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November 10, 2018
लगता है दीपक हासानी जी उम्मीद छोड़ चुके हैं !
राजस्थान के विधानसभा चुनावों में एक महीने से भी कम का समय रह गया है।
भाजपा के दोनों संभावित उम्मीदवारों ने बिना इस बात का इंतज़ार किए कि उन्हें टिकट मिलती है या नहीं घर घर जाकर प्रचार करना शुरू कर दिया।
आखिर व्यक्ति से पहले पार्टी सर्वोपरि होती है।
वहीं दूसरी तरफ अजमेर उत्तर से कांग्रेस और सिन्धी समाज के नुमाइंदे और सम्भावित प्रत्याशी दीपक हासानी जी हैं।
ये भले ही राजनीति के अखाड़े में नए नए आए हैं पर राजनीति की समझ इनमें न के बराबर है।
सोशल मीडिया पर मैंने इनकी पहली चार लाइनें पढ़ी जिनमें व्याकरण की 8 गलतियां थीं।
इन्होंने अपना प्रचार प्रसार जिसे भी सौंप रखा है उसकी
काबलियत इसी बात से पता चलती है कि उसने मुसलमान भाइयों को मुहर्रम की बधाई दे दी।
सही काम के लिए सही व्यक्ति को चुनना भी एक गुण होता है।
पर विरले ही इसमें पारंगत होते हैं।
मुझे लगता है दीपक हासानी को एक नकारात्मक वातावरण ने घेर रखा है जो बाहर से ना तो ठंडी हवा को अन्दर जाने दे रहा है और ना ही अन्दर की गर्मी को बाहर आने दे रहा है।
इस घेरे में दीपक जी अन्दर ही अन्दर झुलस कर रह गए हैं। अब यह उनकी मजबूरी है या कुछ और , वे ही जाने।
मुझे ऐसा लगता है कि दीपक जी ने मन बना लिया है कि टिकट मिलने के बाद ही काम करेंगे जो कि बहुत ही घातक सोच है।
इस सोच से स्वार्थ को बू आती है। दीपक जी कांग्रेस के कार्यकर्त्ता हैं उन्हें टिकट मिले या न मिले पार्टी के लिए तो उन्हें काम करना ही चाहिए।
कहीं ऐसा तो नहीं दीपक हासानी जी टिकट की उम्मीद ही छोड़ चुके हों।