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क़लमकार: क्या अजमेर विकास प्राधिकरण की ईमानदार और कड़क अधिकारी रेणु जयपाल भरेंगी ख़ाली पड़ा सरकारी खज़ाना

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January 10, 2021

क्या भू-माफ़ियाओं के क़ब्ज़े से मुक्त होंगी प्राधिकरण की बेशक़ीमती ज़मीनें

क्या अजमेर विकास प्राधिकरण की ईमानदार और कड़क अधिकारी रेणु जयपाल भरेंगी ख़ाली पड़ा सरकारी खज़ाना




क्या भू-माफ़ियाओं के क़ब्ज़े से मुक्त होंगी प्राधिकरण की बेशक़ीमती ज़मीनें




क्या आनासागर झील को मिलेगा इंसाफ़




क्या स्मार्टसिटी सही मायने में हो पाएगी स्मार्ट




सुरेन्द्र चतुर्वेदी




अजमेर विकास प्राधिकरण अब करवट लेने लगा है । बरसों से घुटी हुई रफ़्तार सांस लेती नज़र आ रही है। एक ईमानदार अधिकारी किसी संस्थान में तय कर ले कि उसकी तनी हुई मुट्ठी बेईमानी के विरुद्ध कभी नहीं खुलेगी तो यही होता है ।भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे अजमेर विकास प्राधिकरण में रेणु जयपाल का जब से आयुक्त पद पर तबादला हुआ है प्राधिकरण में कुछ कर गुज़रने की ख़ुशबू स्वतः ही महकने लगी है ।ख़ाली पड़े ख़ज़ाने भरने लगे हैं। सरकारी ज़मीनों पर क़ब्ज़ा करने वाले बाहर के प्रभावशाली लोग और अंदर के विभीषण सतर्क हो गए हैं।




ऐसा नहीं कि रेणु जयपाल पहली ईमानदार अधिकारी हैं मगर उनका ईमानदार होना शहर को अब साफ़ साफ नज़र आने लगा है।




पहले गौरव अग्रवाल जैसे अधिकारी भी प्राधिकरण में आए।अपनी ईमानदार कार्यशैली से उन्होंने भी कुछ करना चाहा मगर अपनी मजबूत ईमानदारी के होते हुए ,लचर कार्यप्रणाली को लेकर वे वापस बिना कुछ किए धरे चले गए ।जो होना था नहीं हुआ। फाइलें सरकी तो सहीं मगर किशोर कुमार जी जैसे अधिकारियों और आदतन भ्रष्ट कर्मचारियों की वज़ह से अटकती रहीं।




इस बार रेणु जयपाल लेडी सिंघम की तरह अपनी कुशल कार्यशैली से अजमेर विकास प्राधिकरण को जीवंत कर रही हैं।




मैं व्यक्ति पूजा में यक़ीन नहीं रखता, मगर जब कहीं कोई ईमानदार व्यक्ति आक्रमण की मुद्रा में नज़र आता है तो मेरी क़लम उसकी वक़ालत में खड़ी नज़र आती है।





नगर परिषद में आयुक्त के पद पर काबिज़ रहीं प्रशासनिक अधिकारी चिन्मयी गोपाल हों या पुलिस कप्तान के पद पर रहे कुंवर राष्ट्रदीप सिंह मेरी क़लम ने हमेशा उनके सही फ़ैसलों का ताने सहकर भी साथ दिया। मेरे कई मित्रों को मेरा उनके साथ होना पसंद नहीं आया ।चिन्मयी गोपाल को मैंने कभी नहीं देखा । मिलना तो दूर उनसे कभी फोन पर भी बात नहीं हुई। कुंवर राष्ट्रदीप सिंह से भी कभी मैं व्यक्तिगत रुप से नहीं मिला। प्राधिकरण के गौरव अग्रवाल फाइलों की नोटशीट पर मेरे ब्लॉग पर कार्रवाई करते रहे मगर उन्होंने आज तक मेरी शक्ल नहीं देखी।





मित्रों!! इसे आप मेरी आत्म प्रशंसा कहें या आत्म शलागा पर हक़ीक़त यही है कि मैं कभी किसी अधिकारी के साथ तस्वीर खिंचवाने, उनके चेंबर में चाय की चुस्कियां लेने,उनकी साल गिरह पर पुष्प गुच्छ लेकर पहुंच जाने पर यक़ीन नहीं रखता। ना ही मुझे कभी ऐसी हरकत करने की ज़रूरत पड़ती है मगर जब कहीं कोई भी व्यक्ति मजबूत इरादों के साथ, भ्रष्टाचार के विरुद्ध खड़ा होता है तो मेरी क़लम ख़ामोशी के साथ उनके साथ स्वयं ही खड़ी हो जाती है।





इस बार अजमेर विकास प्राधिकरण की आयुक्त रेणु जयपाल के साथ मैं खड़ा हूँ।मेरी क़लम खड़ी है।मैंने उन्हें बचपन से बड़े होते देखा है ।छोटी बहन की तरह। वे कुशाग्र बुद्धि ,पक्का इरादा, दूरदर्शिता और संवेदनशीलता से जीने का हुनर रखती हैं ,इसलिए उनका कहीं भी होना मेरे लिए सम्माननीय होता है





इस ब्लॉग में कुछ सवालों के ज़रिए अजमेर विकास प्राधिकरण की ईमानदार और कड़क अधिकारी रेणु जयपाल को लेकर मैं दो टूक बात करना चाहूँगा।




क्या प्राधिकरण का ख़ाली पड़ा ख़ज़ाना फिर से भर पाएगा




क्या माफ़ियाओं के क़ब्ज़े से प्राधिकरण की बेशक़ीमती ज़मीनें मुक्त हो पाएंगी




क्या आनासागर झील को मिलेगा इंसाफ और स्मार्ट सिटी अजमेर बन सकेगी असल में स्मार्ट




नगर निगम प्रशासन की बन्द आंखों और अब तक प्राधिकरण प्रशासन की निष्क्रियता के चलते पूरा अजमेर शहर भूमाफियाओं के हत्थे चढ़ा हुआ है। परंतु अब प्राधिकरण में आयुक्त के पद पर नियुक्त ,अपनी बेबाक़ , दो टूक और ईमानदार छवि के लिए प्रसिद्ध श्रीमती रेणु जयपाल ने इन पर लगाम कसना शुरू कर दिया है।




एक पुलिस अधिकारी द्वारा प्राधिकरण की ज़मीन पर अपना रौब दिखाते हुए, सबकी आखो में धूल झोंक कर कायड़ क्षेत्र में ना सिर्फ़ क़ब्ज़ा कर मकान बना लिया गया बल्कि बैंक से लोन किसी और ज़मीन पर लिया और मकान जानबूझकर पास पड़ी सरकारी ज़मीन पर बना लिया। इसकी जानकारी रेणु जयपाल को मिलते ही त्वरित कार्यवाही प्रारंभ की गई ।थानेदार जी को नोटिस जारी कर दिए गए और लगता है कि प्राधिकरण की इस ज़मीन को बहुत जल्द कब्जामुक्त करवा कर प्राधिकरण द्वारा अपने कब्जे में ले लिया जायेगा।





इसी प्रकार हाल ही में प्रचारित हुए पूर्व उपमहापौर संपत सांखला द्वारा किए गए सरकारी बेशकीमती ज़मीन में हुए गड़बड़झाले को भी लेकर रेणु जयपाल बहुत ज्यादा सक्रिय नज़र आ रही हैं। उन्होंने अपने मातहत अधिकारियों को हड़काकर इस ज़मीन के सरकारी होने की पुष्टि होते ही तुरंत अपने कब्जे में लेने के निर्देश दे दिए हैं।





वे बिना किसी की सलाह पर अपने स्तर पर ही जानकारी जुटा रही हैं कि प्राधिकरण की ज़मीन पर कहाँ- कहाँ , किस- किस भूमाफियाओं ने क़ब्ज़े कर रखे हैं और उन सरकारी ज़मीनों पर नगर निगम द्वारा अपना स्वामित्व नही होते हुए भी अप्रत्याशित रूप से आंख बन्द कर सुविधा शुल्क के जरिये नक्शे तक स्वीकृत किये जा चुके हैं। ये समस्त जानकारी एकत्र कर वे भूमाफियाओं के साथ -साथ इस गोरखधंधे में लिप्त कर्मचारियों और अधिकारियों के विरुद्ध भी विभागीय कार्यवाही को अंजाम देने का मानस बना चुकी हैं।उनके इरादों से घबराए कई भू-माफ़ियाओं ने तो उनके तबादले की जुगत बैठानी शुरू कर दी है।





इसी क्रम में मुझे याद आया कि ऎसी सलाह मैंने पूर्व आयुक्त श्री गौरव अग्रवाल को भी अपने ब्लॉग के ज़रिए दी थी और मुझे खुशी हुई थी कि उन्होंने फ़ाइलों पर मेरे ब्लॉग का हवाला देते हुए कार्यवाही प्रारंभ कर दी थी। मेरे बताए गए अतिक्रमण व दिए गए सुझावों को कार्यालय की नोट शीट पर ले लिया था। मुझे लगा था कि अब तुरंत कार्यवाही अंजाम में लाई जाएगी। पर मुझे दुख है दोस्तों !! कि हुआ कुछ भी नही !! वही ढाक के तीन पात रहे!!





गौरव जी चाहकर भी कुछ नही कर पाए और यहां से रुखसत हो गए।





अब मेरा रेणु जयपाल के साथ साथ निगम आयुक्त खुशाल यादव से भी आग्रह है कि वे समय की ज़रूरत को पहचानते हुए सक्रिय होकर प्राधिकरण प्रशासन व जिला प्रशासन से सामंजस्य बनाकर आनासागर भराव क्षेत्र में भूमाफियाओं द्वारा किये गए क़ब्ज़े भी चिह्नित करें।उन्हें हटाकर अजमेर की शान मानी जाने वाली आनासागर झील को अतिक्रमण मुक्त कर शहर के सौंदर्यीकरण में अपना योगदान दें।





गौरव पथ स्थित देवनारायण मंदिर के पास आनासागर झील में मिट्टी भरकर किये गए अतिक्रमण पर अतिक्रमणकारी द्वारा बस स्टैंड बनाकर बसें खड़ी की जा रही हैं और उनसे बेधड़क प्रति बस किराया तक वसूल किया जा रहा है। यहां पर बसों के निरंतर आवागमन से ये क्षेत्र दुर्घटनाओं का केन्द्र बना हुआ है। इस क्षेत्र का उन्हें व्यक्तिगत मुआयना करना चाहिए।





इसी प्रकार बधिर विद्यालय के सामने मुख्य सड़क पर भी कई कच्चे पक्के निर्माण हो चुके हैं और अभी भी जारी है। गौरव पथ पर ही रीजनल कॉलेज़ के सामने बनी नई चौपाटी के पहले आनासागर भराव क्षेत्र में भी कई अवैध निर्माण हो रखे हैं।




इन सभी पर कार्यवाही सभी विभागों के आपसी सामंजस्य से ही सम्भव हो सकती है। अगर निगम प्रशासन, प्राधिकरण प्रशासन, पुलिस प्रशासन, और जिला प्रशासन अपना दायित्व निभाने की ठान ले तो निश्चित रूप से स्मार्ट सिटी वास्तव में स्मार्ट बन सकती है।





मैने अपने पूर्व में लिखे एक ब्लॉग में कई व्यावसायिक निर्माण जो अभी शहर में निर्बाध रूप से चल रहे हैं और उनके सौदे भी करोड़ो में हो रहे हैं उनका विस्तार से जिक्र किया था। अगर इन सभी अतिक्रमणों पर कार्यवाही होती है तो निश्चित रूप से निगम के साथ साथ प्राधिकरण का भी ख़ज़ाना भर सकता है। भूमाफियाओं के शिकंजे में जकड़ा ये अजमेर शहर भी रियल स्मार्ट सिटी की ओर बढ़ सकता है।





मुझे उम्मीद है कि बिना किसी के प्रभाव में आए फ़ैसला लेने वाली रेणु जयपाल , बहुत जल्दी प्राधिकरण की कालिख़ पुती छवि को बेदाग करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएंगी और जल्द ही दिखाएंगी कि उनपर किसी प्रकार का कोई प्रभाव काम नहीं करता।


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