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अंदाजे बयां: ख़ुश होकर जब दिल रोता है

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January 17, 2021

ये दिल तब ख़ुसरो होता है

ख़ुश होकर जब दिल रोता है,

ये दिल तब ख़ुसरो होता है।




जंगल हूँ सो जान गया हूँ,

पँछी कब दिन में सोता है।




रटता है जो नाम एक ही,

मुझमें वो रट्टू तोता है।




मेरा दुख आँखों से मिलकर,

झील में सिंघाड़े बोता है।




इक अहसास कबाड़ी जैसा,

सब ख़रीद कर ख़ुश होता है।



सुख मेरा है धोबी जैसा,

घाटों पर कपड़े धोता है।



मुझमें क्यों होता है अक्सर,

रात में बैठ के दिन रोता है।



सुरेन्द्र चतुर्वेदी


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