राजस्थान न्यूज़: जयपुर। जयपुर के सहकार मार्ग स्थित जैक्सन वेयर हाउस क्लब पर ज्योतिनगर थाना पुलिस ने बुधवार देर रात छापा मारा। पुलिस ने सूचना के आधार पर रात करीब डेढ़ से दो बजे के बीच क्लब में दबिश दी। कार्रवाई के दौरान क्लब में शराब पार्टी चलती मिली।पुलिस ने मौके से क्लब मैनेजर सहित कुल 35 युवकों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को थाने ले जाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस क्लब के संचालन, शराब परोसने की अनुमति और निर्धारित समय के उल्लंघन सहित विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। सूचना के बाद क्लब में दी दबिश पुलिस के अनुसार, देर रात सूचना मिली थी कि सहकार मार्ग स्थित क्लब में निर्धारित समय के बाद भी पार्टी चल रही है। सूचना का सत्यापन करने के बाद ज्योतिनगर थाना पुलिस की टीम ने क्लब में दबिश दी।पुलिस के पहुंचने पर वहां बड़ी संख्या में युवक मौजूद मिले और शराब पार्टी चल रही थी। इसके बाद पुलिस ने क्लब मैनेजर तथा पार्टी में मौजूद 35 युवकों को हिरासत में लेकर संबंधित प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया। लाइसेंस की शर्तों की होगी जांच पुलिस यह जांच कर रही है कि क्लब के पास शराब परोसने और देर रात तक संचालन की वैध अनुमति थी या नहीं। क्लब के लाइसेंस, संचालन समय और आबकारी नियमों से संबंधित दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं।यह भी देखा जा रहा है कि क्लब प्रबंधन ने निर्धारित समय सीमा, सुरक्षा मानकों और प्रवेश संबंधी नियमों का पालन किया था या नहीं। जांच में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर क्लब संचालक और प्रबंधन के खिलाफ अलग से कार्रवाई की जा सकती है। क्लब मैनेजर से पूछताछ पुलिस क्लब मैनेजर से पार्टी के आयोजन, वहां मौजूद लोगों, शराब की उपलब्धता और संचालन की अनुमति के संबंध में पूछताछ कर रही है। क्लब के अन्य संचालकों और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।पुलिस क्लब में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग और प्रवेश से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है। इससे देर रात क्लब में आए लोगों और आयोजन की वास्तविक स्थिति की जानकारी जुटाई जाएगी। संबंधित धाराओं में कार्रवाई पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई सूचना के आधार पर की गई है। गिरफ्तार लोगों के खिलाफ लागू कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि क्लब के संचालन में किन नियमों का उल्लंघन हुआ और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।
Read more 17th Jul 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर। जयपुर पुलिस के एक हेड कॉन्स्टेबल की कथित रूप से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के नेटवर्क में संलिप्तता सामने आई है। बिन्दायका थाना पुलिस ने जयपुर रिजर्व पुलिस लाइन की सिनेमा शाखा में तैनात हेड कॉन्स्टेबल सुमेर सिंह को नागौर जिले से गिरफ्तार किया है।पुलिस ने आरोपी को नागौर के जसनगर थाना क्षेत्र स्थित लीलिया गांव में दबिश देकर पकड़ा। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह युवकों को मासिक वेतन पर रखकर ऑनलाइन सट्टे की लाइनें संचालित करवाता था और पैसों के लेन-देन का काम स्वयं संभालता था। सिरसी रोड के विला से पकड़े गए थे दो युवक डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण के अनुसार, बिन्दायका थाना पुलिस ने 14 जुलाई को सिरसी रोड स्थित बालाजी होम्स के एक विला में दबिश दी थी। वहां दो युवक मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप के माध्यम से लाइव क्रिकेट मैचों पर ऑनलाइन सट्टा लगवाते मिले। पुलिस ने मौके से सुनील चौधरी और शक्ति सिंह को गिरफ्तार किया। सुनील मूल रूप से जोधपुर के पावटा क्षेत्र का निवासी है, जबकि शक्ति सिंह डीडवाना-कुचामन जिले के खुनखुना का रहने वाला बताया गया है। जूम एप के जरिए संचालित हो रही थी सट्टे की लाइन पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी जूम एप के माध्यम से ऑनलाइन सट्टे की लाइन संचालित कर रहे थे। वे कथित रूप से ‘महाकाल’ और ‘भवानी’ नाम की ऑनलाइन आईडी के जरिए ग्राहकों को सट्टा खेलने की सुविधा उपलब्ध कराते थे।पुलिस ने मौके से दो लैपटॉप, चार मोबाइल फोन, दो टैबलेट, कैलकुलेटर, वाई-फाई राउटर और सट्टे के हिसाब से संबंधित रजिस्टर जब्त किए हैं। पुलिस के अनुसार, बरामद रिकॉर्ड में करोड़ों रुपये के लेन-देन का हिसाब होने की संभावना है। पूछताछ में सामने आया हेड कॉन्स्टेबल का नाम गिरफ्तार सुनील और शक्ति से पूछताछ में हेड कॉन्स्टेबल सुमेर सिंह का नाम सामने आया। दोनों ने पुलिस को बताया कि वे सुमेर सिंह के निर्देशन में काम करते थे और इसके बदले उन्हें करीब 20 हजार रुपये मासिक वेतन तथा अन्य खर्च दिए जाते थे। जांच में यह भी सामने आया कि सट्टे का संचालन करने के लिए सिरसी रोड क्षेत्र में किराए का विला भी कथित रूप से सुमेर सिंह ने उपलब्ध कराया था। युवकों का काम ऑनलाइन लाइन चलाना था, जबकि ग्राहकों से रुपये लेने और भुगतान करने की जिम्मेदारी सुमेर स्वयं संभालता था। युवाओं को वेतन का लालच देकर बुलाने का आरोप प्रारंभिक जांच के अनुसार, क्रिकेट सीजन शुरू होते ही आरोपी ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं से संपर्क करता था। उन्हें 20 हजार से 50 हजार रुपये प्रतिमाह तक वेतन देने का लालच देकर जयपुर बुलाया जाता और किराए के फ्लैट या विला से ऑनलाइन सट्टे का काम कराया जाता था।पुलिस को आशंका है कि आरोपी ने अलग-अलग स्थानों पर भी इसी प्रकार सट्टे की लाइनें संचालित करवाई होंगी। इस संबंध में गिरफ्तार आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जा रही है। छुट्टी पर चल रहा था आरोपी पुलिसकर्मी पुलिस के अनुसार, सुमेर सिंह जयपुर रिजर्व पुलिस लाइन में हेड कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात है और गिरफ्तारी से पहले तीन-चार दिन से छुट्टी पर चल रहा था। सट्टे के ठिकाने पर कार्रवाई के बाद वह पुलिस की पकड़ से दूर था। तकनीकी निगरानी और अन्य सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने उसका पीछा किया तथा लीलिया गांव में दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया। मोबाइल, बैंक खातों और कॉल रिकॉर्ड की जांच पुलिस अब आरोपी के मोबाइल फोन, बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और ऑनलाइन ऐप से संबंधित डेटा की जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि सट्टे का नेटवर्क कितना बड़ा था और इससे कितने लोग जुड़े हुए थे।बरामद उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने की भी संभावना है। पुलिस ऑनलाइन आईडी, ग्राहकों के विवरण और लेन-देन से संबंधित डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही हैपुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी होगी डीसीपी वेस्ट ने बताया कि आपराधिक मामले की जांच के साथ ही हेड कॉन्स्टेबल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी अलग से की जाएगी। विभाग यह जांच करेगा कि उसने अपने पद और पुलिस संसाधनों का किसी प्रकार दुरुपयोग किया या नहीं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि सुमेर सिंह कब से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के कारोबार में सक्रिय था, उसके संपर्क किन सटोरियों से थे और नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।और गिरफ्तारियां होने की संभावनाबिन्दायका थाना पुलिस ने सुनील चौधरी, शक्ति सिंह, हेड कॉन्स्टेबल सुमेर सिंह और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच में नए नाम सामने आने पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।थानाधिकारी विनोद वर्मा के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के बयानों, जब्त रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
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राजस्थान न्यूज़: जोधपुर। जोधपुर पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी के मामले में पूर्व एनएसजी कमांडो रतनसिंह को गिरफ्तार किया है। बनाड़ थाना पुलिस ने गुरुवार देर रात एकता नगर, रमजान का हत्था स्थित उसके घर पर दबिश दी। पुलिस को देखकर आरोपी ने भागने का प्रयास किया, लेकिन टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। तलाशी के दौरान आरोपी के घर से करीब आठ किलो अफीम का दूध, बड़ी मात्रा में नकदी और एक क्रेटा कार बरामद की गई। डीसीपी ईस्ट मनीष चौधरी के अनुसार, जब्त नकदी की राशि ₹1 करोड़ 6 लाख 50 हजार से अधिक है। प्रारंभिक सूचना में राशि ₹1 करोड़ 60 लाख 50 हजार बताई गई थी, इसलिए अंतिम आधिकारिक आंकड़ा पुलिस की जब्ती सूची से स्पष्ट होगा। देर रात शुरू हुई कार्रवाई सुबह तक चली डीसीपी ईस्ट मनीष चौधरी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान रतनसिंह पुत्र हनुमानराम सिंवर जाट के रूप में हुई है। पुलिस की तलाशी और नकदी गिनने की कार्रवाई देर रात शुरू होकर शुक्रवार सुबह तक चली। आरोपी के घर से बड़ी संख्या में 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां मिलीं। नकदी की मात्रा अधिक होने के कारण पुलिस टीम को नोट गिनने में कई घंटे लगे। असम राइफल्स और NSG में दे चुका है सेवाएं पुलिस के अनुसार, रतनसिंह पूर्व में असम राइफल्स में जवान रह चुका है। वह राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड में कमांडो के रूप में भी सेवाएं दे चुका है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि सुरक्षा बलों से सेवानिवृत्त होने के बाद वह कब और किन परिस्थितियों में कथित ड्रग तस्करी के नेटवर्क से जुड़ा। आठ किलो अफीम के दूध का स्रोत तलाश रही पुलिस आरोपी के घर से बरामद आठ किलो अफीम के दूध की आपूर्ति कहां से हुई और इसे किस व्यक्ति या गिरोह को पहुंचाया जाना था, इस संबंध में पूछताछ की जा रही है। पुलिस उसके मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और संपर्कों की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या किसी बड़े अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क का हिस्सा था। करोड़ों रुपये की नकदी का हिसाब मांगा पुलिस ने आरोपी से घर में मिली बड़ी नकदी के वैध स्रोत और उससे संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। यह जांच की जा रही है कि रकम नशीले पदार्थों की बिक्री से प्राप्त हुई या उसका कोई अन्य स्रोत है। आयकर विभाग अथवा अन्य जांच एजेंसियों को भी नकदी की बरामदगी के संबंध में सूचना दी जा सकती है। नकदी और संपत्ति के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद सामने आएगा। छह करोड़ के मकान की भी होगी जांच आरोपी जिस मकान में रह रहा था, उसकी अनुमानित कीमत करीब छह करोड़ रुपये बताई जा रही है। पुलिस मकान और अन्य संपत्तियों की खरीद से संबंधित दस्तावेजों तथा धन के स्रोत की जांच कर सकती है। हालांकि, मकान की वास्तविक बाजार कीमत और स्वामित्व से संबंधित विवरण की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। क्रेटा कार भी जब्त पुलिस ने आरोपी के घर से एक क्रेटा कार भी जब्त की है। जांच की जा रही है कि वाहन का उपयोग नशीले पदार्थों के परिवहन या नकदी के लेन-देन में किया जाता था या नहीं। वाहन की तलाशी और उसके आवागमन से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए टोल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और फास्टैग विवरण की जांच भी की जा सकती है। नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश पुलिस आरोपी से उसके संपर्कों, अफीम की खरीद-बिक्री, ग्राहकों और संभावित सहयोगियों के संबंध में पूछताछ कर रही है। मोबाइल और डिजिटल साक्ष्यों से अन्य लोगों के नाम सामने आने पर आगे गिरफ्तारियां हो सकती हैं। मामले में मादक पदार्थों की तस्करी से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है।
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उदयपुर न्यूज़: शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला के हाथ से सोने की दो चूड़ियां पार होने का मामला सामने आया है। घटना कांता मारवाह मार्ग, पुलिस लाइन क्षेत्र की बताई जा रही है। पीड़िता के भतीजे ने सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट देकर बाइक सवार बदमाशों पर वारदात को अंजाम देने का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार कांता मारवाह मार्ग पुलिस लाइन अजमेर निवासी जितेन्द्र नारवानी पुत्र चिमनदास नारवानी ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट में बताया गया कि उनकी चाची मीना नारवानी उम्र 75 वर्ष घर से पीछे वाली गली में गाय को रोटी खिलाने के लिए निकली थीं। गली में गाय नहीं मिलने पर वे मुख्य सड़क की ओर पुलिस लाइन चौराहे की तरफ जाने लगीं। इसी दौरान बाइक सवार 2 से 3 युवक उनके पीछे चलने लगे। आरोप है कि इनमें से एक युवक बाइक से उतरकर बुजुर्ग महिला के साथ-साथ चलने लगा और उनसे बातचीत करने की कोशिश करने लगा। कुछ देर बाद महिला को ऐसा महसूस हुआ कि उनकी आंखें बंद हो रही हैं और उन्हें ठीक से कुछ याद नहीं रहा। करीब पांच मिनट बाद जब महिला को होश आया तो उनके हाथों में पहनी सोने की दोनों चूड़ियां गायब थीं। इसी बीच बाइक सवार युवक मौके से फरार हो चुके थे। घटना से घबराई बुजुर्ग महिला घर लौटीं और परिजनों को पूरी बात बताई। इसके बाद परिजनों ने सिविल लाइन थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में बाइक सवार युवकों पर सोने की चूड़ियां चोरी करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच एएसआई कैलाश चंद को सौंपी है। फिलहाल पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने और संदिग्ध युवकों की पहचान करने में जुटी है। बुजुर्ग महिला के साथ हुई इस घटना के बाद क्षेत्र में लोगों में चिंता का माहौल है। परिजनों ने पुलिस से जल्द आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी और चोरी हुई ज्वेलरी बरामद करने की मांग की है।
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उदयपुर न्यूज़: अजमेर के बोर्ड ऑफिस की गली स्थित ओला शोरूम पर गुरुवार को ग्राहकों ने जमकर हंगामा किया और विरोध प्रदर्शन करते हुए जल्द समाधान की मांग की। बड़ी संख्या में पहुंचे ग्राहकों, विशेषकर महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनकी इलेक्ट्रिक स्कूटी खराब होने के बाद सात महीने पहले सर्विस के लिए जमा कराई गई थी, लेकिन आज तक वाहन वापस नहीं मिला। उनका कहना है कि वे लगातार शोरूम के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन दिया जाता है। फोन करने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। प्रदर्शन के दौरान एक युवक ने आरोप लगाया कि उसके स्कूटर का स्टार्ट बटन बार-बार खराब हो जाता है। शिकायत करने पर केवल बटन बदल दिया जाता है, लेकिन मूल समस्या बनी रहती है। ग्राहकों का कहना है कि उन्होंने कंपनी के उच्च अधिकारियों से भी संपर्क किया, लेकिन वहां से भी कोई ठोस समाधान नहीं मिला। इससे नाराज ग्राहकों ने शोरूम के बाहर प्रदर्शन कर प्रबंधन के रवैये पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
Read more 2nd Jul 2026
अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: रायपुर: देशभर में प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात को घटाने के लिए 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित ईंधन यानी E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से E20 पेट्रोल के कारण कार का इंजन पूरी तरह खराब होने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस संवेदनशील मामले पर ऐतिहासिक सुनवाई करते हुए उपभोक्ता अदालत (कंज्यूमर कोर्ट) ने कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत (ऑथराइज्ड) डीलर को सेवा में गंभीर लापरवाही का दोषी माना है। कोर्ट ने ग्राहक के पक्ष में कड़ा फैसला सुनाते हुए आदेश दिया है कि कंपनी या तो पीड़ित ग्राहक को नई कार दे, अन्यथा वाहन की पूरी कीमत करीब 20.5 लाख रुपए ब्याज और अन्य खर्चों समेत लौटाए। E20 ईंधन से वाहन खराब होने पर ग्राहक को इस तरह का भारी मुआवजा दिए जाने का यह देश का पहला और ऐतिहासिक मामला है। इंजन नहीं था E20 के अनुकूल, फिर भी ग्राहक को धोखे से बेची पुरानी कार मामले की सुनवाई के दौरान कंज्यूमर कोर्ट ने पाया कि बेची गई कार का इंजन E20 फ्यूल (20% एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल) को झेलने के तकनीकी रूप से अनुकूल नहीं था, इसके बावजूद कंपनी और डीलर ने यह बात छिपाकर ग्राहक को गाड़ी बेच दी। इस मामले के पीड़ित डॉ. प्रेमराज देबता ने बताया कि उन्होंने जून 2024 में मारुति सुजुकी की प्रीमियम नेक्सा (NEXA) डीलरशिप से 'ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस' (Grand Vitara Strong Hybrid Zeta Plus) कार खरीदी थी। कार खरीदते समय डीलर ने उन्हें भरोसा दिया था कि यह गाड़ी दिसंबर 2023 की मैन्युफैक्चरिंग (निर्मित) है। हालांकि, बाद में जब विवाद बढ़ा और उपभोक्ता आयोग के समक्ष रिकॉर्ड पेश हुए, तो एक और बड़ा धोखा सामने आया। रिकॉर्ड के अनुसार, वह कार वास्तव में जनवरी 2023 में मैन्युफैक्चर हुई थी, यानी डीलर ने ग्राहक को करीब डेढ़ साल पुराना स्टॉक धोखे से बेच दिया था। 5 महीने बाद अचानक बंद हुई हाइब्रिड कार, टैंक से निकला सफेद पदार्थ चूंकि डॉ. प्रेमराज देबता को अपने पेशे के सिलसिले में रोजाना करीब 150 से 200 किलोमीटर तक का लंबा सफर तय करना पड़ता था, इसीलिए उन्होंने बेहतर माइलेज के उद्देश्य से मारुति की महंगी स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड गाड़ी का चयन किया था। शुरुआती 5 महीनों तक तो वाहन का परफॉर्मेंस ठीक रहा, लेकिन 11 नवंबर 2024 को अचानक सफर के दौरान कार के डैशबोर्ड पर 'इंजन मालफंक्शन' (Engine Malfunction) का रेड अलर्ट आ गया और चलती गाड़ी बीच सड़क पर ही पूरी तरह बंद हो गई। इसके बाद कार को टो करके डीलरशिप के वर्कशॉप ले जाया गया। डीलर ने लगाया मिलावटी पेट्रोल का आरोप, पेट्रोल पंप की जांच में ईंधन निकला सही वर्कशॉप में जब तकनीकी जांच की गई, तो डीलरशिप के मैकेनिक्स और अधिकारियों ने कार की खराबी का ठीकरा मिलावटी पेट्रोल पर फोड़ दिया। उन्होंने कार का फ्यूल टैंक खाली किया। टैंक से निकाले गए पेट्रोल की जब जांच की गई, तो उसके नीचे एक अलग ही तरह का गाढ़ा सफेद पदार्थ जमा हुआ मिला (जो कि असल में पेट्रोल में मिश्रित एथेनॉल के इंजन पार्ट्स से रिएक्शन के कारण अलग होने से बना था)। इसके बाद डॉ. देबता ने तुरंत संबंधित पेट्रोल पंप और कार कंपनी से लिखित शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, जब पेट्रोल पंप के ईंधन की आधिकारिक लैब जांच की गई, तो वहां का पेट्रोल पूरी तरह मानकों के अनुरूप और सही पाया गया। इसके बावजूद, वर्कशॉप से ठीक होकर आने के बाद भी डॉ. देबता की कार बार-बार तकनीकी खराबी के कारण बंद होती रही और उसका इंजन जवाब दे गया। 45 दिन का अल्टीमेटम: E20 कंपैटिबल नई कार दे कंपनी, वरना चुकाए पूरा हर्जाना परेशान होकर डॉ. प्रेमराज ने कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां तकनीकी विशेषज्ञों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि यह कार E20 ईंधन के अनुकूल नहीं थी और पुराना मॉडल होने के कारण एथेनॉल मिश्रण ने इसके इंजन को तबाह कर दिया। कंज्यूमर कोर्ट ने अपने सख्त आदेश में मारुति सुजुकी और डीलर को 45 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस समयावधि के भीतर ग्राहक को उसी मॉडल की बिल्कुल नई कार दी जाए, जो पूरी तरह E20 फ्यूल कंपैटिबल (अनुकूल) हो। यदि कंपनी 45 दिनों में नई कार देने में विफल रहती है, तो उसे अनिवार्य रूप से वाहन की पूरी ऑन-रोड कीमत (लगभग 20.5 लाख रुपए), अदालती कार्रवाई का खर्च और मानसिक प्रताड़ना का हर्जाना ग्राहक के बैंक खाते में ट्रांसफर करना होगा।
Read more 16th Jul 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: दिल्ली। भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग वेबसाइट IRCTC का नया बीटा वर्जन बुधवार रात 9 बजे लॉन्च कर दिया गया। यात्री मौजूदा IRCTC वेबसाइट के होमपेज पर उपलब्ध बीटा लिंक के माध्यम से नए पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं। इसके साथ ही यूजर्स नए डिजाइन, सुविधाओं और टिकट बुकिंग के अनुभव को लेकर अपना फीडबैक भी दे सकेंगे।नए बीटा पोर्टल को पहले के मुकाबले अधिक साफ, सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया गया है। रेलवे का उद्देश्य टिकट बुकिंग के दौरान आने वाले अनावश्यक पॉप-अप, बार-बार कैप्चा और जटिल चरणों को कम कर यात्रियों को तेज और सुविधाजनक अनुभव देना है। यूजर्स से मिलने वाले सुझावों के आधार पर पोर्टल में आगे और सुधार किए जाएंगे। MNIT के छात्रों की शिकायत के बाद शुरू हुआ बदलाव रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जून में जयपुर स्थित मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी MNIT के दौरे के दौरान विद्यार्थियों से संवाद किया था। इस दौरान छात्रों ने IRCTC की पुरानी वेबसाइट की धीमी गति, जटिल टिकट बुकिंग प्रक्रिया, बार-बार दिखाई देने वाले कैप्चा और यूजर इंटरफेस से जुड़ी समस्याएं बताई थीं। छात्रों की शिकायतों पर रेल मंत्री ने वेबसाइट को 15 जुलाई तक नया स्वरूप देने का आश्वासन दिया था। इसके बाद IRCTC और सेंटर फॉर रेलवे इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स के अधिकारियों ने नए पोर्टल पर काम शुरू किया। लॉन्च से पहले छात्रों ने किया था बीटा वर्जन का रिव्यू वेबसाइट में बदलाव का सुझाव देने वाले MNIT जयपुर के छात्रों को 10 जुलाई को नए बीटा वर्जन का पूर्वावलोकन कराया गया था। IRCTC और CRIS के अधिकारियों ने विद्यार्थियों से डिजाइन, नेविगेशन और टिकट बुकिंग प्रक्रिया पर प्रतिक्रिया मांगी थी। रेलवे ने कहा था कि छात्रों के सुझावों के आधार पर पोर्टल को अधिक उपयोगी और सहज बनाने का प्रयास किया जा रहा है। बीटा परीक्षण का उद्देश्य खामियों की पहचान कर पूर्ण संस्करण लॉन्च होने से पहले उन्हें दूर करना है।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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