राजस्थान न्यूज़: सीकर। सीकर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने उत्तर प्रदेश की अयोध्या साइबर पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर और तीन कॉन्स्टेबल को कथित तौर पर 2.80 लाख रुपए रिश्वत की रकम लेकर लौटते समय पकड़ा है। आरोप है कि चारों पुलिसकर्मी सीकर के एक युवक के खिलाफ दर्ज साइबर ठगी के मामले को रफा-दफा करने के बदले रिश्वत ले रहे थे। ACB ने मंगलवार दोपहर सीकर-बीकानेर नेशनल हाईवे स्थित रसीदपुरा टोल पर कार्रवाई कर चारों को रोका। तलाशी के दौरान उनके पास से 2.80 लाख रुपए बरामद होने का दावा किया गया है। 8 लाख रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप जानकारी के अनुसार सीकर के एक युवक के खिलाफ अयोध्या साइबर पुलिस में साइबर ठगी से संबंधित मामला दर्ज था। आरोप है कि मामले को रफा-दफा करने के लिए पुलिसकर्मियों ने परिवादी से 8 लाख रुपए की मांग की थी। इसमें से 4 लाख रुपए पहले ही लिए जाने का आरोप है। इसके बाद अयोध्या साइबर पुलिस के सब इंस्पेक्टर यशवंत सिंह और कॉन्स्टेबल गौरव, सोहन तथा पवन त्रिपाठी रिश्वत की शेष रकम लेने के लिए करीब 800 किलोमीटर दूर सीकर पहुंचे थे। तीन दिन पहले सीकर आए थे पुलिसकर्मी सीकर ACB के ASP विजय सिंह के अनुसार आरोपी पुलिसकर्मी करीब तीन दिन पहले परिवादी से रिश्वत लेने के लिए सीकर आए थे। परिवादी से रकम लेने के बाद वे कार से वापस अयोध्या लौट रहे थे। इसी दौरान परिवादी की सूचना पर ACB ने पहले से जाल बिछाकर रसीदपुरा टोल पर उनकी गाड़ी रुकवाई। तलाशी में मिले 2.80 लाख रुपए ACB की टीम ने कार की तलाशी ली तो कथित रिश्वत के 2 लाख 80 हजार रुपए बरामद हुए।ACB अधिकारियों के अनुसार पूछताछ के दौरान चारों पुलिसकर्मी इस रकम के संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसके बाद टीम ने चारों को हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ शुरू की। ACB की गाड़ी को टक्कर मारकर भागने की कोशिश कार्रवाई के दौरान मामला उस समय और गंभीर हो गया जब आरोपियों ने कथित तौर पर अपनी कार से ACB टीम की गाड़ी को टक्कर मारकर भागने की कोशिश की। ACB की टीम ने पीछा कर चारों को पकड़ लिया। इसके बाद सब इंस्पेक्टर यशवंत सिंह और तीनों कॉन्स्टेबल को गिरफ्तार कर लिया गया। अयोध्या से 800 किलोमीटर दूर रिश्वत लेने आने का आरोप ACB के अनुसार चारों पुलिसकर्मी उत्तर प्रदेश के अयोध्या से सीकर तक केवल रिश्वत की रकम लेने के लिए आए थे। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि साइबर ठगी से जुड़े मूल मामले में इन पुलिसकर्मियों की क्या भूमिका थी, रिश्वत की मांग किस स्तर पर की गई और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता तो नहीं है। आरोपियों से पूछताछ जारी सीकर ACB की टीम चारों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। बरामद रकम, फोन कॉल, संपर्क और संबंधित साइबर केस के दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है।मामले में आगे की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि कथित रिश्वत की पूरी डील कैसे हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
Read more 18th Aug 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय और पंचायतीराज चुनावों को लेकर कांग्रेस में टिकट वितरण की रणनीति पर मंथन तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पार्टी से Gen Z और युवा पीढ़ी को 50 प्रतिशत से अधिक टिकट देने की पैरवी की है। उन्होंने कहा कि राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव को समझते हुए युवाओं को ज्यादा अवसर देना जरूरी है। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने साथ ही पार्टी नेतृत्व को साफ नसीहत दी कि टिकट सिफारिश के आधार पर नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत और वास्तविक कार्यकर्ता की क्षमता देखकर दिए जाएं। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि वे स्वयं भी किसी नाम की सिफारिश करें तो केवल उसी आधार पर टिकट नहीं दिया जाना चाहिए। ‘50 प्रतिशत से ज्यादा टिकट Gen Z को दें’ कांग्रेस वॉर रूम में निकाय चुनावों की तैयारियों को लेकर हुई बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि उन्होंने पार्टी के सामने यह बात रखी है कि 50 प्रतिशत से ज्यादा टिकट Gen Z को दिए जाएं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के आने से देश का राजनीतिक और सामाजिक माहौल बदला है। सीनियर नेताओं के अनुभव का उपयोग भी होना चाहिए, लेकिन युवा पीढ़ी के महत्व से इनकार नहीं किया जा सकता। गहलोत ने कहा कि पीढ़ी का बदलाव हो रहा है और राजनीतिक दलों को युवाओं की भावनाओं और आकांक्षाओं को पहचानते हुए उन्हें आगे आने का अवसर देना चाहिए। जंतर-मंतर के आंदोलनों का भी किया जिक्र पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने युवाओं की राजनीतिक सक्रियता का उल्लेख करते हुए कहा कि Gen Z के आंदोलनों ने देश के राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया है। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए आंदोलनों और राहुल गांधी के प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि वे स्वयं भी जयपुर में ऐसे आंदोलनों में शामिल हुए हैं। गहलोत का कहना था कि युवाओं की भागीदारी को अब केवल चुनावी नजरिए से नहीं, बल्कि बदलती राजनीति के संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए। ‘सिफारिश से टिकट मत दीजिए’ पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने टिकट वितरण में सिफारिश आधारित राजनीति से बचने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि पार्टी अगर सिफारिश के आधार पर उम्मीदवार चुनेगी तो चुनावी नुकसान होगा। वास्तविक कार्यकर्ताओं और स्थानीय स्तर पर मजबूत उम्मीदवारों को ही टिकट दिया जाना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने उम्मीद जताई कि फील्ड में भेजे जाने वाले ऑब्जर्वर्स को प्रदेश कांग्रेस पर्याप्त अधिकार देकर भेजेगी ताकि वे स्थानीय परिस्थितियों और जमीनी फीडबैक के आधार पर उम्मीदवारों के नाम तय कर सकें। ‘मैं भी सिफारिश करूं तो टिकट मत देना’ पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि जयपुर, भरतपुर, बीकानेर समेत अलग-अलग जगहों से लोग टिकट की सिफारिश के लिए उनके पास आते हैं, लेकिन वे मानते हैं कि केवल वरिष्ठ नेता की सिफारिश के आधार पर टिकट नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं भी किसी की सिफारिश करूं तो टिकट मत देना।” पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने तर्क दिया कि किसी वरिष्ठ नेता को हर वार्ड या पंचायत की वास्तविक जमीनी स्थिति की जानकारी नहीं हो सकती। ऐसे में केवल सिफारिश पर टिकट देने से गलत उम्मीदवार का चयन हो सकता है और पार्टी को चुनावी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जमीनी हकीकत के आधार पर हो उम्मीदवारों का चयन पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उम्मीदवार का चयन स्थानीय लोकप्रियता, संगठन से जुड़ाव, कार्यकर्ता के रूप में उसकी सक्रियता और जीत की वास्तविक संभावना के आधार पर होना चाहिए।उनका कहना था कि टिकट वितरण का अधिकार फील्ड फीडबैक और संगठनात्मक प्रक्रिया से जुड़े लोगों को अधिक मिलना चाहिए, ताकि वास्तविक कार्यकर्ताओं के साथ न्याय हो सके।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के आगामी चुनावों को लेकर सियासी और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं की आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया को सितंबर 2026 तक टालने के फैसले के बाद अब यह लगभग साफ हो गया है कि प्रदेश में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव अलग-अलग समय पर कराए जाएंगे। इस फैसले के साथ लंबे समय से चर्चा में रहे ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के मॉडल पर फिलहाल विराम लगता दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर, राज्य निर्वाचन आयोग जल्द ही 309 नगरीय निकायों के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की तैयारी में है। पंचायत आरक्षण लॉटरी सितंबर तक टली पंचायती राज संस्थाओं में वार्डों और पदों के आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया को सितंबर तक स्थगित किए जाने से पंचायत चुनाव का कार्यक्रम आगे खिसकना तय माना जा रहा है। इसी के चलते संभावना है कि पहले नगरीय निकाय चुनाव कराए जाएंगे और पंचायत चुनाव बाद में होंगे। सरकार के इस फैसले के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के संभावित प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों की निगाहें अब पंचायत आरक्षण की नई तारीखों पर टिकी हैं। 309 नगरीय निकायों के चुनाव की तैयारी राज्य निर्वाचन आयोग नगरीय निकाय चुनावों को लेकर तैयारियां तेज कर चुका है। प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में चुनाव कराए जाने हैं। निकाय चुनाव की सबसे अहम प्रक्रिया में शामिल वार्ड आरक्षण लॉटरी पूरी होने के बाद अब अगला बड़ा कदम चुनाव कार्यक्रम और मतदान की तारीखों की घोषणा होगा। इस कारण नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं में टिकट के दावेदारों ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। 10,245 वार्डों की आरक्षण लॉटरी पूरी प्रदेश के नगरीय निकायों के कुल 10,245 वार्डों की आरक्षण लॉटरी सोमवार को पूरी हो गई। इसके बाद कई मौजूदा पार्षदों और संभावित प्रत्याशियों के चुनावी समीकरण बदल गए हैं। कई वार्ड महिला, SC, ST और OBC वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद ऐसे नेताओं को भी नई रणनीति बनानी पड़ रही है जो लंबे समय से अपने मौजूदा वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों ने वार्डवार समीकरणों का आकलन शुरू कर दिया है और स्थानीय स्तर पर संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन तेज कर दिया गया है। एक साथ चुनाव होते तो पूरे प्रदेश में लगती आचार संहिता: सरकार राज्य सरकार ने निकाय और पंचायत चुनाव अलग-अलग कराने के पीछे प्रशासनिक और विकास कार्यों की निरंतरता का तर्क दिया है। सरकार के आधिकारिक पक्ष के अनुसार यदि नगरीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव एक साथ घोषित किए जाते तो आदर्श आचार संहिता पूरे प्रदेश में एक साथ लागू हो जाती। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्य, नई योजनाओं की स्वीकृतियां और कई प्रशासनिक प्रक्रियाएं प्रभावित होतीं। विकास कार्य प्रभावित न हों, इसलिए अलग चुनाव सरकार का तर्क है कि दोनों चुनाव अलग-अलग कराने से विकास कार्यों पर एक साथ ब्रेक नहीं लगेगा। इससे प्रशासनिक तंत्र पर भी एक साथ दो बड़े चुनावों का दबाव नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही आम जनता के रोजमर्रा के प्रशासनिक कामों और विकास योजनाओं की गति को भी बनाए रखा जा सकेगा।इस निर्णय के पीछे प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग भी एक महत्वपूर्ण कारण बताया जा रहा है।संयम लोढ़ा ने उठाए सवाल पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी टालने के फैसले पर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए हैं। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने इसे हाईकोर्ट के आदेशों से जोड़ते हुए अवमानना का आरोप लगाया है और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इससे पंचायत चुनाव की समयसीमा को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। अब इस मुद्दे पर सरकार के अगले कदम और न्यायिक स्तर पर होने वाली संभावित कार्रवाई पर भी नजर रहेगी। महिला दावेदारों और स्थानीय नेताओं की नजर टिकट पर नगरीय निकायों में आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होते ही बड़ी संख्या में महिला दावेदारों और आरक्षित वर्ग के संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ गई है। जिन वार्डों में आरक्षण बदला है, वहां राजनीतिक दलों को नए चेहरे तलाशने होंगे। वहीं कई पुराने नेताओं को वार्ड बदलने या परिवार के किसी पात्र सदस्य को चुनावी मैदान में उतारने जैसी रणनीतियों पर विचार करना पड़ सकता है। भाजपा-कांग्रेस ने शुरू की वार्डवार रणनीति बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों ने निकाय चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। वार्डवार आरक्षण की स्थिति, स्थानीय लोकप्रियता, जातीय-सामाजिक समीकरण और जीत की क्षमता के आधार पर उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा शुरू हो चुकी है।आने वाले दिनों में दोनों दल जिला और निकाय स्तर पर बैठकों का दौर और तेज कर सकते हैं।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
Read more 31st Aug 2022
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के लिए नए राज्य प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए। पार्टी ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए तीनों महत्वपूर्ण राज्यों में अनुभवी नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी है। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है, जबकि गुजरात के नेता जगदीश ईश्वरभाई पटेल को उत्तर प्रदेश का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद डॉ. सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी बनाया गया है। वहीं राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग को गुजरात की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्तियां भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा के एक दिन बाद की गई हैं। सोमवार को पार्टी ने 65 राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई टीम घोषित की थी। विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश की कमान भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। तावड़े इससे पहले हरियाणा और बिहार में संगठनात्मक जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। नवंबर 2020 में उन्हें हरियाणा का प्रभारी बनाया गया था। इसके बाद सितंबर 2022 में उन्हें बिहार की जिम्मेदारी मिली। वर्ष 2024 में भी वे बिहार भाजपा के प्रभारी रहे। महाराष्ट्र की राजनीति और भाजपा संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहे तावड़े महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें प्रभारी बनाए जाने को भाजपा की चुनावी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। जगदीश पटेल बने यूपी के सह-प्रभारी गुजरात भाजपा के नेता जगदीश ईश्वरभाई पटेल को उत्तर प्रदेश का सह-प्रभारी बनाया गया है। पटेल वर्ष 2019 में अमराईवाड़ी विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे और अहमदाबाद शहर भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। अगस्त 2026 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया था। अब पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश में सह-प्रभारी के रूप में बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी दी है। सतीश पूनिया को पंजाब की जिम्मेदारी राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद डॉ. सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया गया है। पूनिया इससे पहले हरियाणा में पार्टी संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। 2024 में उन्हें हरियाणा का प्रभारी बनाया गया था। लोकसभा चुनाव के दौरान भी वे हरियाणा में चुनावी जिम्मेदारी संभाल चुके थे। हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की लगातार तीसरी जीत के दौरान भी पूनिया राज्य के प्रभारी थे। जून 2026 में वे राज्यसभा सांसद चुने गए और इसके बाद उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया। अब पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। तरुण चुग को गुजरात का प्रभारी बनाया भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद तरुण चुग को गुजरात का प्रभारी नियुक्त किया गया है। अमृतसर से आने वाले चुग लंबे समय से भाजपा संगठन में सक्रिय हैं। वे तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के प्रभारी रह चुके हैं। नवंबर 2020 में उन्हें तेलंगाना के साथ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की जिम्मेदारी दी गई थी। 2024 में भी वे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के प्रभारी रहे। अब पार्टी ने उन्हें गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्य की संगठनात्मक जिम्मेदारी दी है।
Read more 18th Aug 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम में विभिन्न नेताओं को राष्ट्रीय पदाधिकारी एवं अन्य दायित्वों पर नियुक्त किया है। रविवार, 17 अगस्त को भाजपा के केंद्रीय कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी।राजस्थान के लिहाज से नई टीम में दो प्रमुख नाम खास हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। वसुंधरा राजे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, सतीश पूनिया राष्ट्रीय महामंत्री भाजपा की ओर से जारी सूची के अनुसार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के कुल 13 पदाधिकारियों में राजस्थान से वसुंधरा राजे सिंधिया को जगह दी गई है। वहीं राष्ट्रीय महामंत्रियों की आठ सदस्यीय सूची में राजस्थान से डॉ. सतीश पूनिया को शामिल किया गया है। राजस्थान के इन दोनों वरिष्ठ नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलने से प्रदेश भाजपा में भी इसका राजनीतिक महत्व माना जा रहा है। BJP ने बनाए 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। इनमें राजस्थान से वसुंधरा राजे सिंधिया के अलावा उत्तराखंड से तीरथ सिंह रावत, दिल्ली से राम माधव, ओडिशा से बैजयंत जय पांडा, आंध्र प्रदेश से डी. पुरंदेश्वरी, उत्तर प्रदेश से रेखा वर्मा, गुजरात से वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोशी, महाराष्ट्र से डॉ. भारती प्रवीण पवार और पंजाब से सरदार मनजीत सिंह बादल सहित अन्य नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। सूची में मध्य प्रदेश से लाल सिंह आर्य, कर्नाटक से प्रो. एम. नागराज, उत्तर प्रदेश से प्रो. तारिक मंसूर और पश्चिम बंगाल से डॉ. मधुचंद्र कर को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। बी.एल. संतोष राष्ट्रीय महामंत्री संगठन पार्टी ने बी.एल. संतोष को राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) की जिम्मेदारी दी है। वहीं शिवप्रकाश और सौदान सिंह को राष्ट्रीय सह महामंत्री (संगठन) बनाया गया है।राष्ट्रीय संगठन की इस टीम के जरिए भाजपा ने विभिन्न राज्यों के नेताओं को केंद्रीय स्तर पर जिम्मेदारियां सौंपी हैं। सतीश पूनिया सहित 8 राष्ट्रीय महामंत्री भाजपा की ओर से जारी सूची में आठ नेताओं को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है। इनमें महाराष्ट्र से विनोद तावड़े, दिल्ली से सुनील बंसल, त्रिपुरा से बिप्लब कुमार देब, उत्तर प्रदेश से स्मृति ईरानी, राजस्थान से डॉ. सतीश पूनिया, मध्य प्रदेश से गजेंद्र पटेल, उत्तर प्रदेश से हरीश द्विवेदी और हरियाणा से संजय भाटिया शामिल हैं।सतीश पूनिया राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं और अब उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में महामंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। सात मोर्चों के अध्यक्ष भी नियुक्त भाजपा ने अपने सात प्रमुख मोर्चों के अध्यक्षों की भी घोषणा की है। गुजरात के डॉ. हेमांग जोशी को युवा मोर्चा, छत्तीसगढ़ की रूप कुमारी चौधरी को महिला मोर्चा और उत्तर प्रदेश के अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। मध्य प्रदेश के बंसीलाल गुर्जर को किसान मोर्चा, बिहार के शिवेश कुमार राम को एससी मोर्चा, राजस्थान के डॉ. मन्नालाल रावत को एसटी मोर्चा और उत्तर प्रदेश के कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चा की कमान दी गई है। इस तरह राजस्थान से वसुंधरा राजे और सतीश पूनिया के साथ डॉ. मन्नालाल रावत को भी राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण दायित्व मिला है। मीडिया और सोशल मीडिया टीम की भी घोषणा भाजपा ने राष्ट्रीय मीडिया संयोजक के पद पर उत्तराखंड के अनिल बलूनी को नियुक्त किया है। मीडिया सह संयोजक के तौर पर मध्य प्रदेश के आशीष उषा अग्रवाल तथा दिल्ली के प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को जिम्मेदारी दी गई है। सोशल मीडिया संयोजक के पद पर छत्तीसगढ़ के दीपक म्हस्के को नियुक्त किया गया है। सोशल मीडिया सह संयोजकों में महाराष्ट्र की प्रीति गांधी, दिल्ली के शिवानंद द्विवेदी, उत्तराखंड के आलोक भट्ट और हरियाणा के अरुण यादव शामिल हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह की ओर से जारी नियुक्ति आदेश में कहा गया है कि ये सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। राजस्थान से इन नेताओं को मिली राष्ट्रीय जिम्मेदारी वसुंधरा राजे सिंधिया — राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया — राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. मन्नालाल रावत — एसटी मोर्चा अध्यक्ष राजस्थान के तीन नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में मिली जिम्मेदारी के बाद प्रदेश के राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में इन नियुक्तियों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Read more 17th Aug 2026
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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