For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 117349532
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: ब्लॉक कांग्रेस कमेटी पुष्कर एवं नगर कांग्रेस कमेटी पुष्कर के संयुक्त तत्वाधान मे एआईसीसी और पीसीसी के निर्देशानुसार मनरेगा बचाओ महासंग्राम अभियान के अंतर्गत एक घंटे का सांकेतिक धरना प्रदर्शन |  Ajmer Breaking News: दरगाह थाना अंतर्गत त्रिपोलिया गेट पुलिस चौकी के सामने यादगार चिश्तिया चेरिटेबल गेस्ट हाऊस ओर फुटवेयर की शॉप में लगी शॉर्ट सर्किट से आग, |  Ajmer Breaking News: महात्मा गांधी की पुण्यतिथि और शहीद दिवस के अवसर पर आज कलेक्ट्रेट में 2 मिनट का मौन रखकर बापू सहित सभी शहीदों को पुष्प अर्पित कर दी श्रद्धांजलि,किया नमन  |  Ajmer Breaking News: 30 जनवरी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पुलिस कार्मिकों ने 2 मिनट का मौन रखकर किया नमन, दी श्रद्धांजलि  |  Ajmer Breaking News: मोहनदास करमचंद गांधी यानि महात्मा गांधी के नाम से प्रख्यात बापू की आज पुण्यतिथि है। |  Ajmer Breaking News: ऐतिहासिक आनासागर झील में प्रवासी पक्षियों के शिकार एवं लगातार घटती पक्षियों की संख्या को लेकर कांग्रेस के शिष्ट मंडल ने जिला कलेक्टर को मुंह पर काली पट्टी बांध कर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन |  Ajmer Breaking News:  एक पहल सेवा की ओर से (सामाजिक संस्था) द्वारा आज मंगलम अपार्टमेंट्स कोटड़ा के पास खुले आसमान में निवास कर रहे  50 जरूरतमंद  महिलाओं,बच्चों, को कंबल और टोपे  का वितरण |  Ajmer Breaking News: अजमेर नगर निगम में भाजपा बोर्ड का कार्यकाल 31 जनवरी को होगा पूर्ण, उससे पूर्व महापौर बृज लता हाडा ने 5 साल की उपलब्धियां मीडिया से की साझा, कुछ सवालों पर साधा मौन  |  Ajmer Breaking News: मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी व अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर रने का आयोजन |  Ajmer Breaking News: अजमेर रेलवे अस्पताल में वर्षों से लंबित आग से बचाव के लिए फायर पंप हाउस की स्थापना की गई है | | 

विशेष: श्री गोवर्धन कथा ,महत्व एवं पूजन विधि

Post Views 11

October 30, 2020

इस दिन गाय की पूजा करने से सभी पाप उतर जाते हैं और मोक्ष प्राप्त होता है।

 गोर्वधन पूजा 
 

कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोर्वधन पूजा  (Govardhan Puja) की जाती है। हिन्दू मान्यतानुसार महाभारत काल में इसी दिन भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी। तभी से यह परंपरा कायम है। साल 2020 में गोवर्धन पूजा 15 नवंबर को की जाएगी। 


पूजन विधि 


इस दिन भगवान को तरह−तरह के व्यंजनों के भोग लगाये जाते हैं और उनके प्रसाद का लंगर लगाया जाता है। इस दिन गाय−बैल आदि पशुओं को स्नान कराकर फूलमाला, धूप, चंदन आदि से उनका पूजन किया जाता है। गायों को मिठाई खिलाकर उनकी आरती उतारी जाती है तथा प्रदक्षिणा की जाती है। गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर जल, मौली, रोली चावल लगाकर पूजा करते हैं तथा परिक्रमा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन गाय की पूजा करने से सभी पाप उतर जाते हैं और मोक्ष प्राप्त होता है।


गोवर्धन पूजा कथा 


एक बार की बात है इंद्र को अपनी शक्तियों पर घमंड हो गया। तब भगवान कृष्ण ने उनके घमंड को चूर करने के लिए एक लीला रची। इसमें उन्होंने सभी ब्रजवासियों और अपनी माता को एक पूजा की तैयारी करते हुए देखा तो, यशोदा मां से पूछने लगे, मईया आप सब किसकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं तब माता ने उन्हें बताया कि वह इन्द्रदेव की पूजा की तैयारी कर रही हैं
फिर भगवान कृष्ण ने पूछा मैइया हम सब इंद्र की पूजा क्यों करते है? तब मईया ने बताया कि इंद्र वर्षा करते हैं और उसी से हमें अन्न और हमारी गाय के घास मिलता है। यह सुनकर कृष्ण जी ने तुरंत कहा  मैइया हमारी गाय तो अन्न गोवर्धन पर्वत पर चरती है, तो हमारे लिए वही पूजनीय होना चाहिए। इंद्र देव तो घमंडी हैं वह कभी दर्शन नहीं देते हैं। 
कृष्ण की बात मानते हुए सभी ब्रजवासियों ने इन्द्रदेव के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इस पर क्रोधित होकर भगवान इंद्र ने मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। वर्षा को बाढ़ का रूप लेते देख सभी  ब्रज के निवासी भगवान कृष्ण को कोसने लगें। तब कृष्ण जी ने वर्षा से लोगों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कानी उंगली पर उठा लिया। 
इसके बाद सब को अपने गाय सहित पर्वत के नीचे शरण लेने को कहा। इससे इंद्र देव और अधिक क्रोधित हो गए तथा वर्षा की गति और तेज कर दी। इन्द्र का अभिमान चूर करने के लिए तब श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियंत्रित करने को और शेषनाग से मेंड़ बनाकर पर्वत की ओर पानी आने से रोकने को कहा। 
इंद्र देव लगातार रात- दिन मूसलाधार वर्षा करते रहे। काफी समय बीत जाने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि कृष्ण कोई साधारण मनुष्य नहीं हैं। तब वह ब्रह्मा जी के पास गए तब उन्हें ज्ञात हुआ की श्रीकृष्ण कोई और नहीं स्वयं श्री हरि विष्णु के अवतार हैं। इतना सुनते ही वह श्री कृष्ण के पास जाकर उनसे क्षमा याचना करने लगें। इसके बाद देवराज इन्द्र ने कृष्ण की पूजा की और उन्हें भोग लगाया। तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा कायम है। मान्यता है कि इस दिन गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं। 
 


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved