For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 126900652
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: पुष्कर घाटी,अजमेर में अनियंत्रित होकर बस खाई में गिरने की दुखद सूचना |  Ajmer Breaking News: विधानसभा अध्यक्ष देवनानी के आदेश बेअसर—अजमेर में खुलेआम मटन-चिकन बिक्री, सूचना केंद्र चौराहे पर जाम से लोग परेशान |  Ajmer Breaking News: अजमेर से पीसांगन मायरा भरने जा रही सवारियों से भरी बस पुष्कर घाटी से खाई में गिरी, एक महिला की मौत  |  Ajmer Breaking News: राजस्थान सर्व ब्राह्मण महासभा अजमेर के द्वारा भगवान परशुराम जन्मोत्सव के दो दिवसीय कार्यक्रम के तहत आज रविवार को विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। |  Ajmer Breaking News: अजमेर में ऑनलाइन सट्टेबाजी गिरोह का भंडाफोड़, 5 आरोपी गिरफ्तार |  Ajmer Breaking News: अक्षय तृतीया पर आस्था का सैलाब: 500 साल पुरानी परंपराओं से गूंजा पुष्कर,बद्रीनाथ से जुड़ा पुष्कर: अक्षय तृतीया पर दिखी अद्भुत श्रद्धा |  Ajmer Breaking News: पुष्कर में अक्षय तृतीया के अबूझ सावे पर राजपूत समाज के जयमल कोट में रविवार को सामाजिक समरसता और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। |  Ajmer Breaking News: आदर्श नगर थाना पुलिस की तत्परता से 7-8 साल का  बच्चे को सुरक्षित  परिजनों को किया सुपुर्द , |  Ajmer Breaking News: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कोलकाता के श्याम मंदिर और दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पूजा, सोनार बांग्ला का जताया विश्वास |  Ajmer Breaking News: अक्षय तृतीया पर बाल विवाहों की रोकथाम के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित | 

क़लमकार: हम सब डंडे का ज़ोर ही समझते हैं

Post Views 21

November 18, 2018

मेरे एक मित्र सिंगापुर गए वे वहां की बात बता रहे थे।

रात के दो बजे खाली सड़क पर दो युवतियां सड़क पार करने के लिए हरी बत्ती का इंतज़ार कर रही थीं। सड़क पर यातायात बिल्कुल नहीं था बावजूद इसके वे लड़कियां हरी बत्ती होने का इंतज़ार करती रही।

इसे उस देश का कल्चर और अनुशासन ही कहा जाएगा जो उन्हें बचपन से सिखाया जाता है।

एक हम हिन्दुस्तानी हैं कि लाल बत्ती होने पर भी सिग्नल तोड़ कर भाग छूटते हैं।

कारण ना तो हमें कभी यातायात के नियमों का पालन करना सिखाया गया है और ना ही अनुशासन।

कुछ मेट्रो शहरों को छोड़ दें तो सिग्नल तोड़ने पर कोई कार्रवाई भी नहीं होती जो इस तरह के कृत्य करने वालों को बढ़ावा देती है।

यातायात कर्मचारी कम हैं जो हैं वे उगाही में लगे रहते हैं।

इसका एक ही उपाय समझ आ रहा है आनेवाली नई पौध को हम छोटी उम्र से ही यातायात नियमों का पालन करना स्कूली पाठ्यक्रम में सिखाएं पर मौजूदा लोगों को तो डंडे के ज़ोर से ही सिखाना होगा।

सरकार को मेरी सलाह है कि जितना खर्च वह यातायात कर्मचारियों की भर्ती पर करे अगर उसका एक चौथाई सी सी टी वी कैमरों पर खर्च करे तो सरकार को ना केवल इन कैमरों की लागत वापस मिल पाएगी अपितु राजस्व भी हासिल होगा।


देश का आम नागरिक कोई भी काम बिना डंडे के डर के करता ही नहीं है इसीलिए डंडा चाहे वह किसी भी रूप में हो आवश्यक है।

जयहिंद।

राजेन्द्र सिंह हीरा

       अजमेर


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved