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अंदाजे बयां: सांस चाहे आख़िरी हो ज़िंदगी की बात कर, इन अंधेरों से ना घबरा रौशनी की बात कर.

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February 25, 2021

मंदिरों और मस्ज़िदों की पैरवी में मत उलझ, दर्द के एहसास से जुड़, आदमी की बात कर.

सांस चाहे आख़िरी हो ज़िंदगी की बात कर,
इन अंधेरों से ना घबरा रौशनी की बात कर.

मंदिरों और मस्ज़िदों की पैरवी में मत उलझ,
दर्द के एहसास से जुड़, आदमी की बात कर.

धूप का लम्बा सफ़र भी देखना कट जाएगा,
हमसफ़र परछाईयों से चांदनी की बात कर.

बादलों पर कर यकीं वे लौट कर आ जायेंगे,
घाट सूखे देख मत, बहती नदी की बात कर.

पेट कब किसका भरा गुज़रे हुए इतिहास से,
जी रहा तू जिस सदी में, उस सदी की बात कर.

फिर महाभारत बचा उन कौरवों की चाल से,
फिर नपुंसक पांडवों से, द्रौपदी की बात कर.


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