For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 148497604
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: राजस्थान निजी शिक्षण संस्था संघर्ष समिति के बैनर तले निजी स्कूलों के संचालकों ने हड़ताल रखकर जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम सोपे ज्ञापन, |  Ajmer Breaking News: अजमेर शहर महिला कांग्रेस ने अखिल भारतीय कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा एवं प्रदेशाध्यक्ष सारिका सिंह के निर्देश पर महिलाओं का आरक्षण लागू करो, अभी करो के तहत हस्ताक्षर अभियान चलाया |  Ajmer Breaking News: अजमेर के रामगंज थाना अंतर्गत बीती रात जॉन्स गंज चौराहे पर बाइक चोरों की एक और करतूत सामने आई, लेकिन इस बार उनकी चालाकी एक मैकेनिक की सूझबूझ के आगे फेल हो गई। |  Ajmer Breaking News: स्मार्ट सिटी अजमेर की पहचान मानी जाने वाली आनासागर झील की बदहाल स्थिति लोगों की चिंता का कारण बनी हुई है। |  Ajmer Breaking News: श्री श्याम सखी मंडल द्वारा जरूरतमंद कन्या के विवाह के लिए धूमधाम के साथ मायरा भरा गया। |  Ajmer Breaking News: कृष्णगंज थाना अंतर्गत एक होटल से बांग्लादेशी महिला को क्या डिटेन,अवैध रूप से भारत बांग्लादेश सीमा पार कर पहुंची थी भारत, पुलिस ने भेजा डिटेंशन सेंटर |  Ajmer Breaking News: जिला कार्यकारिणी समिति बैठक आयोजित , सत्र 2026-27 प्रस्तावित कार्य योजना एवं प्रस्तावित बजट पर चर्चा, श्रेष्ठ कार्य करने वाले स्थानीय संघ होंगे सम्मानित  |  Ajmer Breaking News: पूर्व विधायक वेदप्रकाश सोलंकी के आमरण अनशन को अकबर खान का समर्थन: बोले—यह हजारों गरीब पीड़ित परिवारों के न्याय की लड़ाई |  Ajmer Breaking News: अलवर गेट थाना अंतर्गत मदार रेलवे यार्ड स्थित सूने मकान में चोरी की वारदात, जेवर और नकदी लेकर फरार हुए चोर |  Ajmer Breaking News: भाभी पर गर्म दूध फेंकने का आरोप, देवरानी के खिलाफ मामला दर्ज | 

विशेष: श्री गोवर्धन कथा ,महत्व एवं पूजन विधि

Post Views 61

October 30, 2020

इस दिन गाय की पूजा करने से सभी पाप उतर जाते हैं और मोक्ष प्राप्त होता है।

 गोर्वधन पूजा 
 

कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोर्वधन पूजा  (Govardhan Puja) की जाती है। हिन्दू मान्यतानुसार महाभारत काल में इसी दिन भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी। तभी से यह परंपरा कायम है। साल 2020 में गोवर्धन पूजा 15 नवंबर को की जाएगी। 


पूजन विधि 


इस दिन भगवान को तरह−तरह के व्यंजनों के भोग लगाये जाते हैं और उनके प्रसाद का लंगर लगाया जाता है। इस दिन गाय−बैल आदि पशुओं को स्नान कराकर फूलमाला, धूप, चंदन आदि से उनका पूजन किया जाता है। गायों को मिठाई खिलाकर उनकी आरती उतारी जाती है तथा प्रदक्षिणा की जाती है। गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर जल, मौली, रोली चावल लगाकर पूजा करते हैं तथा परिक्रमा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन गाय की पूजा करने से सभी पाप उतर जाते हैं और मोक्ष प्राप्त होता है।


गोवर्धन पूजा कथा 


एक बार की बात है इंद्र को अपनी शक्तियों पर घमंड हो गया। तब भगवान कृष्ण ने उनके घमंड को चूर करने के लिए एक लीला रची। इसमें उन्होंने सभी ब्रजवासियों और अपनी माता को एक पूजा की तैयारी करते हुए देखा तो, यशोदा मां से पूछने लगे, मईया आप सब किसकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं तब माता ने उन्हें बताया कि वह इन्द्रदेव की पूजा की तैयारी कर रही हैं
फिर भगवान कृष्ण ने पूछा मैइया हम सब इंद्र की पूजा क्यों करते है? तब मईया ने बताया कि इंद्र वर्षा करते हैं और उसी से हमें अन्न और हमारी गाय के घास मिलता है। यह सुनकर कृष्ण जी ने तुरंत कहा  मैइया हमारी गाय तो अन्न गोवर्धन पर्वत पर चरती है, तो हमारे लिए वही पूजनीय होना चाहिए। इंद्र देव तो घमंडी हैं वह कभी दर्शन नहीं देते हैं। 
कृष्ण की बात मानते हुए सभी ब्रजवासियों ने इन्द्रदेव के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इस पर क्रोधित होकर भगवान इंद्र ने मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। वर्षा को बाढ़ का रूप लेते देख सभी  ब्रज के निवासी भगवान कृष्ण को कोसने लगें। तब कृष्ण जी ने वर्षा से लोगों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कानी उंगली पर उठा लिया। 
इसके बाद सब को अपने गाय सहित पर्वत के नीचे शरण लेने को कहा। इससे इंद्र देव और अधिक क्रोधित हो गए तथा वर्षा की गति और तेज कर दी। इन्द्र का अभिमान चूर करने के लिए तब श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियंत्रित करने को और शेषनाग से मेंड़ बनाकर पर्वत की ओर पानी आने से रोकने को कहा। 
इंद्र देव लगातार रात- दिन मूसलाधार वर्षा करते रहे। काफी समय बीत जाने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि कृष्ण कोई साधारण मनुष्य नहीं हैं। तब वह ब्रह्मा जी के पास गए तब उन्हें ज्ञात हुआ की श्रीकृष्ण कोई और नहीं स्वयं श्री हरि विष्णु के अवतार हैं। इतना सुनते ही वह श्री कृष्ण के पास जाकर उनसे क्षमा याचना करने लगें। इसके बाद देवराज इन्द्र ने कृष्ण की पूजा की और उन्हें भोग लगाया। तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा कायम है। मान्यता है कि इस दिन गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं। 
 


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved