राजस्थान न्यूज़: अजमेर में 32 पार्षदों वाली भाजपा की अनामिका शर्मा को मिले 43 वोट, पाली में 21 पार्षदों के बावजूद नमिता बुबकिया 33 वोट लेकर जीतीं, कांग्रेस की सुमित्रा जैन 3 मतों पर सिमटीं जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकायों में सोमवार को हुए मेयर, सभापति और पालिकाध्यक्ष चुनावों में कई जगह वार्ड चुनाव के संख्या-बल से अलग नतीजे सामने आए। सबसे ज्यादा चर्चा अजमेर और पाली नगर निगम की रही, जहां भारतीय जनता पार्टी अपने दम पर बहुमत में नहीं होने के बावजूद मेयर पद हासिल करने में सफल रही। अजमेर में भाजपा की अनामिका शर्मा 43 वोट लेकर मेयर बनीं, जबकि पाली में भाजपा की नमिता बुबकिया ने बहुमत के लिए जरूरी 33 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। सात नगर निगमों के उपलब्ध परिणामों में उदयपुर, अजमेर, अलवर, पाली, भीलवाड़ा और भरतपुर में भाजपा तथा बीकानेर में कांग्रेस का मेयर निर्वाचित हुआ है। अजमेर में भाजपा के 32 पार्षद, अनामिका शर्मा को मिले 43 वोट अजमेर नगर निगम का परिणाम वार्ड चुनाव के बाद बने समीकरण से अलग रहा। 80 सदस्यीय नगर निगम में कांग्रेस के 37 पार्षद निर्वाचित हुए थे और वह सबसे बड़ी पार्टी थी। भाजपा के पास 32 पार्षद थे, जबकि 11 निर्दलीय चुनाव जीतकर आए थे। बोर्ड बनाने के लिए 41 पार्षदों का समर्थन आवश्यक था। चुनाव से पहले कांग्रेस बहुमत से चार और भाजपा नौ मत दूर थी। मेयर पद के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अनामिका शर्मा को 43 और कांग्रेस की किरण गढ़वाल को 37 वोट मिले। इस तरह अनामिका शर्मा ने छह वोट के अंतर से जीत दर्ज की। भाजपा के पास अपने 32 निर्वाचित पार्षद थे, जबकि उसकी प्रत्याशी को कुल 43 वोट मिले यानी पार्टी के मूल संख्या-बल से 11 वोट अधिक हासिल हुए। मतदान गुप्त होने के कारण यह आधिकारिक रूप से तय नहीं किया जा सकता कि ये अतिरिक्त वोट किन पार्षदों ने दिए। हालांकि परिणाम से यह स्पष्ट है कि मेयर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में उसके 32 सदस्यीय दलीय संख्या-बल से अधिक समर्थन आया। चुनाव से पहले भी 11 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका को निर्णायक माना जा रहा था। पाली में और बड़ा फेरबदल, 21 पार्षदों वाली भाजपा को मिले 33 वोट पाली नगर निगम का परिणाम और भी उल्लेखनीय रहा। यहां 65 वार्डों के चुनाव में कांग्रेस ने 29 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का स्थान हासिल किया था। भाजपा के सिर्फ 21 पार्षद थे, जबकि 15 निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए थे। बहुमत का आंकड़ा 33 था। मेयर चुनाव में भाजपा की नमिता बुबकिया ने सीधे 33 वोट हासिल कर बहुमत का आंकड़ा छू लिया और महापौर निर्वाचित हो गईं। निर्दलीय प्रत्याशी राजबाला हिंगड़ को 29 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुमित्रा जैन को केवल 3 वोट मिले। सभी 65 पार्षदों ने मतदान किया। इस परिणाम में भाजपा प्रत्याशी को पार्टी के 21 पार्षदों की तुलना में 12 वोट अधिक मिले। वहीं वार्ड चुनाव में कांग्रेस के 29 पार्षद जीतकर आए थे, लेकिन उसकी अधिकृत मेयर प्रत्याशी को केवल तीन मत मिले। पाली में मुकाबला त्रिकोणीय था, क्योंकि कांग्रेस के टिकट पर पार्षद बनीं राजबाला हिंगड़ मेयर पद के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में थीं। अलवर में भी बहुमत से दूर थी भाजपा, सुमनलता को मिले 42 वोट अलवर नगर निगम में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल ने कांग्रेस की कमलेश शर्मा को हराकर मेयर पद हासिल किया। सुमनलता को 42 वोट मिले जबकि कमलेश शर्मा को 23 मत मिले। दोनों के बीच 19 वोट का अंतर रहा। अलवर के 65 वार्डों में भाजपा ने 28 और कांग्रेस ने 23 सीटें जीती थीं। भाजपा बहुमत के 33 के आंकड़े से पांच सीट पीछे थी। इसके बावजूद मेयर चुनाव में उसकी प्रत्याशी को 42 वोट मिले। चुनाव से पहले निर्दलीय पार्षदों के समर्थन को दोनों प्रमुख दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था। उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी बने मेयर उदयपुर नगर निगम में भाजपा के पारस सिंघवी ने कांग्रेस की डॉ. पूनम कंवर को हराकर मेयर पद हासिल किया। यहां भाजपा वार्ड चुनाव में ही स्पष्ट बहुमत हासिल कर चुकी थी। 80 सदस्यीय निगम में भाजपा के 53 पार्षद थे, जबकि कांग्रेस के 23 पार्षद निर्वाचित हुए थे। इसलिए अजमेर, पाली और अलवर की तरह उदयपुर में भाजपा को बोर्ड बनाने के लिए अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता नहीं थी। पारस सिंघवी की जीत का अंतर 30 वोट रहा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्हें भाजपा के दलीय संख्या-बल के अतिरिक्त दो निर्दलीय पार्षदों का भी समर्थन मिला। बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला बने मेयर बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने अपना बोर्ड बनाया। पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला ने भाजपा के सुरेंद्र सिंह को हराकर मेयर पद हासिल किया। वार्ड चुनाव में कांग्रेस को 80 में से 42 सीटें मिली थीं और वह 41 के बहुमत के आंकड़े से पहले ही एक सीट आगे थी। भाजपा के 27 पार्षद निर्वाचित हुए थे। सात नगर निगमों की परिणाम सूची में अनिल कल्ला की जीत का अंतर 30 दर्ज किया गया है। अटरू में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई कृष्ण मुरारी हारे बारां जिले की अटरू नगर पालिका में कांग्रेस की निशा नैनीवाल ने भाजपा प्रत्याशी कृष्ण मुरारी दिलावर को तीन वोट से हराकर अध्यक्ष पद हासिल किया। कृष्ण मुरारी दिलावर राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के छोटे भाई हैं और वार्ड नंबर 5 से भाजपा के पार्षद निर्वाचित हुए थे। अटरू के 25 वार्डों में कांग्रेस ने 14 सीटें जीतकर अपने दम पर बहुमत हासिल किया था। भाजपा को 10 और निर्दलीय को एक सीट मिली थी। यहां बहुमत का आंकड़ा 13 था। कांग्रेस की निशा और भाजपा के कृष्ण मुरारी दिलावर अध्यक्ष पद के लिए आमने-सामने थे। अटरू का चुनाव इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि वार्ड चुनाव में कृष्ण मुरारी दिलावर की जीत के बाद उन्हें नगर पालिका अध्यक्ष पद का प्रमुख भाजपा दावेदार माना जा रहा था। लेकिन अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस की निशा नैनीवाल ने जीत दर्ज कर कांग्रेस का बोर्ड बरकरार रखा। सात नगर निगमों में भाजपा के 6, कांग्रेस का 1 मेयर अजमेर का परिणाम आने के बाद सातों नगर निगमों की तस्वीर साफ हो गई है। उदयपुर में पारस सिंघवी, अजमेर में अनामिका शर्मा, अलवर में सुमनलता अग्रवाल और पाली में नमिता बुबकिया भाजपा से चुनाव जीतकर मेयर बनी हैं। भीलवाड़ा में जसवंत कंवर और भरतपुर में अनुराधा सिंह पहले ही भाजपा से निर्विरोध महापौर चुनी जा चुकी थीं। बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला ने मेयर पद हासिल किया। इन नतीजों में अजमेर और पाली का संख्या-गणित सबसे अलग रहा। अजमेर में वार्ड चुनाव में कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन 32 पार्षदों वाली भाजपा ने मेयर पद हासिल किया। पाली में भी कांग्रेस 29 पार्षदों के साथ सबसे बड़ा दल थी, जबकि 21 पार्षदों वाली भाजपा की नमिता बुबकिया मेयर निर्वाचित हुईं।
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राजस्थान न्यूज़: सीकर। सीकर नगर परिषद में सभापति पद पर कांग्रेस की खतीजा बानो ने जीत दर्ज की है। सोमवार को हुए मतदान में खतीजा बानो को कुल 41 वोट मिले, जबकि भाजपा की सभापति प्रत्याशी कंचन खड़ोलिया को 24 मत हासिल हुए। इस तरह खतीजा बानो ने कंचन खड़ोलिया को 17 वोटों के अंतर से हराकर सीकर नगर परिषद के सभापति की कुर्सी हासिल कर ली। सीकर नगर परिषद के 65 वार्डों के चुनाव में कांग्रेस पहले ही 38 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर चुकी थी। भाजपा के 22 पार्षद जीते थे, जबकि चार निर्दलीय और एक आरएलपी पार्षद निर्वाचित हुआ था। ऐसे में सभापति चुनाव के परिणाम में खतीजा बानो को कांग्रेस के मूल संख्या-बल से तीन वोट अधिक मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी कंचन खड़ोलिया को भी भाजपा के 22 निर्वाचित पार्षदों की तुलना में दो वोट अधिक मिले। मतदान गुप्त होने के कारण यह तय नहीं किया जा सकता कि अतिरिक्त मत किन पार्षदों की ओर से आए। रिटर्निंग अधिकारी ने दिया निर्वाचन प्रमाण पत्र मतगणना के बाद रिटर्निंग अधिकारी सुभाष चंद्र ने खतीजा बानो को सभापति पद पर निर्वाचित घोषित किया और उन्हें निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंपा। जीत के बाद कांग्रेस खेमे में उत्साह देखने को मिला। खतीजा बानो ने विधायक राजेंद्र पारीक, कांग्रेस पार्षदों और अपने परिवार के सदस्यों के साथ विक्ट्री साइन बनाकर ग्रुप फोटो भी खिंचवाया। खतीजा बानो पूर्व सभापति जीवण खां की पत्नी हैं। वह इस बार वार्ड नंबर 16 से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद चुनी गई थीं। जीवण खां भी नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस से पार्षद निर्वाचित हुए हैं। चुनाव से पहले ही कांग्रेस ने सभापति पद के लिए खतीजा बानो को उम्मीदवार घोषित किया था, जबकि भाजपा ने कंचन खड़ोलिया को मैदान में उतारा था। दोनों के बीच सीधा मुकाबला था। सुबह सबसे पहले वोट डालने पहुंचीं थीं भाजपा प्रत्याशी कंचन इससे पहले सोमवार सुबह 10 बजे सभापति पद के लिए मतदान शुरू हुआ था। मतदान शुरू होने के बाद सबसे पहले भाजपा की सभापति प्रत्याशी कंचन खड़ोलिया और पूर्व विधायक रतनलाल जलधारी के पोते यश जलधारी वोट डालने पहुंचे थे। भाजपा के पार्षदों को एक बस में एक साथ नगर परिषद के मतदान स्थल पर लाया गया था। यश जलधारी वार्ड नंबर 11 से भाजपा पार्षद हैं। बाद कांग्रेस के पार्षद भी बस में एक साथ मतदान के लिए पहुंचे। दोनों दलों ने मतदान से पहले अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए बाड़ेबंदी की थी। कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद चुनाव से पहले क्रॉस वोटिंग को लेकर राजनीतिक चर्चा बनी हुई थी। कांग्रेस के 38 पार्षद होने के कारण सामान्य संख्या-गणित में उसकी स्थिति मजबूत थी, जबकि भाजपा के पास 22 पार्षद थे। सभी 65 वोट पड़े, खतीजा को 41 और कंचन को 24 मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद मतगणना की गई। कुल 65 वोटों में खतीजा बानो के खाते में 41 और कंचन खड़ोलिया के खाते में 24 वोट आए। दोनों प्रत्याशियों को मिले मतों का योग भी 65 है। आखिरकार कांग्रेस की खतीजा बानो ने 17 मतों के अंतर से सभापति पद जीत लिया। वार्ड चुनाव में कांग्रेस 38 सीटों के साथ बहुमत के 33 के आंकड़े से पांच सीट आगे थी। सभापति चुनाव में खतीजा को 41 वोट मिलने से कांग्रेस समर्थित खेमे ने अपने चुनावी संख्या-बल से आगे समर्थन प्राप्त किया। वहीं कंचन को भी भाजपा की 22 सीटों से दो ज्यादा, यानी 24 वोट मिले। चौथी बार पार्षद बनी हैं खतीजा बानो खतीजा बानो सीकर की स्थानीय राजनीति में जाना-पहचाना नाम हैं और चौथी बार पार्षद बनी हैं। वह निवर्तमान सभापति जीवण खां की पत्नी हैं। वार्ड चुनाव के बाद से ही सभापति पद के लिए उनका नाम कांग्रेस के प्रमुख दावेदारों में था। कांग्रेस ने 38 सीटों के साथ लगातार नगर परिषद में मजबूत स्थिति बनाई थी। खतीजा बानो की जीत के साथ सीकर नगर परिषद में कांग्रेस ने सभापति पद भी अपने पास बनाए रखा है। अब नगर परिषद की अगली राजनीतिक परीक्षा उपसभापति पद के चुनाव में होगी। अब 22 सितंबर को उपसभापति का चुनाव सभापति का फैसला होने के बाद अब मंगलवार, 22 सितंबर को सीकर नगर परिषद में उपसभापति पद के लिए चुनाव होगा। राज्य निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार सुबह 10 बजे बैठक शुरू होगी और सुबह 11 बजे तक नामांकन पत्र प्रस्तुत किए जा सकेंगे। सुबह 11:30 बजे से नामांकन पत्रों की जांच होगी। उम्मीदवार दोपहर 2 बजे तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। यदि नाम वापसी के बाद एक से अधिक प्रत्याशी मैदान में रहते हैं तो दोपहर 2:30 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान कराया जाएगा। मतदान समाप्त होते ही मतगणना होगी और उसी दिन उपसभापति का परिणाम घोषित कर दिया जाएगा।
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राजस्थान न्यूज़: खाटूश्यामजी (सीकर)। खाटूश्यामजी नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव को लेकर सोमवार को सियासी माहौल और गरमा गया। वार्ड नंबर 10 से कांग्रेस पार्षद लक्ष्मी देवी के मतदान के लिए नहीं पहुंचने के बाद अब भाजपा नेता और कार्यकर्ता उनके पक्ष में धरने पर बैठ गए हैं। भाजपा के गजानंद कुमावत, पवन पुजारी सहित कई कार्यकर्ताओं ने मौके पर धरना शुरू किया है। दूसरी ओर लक्ष्मी देवी के ससुर सागर मल झिंझवाडिया ने पूरे मामले को लेकर कांग्रेस पर आरोप लगाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस जांच कर रही है। वहीं, जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी कपिल उपाध्याय की ओर से मतदान का समय शाम 5 बजे तक बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है। सामान्य चुनाव कार्यक्रम के अनुसार खाटूश्यामजी नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक होना था। कांग्रेस पार्षद के समर्थन में भाजपा का धरना इस घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प स्थिति यह बनी है कि लक्ष्मी देवी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर पार्षद बनी हैं, लेकिन उनके मतदान के लिए नहीं पहुंचने के बाद भाजपा नेता और कार्यकर्ता उनके पक्ष में धरने पर बैठे हैं। भाजपा से जुड़े गजानंद कुमावत, पवन पुजारी सहित कार्यकर्ताओं ने मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठाई है। इससे पहले लक्ष्मी देवी के परिजनों की ओर से उनके कथित अपहरण की आशंका जताते हुए पुलिस को शिकायत देने की बात सामने आई थी। अब परिवार की ओर से कांग्रेस पर भी आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही परिस्थितियां स्पष्ट होंगी। भाजपा प्रत्याशी प्रेम देवी की रिश्तेदार बताई जा रहीं लक्ष्मी देवी सियासी घटनाक्रम के बीच यह भी बताया जा रहा है कि कांग्रेस पार्षद लक्ष्मी देवी नगर पालिका अध्यक्ष पद की भाजपा प्रत्याशी प्रेम देवी की रिश्तेदार हैं। इस रिश्तेदारी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है, क्योंकि नगर पालिका में भाजपा और कांग्रेस के बीच संख्या-बल बराबर है और प्रत्येक पार्षद का मत महत्वपूर्ण है। खाटूश्यामजी नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस ने विनीता पूनिया और भाजपा ने प्रेम देवी को प्रत्याशी बनाया है। नगर पालिका में कुल 20 पार्षद हैं और अध्यक्ष बनने के लिए 11 मतों की आवश्यकता है। भाजपा-कांग्रेस के 8-8 पार्षद, इसलिए हर वोट महत्वपूर्ण खाटूश्यामजी नगर पालिका के वार्ड चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने 8-8 सीटें जीती हैं। इसके अलावा तीन निर्दलीय और एक आरएलपी पार्षद निर्वाचित हुआ है। किसी भी दल को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में अध्यक्ष पद के चुनाव में एक भी पार्षद की अनुपस्थिति चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है। कांग्रेस पार्षद लक्ष्मी देवी के मतदान के लिए नहीं पहुंचने के कारण मामला और संवेदनशील हो गया है। लक्ष्मी देवी वार्ड नंबर 10 से कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुई थीं। उन्होंने भाजपा की ममता देवी को 37 वोटों के अंतर से हराया था और उन्हें कुल 172 मत मिले थे। लक्ष्मी देवी के ससुर ने कांग्रेस पर लगाए आरोप इस बीच लक्ष्मी देवी के ससुर सागर मल झिंझवाडिया भी सामने आए हैं और उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाए हैं। परिवार की ओर से पहले पार्षद के कथित अपहरण की आशंका जताई गई थी। अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। इसलिए पार्षद की अनुपस्थिति, उनके वर्तमान ठिकाने अथवा किसी राजनीतिक दल की भूमिका को लेकर जांच पूरी होने से पहले किसी आरोप को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। चुनाव अधिकारी ने बढ़ाया मतदान का समय घटनाक्रम के बीच मतदान प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देश पर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी कपिल उपाध्याय ने मतदान के लिए समय बढ़ाकर शाम 5 बजे तक कर दिया है। राज्य निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार सामान्य रूप से निकाय अध्यक्ष पद के लिए मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित था और मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद मतगणना होनी थी। ऐसे में खाटूश्यामजी में मतदान का समय बढ़ाया जाना मौजूदा विवाद के बीच महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि लक्ष्मी देवी शाम 5 बजे तक मतदान स्थल पहुंचती हैं या नहीं और अध्यक्ष पद के लिए अंतिम संख्या-गणित क्या रहता है। मौके पर पुलिस, नतीजे पर टिकी नजर मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस समर्थकों की मौजूदगी के कारण राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। पुलिस मौके पर स्थिति पर नजर रख रही है और पार्षद से जुड़े मामले की जांच कर रही है। 20 सदस्यीय नगर पालिका में भाजपा और कांग्रेस दोनों के पास 8-8 पार्षद हैं, इसलिए अध्यक्ष चुनाव का परिणाम निर्दलीय, आरएलपी और किसी भी अनुपस्थित पार्षद की स्थिति से सीधे प्रभावित हो सकता है। अब मतदान समाप्त होने और मतगणना के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि खाटूश्यामजी नगर पालिका में किसका बोर्ड बनता है।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: मुंबई। बॉलीवुड के स्टार कपल दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के घर एक बार फिर खुशियों ने दस्तक दी है। दोनों शनिवार, 19 सितंबर 2026 को दूसरी बार माता-पिता बने हैं। दीपिका ने दूसरी बेटी को जन्म दिया है। कपल ने सोशल मीडिया पर एक बेहद प्यारा पोस्ट साझा कर अपने फैंस के साथ यह खुशखबरी शेयर की। दीपिका और रणवीर ने अपने संयुक्त इंस्टाग्राम पोस्ट में नवजात बच्ची के छोटे-छोटे फुटप्रिंट की तस्वीर शेयर की। इसके साथ उन्होंने लिखा—“Welcome baby girl! 19/9/2026. Dua, Deepika and Ranveer.” पोस्ट में नजर से बचाने वाला इमोजी भी लगाया गया है। हालांकि कपल ने फिलहाल अपनी दूसरी बेटी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। दुआ बनी बड़ी बहन दीपिका और रणवीर की पहली बेटी दुआ पादुकोण सिंह का जन्म 8 सितंबर 2024 को हुआ था। अब करीब दो साल बाद परिवार में दूसरी बेटी के आने से दुआ बड़ी बहन बन गई हैं। खास बात यह है कि दोनों बेटियों का जन्म सितंबर महीने में हुआ है। कपल की ओर से दूसरी बेटी के जन्म की घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और फैंस ने दोनों को शुभकामनाएं दीं और नए मेहमान का स्वागत किया। अप्रैल में की थी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा दीपिका और रणवीर ने इसी साल अप्रैल में अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की थी। उस समय उन्होंने एक खास पोस्ट के जरिए फैंस को बताया था कि उनका परिवार एक बार फिर बढ़ने वाला है। अब सितंबर में दूसरी बेटी के जन्म के साथ कपल के घर एक और नन्ही सदस्य आ गई है। शादी के छह साल बाद चार लोगों का हुआ परिवार दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने नवंबर 2018 में इटली में शादी की थी। शादी के करीब छह साल बाद सितंबर 2024 में दोनों पहली बार माता-पिता बने और बेटी दुआ का स्वागत किया। अब दूसरी बेटी के जन्म के बाद उनका परिवार चार सदस्यों का हो गया है। दीपिका और रणवीर अपने पारिवारिक जीवन को काफी निजी रखते हैं और दुआ की तस्वीरें भी सीमित मौकों पर ही साझा की हैं। दूसरी बेटी के जन्म की जानकारी भी उन्होंने बेहद सादगी से फुटप्रिंट वाली पोस्ट के जरिए दी है। राधाष्टमी के दिन आई नन्ही परी इस बार 19 सितंबर को राधाष्टमी का पर्व भी मनाया जा रहा है। ऐसे में दीपिका और रणवीर की दूसरी बेटी का जन्म इसी शुभ अवसर पर हुआ है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर फैंस लगातार कपल को बधाई दे रहे हैं। फिलहाल कपल ने नवजात बच्ची की तस्वीर या नाम साझा नहीं किया है। फैंस अब यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि दीपिका और रणवीर अपनी दूसरी बेटी का क्या नाम रखते हैं।
Read more 20th Sep 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: तिरुपति/नई दिल्ली। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के प्रसिद्ध श्रीवारी लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी की कथित मिलावट के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। ED के मुताबिक मंगला को हैदराबाद जोनल कार्यालय ने 17 सितंबर को हिरासत में लिया था और शुक्रवार को जारी बयान में कार्रवाई की जानकारी दी गई। बाद में उन्हें विशाखापत्तनम की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। ED का आरोप है कि TTD को जिस सामग्री की आपूर्ति ‘एगमार्क स्पेशल ग्रेड काउ घी’ बताकर की गई, उसमें वास्तविक गाय के घी के स्थान पर रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल, पामोलिन और कई रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने MG-90, मोनोग्लिसराइड्स, Myvacet Soft 400 और acetic acid ester जैसे पदार्थों का भी उल्लेख किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन सामग्रियों को मिलाकर ऐसा उत्पाद तैयार किया गया जिसे रिकॉर्ड में शुद्ध गाय के घी के रूप में दिखाया गया। ₹230 करोड़ की कथित सप्लाई, ₹96 करोड़ का घी मंगला से जुड़ा ED की जांच के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच TTD को कथित रूप से करीब ₹230 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी सप्लाई किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इसमें लगभग ₹96 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी कैलाश चंद मंगला की इकाई में तैयार किया गया था। इसलिए ₹230 करोड़ की पूरी राशि को अकेले सुकृति फूड्स द्वारा तैयार घी की रकम मानना सही नहीं होगा; ED ने व्यापक कथित सप्लाई नेटवर्क के लिए ₹230 करोड़ और मंगला से जुड़े निर्माण के लिए करीब ₹96 करोड़ का आंकड़ा बताया है। जांच एजेंसी ने मंगला को इस कथित नेटवर्क का सह-साजिशकर्ता बताया है। ED का दावा है कि उन्होंने मिलावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जुटाने, अपने परिसर में कथित मिलावटी घी तैयार करने और इसे अलग-अलग कारोबारी इकाइयों के माध्यम से सप्लाई कराने में भूमिका निभाई। एजेंसी ने Sri Vyshnavi Dairy Specialities, Malganga Milk & Agro Products और A.R. Dairy Foods जैसी इकाइयों के जरिए सप्लाई समन्वय किए जाने का आरोप भी लगाया है।खरीद-बिक्री के फर्जी रिकॉर्ड बनाने का भी आरोप ED के मुताबिक कथित मिलावट को छिपाने के लिए घी और रिफाइंड पाम ऑयल की खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया। एजेंसी का आरोप है कि ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए जिनसे यह दिखाया जा सके कि उत्पादन और सप्लाई वास्तविक गाय के घी की थी, जबकि जांच में दूसरी सामग्री के उपयोग का दावा सामने आया। इन आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच तिरुपति ईस्ट पुलिस की उस FIR से जुड़ी है जिसमें कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार के जरिए TTD को मिलावटी घी सप्लाई करने के आरोप लगाए गए थे। उसी कथित अपराध से पैदा हुई रकम और वित्तीय लेन-देन की जांच ED PMLA के तहत कर रही है।इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी के प्रमोटर की भी गिरफ्तारी कैलाश चंद मंगला इस मामले में गिरफ्तार होने वाले पहले कारोबारी नहीं हैं। ED इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क से जुड़े प्रमोटर एवं निदेशक विपिन जैन को भी इसी जांच में गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी अब कथित सप्लाई चेन, भुगतान, विभिन्न कारोबारी संस्थाओं और घी के निर्माण एवं बिक्री रिकॉर्ड की जांच आगे बढ़ा रही है।‘पशु चर्बी’ के पुराने विवाद से अलग है ED का मौजूदा दावा तिरुपति लड्डू विवाद में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ED के मौजूदा बयान में कथित मिलावट के रूप में पाम आधारित तेल और रासायनिक पदार्थों का उल्लेख किया गया है; एजेंसी ने इस कार्रवाई में पशु चर्बी मिलने का दावा नहीं किया है। इससे पहले CBI द्वारा गठित SIT की जांच में जांचे गए नमूनों में पशु चर्बी की मौजूदगी स्थापित नहीं होने की रिपोर्ट सामने आई थी, हालांकि घी में अन्य प्रकार की मिलावट और खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच अलग विषय रही है।इसलिए मौजूदा ED कार्रवाई को सीधे पुराने “animal fat” आरोप की पुष्टि के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। ताजा कार्रवाई का केंद्र कथित रूप से पाम ऑयल, पामोलिन, पाम कर्नेल ऑयल तथा अन्य पदार्थों का इस्तेमाल कर गाय के घी के नाम पर उत्पाद तैयार करने और उसके वित्तीय लेन-देन पर है। रोज तैयार होते हैं 4 लाख से ज्यादा श्रीवारी लड्डू तिरुपति का श्रीवारी लड्डू दुनिया के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक प्रसादों में शामिल है। TTD की जून 2026 की आधिकारिक जानकारी के अनुसार मंदिर प्रशासन प्रतिदिन 4 लाख से अधिक लड्डू तैयार करता है। मई में औसतन करीब 4.08 लाख लड्डू प्रतिदिन बनाए गए थे। अकेले जून 2026 में रिकॉर्ड 1.26 करोड़ से अधिक लड्डुओं की बिक्री हुई।TTD के मुताबिक लड्डू निर्माण में रोजाना लगभग 16 टन घी सहित करीब 68 टन कच्ची सामग्री इस्तेमाल होती है। इतनी बड़ी मात्रा में प्रसाद तैयार होने के कारण घी की गुणवत्ता और सप्लाई चेन की निगरानी सीधे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और खाद्य गुणवत्ता से जुड़ा विषय है।अब मनी ट्रेल और सप्लाई नेटवर्क की जांच कैलाश चंद मंगला को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद ED की जांच अब कथित मिलावट से पैदा हुई आय, कारोबारी संस्थाओं के बीच हुए भुगतान और सप्लाई नेटवर्क पर केंद्रित है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित मिलावटी उत्पाद किन-किन संस्थाओं के जरिए TTD तक पहुंचा और इससे जुड़े वित्तीय लाभ का प्रवाह किस तरह हुआ। फिलहाल कैलाश चंद मंगला के खिलाफ लगाए गए ये सभी आरोप ED की जांच का हिस्सा हैं। गिरफ्तारी या एजेंसी का आरोप अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है और मामले की अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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