For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 132124195
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: विवादित जमीन पर रातों-रात बने शराब ठेके का क्षेत्रवासियों ने किया विरोध,क्षेत्रवासी किसी भी हालत में ठेके को नहीं खुलने देंगे चाहे उन्हें किस हद तक जाना पड़े। |  Ajmer Breaking News: एटीएस की सूचना पर सिविल लाइंस थाना पुलिस ने दिया बड़ी कार्रवाई को अंजाम नेपाल के दो तस्कर गिरफ्तार, |  Ajmer Breaking News: परिजनों की मर्जी के खिलाफ विवाह कर प्रेमी युगल पहुंचा जिला मुख्यालय, एसपी के समक्ष पेश होकर लगाई सुरक्षा की गुहार, |  Ajmer Breaking News: ग्राम विकास चौपाल कार्यक्रम,महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना हमारा लक्ष्य प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हो रहे महिला सशक्तीकरण के कार्य  |  Ajmer Breaking News: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पुष्कर में कार्यकर्ताओं के साथ किया संवाद, ग्रामीण परिवारों के यहां किया रात्रि भोजन |  Ajmer Breaking News: तू डाल डाल में पात पात, शहर में लगातार बढ़ रही है चोरी लूट की वारदात वहीं पुलिस कस रही है शिकंजा, लगातार चोर बदमाश हो रहे हैं गिरफ्तार |  Ajmer Breaking News:  सिंधु संस्कृति गौरव यात्रा 2026 आयोजन 17 मई से, श्री अमरापुर स्थान पर संतो ने किया प्रचार सामग्री व बैनर का विमोचन |  Ajmer Breaking News: जिला कलक्टर लोक बंधु ने पिचौलिया में की संध्या चौपाल,जनसुनवाई कर सुनी ग्रामीणों की परिवेदनाएं, दिए त्वरित निस्तारण के निर्देश  |  Ajmer Breaking News: जमीनी विवाद में फायरिंग मामले में फरार चल रहे आरोपी को अराई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। |  Ajmer Breaking News: राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रकरणों का हुआ आपसी समझाइश से निस्तारण | 

विशेष: श्री गोवर्धन कथा ,महत्व एवं पूजन विधि

Post Views 41

October 30, 2020

इस दिन गाय की पूजा करने से सभी पाप उतर जाते हैं और मोक्ष प्राप्त होता है।

 गोर्वधन पूजा 
 

कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोर्वधन पूजा  (Govardhan Puja) की जाती है। हिन्दू मान्यतानुसार महाभारत काल में इसी दिन भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी। तभी से यह परंपरा कायम है। साल 2020 में गोवर्धन पूजा 15 नवंबर को की जाएगी। 


पूजन विधि 


इस दिन भगवान को तरह−तरह के व्यंजनों के भोग लगाये जाते हैं और उनके प्रसाद का लंगर लगाया जाता है। इस दिन गाय−बैल आदि पशुओं को स्नान कराकर फूलमाला, धूप, चंदन आदि से उनका पूजन किया जाता है। गायों को मिठाई खिलाकर उनकी आरती उतारी जाती है तथा प्रदक्षिणा की जाती है। गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर जल, मौली, रोली चावल लगाकर पूजा करते हैं तथा परिक्रमा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन गाय की पूजा करने से सभी पाप उतर जाते हैं और मोक्ष प्राप्त होता है।


गोवर्धन पूजा कथा 


एक बार की बात है इंद्र को अपनी शक्तियों पर घमंड हो गया। तब भगवान कृष्ण ने उनके घमंड को चूर करने के लिए एक लीला रची। इसमें उन्होंने सभी ब्रजवासियों और अपनी माता को एक पूजा की तैयारी करते हुए देखा तो, यशोदा मां से पूछने लगे, मईया आप सब किसकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं तब माता ने उन्हें बताया कि वह इन्द्रदेव की पूजा की तैयारी कर रही हैं
फिर भगवान कृष्ण ने पूछा मैइया हम सब इंद्र की पूजा क्यों करते है? तब मईया ने बताया कि इंद्र वर्षा करते हैं और उसी से हमें अन्न और हमारी गाय के घास मिलता है। यह सुनकर कृष्ण जी ने तुरंत कहा  मैइया हमारी गाय तो अन्न गोवर्धन पर्वत पर चरती है, तो हमारे लिए वही पूजनीय होना चाहिए। इंद्र देव तो घमंडी हैं वह कभी दर्शन नहीं देते हैं। 
कृष्ण की बात मानते हुए सभी ब्रजवासियों ने इन्द्रदेव के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इस पर क्रोधित होकर भगवान इंद्र ने मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। वर्षा को बाढ़ का रूप लेते देख सभी  ब्रज के निवासी भगवान कृष्ण को कोसने लगें। तब कृष्ण जी ने वर्षा से लोगों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कानी उंगली पर उठा लिया। 
इसके बाद सब को अपने गाय सहित पर्वत के नीचे शरण लेने को कहा। इससे इंद्र देव और अधिक क्रोधित हो गए तथा वर्षा की गति और तेज कर दी। इन्द्र का अभिमान चूर करने के लिए तब श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियंत्रित करने को और शेषनाग से मेंड़ बनाकर पर्वत की ओर पानी आने से रोकने को कहा। 
इंद्र देव लगातार रात- दिन मूसलाधार वर्षा करते रहे। काफी समय बीत जाने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि कृष्ण कोई साधारण मनुष्य नहीं हैं। तब वह ब्रह्मा जी के पास गए तब उन्हें ज्ञात हुआ की श्रीकृष्ण कोई और नहीं स्वयं श्री हरि विष्णु के अवतार हैं। इतना सुनते ही वह श्री कृष्ण के पास जाकर उनसे क्षमा याचना करने लगें। इसके बाद देवराज इन्द्र ने कृष्ण की पूजा की और उन्हें भोग लगाया। तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा कायम है। मान्यता है कि इस दिन गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं। 
 


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved