For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 170743406
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: गूंज गरबा महोत्सव में दिव्यांग बच्चों ने बिखेरी प्रतिभा की छटा |  Ajmer Breaking News: अजमेर में नवरात्रि के अवसर पर आयोजित भव्य डांडिया कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेता और कॉमेडी किंग चंकी पांडे ने शिरकत कर कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। |  Ajmer Breaking News: अजमेर में नवरात्रों की धूम, बॉलीवुड अभिनेता चंकी पांडे को देखने उमड़ा जनसैलाब |  Ajmer Breaking News: नाका मदार के वार्ड 55 में गरबा रास की धूम, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने की मां दुर्गा की आरती |  Ajmer Breaking News: अजमेर की ईदगाह कॉलोनी में आया साइलेंट किलर  |  Ajmer Breaking News: अजमेर बाईपास पर दर्दनाक हादसा: सड़क पार कर रहे पिता-पुत्र को टेलर ने रौंदा, पिता की मौत, बेटा अस्पताल में भर्ती   |  Ajmer Breaking News: अजमेर। कल्याणीपुरा स्थित जगत जननी माँ काली मंदिर में माँ काली मित्र मंडल के तत्वावधान में कन्या पूजन |  Ajmer Breaking News: दुकान में घुसकर मारपीट और सोने की चैन छीनने का आरोप, पीड़ित ने कोतवाली थाने में दी शिकायत |  Ajmer Breaking News: अजमेर के किशनपुरा गांव में पूजा के दौरान दर्दनाक हादसा! अखंड दीपक से चुनरी में लगी आग, बचाने के प्रयास में झुलसी महिला।   |  Ajmer Breaking News: ख्वाजा साहब की दरगाह पहुंचे पूर्व मंत्री शाहनवाज हुसैन, अमन-चैन की मांगी दुआ | 
madhukarkhin

#मधुकर कहिन: आज़ादी और लोकतंत्र का सही अर्थ समझने के बाद ही मनाएं स्वतंत्रता दिवस

Post Views 281

August 15, 2020

1947 में आज से एक दिन पहले 14 अगस्त को अखंड भारतवर्ष की अवाम पर जो वज्रपात हुआ

#मधुकर कहिन

आज़ादी और लोकतंत्र का सही अर्थ समझने के बाद ही मनाएं स्वतंत्रता दिवस

नरेश राघानी

आज 15 अगस्त है । 1947 में आज से एक दिन पहले 14 अगस्त को अखंड भारतवर्ष की अवाम पर जो वज्रपात हुआ , उस वज्रपात के चलते , कुछ बड़े लोगों ने लाहौर और अमृतसर के बीच एक लकीर खींच कर यह तय कर दिया कि - कौन कहां रहेगा   हजारों की तादाद में लोगों को निर्देशित कर दिया गया कि पाकिस्तान सिर्फ मुसलमानों के लिए है और हिंदुस्तान हिंदुओं के लिए । सैकड़ों ऐसे परिवार जो इस फैसले को नामंजूर करते थे उनकी पीड़ा दोनों मुल्कों की आज़ादी के जश्न के शोर में दबा दी गई।

तब से लेकर आज तक , सभी अपने अपने ढंग से आज़ादी और लोकतंत्र को परिभाषित करते आ रहे हैं। पिछले कुछ सालों में इस देश में जो माहौल उत्पन्न हुआ है , उस माहौल के चलते युवा पीढ़ी सोशल मीडिया पर बैठकर आज़ादी की अलग-अलग परिभाषाएं गढ़ रही है । सोशल मीडिया के लगभग 23 माध्यमों पर युवा पीढ़ी का रिएक्शन पढ़ कर ऐसा लगता है, कि उन्हें यह फीड कर दिया गया है कि आज़ादी कुछ भी बोलने की आज़ादी है । और लोकतंत्र में जो बहुमत चाहता है वही सही है। या फिर की अगर बहुमत किसी गलत चीज के पक्ष में है ... तो भी वही सही और लोकतांत्रिक है। जबकि , आज़ादी और लोकतंत्र इस से कुछ अलग है। लोकतंत्र केवल बहुमत का सम्मान करना भर नहीं है।अपितु लोकतंत्र वह है जिसमें अल्पमत में बैठे लोग भी अपनी आवाज को दबा हुआ महसूस ना करें। बहुमत में बैठे लोग अल्पमत में बैठे हुए लोगों के अधिकारों का भी उतना ही ख्याल रखें जितना खुद का रखते हैं।  तब जाकर सही मायने में लोकतंत्र की स्थापना होती हुई किसी भी देश में दिखाई देगी। केवल भीड़ को अपनी कुर्सी बचाने के लिए खुश करना लोकतंत्र नहीं है।

वहीं आज़ादी का मतलब यह नहीं है कि हम हमारे ऐतिहासिक नायकों के चरित्र और जीवन पर सवाल उठाएंगें। और उनके जीवन मूल्यों की आलोचना करके खुद को विद्यवान घोषित करेंगे। इस तरीके को बदतमीज़ी कहा जा सकता है ।  बोलने की आज़ादी नहीं।  सोशल मीडिया के गटर में  पड़ी हुई हर चीज़ को मुद्दा बना लेने की आदत देश की युवा पीढ़ी को सुधारनी होगी।  तथ्यों की समझ का विकास करना होगा । और यह समझना होगा कि यह स्मार्ट फोन जो आपकी जेब में पड़ा हुआ है वह आपको यदि बड़ी हदों तक सशक्त बनाता है तो वही फोन आपको उन्हीं हदों तक बेवकूफ भी बना सकता है 

एक नए तरह की आज़ादी को पिछले कुछ सालों में स्थापित किया जा चुका है । जिसमें  सरकार की आलोचना करना देशद्रोह की श्रेणी में गिना जाने लगा है। जबकि अल्पमत में बैठे लोग भी कहीं न कहीं उसी जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि है। जिस जनसमूह ने बहुमत में बैठे लोगों को ताकत प्रदान की है।

इस तरह की आज़ादी और इस तरह के लोकतंत्र का प्रदर्शन करने वालों को दरअसल किसी से कोई लेना देना नहीं है। वो सिर्फ अपने आप के लिए ये सब ढोंग रचते हैं। जिसके चलते हर 5 साल बाद चुनाव फिर जीत लेने के दबाव में हर चीज और हर समस्या का इलाज फटाफट कर दिया जाता है। बिना यह सोचे समझे कि इसका क्या असर होगा। नक्शों पर धुंधली पड़ चुकी लकीरों को जल्दबाजी में फिर गहरा दिया जाता है। लोगों के ज़ख्म कुरेद कर हरे किये जाते हैं , ताकि उनसे टपकता हुआ लहू इन ओछे राजनेताओं की सत्ता प्राप्ति के हवन में आहूती हेतु काम आ सके।

जिस दिन इस देश के युवा को यह सब समझ आने लगेगा दरअसल उसी दिन असली स्वतंत्रता का उत्सव मनाने में आनंद आएगा। और तभी आज़ादी का उत्सव  कन्याकुमारी के विवेकानंद स्मारक से लेकर कश्मीर के लाल चौक  तक परिपूर्णता से मनाया जा सकेगा।

आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ

जय हिन्द

जय श्री कृष्ण

नरेश राघानी
प्रधान संपादक
Horizon Hind | हिन्दी न्यूज़
www.horizonhind.com
9829070307


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved