राजस्थान न्यूज़: भरतपुर। महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय, भरतपुर में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए गेस्ट फैकल्टी भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक सवाल उठे हैं। भर्ती विज्ञापन जारी करने की समय-सीमा, आदर्श आचार संहिता के दौरान प्रक्रिया शुरू किए जाने, सरकारी परिपत्रों की तारीखों में कथित बदलाव और अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए बेहद कम समय दिए जाने जैसे मुद्दों को लेकर कुलाधिपति के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं और मांग की है कि विश्वविद्यालय की फाइल, नोटशीट, डिस्पैच रिकॉर्ड और वेबसाइट से जुड़े डिजिटल लॉग की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए। आचार संहिता के बाद विज्ञापन प्रकाशित होने पर सवाल शिकायत के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग ने 19 अगस्त 2026 को नगरीय निकाय चुनावों की घोषणा के साथ आदर्श आचार संहिता लागू कर दी थी। इसके अगले दिन, 20 अगस्त 2026 को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर गेस्ट फैकल्टी भर्ती का विज्ञापन प्रकाशित किए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि आचार संहिता प्रभावी होने के बाद भर्ती विज्ञापन जारी करने से पहले क्या राज्य निर्वाचन आयोग या किसी सक्षम प्राधिकारी से अनुमति ली गई थी। इस संबंध में अनुमति पत्र, फाइल नोटिंग और सक्षम अधिकारी के आदेश की जांच की मांग की गई है। विज्ञापन पर 14 अगस्त का डिस्पैच, वेबसाइट पर 20 अगस्त को अपलोड मामले में एक और महत्वपूर्ण सवाल विज्ञापन पर दर्ज तारीख को लेकर उठाया गया है। शिकायत के अनुसार विज्ञापन पर 14 अगस्त 2026 का डिस्पैच अंकित है, जबकि इसे वेबसाइट पर 20 अगस्त 2026 को सार्वजनिक किया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि 14 से 20 अगस्त के बीच विज्ञापन सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया और आचार संहिता लागू होने के ठीक अगले दिन वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया, इसका रिकॉर्ड के आधार पर परीक्षण किया जाए। सरकारी परिपत्रों की तारीख बदलने का गंभीर आरोप शिकायत में सबसे गंभीर आरोप राजस्थान सरकार के वित्त विभाग से जुड़े परिपत्रों की तारीखों को लेकर लगाया गया है। दावा किया गया है कि भर्ती विज्ञापन में जिन मूल सरकारी परिपत्रों का संदर्भ दिया गया, उनकी वास्तविक तारीखें 30.03.2021 और 07.08.2023 थीं, जबकि विज्ञापन में कथित तौर पर इन्हें 30.03.2026 और 07.08.2026 दर्शाया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यह जांच की जाए कि यदि तारीखों में वास्तव में परिवर्तन हुआ तो वह किस स्तर पर, किस अधिकारी या कर्मचारी द्वारा और किसके निर्देश पर किया गया। इसके लिए मूल सरकारी परिपत्र और विश्वविद्यालय की ओर से जारी विज्ञापन का अभिलेखीय और तकनीकी परीक्षण कराने की मांग भी की गई है। आवेदन के लिए केवल करीब 24 घंटे का समय शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भर्ती विज्ञापन वेबसाइट पर 20 अगस्त को अपलोड किया गया और आवेदन की अंतिम तारीख 21 अगस्त 2026 रखी गई। इस तरह अभ्यर्थियों को आवेदन करने के लिए लगभग 24 घंटे का समय ही मिला। शिकायतकर्ता का कहना है कि इतनी कम समय-सीमा व्यापक प्रतिस्पर्धा और समान अवसर के सिद्धांत पर सवाल खड़ा करती है। यह भी जांच का विषय बनाने की मांग की गई है कि भर्ती का पर्याप्त प्रचार समाचार पत्रों या अन्य माध्यमों से क्यों नहीं किया गया। पहले से कार्यरत गेस्ट फैकल्टी के बावजूद नई भर्ती क्यों? शिकायत में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय के संबंधित विभागों में पहले से गेस्ट फैकल्टी कार्यरत हैं। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि आचार संहिता की अवधि में नई भर्ती शुरू करने की तत्काल प्रशासनिक और शैक्षणिक आवश्यकता क्या थी। शिकायतकर्ता ने इस निर्णय से संबंधित प्रस्ताव, स्वीकृति और संबंधित अधिकारियों की नोटिंग की जांच की मांग की है।
Read more 8th Sep 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के पहले चरण के लिए बुधवार को मतदान होगा। प्रदेश के 39 जिलों के 168 नगरीय निकाय क्षेत्रों के 5,393 वार्डों में मतदाता अपने पार्षदों का चुनाव करेंगे। सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चलने वाले मतदान में 57 लाख 52 हजार 278 मतदाता 20 हजार 623 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। इसके लिए 7,683 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। सोमवार शाम चुनाव प्रचार थमने के साथ ही भाजपा और कांग्रेस ने अपनी रणनीति का फोकस वोट मैनेजमेंट पर कर दिया है। भाजपा ने कमजोर बूथों की पहचान कर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया है, जबकि कांग्रेस उन निर्दलीय उम्मीदवारों से संपर्क साध रही है जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। पहले चरण में पाली, भरतपुर, भीलवाड़ा और अलवर नगर निगम सहित 168 निकायों में मतदान होगा। वहीं जयपुर नगर निगम समेत छह नगर निगमों में दूसरे चरण का मतदान 11 सितंबर को कराया जाएगा। दोनों चरणों की मतगणना 14 सितंबर को होगी। राजनीतिक दलों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। भाजपा जहां निकायों में बहुमत हासिल करने के लिए बूथ स्तर तक रणनीति बना रही है, वहीं कांग्रेस करीबी मुकाबलों वाले वार्डों में हर वोट को निर्णायक मानकर संगठन को सक्रिय कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार युवा मतदाता और युवा प्रत्याशी चुनावी परिणामों में अहम भूमिका निभा सकते हैं। पहले चरण में 40 प्रतिशत से अधिक मतदाता 35 वर्ष तक की आयु वर्ग के हैं, जबकि 49 प्रतिशत से ज्यादा प्रत्याशी भी युवा हैं। ऐसे में निकाय चुनाव में युवाओं का उत्साह नतीजों की दिशा तय कर सकता है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। नगर निकाय चुनाव के प्रचार के बीच 7 सितंबर को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद मदन राठौड़ ने जयपुर के वार्ड संख्या 108, 110 और 111 में पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में जनसंपर्क किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से संवाद कर भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान की अपील की। मदन राठौड़ ने वार्ड 110 से भाजपा प्रत्याशी ज्योति खंडेलवाल, वार्ड 111 से संजय जायसवाल और वार्ड 108 से मीनाक्षी पारीक के समर्थन में विभिन्न इलाकों में पहुंचकर मतदाताओं से संपर्क किया। तीन वार्डों में भाजपा प्रत्याशियों के लिए मांगा समर्थन जनसंपर्क अभियान के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ घर-घर पहुंचकर मतदाताओं से मुलाकात की। उन्होंने निकाय चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को समर्थन देने की अपील की। भाजपा की ओर से कहा गया कि प्रचार के दौरान क्षेत्रवासियों का उत्साह और कार्यकर्ताओं की सक्रियता पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत है। वार्ड 110 में ज्योति खंडेलवाल के समर्थन में प्रचार वार्ड संख्या 110 में मदन राठौड़ ने भाजपा प्रत्याशी ज्योति खंडेलवाल के समर्थन में जनसंपर्क किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से संवाद कर क्षेत्र के विकास और नगर निगम से जुड़े मुद्दों पर भाजपा के पक्ष में मतदान का आह्वान किया। वार्ड 111 में संजय जायसवाल के लिए अपील इसके बाद वार्ड 111 में भाजपा प्रत्याशी संजय जायसवाल के समर्थन में प्रचार किया गया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र में जनसंपर्क कर मतदाताओं तक भाजपा का संदेश पहुंचाया। वार्ड 108 में मीनाक्षी पारीक के समर्थन में पहुंचे वार्ड 108 में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी प्रत्याशी मीनाक्षी पारीक के समर्थन में क्षेत्रवासियों से मुलाकात की और भाजपा को समर्थन देने की अपील की। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि तीनों वार्डों में जनता से मिल रहा समर्थन चुनाव परिणाम में पार्टी के पक्ष में दिखाई देगा। चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में बढ़ी बड़े नेताओं की सक्रियता जयपुर नगर निकाय चुनाव जैसे-जैसे मतदान के करीब पहुंच रहे हैं, भाजपा और कांग्रेस दोनों ने बड़े नेताओं को वार्ड स्तर के प्रचार में उतार दिया है। अलग-अलग क्षेत्रों में प्रत्याशी स्थानीय समस्याओं और विकास के मुद्दों को लेकर मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं। भाजपा ने अपने अभियान को “कमल खिलेगा, भाजपा जीतेगी” के संदेश के साथ आगे बढ़ाते हुए नगर निगम में जीत का दावा किया है।
Read more 7th Sep 2026
अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी बनाए जाने के बाद दिल्ली से लेकर पंजाब तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नई जिम्मेदारी मिलने के कुछ ही दिन बाद मंगलवार को पायलट ने दिल्ली स्थित 10 जनपथ पहुंचकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की।मुलाकात के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने पायलट को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। बैठक में वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव, पार्टी के आगामी कार्यक्रमों और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व का फोकस चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और पार्टी के अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाने पर है।मुलाकात के बाद सचिन पायलट ने भी सोशल मीडिया के जरिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का पंजाब की जिम्मेदारी सौंपने के लिए आभार जताया। उन्होंने भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयास, मजबूत संगठन और कार्यकर्ताओं की ताकत के बल पर कांग्रेस पंजाब में सत्ता में वापसी के लिए पूरी मजबूती से चुनाव लड़ेगी। पंजाब में पायलट को मिला बड़ा राजनीतिक टास्क सचिन पायलट के लिए पंजाब की जिम्मेदारी केवल एक संगठनात्मक नियुक्ति नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रह चुके पायलट को अब ऐसे राज्य की जिम्मेदारी मिली है, जहां कांग्रेस के पास मजबूत राजनीतिक आधार तो है, लेकिन पार्टी लंबे समय से आंतरिक खींचतान से जूझ रही है। कांग्रेस ने 5 सितंबर को संगठनात्मक फेरबदल करते हुए भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का महासचिव प्रभारी बनाया था। बघेल को असम की जिम्मेदारी दी गई है। यह फेरबदल पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले किया गया है। गुटबाजी खत्म करना होगी सबसे बड़ी चुनौती पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल के रूप में दोबारा सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। लेकिन चुनावी लड़ाई से पहले पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने ही संगठन के भीतर अलग-अलग नेताओं और गुटों को साथ लाने की होगी।पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सहित कई वरिष्ठ नेताओं के अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र हैं। हाल के समय में पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। पायलट की नियुक्ति को इसी अंदरूनी खींचतान को नियंत्रित करने और चुनाव से पहले एकजुट संगठन खड़ा करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। पायलट के पक्ष में यह बात मानी जा रही है कि वे राजस्थान में लंबे समय तक संगठन की कमान संभाल चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच लगातार सक्रियता बनाए रखी थी। अब पंजाब में उनके सामने यही मॉडल स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक लागू करने की चुनौती होगी। पहले ही शुरू किया नेताओं से संवाद नई जिम्मेदारी मिलने के बाद पायलट ने पंजाब कांग्रेस के नेताओं से संपर्क और बैठकों का सिलसिला भी शुरू कर दिया है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग उनसे दिल्ली में मुलाकात कर चुके हैं। बैठक में विधानसभा चुनाव की तैयारियों, संगठन और चुनावी रणनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। पायलट के जल्द पंजाब दौरे पर जाने की भी संभावना जताई गई है। सफल हुए तो राष्ट्रीय राजनीति में और बढ़ सकता है कद पंजाब की जिम्मेदारी को सचिन पायलट के लिए कांग्रेस आलाकमान के भरोसे की बड़ी परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है। पंजाब उन राज्यों में है जहां कांग्रेस अभी भी सत्ता की प्रमुख दावेदार पार्टियों में शामिल है। ऐसे में यदि पायलट पार्टी की गुटबाजी पर काबू पाकर संगठन को एकजुट करने और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कराने में कामयाब रहते हैं, तो राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।राजनीतिक जानकारों के लिहाज से यह जिम्मेदारी पायलट के लिए बड़ा अवसर भी है। पंजाब में सफलता उन्हें राजस्थान की राजनीति से आगे कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व और चुनावी रणनीति में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका दिला सकती है।फिलहाल पायलट की पहली परीक्षा चुनाव प्रचार से पहले पंजाब कांग्रेस के नेताओं को एक मंच पर लाने की है। 2027 के चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी हद तक इस बात पर भी निर्भर करेगा कि नई जिम्मेदारी संभालने के बाद पायलट संगठन की अंदरूनी खींचतान को कितनी जल्दी चुनावी ताकत में बदल पाते हैं।
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। कांग्रेस ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को पंजाब का AICC प्रभारी महासचिव नियुक्त किया है। पंजाब की जिम्मेदारी संभाल रहे पूर्व छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अब असम का प्रभार दिया गया है। सचिन पायलट अब तक छत्तीसगढ़ के प्रभारी महासचिव थे। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से बदलावों की घोषणा की गई। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब पंजाब कांग्रेस आंतरिक खींचतान से गुजर रही है और अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी तेज हो रही हैं। पार्टी नेतृत्व के सामने प्रदेश संगठन को एकजुट कर चुनावी रणनीति तैयार करने की बड़ी चुनौती है। पंजाब में पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती- गुटबाजी खत्म करना पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ समय से प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से जुड़े खेमों के बीच मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। टिकट वितरण और संगठनात्मक फैसलों को लेकर भी नेताओं के बीच बयानबाजी हुई है। ऐसे में सचिन पायलट की पहली बड़ी जिम्मेदारी अलग-अलग खेमों के बीच समन्वय स्थापित करना और विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट करना होगी। पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं, इसलिए कांग्रेस हाईकमान के इस फैसले को चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी सुखदेव भगत को सचिन पायलट के पंजाब जाने के बाद सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया है। वहीं भूपेश बघेल को पंजाब से हटाकर असम भेजा गया है। इसके साथ ही कांग्रेस ने अन्य राज्यों के संगठनात्मक प्रभार में भी बदलाव किए हैं। डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद को महाराष्ट्र और पी.वी. मोहन को आंध्र प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है। गुजरात में भी बदलाव कांग्रेस ने गुजरात के संगठनात्मक प्रभार में भी बदलाव किया है। मुकुल वासनिक से गुजरात की जिम्मेदारी वापस लिए जाने और रणदीप सिंह सुरजेवाला को नया प्रभार दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सुरजेवाला कांग्रेस के प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में शामिल हैं और कर्नाटक संगठन से भी जुड़े रहे हैं। इस बदलाव को भी आने वाले चुनावी और संगठनात्मक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पंजाब में चुनाव से पहले नया प्रयोग सचिन पायलट का पंजाब प्रभारी बनना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पायलट राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रहने के अलावा लंबे समय से राष्ट्रीय संगठन में सक्रिय हैं। अब तक उनके पास छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी थी। कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर फेरबदल से पहले उन्हें छत्तीसगढ़ और भूपेश बघेल को पंजाब का प्रभारी दर्ज किया गया था।पंजाब में उनकी नियुक्ति को हाईकमान की ओर से चुनाव से पहले संगठन में संतुलन बनाने और अलग-अलग नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी पंजाब से हटाए गए भूपेश बघेल को असम कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया है। असम में विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद संगठनात्मक बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी असम के तत्कालीन प्रभारी जितेंद्र सिंह ने 4 मई 2026 को चुनावी हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसलिए उन्हें इस ताजा फेरबदल में “हटाया गया” कहना सटीक नहीं होगा; उनका इस्तीफा कई महीने पहले ही आ चुका था।छह राज्यों की जिम्मेदारियों में बदलाव कांग्रेस के इस संगठनात्मक फेरबदल में मुख्य रूप से पंजाब, असम, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों के प्रभार में बदलाव सामने आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी मिलने की हो रही है, क्योंकि पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को संगठनात्मक खींचतान खत्म करने और भाजपा, आम आदमी पार्टी तथा शिरोमणि अकाली दल के मुकाबले मजबूत चुनावी रणनीति तैयार करनी होगी। पायलट की नियुक्ति के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि वे पंजाब कांग्रेस के अलग-अलग गुटों के बीच किस तरह तालमेल स्थापित करते हैं और चुनाव से पहले संगठन को कितना एकजुट कर पाते हैं।
Read more 6th Sep 2026
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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