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अंदाजे बयां: तेरी राहनुमाई मेरी सोच के साथ

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January 8, 2021

सागर की गहराई मेरी सोच के साथ

तेरी राहनुमाई मेरी सोच के साथ,

सागर की गहराई मेरी सोच के साथ।




दूर से मुझको देती रही हिदायत पर,

दुनिया कब टकराई मेरी सोच के साथ।




हर जज़्बे ने ख़ूब छकाया मुझे मगर,

नहीं जुड़ी चतुराई मेरी सोच के साथ।




फटी पुरानी यादें पहन के आया वो,

करता रहा तुरपाई मेरी सोच के साथ।




साथ बदन ने छोड़ दिया पर बनी रही,

रूहानी रानाई मेरी सोच के साथ।




मुद्दत बाद मैं अपने अंदर लौटा तो,

लिपट गई तन्हाई मेरी सोच के साथ।





कच्चे घर की छत पर छप्पर के जैसे,

सर पे रही सच्चाई मेरी सोच के साथ।




सुरेन्द्र चतुर्वेदी


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