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क़लमकार: कोरोना गया नहीं, स्ट्रेन सर पर है, वैक्सीन लगना अभी शुरू नहीं हुआ, वैक्सीन को लेकर अफ़वाहों का दौर ज़ारी मगर

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January 6, 2021

स्कूल कॉलेज़ खोलने का ऐलान!!

कोरोना गया नहीं, स्ट्रेन सर पर है, वैक्सीन लगना अभी शुरू नहीं हुआ, वैक्सीन को लेकर अफ़वाहों का दौर ज़ारी मगर




स्कूल कॉलेज़ खोलने का ऐलान!!




बर्ड फ़्लू से मुर्गी पालक ख़तरे में




ये क्या हो रहा है गहलोत जी





सुरेन्द्र चतुर्वेदी





समझ में नहीं आ रहा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आख़िर कहना, करना क्या चाह रहे हैं 





कोरोना से डरे हुए गहलोत स्ट्रेन वायरस की मौजूदगी को ख़तरनाक़ बता रहे है ।उन्होंने स्ट्रेन के ख़तरे को भांपते हुए चिंता जाहिर भी की है, मगर इस चिंता के साथ-साथ उन्होंने 18 जनवरी से स्कूल खोले जाने का ऐलान भी कर दिया है ।





मुख्यमंत्री ने कक्षा 9 से 12वीं तक की कक्षाएं , विश्वविद्यालय व महाविद्यालय की अंतिम वर्ष की कक्षाएं ,कोचिंग सेंटर और सरकारी प्रशिक्षण संस्थान खोलने की घोषणा की है ।उन्होंने मेडिकल कॉलेज ,डेंटल कॉलेज ,नर्सिंग कॉलेज, पैरामेडिकल कॉलेज तो 11 जनवरी से ही खोलने के निर्देश दे दिए हैं ।यदि स्ट्रेन की संभावनाएं प्रबल हैं, कोरोना अभी गया नहीं है ,वैक्सीन लगाने की दिशा में रफ्तार जैसी कोई चीज़ नज़र नहीं आ रही तो शिक्षण संस्थाओं के खोले जाने की अभी ऐसी भी क्या ज़रूरत थी





जब इतने वक्त तक स्कूल नहीं खुले थे तो वैक्सीन की रफ्तार बढ़ने के बाद भी स्कूल खोले जा सकते थे! बिना वैक्सीन लगाए यदि शिक्षक और छात्र शिक्षण संस्थाओं में जाएंगे तो संक्रमण के ख़तरे तो कायम रहेंगे ही।





मैं शिक्षण संस्थाओं के खोले जाने का विरोध नहीं करता ! उनका खुलना बेहद ज़रूरी है मगर मुझे पता है कि कोरोना के कहर का खतरा अभी टला नहीं है ।अभिभावक अभी अपने बच्चों को स्कूल या कॉलेज़ भेजने के भय से मुक्त नहीं हुए हैं ।बिना वैक्सीन लगवाए वे किसी भी हाल में अपने बच्चे को पढ़ने नहीं भेजेंगे ।सरकार भले ही कितने भी ऐलान कर दे! कितने भी घोड़े खोल ले ! शिक्षण संस्थाएं खोल भी दी गईं तो क्या होगा शिक्षण कार्य तो शुरू हो नहीं पाएंगे ।





सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का पढ़ाने जाना लंबे समय से जारी है, मगर उनके शिक्षण कार्यों का यदि मूल्यांकन किया जाए तो पता चलेगा कि सरकार जितना वेतन पर खर्च कर रही है उसका 20% भी उपयोग नहीं हो पा रहा ।ऑनलाइन शिक्षा के नाम पर सरकार अपनी दिल की तसल्ली ही कर रही है वरना हकीकत में तो कुछ नहीं हो रहा ।





मुख्यमंत्री गहलोत को अनुमान है कि मिशन मोड पर वैक्सीन का कार्य शुरू हो जाएगा , मगर मुझे इसकी संभावनाएं अभी भी कमज़ोर लग रही हैं।अभी तक तो वैक्सीनेशन के लिए स्वास्थ्य कर्मियों का डेटाबेस ही अपलोड नहीं हुआ है ।





वैक्सीन को लेकर अफ़वाहों का बाज़ार अलग से गर्म है । लोग वैक्सीन लगवाने में जल्दबाज़ी करने के मूड में नहीं ! बचाव ही उपचार है!! इस मानसिकता से लोग वैक्सीन से पूरी तरह दूरी बना कर रखना चाहते हैं। अनावश्यक अफ़वाहें फैली हुई हैं। पढ़े-लिखे राजनेता भी इन अफ़वाहों के हिस्सेदार बने हुए हैं।





वैक्सीन को लेकर तरह-तरह की राजनीति खेली जा रही है। कहा जा रहा है कि मोदी जी ने यह वैक्सीन विरोधियों को ठिकाने लगाने के लिए बनवाई हैं।कमाल की बात है कि मीडिया भी ऐसी बेबुनियाद और बेसिर पैरों के बयानों को मसालेदार बनाकर प्रस्तुत कर रहा है।





पूरे मुल्क में वैक्सीन को लेकर लोग डरे हुए हैं ।वे पहले तय कर लेना चाहते हैं कि वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं अधिकांश लोग चाहते हैं कि वैक्सीन पहले अन्य लोग लगवा लें ! जब उनके आफ्टर इफेक्ट ना हों तो वे भी लगवा लेंगे।





भ्रांतियों के इस दौर में स्कूल कॉलेज़ खोल देने से क्या होगा स्टैन का खतरा अभी पूरी तरह बना हुआ है। इंग्लैंड में वायरस के कारण वापस लॉकडाउन लगा दिया गया है। क्या कोई गारंटी ले सकता है कि भारत में ऐसा नहीं होगा क्या मुख्यमंत्री गहलोत यह कह सकते हैं कि राजस्थान में स्ट्रेन से मुक़ाबला करने में वे सक्षम हैंजबकि राजस्थान में स्ट्रेन अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुका है।





मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद बयान दे रहे हैं कि राजस्थान में स्ट्रेन ट्रेन का खतरा पूरी तरह बना हुआ है। यदि ऐसा है तो फिर शिक्षण संस्थाएं खोलने की यह नाटक बाज़ी कैसी





आगामी फरवरी ,मार्च तक इंतजार भी किया जा सकता था ।ईश्वर ना करें कोई भी विपरीत स्थितियां पैदा हों मगर हो गईं तो स्कूल कॉलेज खोले जाने का जो विपरीत असर होगा उसका जिम्मेदार कौन होगा




बर्ड फ्लू को लेकर पूरा राजस्थान संकट में है। रोज़ बड़ी संख्या में कौए मर रहे हैं। मुर्गी पालक डरे हुए हैं। यदि मुर्गियों में यह रोग फैल गया तो क्या होगा राजस्थान के मुर्गी पालक पहले भी भुगत चुके हैं।जब लोगों ने अंडे खाने बंद कर दिए थे। मुर्गियां मुर्गों के मांस पर पाबंदी लग गई थी ।अब फिर ऐसा होना तय सा लग रहा है।





सरकार को चाहिए कि वह ऐसे में पहले नागरिकों के स्वास्थ्य की चिंता करे। स्कूल और कॉलेज खोलना उनकी पहली प्राथमिकता नहीं ,लोगों की जान बचाना उनकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।


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