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#मधुकर कहिन: आखिर कोई नेहरू वंशी गांधी ही क्यूँ चाहिए कांग्रेस को 

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August 27, 2020

जब सैकड़ों ऐतिहासिक परिवार आज भी हाशिये पर जी रहे हैं ।

#मधुकर कहिन
आखिर कोई नेहरू वंशी गांधी ही क्यूँ चाहिए कांग्रेस को 
जब सैकड़ों ऐतिहासिक परिवार आज भी हाशिये पर जी रहे हैं ।

नरेश राघानी

कांग्रेस कमेटी में सोनिया गांधी के बीमारी के दौरान जिन 23 लोगों ने पत्र लिखकर किसी गैर गांधी को राष्ट्र अध्यक्ष बनाने का विचार कांग्रेस आलाकमान के समक्ष रखा। वह लोग इस बहादुरी के लिए वाकई साधुवाद के पात्र हैं। विचारणीय बात यह है कि - क्या कांग्रेस में गांधी परिवार के अलावा कोई भी और योग्य नहीं है ,जो भारत देश के सवा सौ करोड़ मतदाताओं को भी स्वीकार हो ?

ऐसे सैकड़ों लोग हैं जिन्होंने अपने पूर्वजों के कद और कौशल अनुरूप सफलता प्राप्त नहीं कि है, फिर भी आज सम्मान से बिना राजनैतिक लालसा के सामान्य जीवन जी रहे है।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कांग्रेस के नायक लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल की तिगड़ी आज भी मशहूर है। जिसे इतिहास में लाल बाल पाल के नाम से जाना जाता है । लाल बाल पाल की तिकड़ी के लाला लाजपत राय के प्रपौत्र अभिषेक अग्रवाल दिल्ली में एक समाज सेवी संस्था चलाते हैं। और अच्छे समाज सेवकों में गिने जाते हैं। लेकिन राजनैतिक सक्रियता नहीं है। इस परिवार का एक वंशज तो ऐसा भी है जिसे कुछ साल पहले, मैं खुद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में मिला था। मानसिक अवसाद में घिरा और आंशिक लकवे का शिकार वह चेहरा मुझे आज 15 वर्ष बाद भी याद है। हाथ में डंडा लिए और गले में सैकड़ों प्रशस्ति पत्र और पहचान पत्र लटकाए हुए उस लाला लाजपत राय के वंशज का हाल देख कर बहुत हैरानी होती थी। और रहम भी आता था। दिल यह सोचने पर मजबूर हो जाता कि कांग्रेस अपने पौराणिक रत्नों के परिवारों को भी संभाल कर रख पाने में नाकाम हो गयी है ।

वहीं पर बाल गंगाधर तिलक के प्रपौत्र रोहित तिलक 2017 में एक बलात्कार के आरोप में मुकदमा लड़ते हुए पाए गए ।

बिपिन चंद्र पाल के वंशज कॉलिन पाल बंगाली फिल्म और कला के क्षेत्र में, निर्देशक की भूमिका ताउम्र सफलता से निभाते रहे।

भगत सिंह के भतीजे और भतीजे- वीरेंद्र संधू, किरनजीत सिंह संधू, इंद्रजीत ढिल्लों और जगमोहन सिंह अब मीडिया में कभी-कभार ही दिखाई देते हैं।

सुखदेव थापर के वंशज अशोक थापर तो आज तक सुखदेव के घर की तरफ जाने वाले सड़क मार्ग को सुगम करवाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। ताकि लोगों को केवल यह याद रह जाए कि सुखदेव यहाँ रहते थे।

शिवराम राजगुरु की वंशज उमा महादेवकर आज भी पुणे में हर साल उनकी जयंती के कार्यक्रम बड़ी सामान्यता से मनाती हैं। और केवल आज़ादी के दिन शहीदों को याद करने वाले इस सिस्टम से अपने लिए कोई उम्मीद नही करती ।

महात्मा गांधी के वंशजों को ही देख लीजिए । बिल्कुल सामान्य ज़िंदगी है उनकी। भीमराव अंबेडकर के वंशज सुजत अम्बेडकर रॉक बैंड आर्टिस्ट होने के साथ साथ दलित संघर्ष की पताका आज भी उठाए हुए हैं।

यह तो बात हुई कांग्रेस नेताओं की।कांग्रेस से भी पुराने मुगलकालीन परिवारों की ।

तो दक्षिण भारत में मैसूर से लेकर पूरे भारतवर्ष में अंग्रेजों के खिलाफ आज़ादी की लड़ाई लड़ने वाले मुगल बादशाह टीपू सुल्तान की वंशज नूर इनायत खान ने मास्को में जन्म लिया। और कमाल की बात देखिए कि ब्रिटिश जासूस बनकर ही हिटलर के खिलाफ काम किया। और दूसरे विश्वयुद्ध में हिटलर के खिलाफ जासूसी करने के आरोप में पकड़ी गई । अंततः हिटलर के वफादारों की गोलियों का सामना करते हुए मारी गई।

अंतिम मुगल सम्राट बहादुरशाह ज़फ़र के वंशज और उनकी वंशावली से उत्पन्न संताने आज भी लाल किले पर दावा ठोकने की बात सोचते रहते हैं। जबकि खुद की हालात बहुत अच्छी नहीं है। और 400 रुपये मासिक सरकारी पेंशन पाते हैं।

तो भैया !!! इसका सीधा-सीधा अर्थ यह है कि - किसी का बाप चाहे इतिहास में जो भी रहा हो। यह बिल्कुल जरूरी नहीं की उसके बेटे और वंशज भी उतनी ही काबिलियत से वह सब कर पाए। लेकिन फिर भी सामान्य जीवन जीया जा सकता हैं।

सो ... खुद को महात्मा गांधी के तथाकथित वंशज कहलाने वाले नेहरू परिवार की पट्टी जो वर्षों से सैकड़ों कांग्रेसियों की आंखों पर बंधी है। वह आज के हालात में जितना जल्दी आंखों से उतर जाए उतना कांग्रेस के लिए सही है।

ऐसा नहीं है कि कांग्रेसी परिवारों में अच्छे लोग नहीं बचे है। कांग्रेस के पास आज भी इन सभी वर्णित लोगों के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री और जय जवान जय किसान का नारा पूरे विश्व को देने वाले नेता , स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री के वंशज मौजूद है। जिन्हें पूरी दुनिया बड़े आराम से नए कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में स्वीकार कर सकती है। लेकिन गांधी परिवार के अंधभक्तों की भीड़ की नजर किसी और पर पड़े तब न ..


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