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#मधुकर कहिन: वो सब तो ठीक है लेकिन कोई ये बताए कि .आखिर फोटू किसकी लगानी है

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August 15, 2020

आज कृष्ण जन्माष्टमी है। सुबह से मित्रों के जय श्री कृष्णा कहने हेतु फोन आ रहे हैं। लगभग 8 कांग्रेसियों ने फोन करके एक ही सवाल पूछा

#मधुकर कहिन 
 वो सब तो ठीक है लेकिन कोई ये बताए कि ... 
 आखिर फोटू किसकी लगानी है 

 नरेश राघानी 

 आज कृष्ण जन्माष्टमी है। सुबह से मित्रों के जय श्री कृष्णा कहने हेतु फोन आ रहे हैं। लगभग 8 कांग्रेसियों ने फोन करके एक ही सवाल पूछा 

 मधुकर जी !!! ये बताओ कि आखिर फोटू किसकी लगाए 

 जब पहली बार किसी ने मुझसे पूछा तो मैं बात समझा नहीं । मैंने पूछा किस बारे में बात कर रहे हो भाई 

 तो वह कांग्रेसी बोला कि आपको तो जय श्री कृष्णा बोल कर बधाई दे दी । लेकिन लोगों को भी तो बधाई प्रेषित करनी पड़ेगी ना  आखिर नेता हैं हम ... 

 वह आगे बोला - कल शाम जब शहर में  जन्माष्टमी के पोस्टर लगवाने हेतु मैंने होर्डिंग वाले को फोन किया तो उसने पूछा - भाई साहब !!! आपकी फोटो तो लग जाएगी, भगवान कृष्ण की भी लग जाएगी और बधाई प्रेषित कर देंगे । आप तो यह बताओ कि आपके अलावा आखिर किस किस की फोटो लगानी है  पायलट की या गहलोत की 

 अपनी व्यथा आगे कहते हुए कांग्रेसी मुझसे बोला कि - भाई साहब !! मेरे पास तो इसका जवाब है नहीं। आप ही बता दो   तो कम से कम ये असमंजस हल हो। 

 यह लोग रोज लड़ते झगड़ते हैं,रोज एक दूसरे को कोसते हैं। पायलट के पास जाओ तो कह देते हैं कि - चल हट ..तू तो गहलोत का आदमी है। गहलोत के पास जाओ तो वहाँ भी यही आलम है। 
 
कमबख्त हम जाएं तो जाएं कहां 

यह सुन कर मुझे उस पीड़ित आत्मा के अंतर्मन की पीड़ा समझ आ गई। मैंने उसे कहा -  भाई !!! किसी की फोटो लगाने की जरूरत नहीं है। अब सिर्फ अपने काम की फोटो लगाओ। उसी से पार पड़ेगी। क्योंकि इन नेताओं का न तो चरित्र सीधा है, न हरकतें। इनको जब समझ में आएगा तब लड़ लेंगें और जब समझ में आएगा फिर मिल जाएंगे । 
 तुम गरीब आदमी हो। अपने बच्चों का भविष्य बनाने का पैसा,अपने परिवार के हक की गाढ़ी कमाई क्यूँ नेताओं पर लगा रहे हो   तुम्हें इस तरह का की पार्टी बाजी रास नहीं आएगी। राजनीति छोड़ कर घर बैठ जाओ। 


 राजनीति बेशर्म लोगों का खेल है । और तुम इतने बेशर्म नहीं बन सकते। वह बोला - भाई साहब वाकई!!! ये लोग हमसे कहते हैं... दरसल बड़े बेशर्म तो ये बड़े नेता लोग हैं । मैं पिछले 18 साल से कांग्रेस पार्टी का झंडा लेकर चल रहा हूं । अड़ोस पड़ौस में इज़्ज़त बनाई है। लोग नेताजी नेताजी कहकर पुकारते हैं। मैं उन लोगों से क्या कहूँ  क्या जवाब दूँ बहुत शर्म आती है।क्या करूँ  आप ही सीखा दो क्या करना है  

मैंने कहा तुम्हें सीखना है तो सीखो दिव्या मदेरणा से । जिसके पिता को अशोक गहलोत की सरकार होते हुए भी जेल हो गई और सीबीआई जांच बैठी। उसके बावजूद भी वह अशोक गहलोत के बाड़े में बंद होकर खड़ी रही। और अशोक गहलोत का ही समर्थन करती रही। 

 तुम्हें सीखना है तो सीखो सचिन पायलट से, जिसके पिता ने उम्र भर गांधी परिवार की सेवा की। और सिर्फ एक बार बगावत की , जिसके चलते कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव लड़ने हेतु पर्चा भरा । उसके बाद इतनी जबरदस्त योग्यता के होते हुए भी कांग्रेस ने कभी भी स्व.राजेश पायलट को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाने की नहीं सोची। बावजूद उसके राजेश पायलट कांग्रेस की सरकार में कई बार मंत्री रहे और कांग्रेस की सेवा करते करते ही परम गति को प्राप्त हुए। जिसके बाद गद्दी विरासत में मिली । और इस विरासत को आगे ले जाने के जोश और जुनून में मन में मुख्यमंत्री बनने की चाह पाल ली। कांग्रेस से खुल कर बगावत मोल ले ली। और भाजपा के गढ़ में जाकर मेहमान नवाजी करवाई। उसके बाद भी वहाँ दाल न गली तो बिना भाजपा से कुछ बातचीत किये, वापस कांग्रेस आलाकमान के चरणों में जा बैठे। अब फिर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होने की सोच रहे है। 

 क्या तुम इतने बे गैरत हो सकते हो  अगर नहीं हो सकते हैं तो तुम्हें राजनीति नहीं करनी चाहिए। फिर ज़रूरत ही क्या है यह पूछने कि - भाई किसकी फोटू लगाई जाए  कोई जरूरत नहीं है। 

 अब वक्त आ गया है कि अपनी धरती पकड़ कर अपने वोटरों की फोटो लगाई जाए। क्योंकि यह नेता ना तो आज तक किसी के सगे हुए हैं। न कभी हो सकते हैं । यदि तुम किसी पैसे वाले परिवार से नहीं हो , या अगर किसी मंत्री की संतान नहीं हो  तो तुम्हें कोई अधिकार नहीं है कांग्रेस में राजनीति करने का। 

 हो सके तो निभाओ ... नहीं तो तुम भी भाजपा में चले जाओ भाजपा में। कम से कम काम की कदर तो होगी। अपनों से बेहतर है गैरों के हाथों मरना। फिर भाजपा में किसी भी नेता की फोटो लगाने के बाद इस तरह से पछताना तो नहीं पड़ता। 

 और वाकई चाहते हो कि अगर किस की फोटो लगाई जाए  तो अशोक गहलोत की फोटो लगाना बेहतर होगा। क्योंकि गहलोत की फोटो लगाने से लाभ भले कुछ भी ना मिले। ऐसे नुकसान कम से कम कभी किसी को नहीं हुआ होगा । पायलट का क्या भरोसा आज यहां विमान लैंड कर दिया। कल फिर टेक ऑफ कर जाए तो 
 फिर तुम किस किस से अपनी शक्ल छिपाओगे 

 और यार तुम तो इतने में ही घबरा रहे हो  जरा हाल सोचो डॉ गोपाल बाहेती का । जिसने उम्र भर अशोक गहलोत की फोटो लगाई है । पायलट युग आते ही 7 साल तक बर्फ में पड़े रहे , फिर भी उफ्फ नहीं की। 

 जरा हाल सोचो महेंद्र सिंह रलावता का जो पायलट के आने से पहले गहलोत के साथ थे। फिर पायलट के करीबी रहे। पायलट के जमुना पार चले जाने के बाद , कांग्रेस द्वारा कलेक्टर कार्यालय पर ज्ञापन देने पहुंची कांग्रेस में भी सबसे आगे थे। लोगों के गुस्से का भी शिकार हुए । लेकिन डंटे रहे। क्यूँकि निष्ठा कांग्रेस से थी। क्या वह अब फिर पायलट के लौट आने से खुद असमंजस में खड़ा महसूस नहीं करते होंगे 

 दरअसल राजस्थान में कांग्रेसियों को अजमेर सहित कुछ गिने चुने ज़िलों में ही ज्यादा ऊँच नीच महसूस होती है। इसमें गलती दरअसल कांग्रेस आलाकमान की भी है। वह गलती यह है कि कांग्रेस आलाकमान एक या दो सीटें नहीं, जिले के जिले किसी भी एक नेता के सुपुर्द कर देता है। 

 और उस जिले भर के कांग्रेसियों के भविष्य का निर्धारण वही एक नेता अपनी उंगलियों पर नचा नचा कर करता रहता है। बाकी सब का मनोबल टूट जाता है। जिसकी वजह से इस तरह की स्थितियां उन जिलों में उत्पन्न हो जाती है। और उन जिलों की कमान पकड़कर व नेता प्रदेशभर का नेता बनने के ख्वाब देखने लगता है। कांग्रेस आलाकमान को चाहिए कि हर जिले में संतुलन कायम करें। और वह संतुलन ही है जो दरअसल कांग्रेस संगठन के अंदर लोकतंत्र की भावना बरकरार रखेगा। इस से किसी भी एक नेता के हाथ में पूरी ताकत कभी नहीं जा पाएगी और पूरे प्रदेश भर में कांग्रेस का हौसला बना रहेगा। 

 यह तो है कटु सत्य बाकी सब मोह माया ... 

 सोचते रहो किसकी फोटू लगाएं किस की नहीं ... इस जन्म में तय हो जाये तो मुझे भी बता देना 

 जय श्री कॄष्ण 

 नरेश राघानी मधुकर 
 प्रधान संपादक 
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