियों के खिलाफ विधि अनुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसी आश्वासन और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद संघर्ष समिति ने आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया। इंटरनेट सेवाएं जल्द बहाल होने की उम्मीद पांचना बांध विवाद और संभावित तनाव को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर करौली जिले के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी थीं। प्रशासन का उद्देश्य अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोकना था। अब धरना और चक्काजाम समाप्त होने तथा स्थिति सामान्य होने के बाद माना जा रहा है कि प्रशासन जल्द ही इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने पर निर्णय ले सकता है। इंटरनेट बंद होने से आमजन, विद्यार्थियों और व्यवसाय से जुड़े लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

July 9, 2026

राजस्थान न्यूज़: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्व अर्जन विभागों की समीक्षा की, लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति के निर्देश

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास पर राजस्व अर्जन से संबंधित विभागों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के राजस्व लक्ष्यों, कर संग्रहण की स्थिति और कर चोरी के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजस्व लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की जाए और राजस्व संग्रहण में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरती जाए। बैठक में कर चोरी रोकने के लिए प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई, तकनीक आधारित निगरानी और विभागीय समन्वय को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने संबंधित विभागों को लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण, राजस्व रिसाव रोकने और लक्ष्य आधारित कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ने के निर्देश दिए। बैठक में विभागवार प्रगति की समीक्षा की गई और आगामी वित्तीय वर्ष के लिए राजस्व अर्जन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

July 9, 2026

राजस्थान न्यूज़: राजस्थान में यूसीसी लागू करने की दिशा में बड़ा कदम, 10 और 11 जुलाई को जयपुर में जनसुनवाई

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने अगला कदम बढ़ा दिया है। कानून के मसौदे को व्यावहारिक, संतुलित और सर्वसमावेशी बनाने के लिए 10 और 11 जुलाई 2026 को जयपुर के कलेक्टर सभागार में दो दिवसीय संभाग स्तरीय जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में गठित समिति आमजन, प्रबुद्धजनों, विभिन्न संगठनों और समाज के अलग-अलग वर्गों से सुझाव लेगी। संभागीय आयुक्त वी. सरवण कुमार ने जिला प्रशासन को जनसुनवाई के सफल आयोजन और व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। दो दिन चलेगी जनसुनवाई 10 जुलाई को सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, नगर निकाय अध्यक्षों, विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए जाएंगे। इसी दिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक जयपुर संभाग के विभिन्न जिलों से आने वाले आम नागरिकों के लिए जनसुनवाई होगी। इसकी अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह करेंगे। 11 जुलाई को सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक जयपुर जिले के शेष नागरिकों के लिए जनसुनवाई रखी गई है। इस दौरान समिति सदस्य डॉ. शुचि चौहान की मौजूदगी में आमजन से सुझाव लिए जाएंगे। इन विषयों को UCC के दायरे में रखने पर विचार प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के दायरे में विवाह, विवाह विच्छेद यानी तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों को शामिल किए जाने पर विचार किया जा रहा है। समिति इन विषयों पर अलग-अलग वर्गों की राय लेकर मसौदे को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ेगी। सरकार ने सुझावों के लिए ucc.rajasthan.gov.in पोर्टल भी शुरू किया है। इस पोर्टल पर नागरिक सवालों के जवाब देकर अपने सुझाव दर्ज करा सकते हैं और संबंधित दस्तावेज भी अपलोड कर सकते हैं। इन सवालों पर मांगी जा रही राय जनसुनवाई और पोर्टल के माध्यम से नागरिकों से यह राय मांगी जा रही है कि क्या वे संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता के प्रावधान से परिचित हैं और क्या वे राजस्थान में यूसीसी लागू करने के पक्ष में हैं। इसके अलावा यह भी पूछा जा रहा है कि क्या यूसीसी को संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किए बिना लागू किया जा सकता है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत और लिव-इन संबंधों को यूसीसी में शामिल करने को लेकर भी आमजन से सुझाव मांगे जा रहे हैं। समिति यह भी जानना चाहती है कि क्या सभी समुदायों के लिए विवाह और तलाक के समान नियम होने चाहिए, क्या तलाक का अनिवार्य पंजीकरण होना चाहिए और क्या भरण-पोषण के लिए एक समान कानून बनाया जाना चाहिए। महिलाओं और पुरुषों को समान संपत्ति अधिकार देने, लिव-इन संबंधों के अनिवार्य पंजीकरण, लिव-इन संबंधों से जुड़ी महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, बहुविवाह के प्रभाव और सामाजिक कुरीतियों तथा लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने में यूसीसी की भूमिका पर भी राय ली जाएगी। सरकार का उद्देश्य विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों के आधार पर ऐसा मसौदा तैयार करना है, जो सामाजिक संतुलन, संवैधानिक मूल्यों और समान अधिकारों की भावना को ध्यान में रखकर बनाया जा सके।

July 9, 2026

राजस्थान न्यूज़: वंशिका गर्ग मामले में न्याय की मांग तेज, परिवार ने जांच पर उठाए सवाल, 48 घंटे का अल्टीमेटम,परिजनों ने आरोप लगाया कि वंशिका मामले की जांच को जानबूझकर धीमा किया जा रहा है

राजस्थान न्यूज़: जयपुर। प्रताप नगर क्षेत्र से 5 जून को लापता हुई और 6 जून को मृत अवस्था में मिली 15 वर्षीय वंशिका गर्ग के मामले में न्याय की मांग तेज हो गई है। गुरुवार को पिंकसिटी प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में वंशिका के परिजनों ने पुलिस जांच और कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। पत्रकार वार्ता में वंशिका के पिता मनीष गर्ग, माता संतोष गर्ग, भाई वरुण गर्ग, एडवोकेट पीयूष अग्रवाल, आशीष अग्रवाल, मोहित गौतम, संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल, प्रदेश प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी अभिषेक जैन ‘बिट्टू’ सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। परिजनों ने आरोप लगाया कि वंशिका मामले की जांच को जानबूझकर धीमा किया जा रहा है और वास्तविक आरोपियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। परिवार ने महत्वपूर्ण साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई। परिजनों का कहना है कि घटना को एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक न तो जांच की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की गई है और न ही मौत के कारणों को लेकर संतोषजनक जानकारी दी गई है। 48 घंटे का अल्टीमेटम, कार्रवाई नहीं हुई तो धरना परिजनों ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि इस अवधि में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और जांच की संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई, तो परिवार अपने शुभचिंतकों के साथ भाजपा प्रदेश मुख्यालय पर लोकतांत्रिक तरीके से धरना देगा। परिवार ने कहा कि ऐसी स्थिति में पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के समय न्याय का भरोसा दिलाने वाले कई जनप्रतिनिधि अब फोन तक नहीं उठा रहे हैं। परिवार का कहना है कि उन्हें अब भी न्याय का इंतजार है और वे अपनी बेटी को न्याय दिलाने तक संघर्ष जारी रखेंगे। जन्मदिन पर भावुक हुआ परिवार गुरुवार को वंशिका का जन्मदिन था। इस मौके पर परिवार भावुक नजर आया। परिजनों ने कहा कि हर बेटी का सपना होता है कि वह अपना जन्मदिन अपने परिवार और अपनों के साथ खुशियों में मनाए, लेकिन उनकी बेटी आज इस दुनिया में नहीं है। परिवार ने कहा कि वंशिका की आत्मा आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रही है। परिजनों ने संकल्प दोहराया कि जब तक वंशिका को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। पीड़ित परिवार के मोबाइल जब्त करने पर सवाल वंशिका के पिता मनीष गर्ग ने कहा कि पुलिस ने जांच के नाम पर पीड़ित परिवार के मोबाइल फोन करीब एक माह पहले जब्त किए, लेकिन अब तक यह नहीं बताया गया कि उनसे क्या साक्ष्य मिले। उन्होंने सवाल उठाया कि पीड़ित परिवार के मोबाइल ही क्यों जब्त किए गए, जबकि कथित आरोपियों के मोबाइल जब्त कर जांच आगे बढ़ाई जानी चाहिए थी। मनीष गर्ग ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में पुलिस पीड़ित परिवार को परेशान कर रही है और वास्तविक आरोपियों पर कार्रवाई नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि आरयूएचएस अस्पताल के बाहर चले धरने के दौरान पुलिस और प्रशासन ने दो दिन में कार्रवाई तथा आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया था, लेकिन एक माह बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई और जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई।

July 9, 2026

राजस्थान न्यूज़: राजस्थान में एक ही नंबर पर दौड़ती मिलीं 3 बसें, चूरू और जयपुर में रालसा अभियान में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

राजस्थान न्यूज़: जयपुर/चूरू। राजस्थान में बसों के संचालन में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। रालसा के एक माह के विशेष निरीक्षण एवं प्रवर्तन अभियान के दौरान चूरू में एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर पर तीन बसें संचालित होती मिलीं। इनमें एक बस चूरू रूट पर, दूसरी झुंझुनूं रूट पर और तीसरी चूरू के एक स्कूल में चलाई जा रही थी। प्रदेश में लगातार हो रहे बस हादसों के बाद राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से लग्जरी बसों, स्लीपर बसों और यात्री वाहनों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत जयपुर और चूरू में हुई कार्रवाई में परिवहन विभाग ने 4 बसों को जब्त किया है। चूरू में एक ही नंबर पर तीन बसें चूरू में परिवहन निरीक्षक रॉबिन सिंह की जांच में बस नंबर RJ 18 PB 1433 पर तीन अलग-अलग बसों का संचालन होना पाया गया। जांच में सामने आया कि तीनों बसों के चेसिस नंबर वाले हिस्से को काटकर उन पर दोबारा कथित रूप से फर्जी पंचिंग की गई थी। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि ये बसें या तो कबाड़ से खरीदी गई थीं या फिर चोरी के वाहनों को मॉडिफाई कर सड़क पर उतारा गया था। परिवहन विभाग के अनुसार, जब्त की गई तीनों बसों में से कोई भी बस RJ 18 PB 1433 नंबर की मूल बस नहीं निकली। ऐसे में जिस बस के दस्तावेजों और रजिस्ट्रेशन नंबर पर यह पूरा संचालन किया जा रहा था, उस असली बस का पता लगाने की कार्रवाई की जा रही है। तीनों बसें अलग-अलग ट्रैवल्स एजेंसियों के नाम पर संचालित की जा रही थीं। परिवहन विभाग ने इन्हें अलग-अलग रूटों से जब्त कर चूरू डीटीओ कार्यालय में सीज कर दिया है। मामले में वाहन मालिक सतवीर सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जयपुर में नागालैंड रजिस्ट्रेशन की बस पर एमपी नंबर प्लेट जयपुर में भी जांच के दौरान विजय ट्रैवल्स की एक बस संदिग्ध पाई गई। बस पर मध्य प्रदेश की नंबर प्लेट लगी हुई थी, लेकिन जांच में उसका मूल रजिस्ट्रेशन नागालैंड का निकला। दस्तावेजों और वाहन की पहचान में गड़बड़ी मिलने के बाद बस को जब्त कर जांच शुरू कर दी गई है। इस तरह के मामलों ने यात्री सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही नंबर पर कई बसों का संचालन न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि किसी दुर्घटना की स्थिति में वाहन की वास्तविक पहचान और जिम्मेदारी तय करने में भी बड़ी बाधा बन सकता है। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के प्रावधान परिवहन विभाग के अनुसार, ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। संबंधित प्रावधानों के तहत एक साल तक की जेल और 15 से 20 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। रालसा के विशेष अभियान के तहत अब प्रदेशभर में बसों की जांच और तेज होने की संभावना है। परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और संबंधित एजेंसियां दस्तावेजों, चेसिस नंबर, फिटनेस, परमिट और नंबर प्लेट की गहन जांच कर रही हैं, ताकि अवैध और असुरक्षित वाहनों को सड़क से हटाया जा सके।

July 8, 2026

राजस्थान न्यूज़: 11 करोड़ से बना श्री धरणीधर मंदिर, अब एक करोड़ की लागत से बनेगा राष्ट्रीय उद्यान

राजस्थान न्यूज़: टोंक। मांडव ऋषि की तपोभूमि और मिनी पुष्कर के रूप में प्रसिद्ध मांडकला-नगरफोर्ट सरोवर तट पर स्थित श्री धरणीधर मंदिर राष्ट्रीय स्मारक का पुनर्निर्माण कार्य लगभग 11 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण हो चुका है। धाकड़ समाज की एकता, अखंडता और आस्था के प्रतीक आदि पूर्वज आराध्य देव श्री धरणीधर मंदिर परिसर में अब एक करोड़ रुपये की लागत से “श्री धरणीधर राष्ट्रीय उद्यान” का निर्माण और सौंदर्यकरण किया जाएगा। श्री धरणीधर राष्ट्रीय उद्यान निर्माण समिति मांडकला-नगरफोर्ट के प्रबंधक प्रहलाद धाकड़ सेवक ने बताया कि यह दिव्य, अलौकिक और आकर्षक उद्यान अखिल भारतीय श्री धाकड़ महासभा भारतवर्ष के तत्वावधान में विकसित किया जाएगा। उद्यान का निर्माण कार्य लगभग दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रहलाद धाकड़ ने बताया कि उद्यान को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से विशेष रूप से आकर्षक बनाया जाएगा। इसमें चार धाम यात्रा की झांकी, प्राकृतिक झीलें, झूले, फव्वारे, विशेष लाइटिंग और धार्मिक व आध्यात्मिक स्टैच्यू स्थापित किए जाएंगे। रात्रि के समय आकर्षक रोशनी की व्यवस्था उद्यान की सुंदरता को और बढ़ाएगी। उद्यान परिसर को खुशबूदार फूलों, लताओं और हरित वातावरण से सजाया जाएगा। इसके साथ ही किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए धाकड़ समाज के रूपाजी और कृपाजी का स्मारक भी यहां बनाया जाएगा, जो समाज की गौरवगाथा और बलिदान की याद दिलाएगा। उन्होंने बताया कि इस उद्यान का निर्माण भारतभर के स्वजातीय भामाशाहों, प्रतिष्ठित व्यवसाय बंधुओं और अखिल भारतीय धाकड़ महासभा के राष्ट्रीय, प्रांतीय, जिला और तहसील स्तरीय पदाधिकारियों के सहयोग से किया जाएगा। प्रबंधक प्रहलाद धाकड़ ने कहा कि श्री धरणीधर राष्ट्रीय उद्यान बनने के बाद यह स्थल केवल धाकड़ समाज ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए आस्था, संस्कृति और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा। मंदिर और उद्यान के विकसित होने से मांडकला-नगरफोर्ट क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है।