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January 12, 2021
सहराओं से खोई जवानी माँगेगा,
सागर फिर रातें नूरानी माँगेगा।
बारिश के मौसम को ज़रा गुजरने दो,
तालाबों से दरिया पानी माँगेगा।
मेरे सर दस्तार बंधी है जानता हूँ,
मुझसे कुनबा अब क़ुरबानी माँगेगा।
फिर से ख़बर उड़ी है मेरे मरने की,
फिर कोई किरदार कहानी माँगेगा।
लौट रहा हूँ अपने घर मैं मुद्दत बाद,
घर मेरा तस्वीर पुरानी माँगेगा।
सिर्फ़ कसर है तुझसे मिलने की मौला,
ये फ़क़ीर तुझसे सुल्तानी माँगेगा।
लौट के जब आएंगी बहारें आँगन में,
दिन का राजा रात की रानी माँगेगा।
सुरेन्द्र चतुर्वेदी