For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 166354827
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने लवकुश उद्यान से आनासागर पुलिस चौकी तक सड़क कार्य का किया शुभारम्भ |  Ajmer Breaking News: अजमेर में 12 अक्टूबर को विश्व हिंदू परिषद दुर्गा वाहिनी आयाम का शौर्य शक्ति संचलन |  Ajmer Breaking News: अजमेर के गेगल थाना अंतर्गत गुढ़ा गांव में फंदे पर लटका मिला युवक का शव, हत्या का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने किया धरना प्रदर्शन |  Ajmer Breaking News: ​राजनीतिक पार्टी के खाते का इस्तेमाल कर लाखों की साइबर ठगी, आरोपी गिरफ्तार!   |  Ajmer Breaking News: अजमेर में शेयर ट्रांसफर के नाम पर साइबर ठगी, 300 शेयर बेचकर ₹2.73 लाख की रकम हड़पने का आरोप |  Ajmer Breaking News: सुभाष उद्यान के जीर्णोद्धार और सफाई व्यवस्था को लेकर महापौर ने किया निरीक्षण, पार्क में खाद्य पदार्थ ले जाने पर लगाई रोक,   |  Ajmer Breaking News: अजमेर: रेलवे कर्मचारी अपहरण-फिरौती मामले में बड़ी कार्रवाई, मुख्य आरोपी समेत तीन गिरफ्तार |  Ajmer Breaking News: PM मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार से की बात: बोले- पूरा देश आपके लिए प्रार्थना कर रहा; पायलट ने कहा- संकट में पढ़ रहा था हनुमान चालीसा |  Ajmer Breaking News: मुख्यमंत्री का पंचायतीराज जनप्रतिनिधियों से संवाद, गांव के व्यक्ति की उम्मीद का पहला केन्द्र होता है सरपंच, वन स्टेट-वन इलेक्शन का संकल्प हो रहा पूरा |  Ajmer Breaking News: अजमेर रेल मंडल में गांधी जयंती एवं स्वच्छता पखवाड़ा के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित | 

अजमेर न्यूज़:  संतो के चातुर्मास में मिल रहा प्रवचनो का लाभ

Post Views 51

July 29, 2021

पिपलिया बाजार स्थित श्री जैन स्थानक में

 संतो के चातुर्मास में मिल रहा प्रवचनो का लाभ​​​​​​​ पिपलिया बाजार स्थित श्री जैन स्थानक में धर्म सभा को संबोधित करते हुए–उपप्रवर्तिनी श्री राजमती जी म.सा.ने फरमाया कर्मों का भुगतान करते समय विद्या,धन,परिवार कोई सहयोगी नहीं बनता। व्यक्ति स्वयं कर्त्ता और स्वयं भोक्ता होता है। राजा हो या रंक सभी को जैसे कर्म किए वैसे फल अवश्य नसीब होते है। अशुभ कर्मों के उदय से गरीबी, तन का रोगी, सुखों का वियोगी होता है। अशुभ कर्मों को समभाव पूर्वक सहन करने से ही कर्मों की निर्जरा होती है तथा व्यक्ति आत्मिक सुख को प्राप्त करता है।डॉ.साध्वी राज रश्मि जी ने कहा सदधर्म की प्राप्ति के लिए इंद्रियों की पूर्णता, अविकल सबल शरीर होना आवश्यक है।चारित्र धर्म की प्राप्ति के लिए, अष्ट प्रवचन माताओं की आराधना के लिए इंद्रियों का सदुपयोग करना चाहिए। डॉ.साध्वी राजऋद्धि जी ने सुख विपाक सूत्र का विश्लेषण करते हुए स्वप्न की महत्ता,कालसर्प योग का कारण,शकुन विचार कितना उपयोगी पर विस्तृत जानकारी दी। संघ मंत्री पदम चंद  बंब ने बताया कि–पूज्या महासती जी महाराज के सान्निध्य में नियमित प्रार्थना, प्रवचन सुचारू रूप से गतिशील है। संघ में तपस्या का क्रम भी चल रहा है, और दर्शनार्थियों का आवागमन भी जारी है।


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved