For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 120839885
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: देवनानी विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि से हुए विभूषित, तकनीकी शिक्षा के साथ मानवीय मूल्यों का समावेश अनिवार्य: श्री वासुदेव देवनानी, अध्यक्ष-राजस्थान विधानसभा |  Ajmer Breaking News: जिले में घरेलु गैस सिलेण्डरों के अवैध उपयोग के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए शुक्रवार को 35 घरेलु गैस सिलेण्डर जब्त किए गए।  |  Ajmer Breaking News: पीएम-किसान उत्सव दिवस ,जिला स्तरीय कार्यक्रम राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र तबीजी में हुआ आयोजित |  Ajmer Breaking News: जिला कलक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने किए गैस एजेन्सियों के औचक निरीक्षण,जिलेभर में एक साथ निरीक्षण किए अधिकारियों ने, आमजन को गैस मिलना किया सुनिश्चित |  Ajmer Breaking News: पुष्कर में 93 लाख का बकाया: 68 सार्वजनिक पानी कनेक्शन कटे, गर्मियों में जल संकट की आशंका |  Ajmer Breaking News: एलपीजी गैस सिलेंडर की अनुपलब्धता और बढ़ाई गए दामों को लेकर कांग्रेस का हल्ला बोल प्रदर्शन, |  Ajmer Breaking News: होली के दिन दिल्ली में एक युवक की हुई नृशंस हत्या के खिलाफ खटीक समाज हुआ लामबंद, |  Ajmer Breaking News: ब्रांडेड कंपनी के नकली ट्रेडमार्क लगाकर पैकिंग कर बाजार में माल बेचने वाले 2 युवकों को हरिभाऊ उपाध्याय नगर थाना पुलिस ने किया गिरफ्तार, |  Ajmer Breaking News: उत्तर पश्चिम रेलवे के अजमेर मंडल में चित्तोडगढ – उदयपुर  सेक्शन के घोसुन्दा –पांडोली  स्टेशनो के मध्य रेल संचालन को अधिक सुरक्षित एवं सुचारु बनाने के उद्देश्य से लेवल क्रॉसिंग गेट का आधुनिकीकरण |  Ajmer Breaking News: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से बोर्ड परीक्षाओं के आयोजन परीक्षा परिणाम एवं मूल्यांकन व्यवस्था के बारे में जानकारी देने के लिए एक प्रेस वार्ता का आयोजन | 

हेल्थ न्यूज़: जोंक हर लेती है इंसानों का मर्ज (डॉ. दीपक आचार्य)

Post Views 271

October 23, 2017

jock har leeti h insaino ka murj (Do.deepak achariya)

जोंक हर लेती है इंसानों का मर्ज,

देती है सेहत का वरदान

डॉ. दीपक आचार्य


      पानी में पायी जाने वाली जोंक केवल मामूली जलचर ही नहीं बल्कि इंसानों के लिए आरोग्य देने वाली है। इसका प्रयोग त्वचा एवं रक्त संबंधित कई बीमारियों में किया जाता है।

       पुराने जमाने में लोग इन जलचर जीवों के माध्यम से अपनी कई सारी बीमारियों का ईलाज किया करते थे। फोड़ा-फुँसी या रक्त विकार हो जाने अथवा चमड़ी से संबंधित बीमारियों के निवारण में जोंक किसी डॉक्टर से कम नहीं है।

       इस बात को बीते युगों के लोग अच्छी तरह जानते थे। कालान्तर में ज्ञान और अनुसंधान के अभाव में इन परंपरागत और पुरातन महत्व की कई चिकित्सा पद्धतियों और ईलाज के मामूली किन्तु रामबाण नुस्खे हाशिये पर आते गए और धीरे-धीरे लुप्त हो            गए।

       अब इन्हीं पुरातन चिकित्सा पद्धतियों पर चिकित्सा जगत का ध्यान गया है तथा इन हानिरहित और कारगर प्रयोगों पर नए सिरे से अनुसंधान किया जा रहा है।

       प्राचीन भारतीय चिकित्सा संसार से विलुप्त हो चुकी अपनी तरह की कई चिकित्सा पद्धतियाँ ऎसी हैं जिनकी ओर न केवल भारतीयों बल्कि विदेशी चिकित्सकों में भी जिज्ञासाउत्सुकता और आकर्षण बना हुआ है।

       इन्हीं में एक है जलौका चिकित्सा। इसे अब अपनाया जाने लगा है। इस पद्धति में जलौका अर्थात जोंक से चिकित्सा की जाती है।

       जगने लगा है आकर्षण

       जलौका चिकित्सा को लेकर सभी जगह आकर्षण बढ़ रहा है। राजस्थान में इस चिकित्सा को प्रोत्साहित कर रहे जलौका चिकित्सा विशेषज्ञजहाजपुर (भीलवाड़ा) के आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. युगलकिशोर चतुर्वेदी बताते हैं कि रक्तमोक्षण विधियों का प्रयोग कर शरीर से दूषित रक्त निकाल कर रोगियों को बीमारियों से मुक्ति दिलायी जाती है।

       शुरू-शुरू में लोग इस पद्धति से चिकित्सा कराने में थोड़ा-बहुत हिचक दिखाते हैं किन्तु समझाने और उपचार ले लेने के उपरान्त अच्छा अनुभव व आरोग्य महसूस करते हैं। डॉ. चतुर्वेदी अकेले इन पद्धतियों के जरिये पिछले वर्षों में 15 से 20 हजार से अधिक लोगों का सफल उपचार कर चुके हैं।

       दर्दमुक्त और सुकूनदायी है यह

       बच्चों से लेकर बूढ़ों तक के लिए यह कारगर है वहीं दर्दमुक्त है इसलिए लोग इसे पसंद करते हैं।  जलौका  चर्मरोगों के निवारण की दिशा में रामबाण है।         

       जोंक जहरीली और विषहीन दोनों प्रकार की होती है किन्तु रक्तमोक्षण चिकित्सा में विषहीन जोंक ही काम में ली जाती है। जोंक आमतौर पर कमल की खेती वाले जलाशयों में होती है और चिकित्सा में प्रयुक्त होने वाली जोंक 3 से 7 सेमी लम्बाई की होती हैं। 

       ये जौंकें स्थानीय स्तर पर भी तालाबों में मिल जाया करती हैं लेकिन जलौका विशेषज्ञ इन्हें अम्बालाआगराअहमदाबाद सहित देश केे अन्य स्थानों से मंगवाते हैं। इनके रोम और धारियों को देखकर जानकार लोग इनकी उपयोगिता का पता कर लेते हैं।

       ऎसे चूस लेती है दूषित खून

       जलौका चिकित्सा में चर्मरोग से प्रभावित बिन्दुओं पर जोंक चिपका दी जाती है जो कि दूषित रक्त चूस लेती है। विषहीन जोंकों का उपयोग किया जाता है और एक मरीज पर एक बार में ही पन्द्रह मिनट से लेकर 3 घण्टे तक अवधि में ये प्रयुक्त होती हैं। इसके बाद उन्हें जलाशय में छोड़ दिया जाता है। 

       एक जोंक एक बार में 2 से 5 मिलीलीटर दूषित खून चूस लेती है। रक्त शुद्ध हो जाने के बाद ये खून चूसना बंद कर देती हैं। तब हल्दी और अजवाईन का चूर्ण डालकर इसे हटा लिया जाता है। जलौका के मुँह में हल्दी या अजवाईन का बुरादा डालकर इसे वमन करवाया जाता है।

       जोंकों के पालनहार डॉक्टर

       उन्होंने 100 जोंकें अपने जहाजपुर स्थित औषधालय में पाल रखी हैं जबकि अपने देवली स्थित आवास में 500 जोंक पाली हुई हैं जिनके लिए सात दिन में मिट्टी और 24 घण्टे में पानी बदलते रहना पड़ता है। जलीय वनस्पति पर जिन्दा रहने वाली जोंक के पोषण लिए कृत्रिम रूप से सिंघाड़े का आटा उपयोग में लाया जाता है।

       आत्मप्रेरणा से अपनाया इसे

       डॉ. युगलकिशोर चतुर्वेदी बताते हैं कि उन्होंने इस चिकित्सा पद्धति को आत्मप्रेरणा से अपनाया। वे कहते हैं कि पुरातन भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को पुनर्जीवित किया जाए तो लोक स्वास्थ्य रक्षा के लक्ष्यों को और अधिक तेजी से पाया जा सकता है।

       जलौका सहित कई प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों का वजूद फिर से स्थापित करने खास प्रयासों को अपनाने की जरूरत है। इसके लिए निरन्तर शोध अध्ययन एवं अनुसंधान की आवश्यकता है।

ajmer news , rajasthan news , horizon , horizon hind
ajmer news , rajasthan news , horizon , horizon hind
ajmer news , rajasthan news , horizon , horizon hind

© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved