For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 174043663
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: अजमेर रेल मंडल के मुख्य स्टेशनों पर 3 और 4 नवंबर को 'डीएलसी 5.0' व शिकायत निवारण हेतु विशेष शिविर |  Ajmer Breaking News:  स्वगणना 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक प्रस्तावित द्वितीय चरण के लिए नियमित सहायक एवं तकनीकी सहायकों का जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित |  Ajmer Breaking News: उपभोक्ताओं के हितों को सुरक्षित रखते हुए सोमवार को दीपावली पर्व के परिप्रेक्ष्य में पैकेज कमोडिटी की पालना में औचक निरीक्षण किए गए। |  Ajmer Breaking News: महज 2 साल 10 माह की उम्र में प्रांश दगदी ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, 3 किलो वजन के साथ 1 मिनट  60 सेकेंड  स्केटिंग कर रचा इतिहास।। |  Ajmer Breaking News: अजमेर ऑफिस जा रही युवती से बैग छीनकर बाइक सवार बदमाश फरार, मामला दर्ज |  Ajmer Breaking News: वार्ड नंबर 11 में सामुदायिक भवन के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण कार्य का शुभारंभ, विधायक कोष से खर्च होंगे 11.80 लाख रुपये |  Ajmer Breaking News: अजमेर के बाजार में सरपंच की जेब से 50 हजार रुपये निकाल कर भाग रहे बदमाश को रंगे हाथों पकड़ा, कोतवाली थाना पुलिस के किया सुपुर् |  Ajmer Breaking News: ​पुष्कर मेला 2026 बाजारों में अतिक्रमण के खिलाफ नगर परिषद की सख्त कार्रवाई |  Ajmer Breaking News: खानचन्दानी सेवा संस्था दीपावली पर वृद्धजनों को नए वस्त्र वितरित  |  Ajmer Breaking News: घुघरा घाटी पर डिवाइडर बंद करने को लेकर ग्रामीणों का हंगामा, सड़क जाम कर जताया विरोध | 

क़लमकार: क्या न्यायपालिका अमित शाह के हिटलरी बयान को गम्भीरता से लेगी ?

Post Views 121

October 29, 2018

बरीमाला मन्दिर में महिलाओं के प्रवेश के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला लिया है उसका हर हालत में पालन होना ही चाहिए।

कुछ कट्टरपंथी अगर इस फैसले का विरोध कर रहे हैं तो उन पर सख्ती की जानी चाहिए। 

आखिर हम 21 वीं शताब्दी में जी रहे हैं और पुरातन आस्थाएं जो अप्रासंगिक हो गईं हैं बदली जानी ही चाहिएं।

अगर कुछ लोग वर्जनाओं में जीना चाहते हैं तो कानून उन्हें इसका अधिकार नहीं देता।

केरल सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराने में लगी हुई है इसका उसे श्रेय मिलना चाहिए।

यहां एक बात समझ में नहीं आई कि कैसे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जिनकी कि सरकार देश पर शासन कर रही है केवल विशुद्ध वोटों की राजनीति करते हुए न्यायपालिका  को एक तरह से निर्देशित कर रहे हैं कि उसे किस तरह के फैसले लेने चाहिएं।

अमित शाह का बयान जो कानून व्यवस्था के खिलाफ तो है ही यह संविधान विरुद्ध भी है।

अमित शाह को इतना ही फैसले करवाने का शौक है तो उन्हें राजनीति छोड़कर  न्यायपालिका से जुड़ना चाहिए।

जो व्यक्ति केरल सरकार के मना करने के बावजूद उद्घाटन से पहले कन्नूर एयरपोर्ट पर उतरे मतलब जो खुद व्यवस्थाएं तोड़ने की पहल करे , जो नियम कायदे को ना माने वह व्यक्ति देश की सर्वोच्च न्यायपालिका से कहता है कि फैसले ऐसे ना दिए जाएं जो लागू न हो सकें।

कितना हास्यास्पद लगता है।


अमित शाह के बयान से ऐसा लग रहा है ( भले ही यह सच नहीं है) कि सरकार का न्यायपालिका पर कुछ नियंत्रण है , जो कि अच्छी स्थिति नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीतिज्ञ अमित शाह के इस बयान का कुछ अच्छा मतलब नहीं निकालेंगे।


मेरा ऐसा मानना है मोदीजी को अमित शाह के  सुप्रीम कोर्ट के विरुद्ध दिए गए इस बयान पर अवश्य ही संज्ञान लेना चाहिए।


अगर ऐसा ना हुआ तो सुप्रीम कोर्ट की साख को धक्का लगेगा।


वैसे सुप्रीम कोर्ट को अमित शाह के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य ही देनी चाहिए।

जयहिंद।

राजेन्द्र सिंह हीरा

        अजमेर


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved