राजस्थान न्यूज़: जयपुर। बजाज नगर थाना पुलिस ने ज्वेलरी शॉप में दुकानदार को बातों में उलझाकर सोने के आभूषण चोरी करने के मामले का खुलासा करते हुए आरोपी राजू उर्फ पूजा किन्नर (50) को गिरफ्तार किया है। आरोपी पंजाब के जालंधर का रहने वाला है। पुलिस ने उसके कब्जे से चोरी किए गए सोने के टॉप्स और सोने की अंगूठी बरामद कर ली है। पुलिस के अनुसार आरोपी ज्वेलरी दुकानों पर पहुंचकर दुकानदार को बातचीत और आभूषण दिखाने में उलझाता था और मौका मिलते ही कीमती सामान चोरी कर लेता था। पुलिस अब उससे इसी तरह की अन्य संभावित वारदातों के संबंध में पूछताछ कर रही है। 19 अगस्त को ज्वेलरी शॉप पर पहुंचा था आरोपी डीसीपी ईस्ट रंजीता शर्मा के अनुसार सिद्धार्थ नगर निवासी रामरज गोयल (60) ने 31 अगस्त को बजाज नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी बी-63, प्रगति पथ, बजाज नगर में सरयू ज्वेलर्स नाम से ज्वेलरी की दुकान है। रिपोर्ट के मुताबिक 19 अगस्त को दोपहर करीब 2 बजे आरोपी एक महिला के साथ दुकान पर पहुंचा। उसने दुकानदार से गिफ्ट देने के लिए 11 जोड़ी पायल दिखाने को कहा। पायल पसंद करने के बाद उसने दो जोड़ी टॉप्स दिखाने को कहा और फिर एक लेडीज अंगूठी भी पसंद की। जब दुकानदार ने भुगतान करने के लिए कहा तो आरोपी ने बताया कि उसके पास नकद रुपये नहीं हैं और वह घर से पैसे लेकर आता है। इसके बाद वह दुकान से बाहर चला गया, जबकि उसके साथ आई महिला वहीं बैठी रही। सामान संभाला तो गायब मिले सोने के टॉप्स और अंगूठी कुछ देर बाद दुकानदार ने ज्वेलरी संभाली तो एक जोड़ी सोने के टॉप्स और एक सोने की अंगूठी गायब मिली। दुकानदार ने दुकान पर मौजूद महिला से आरोपी के बारे में पूछा। महिला ने बताया कि वह उसे केवल दो दिन से जानती है और उसे आरोपी के घर या पते की कोई जानकारी नहीं है। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई और बजाज नगर थाने में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई। CCTV फुटेज से आरोपी तक पहुंची पुलिस वारदात के खुलासे के लिए बजाज नगर थाना पुलिस ने विशेष टीम गठित की। पुलिस ने ज्वेलरी शॉप के साथ आसपास के इलाकों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी सहायता और मुखबिर तंत्र के जरिए पुलिस ने संदिग्ध की पहचान की और लगातार तलाश के बाद आरोपी राजू उर्फ पूजा किन्नर को गिरफ्तार कर लिया। किन्नर का वेश धरकर दुकान पहुंचने की बात आई सामने पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी किन्नर का वेश धारण कर ज्वेलरी की दुकानों पर पहुंचता था। पुलिस के मुताबिक इस तरह वह दुकानदारों को बातों में उलझाकर आभूषण दिखाने को कहता और मौका देखकर कीमती सामान चोरी कर लेता था। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने इसी तरीके से जयपुर या अन्य शहरों में और कितनी वारदातें की हैं। चोरी का 100 प्रतिशत माल बरामद पुलिस ने आरोपी के कब्जे से इस मामले में चोरी किए गए सोने के टॉप्स और सोने की अंगूठी सहित पूरा माल बरामद कर लिया है। आरोपी से उसके संपर्कों और अन्य संभावित वारदातों को लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस तरह की घटनाओं में उसके साथ और कौन-कौन लोग शामिल रहे हैं।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव-2026 में भाजपा और कांग्रेस की प्रत्याशी सूची ने दोनों दलों के भीतर टिकट वितरण की ताकत का समीकरण भी सामने ला दिया है। भाजपा में शहर संगठन की ओर से करीब एक महीने तक तैयार किए गए वार्डवार पैनल के मुकाबले अंतिम टिकट वितरण में विधायकों की पसंद को ज्यादा महत्व मिलने की चर्चा है। वहीं कांग्रेस में शहर जिलाध्यक्ष सुनील शर्मा चार विधानसभा क्षेत्रों में अपनी पसंद के करीब 32 नेताओं और कार्यकर्ताओं को टिकट दिलाने में प्रभावी रहे। दोनों दलों में टिकट वितरण के बाद विरोध भी सामने आया। भाजपा में संगठन की भूमिका को लेकर अंदरखाने चर्चा है, जबकि कांग्रेस में टिकटों में बदलाव के आरोप लगाते हुए कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खुले तौर पर विरोध किया। भाजपा: हर वार्ड से तीन नामों का पैनल, फिर विधायकों से लिया फीडबैक भाजपा ने टिकट चयन की शुरुआत शहर संगठन को अहम भूमिका देकर की थी। शहर अध्यक्ष अमित गोयल को वार्डवार सर्वे कराने, मंडल अध्यक्षों और संयोजकों से फीडबैक लेने तथा संभावित प्रत्याशियों की सूची तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई। बताया जा रहा है कि प्रत्येक वार्ड से तीन संभावित नामों का पैनल तैयार कर प्रदेश मुख्यालय भेजा गया था। इसके बाद पार्टी स्तर पर ऐसा फीडबैक सामने आया कि केवल संगठन के पैनल के आधार पर सभी वार्डों में जीत और बोर्ड बनाने की स्थिति को लेकर तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इसके बाद संबंधित विधायकों से भी वार्डवार फीडबैक लिया गया। अंतिम सूची में विधायकों की पसंद को मिला ज्यादा महत्व टिकटों के अंतिम चयन में स्थानीय विधायकों की राय, प्रत्याशियों की क्षेत्रीय पकड़ और वार्ड के चुनावी समीकरणों को अहमियत दी गई।इसी कारण कई वार्डों में शहर संगठन द्वारा भेजे गए नामों के बजाय विधायकों की पसंद के उम्मीदवारों को टिकट मिलने की चर्चा है। इससे यह राजनीतिक संदेश भी निकला कि भाजपा ने इस चुनाव में विधायकों को टिकट चयन में अधिक भूमिका देने के साथ संबंधित विधानसभा क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी दी है। अमित गोयल की महीने भर की कवायद का सीमित असर भाजपा के भीतर चर्चा है कि शहर अध्यक्ष अमित गोयल की ओर से तैयार पैनल का अंतिम सूची पर अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखा।दावा यह भी किया जा रहा है कि गोयल अपने कुछ बेहद करीबी नेताओं के नाम भी अंतिम सूची में शामिल नहीं करा सके।हालांकि टिकट वितरण को लेकर पार्टी की ओर से इस तरह की आंतरिक शक्ति-समीकरण संबंधी कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।‘करीबियों के लिए खुलकर पैरवी नहीं कर पाए गोयल’ भाजपा के अंदरखाने यह भी चर्चा है कि अमित गोयल ने अंतिम चरण में अपने करीबी दावेदारों के लिए खुलकर पैरवी नहीं की।इसके पीछे संगठन के भीतर चल रहे राजनीतिक समीकरण और शीर्ष नेतृत्व की प्राथमिकताओं को वजह माना जा रहा है। अब यदि किसी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहता है तो उसे संबंधित विधायक के राजनीतिक रिपोर्ट कार्ड से जोड़कर देखे जाने की संभावना है। कांग्रेस: चार विधानसभा क्षेत्रों में सुनील शर्मा का प्रभाव कांग्रेस में शहर अध्यक्ष सुनील शर्मा टिकट वितरण में प्रभावी भूमिका में दिखाई दिए।बताया जा रहा है कि हवामहल, विद्याधर नगर, झोटवाड़ा और सांगानेर विधानसभा क्षेत्रों में उन्होंने अपनी पसंद के करीब 32 कार्यकर्ताओं और नेताओं को टिकट दिलाने में भूमिका निभाई। हालांकि टिकट वितरण के बाद उनके फैसलों को लेकर भी पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं में नाराजगी सामने आई और उनके आवास के बाहर प्रदर्शन तक किया गया। आरआर तिवाड़ी के धरने से खुलकर सामने आई नाराजगी कांग्रेस में टिकटों को लेकर सबसे प्रमुख विरोध पूर्व शहर अध्यक्ष आरआर तिवाड़ी की ओर से देखने को मिला।उन्होंने हवामहल विधानसभा क्षेत्र में टिकटों में अंतिम समय पर फेरबदल का आरोप लगाते हुए धरना दिया। तिवाड़ी का आरोप था कि शुरुआती स्तर पर सहमति से तय किए गए कुछ नामों को बाद में बदल दिया गया। इस विरोध ने कांग्रेस के भीतर टिकट वितरण को लेकर चल रही नाराजगी को सार्वजनिक कर दिया। दोनों दलों में टिकट के साथ तय हुई जवाबदेही जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में अब भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए टिकट वितरण के बाद सबसे बड़ी चुनौती अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की है।भाजपा में जहां विधायकों की पसंद को तरजीह मिलने की चर्चा है, वहीं कांग्रेस में शहर संगठन की भूमिका अधिक प्रभावी दिखाई दी। अब चुनाव परिणाम यह भी बताएंगे कि टिकट वितरण में अपनाए गए इन दोनों अलग-अलग मॉडलों में कौन ज्यादा सफल साबित होता है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव में टिकट वितरण, बगावत और सिंबल से जुड़े विवादों के बाद कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व ने संबंधित जिलों और निकाय प्रभारियों से तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है। सबसे गंभीर मामला भीलवाड़ा नगर निगम का माना जा रहा है, जहां कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों के अधिकृत सिंबल समय पर जमा नहीं हो पाए। पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि भीलवाड़ा मामले में प्रभारी, जिलाध्यक्ष और कोऑर्डिनेटर से 48 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। इसके अलावा प्रदेश के जिन-जिन निकायों में बगावत, प्रत्याशी बदलने या नामांकन से जुड़े विवाद सामने आए हैं, वहां के प्रभारियों से भी जवाब मांगा गया है। भीलवाड़ा में 70 में से सिर्फ 53 वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशी भीलवाड़ा नगर निगम में कांग्रेस ने 70 वार्डों के लिए प्रत्याशियों की प्रक्रिया पूरी की थी, लेकिन 17 वार्डों के अधिकृत सिंबल समय पर निर्वाचन अधिकारी के पास जमा नहीं हो सके। इसके चलते कांग्रेस अब केवल 53 वार्डों में अधिकृत पार्टी प्रत्याशी के साथ चुनाव लड़ पा रही है। इस पूरे मामले में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि सिंबल जमा कराने की जिम्मेदारी किस स्तर पर थी और चूक कहां हुई। टिकट वितरण से बगावत तक, कई मामलों की रिपोर्ट मांगी निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद कांग्रेस को कई शहरों और कस्बों में बगावत का सामना करना पड़ा है। पार्टी को ऐसे मामलों की भी जानकारी मिली है जहां प्रत्याशी ने चुनाव मैदान छोड़ दिया, नामांकन वापस ले लिया या नामांकन जांच में निरस्त हो गया। प्रदेश नेतृत्व ने टिकट वितरण, अंतिम समय में उम्मीदवार बदलने, अधिकृत सिंबल जमा नहीं होने और बागी प्रत्याशियों से जुड़े मामलों पर संबंधित निकाय प्रभारियों से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। जयपुर, कोटा और सांचौर के मामलों पर भी नजर जयपुर, कोटा और सांचौर सहित कुछ निकायों में अंतिम समय पर प्रत्याशियों के नाम बदलने को लेकर प्रदेश नेतृत्व तक शिकायतें पहुंची हैं। कुछ स्थानों से टिकट वितरण में कथित अनियमितताओं और लेनदेन संबंधी शिकायतें भी मिलने की बात कही जा रही है। पार्टी ने ऐसे आरोपों को फिलहाल शिकायत के तौर पर लेते हुए संबंधित प्रभारियों से तथ्य और दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट देने को कहा है। आरोपों की सत्यता रिपोर्ट और जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। 2-3 दिन में PCC चीफ को देनी होगी लिखित रिपोर्ट विवादित निकायों के प्रभारियों को अगले दो से तीन दिन के भीतर लिखित रिपोर्ट पीसीसी अध्यक्ष को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट में टिकट चयन की प्रक्रिया, संबंधित नेताओं की भूमिका, सिंबल प्रबंधन, बागी प्रत्याशियों की स्थिति और आखिरी समय पर हुए बदलावों का पूरा ब्यौरा मांगा गया है। कोटा की कलह राहुल गांधी के कार्यालय तक पहुंची कोटा में टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान भी चर्चा में रही है। स्थानीय विवाद की शिकायत पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और राहुल गांधी के कार्यालय तक पहुंचने की बात सामने आई है। अब प्रदेश नेतृत्व का फोकस नाम वापसी और चुनाव प्रचार से पहले अंदरूनी असंतोष को कम करने पर है, ताकि बागियों के कारण अधिकृत प्रत्याशियों के वोटों का नुकसान रोका जा सके। डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व ने साफ संकेत दिए हैं कि निकाय चुनाव में जहां भी संगठनात्मक स्तर पर गंभीर चूक हुई है, उसकी जवाबदेही तय की जाएगी। फिलहाल पार्टी एक तरफ बागियों को मनाने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ भीलवाड़ा जैसे मामलों में यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चुनावी प्रक्रिया के अंतिम चरण में इतनी बड़ी प्रशासनिक और संगठनात्मक चूक कैसे हुई।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
Read more 31st Aug 2022
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सभी राज्य सरकारों से बाइक टैक्सी को मंजूरी देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि निजी बाइक और स्कूटर के जरिए यात्रियों को परिवहन सुविधा देने से खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। गडकरी ने दावा किया कि बाइक टैक्सी को व्यापक स्तर पर अनुमति मिलने से करीब 8 करोड़ लोगों के लिए रोजगार या आय के अवसर तैयार हो सकते हैं। ‘केंद्र ने अनुमति दी, अब राज्यों की मंजूरी जरूरी’ गडकरी ने कहा कि केंद्र सरकार बाइक टैक्सी को अनुमति देने की दिशा में कदम उठा चुकी है, लेकिन परिवहन का विषय राज्य सरकारों से भी जुड़ा होने के कारण कई राज्यों में अभी तक इसकी मंजूरी नहीं दी गई है। उन्होंने राज्य सरकारों से अपील की कि वे बाइक टैक्सी को अनुमति दें, ताकि युवाओं और आम लोगों को कम लागत में नया रोजगार और कमाई का जरिया मिल सके। बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सख्ती की तैयारी गडकरी ने सड़क सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे वाहन चालकों पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत है जो बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हैं। इसके लिए मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव कर ‘नेगेटिव पॉइंट सिस्टम’ लागू करने का प्रस्ताव बताया गया है। इसके तहत बार-बार नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों के रिकॉर्ड पर नकारात्मक अंक जुड़ सकते हैं और आगे सख्त कार्रवाई की व्यवस्था बनाई जा सकती है। भारी वाहन चालकों की ट्रेनिंग पर जोर नितिन गडकरी ने भारी वाहन और निर्माण उपकरण चलाने वाले ड्राइवरों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि बड़े निर्माण उपकरण और भारी मशीनें चलाने वालों के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण जरूरी होना चाहिए। उन्होंने JCB India जैसी कंपनियों से भी अपील की कि मशीन या उपकरण देने से पहले ड्राइवरों को उचित ट्रेनिंग दी जाए। 10 लाख ड्राइवरों की होगी मुफ्त स्वास्थ्य जांच गडकरी ने सड़क और औद्योगिक सुरक्षा से जुड़ा ‘सुरक्षा’ पायलट प्रोग्राम भी शुरू किया है। इस कार्यक्रम के तहत हाईवे, खनन और निर्माण जैसे जोखिम वाले क्षेत्रों में काम करने वाले करीब 10 लाख ड्राइवरों और कर्मचारियों की मुफ्त मेडिकल जांच और काउंसलिंग कराने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में नागपुर-कामठी के NH-44 और चंद्रपुर के खनन क्षेत्र में करीब 10 हजार लोगों की जांच करने की योजना है। दोपहिया हादसों में 81,780 मौतों का दावा गडकरी ने सड़क हादसों के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं में 81,780 लोगों की मौत हुई है और यह संख्या बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सड़क हादसों के प्रमुख कारणों में सीट बेल्ट नहीं लगाना, हिट एंड रन, गलत दिशा में वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग और मोबाइल फोन के इस्तेमाल को गिनाया। सीट बेल्ट नहीं लगाने से 14,466 मौतों का आंकड़ा गडकरी ने बताया कि सीट बेल्ट नहीं लगाने से 14,466 मौतें हुईं, जबकि हिट एंड रन की घटनाओं में 34,030 लोगों की जान गई।इन आंकड़ों के आधार पर उन्होंने ड्राइवर ट्रेनिंग, स्वास्थ्य जांच और ट्रैफिक नियमों के सख्त पालन की जरूरत पर जोर दिया। रोजगार और सड़क सुरक्षा दोनों पर फोकस गडकरी का बयान ऐसे समय आया है जब कई राज्यों में बाइक टैक्सी को लेकर अलग-अलग नीतियां और विवाद सामने आते रहे हैं। केंद्र की कोशिश इसे रोजगार के अवसर के तौर पर बढ़ावा देने की है, वहीं राज्य सरकारों को स्थानीय परिवहन नियमों और सुरक्षा मानकों के आधार पर निर्णय लेना होगा।
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राष्ट्रीय न्यूज़: डीग। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन काउंटडाउन” के तहत डीग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में चल रहे कथित फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने तीन मंजिला इमारत में दबिश देकर 31 युवकों और 33 युवतियों सहित कुल 64 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 2 नाबालिगों को रेस्क्यू कराया गया। डीग पुलिस अधीक्षक शरण गोपीनाथ के. के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने मौके से 88 एंड्रॉयड स्मार्टफोन, एक्सिस बैंक, यस बैंक और एचडीएफसी बैंक के कथित फर्जी आईडी कार्ड तथा बड़ी मात्रा में बैंकिंग डेटा जब्त किया है। बैंक अधिकारी बनकर लोगों को करते थे कॉल पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य खुद को एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे। कॉल के दौरान ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने, कार्ड रिन्यू करने या अन्य बैंकिंग सुविधा देने का झांसा दिया जाता था। इसके बाद उनसे कथित रूप से OTP, CVV, PAN कार्ड की जानकारी, जन्मतिथि और Gmail ID जैसी संवेदनशील जानकारियां हासिल की जाती थीं। पुलिस का आरोप है कि इन जानकारियों का इस्तेमाल कर खातों और कार्ड से रकम निकाली जाती थी। डीग के बैंक मैनेजर की शिकायत से खुला मामला इस साइबर नेटवर्क की जांच उस समय शुरू हुई जब एक्सिस बैंक, डीग के शाखा प्रबंधक फूल सिंह ने साइबर क्राइम थाना डीग में शिकायत दर्ज कराई।शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ अज्ञात लोग बैंक के नाम, लोगो और साख का दुरुपयोग कर कथित फर्जी वेबसाइटों और कॉलिंग के जरिए ग्राहकों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और डिजिटल फुटप्रिंट्स तथा सर्विलांस के आधार पर संदिग्धों तक पहुंचने का प्रयास किया। जांच आजमगढ़ के आकाश तक पहुंची पुलिस जांच में तकनीकी सुरागों के आधार पर टीम उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी आकाश तक पहुंची। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो दिल्ली के उत्तम नगर में किराए पर ली गई तीन मंजिला इमारत से कॉल सेंटर संचालित होने की जानकारी सामने आई।पुलिस के अनुसार यहां से खास तौर पर राजस्थान के मोबाइल नंबरों पर टारगेटेड कॉलिंग की जा रही थी। फर्जी बैंक आईडी और बैंकिंग डेटा जब्त रेड के दौरान पुलिस को मौके से 88 स्मार्टफोन के साथ बैंक कर्मचारियों के नाम पर तैयार किए गए कथित फर्जी आईडी कार्ड और आम लोगों का बैंकिंग डेटा मिला।पुलिस अब जब्त मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से कितने लोग ठगी का शिकार हुए और कुल कितनी राशि का लेन-देन हुआ। अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच जारी पुलिस इस मामले को एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क से जोड़कर देख रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों, डेटा उपलब्ध कराने वालों और रकम के ट्रांजेक्शन से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार आगे की जांच में इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं।
Read more 1st Sep 2026
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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