राजस्थान न्यूज़: कोटा। नगर निगम कोटा के महापौर चुनाव की तस्वीर नामांकन के आखिरी दिन साफ हो गई। भारतीय जनता पार्टी ने लंबे मंथन के बाद वार्ड संख्या 98 से निर्वाचित पार्षद अनुसुईया गोस्वामी को महापौर पद का प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस की ओर से वार्ड संख्या 17 की पार्षद सुनीता सुमन ने नामांकन दाखिल किया है। दोनों दलों की ओर से प्रत्याशी मैदान में आने के बाद अब महापौर पद पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला बन गया है। महापौर का मतदान 25 सितंबर को होगा।भाजपा ने अपने प्रत्याशी के नाम को नामांकन की अंतिम समय-सीमा तक सार्वजनिक नहीं किया था। शनिवार को दोपहर करीब 2:40 बजे भाजपा शहर जिलाध्यक्ष राकेश जैन नगर निगम पहुंचे और इसके बाद अनुसुईया गोस्वामी का नामांकन दाखिल कराया गया। नाम घोषित करने में हुई देरी के सवाल पर राकेश जैन ने कहा कि “सस्पेंस बड़ी चीज है, बना रहना चाहिए।” पार्टी की ओर से प्रत्याशी का नाम सामने आने के तुरंत बाद नामांकन की प्रक्रिया पूरी की गई। आखिरी मिनटों में सामने आया अनुसुईया का नाम भाजपा में महापौर प्रत्याशी को लेकर पिछले कुछ दिनों से कई नाम चर्चा में थे। सीमा चौधरी और प्रतिभा सुमन सहित अन्य महिला पार्षदों के नाम भी दावेदारी में बताए जा रहे थे। अंतिम चरण में अनुसुईया गोस्वामी के नाम पर सहमति बनी और पार्टी ने उन्हें अधिकृत प्रत्याशी बनाया।अनुसुईया गोस्वामी वार्ड संख्या 98 से भाजपा के टिकट पर पार्षद निर्वाचित हुई हैं। वह पहली बार पार्षद बनी हैं, लेकिन भाजपा संगठन में पहले से सक्रिय रही हैं। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार वह भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष रहने के साथ प्रदेश स्तर पर भी संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं।भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश जैन ने कहा कि अनुसुईया गोस्वामी के नाम पर संगठन ने सहमति से फैसला किया है। उन्होंने पार्टी में किसी तरह की फूट से इनकार किया और कहा कि महापौर तथा उपमहापौर चुनाव को लेकर भाजपा पार्षद एकजुट हैं। यह भाजपा नेतृत्व का राजनीतिक दावा है। कांग्रेस ने एक दिन पहले ही तय कर लिया था सुनीता सुमन का नाम दूसरी ओर कांग्रेस ने भाजपा से पहले अपना महापौर प्रत्याशी तय कर लिया था। कांग्रेस ने वार्ड संख्या 17 से निर्वाचित पार्षद सुनीता सुमन को मैदान में उतारा है। उनका नाम शुक्रवार रात ही तय कर लिया गया था और शनिवार को उन्होंने नगर निगम पहुंचकर अपना नामांकन दाखिल किया।नामांकन के दौरान शहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राखी गौतम, कांग्रेस पार्षद और पार्टी के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। रिपोर्टों के अनुसार सुनीता सुमन ने दोपहर करीब एक बजे अपना पर्चा दाखिल किया। राखी गौतम ने कहा कि कांग्रेस चुनाव मैदान में है और अंतिम परिणाम 25 सितंबर के मतदान में तय होगा। उन्होंने भाजपा की ओर से पार्षदों को एक साथ रखे जाने पर भी राजनीतिक टिप्पणी की। उनके बयान को कांग्रेस के पक्ष के रूप में देखा जाना चाहिए।भाजपा के 57, कांग्रेस के 39 पार्षद कोटा नगर निगम में कुल 100 वार्ड हैं। अंतिम परिणामों के अनुसार भाजपा के 57, कांग्रेस के 39 और चार निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए हैं। सामान्य बहुमत का आंकड़ा 51 है, इसलिए भाजपा के पास अपने निर्वाचित पार्षदों के आधार पर सदन में बहुमत है।हालांकि महापौर का औपचारिक निर्वाचन पार्षदों के मतदान से होगा। इसलिए किसी प्रत्याशी को मतदान से पहले निर्वाचित घोषित नहीं किया जा सकता। 25 सितंबर को मतदान और मतगणना के बाद ही आधिकारिक परिणाम सामने आएगा। भाजपा पार्षदों को चित्तौड़गढ़ ले जाने की भी रही चर्चा महापौर प्रत्याशी घोषित होने से पहले भाजपा पार्षदों को एक साथ चित्तौड़गढ़ ले जाया गया था। रिपोर्टों के अनुसार पार्टी में महापौर और उपमहापौर के नामों को लेकर आंतरिक विचार-विमर्श चल रहा था और अलग-अलग क्षेत्रों के पार्षदों को एक साथ रखा गया। वहां कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा, लाडपुरा विधायक कल्पना देवी और भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश जैन भी मौजूद बताए गए।महापौर प्रत्याशी घोषित होने के बाद अब भाजपा के भीतर उपमहापौर पद को लेकर चर्चा जारी है। अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से प्रतिनिधित्व के सवाल पर भी पार्टी के अंदर विचार चल रहा है। अभी उपमहापौर प्रत्याशी का अंतिम नाम सामने आना बाकी है। नामांकन की जांच 21 सितंबर को निर्धारित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार महापौर पद के लिए दाखिल नामांकन पत्रों की जांच 21 सितंबर को होगी। प्रत्याशी 22 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद अंतिम उम्मीदवार सूची स्पष्ट होगी। मतदान 25 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक कराया जाएगा और उसी दिन मतगणना के बाद परिणाम घोषित किया जाएगा।इस तरह कोटा में फिलहाल मुख्य राजनीतिक मुकाबला भाजपा की अनुसुईया गोस्वामी और कांग्रेस की सुनीता सुमन के बीच है। दोनों ही निर्वाचित महिला पार्षद हैं और अब 25 सितंबर को नगर निगम के निर्वाचित पार्षद महापौर का चयन करेंगे।
Read more 20th Sep 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव-2026 में वार्डों के नतीजों के बाद अब नगर निगमों, नगर परिषदों और नगरपालिकाओं के प्रमुख पदों की तस्वीर भी साफ होने लगी है। भाजपा के प्रत्याशी 30 निकायों में मेयर, सभापति या अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। अलग-अलग प्रकाशित रिपोर्टों में कुल 33 निकायों में बिना मुकाबले बोर्ड बनने का आंकड़ा दिया गया है। इसमें 30 भाजपा, 2 कांग्रेस और एक भाजपा समर्थित बोर्ड को शामिल किया गया है।ऐतिहासिक तुलना में यह संख्या पिछली अशोक गहलोत सरकार के 2018 से 2023 के कार्यकाल के दौरान बने निर्विरोध बोर्डों से काफी अधिक बताई जा रही है। प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार उस पांच साल की अवधि में 11 निकायों में प्रमुख पद निर्विरोध तय हुए थे—इनमें 6 कांग्रेस, 3 भाजपा और 2 निर्दलीय खेमे के थे। मौजूदा चुनाव में यह आंकड़ा 33 तक बताया गया है। एक जरूरी अंतर: 32 सीधे निर्विरोध, 33 में एक भाजपा समर्थित बोर्ड भी शामिल निर्विरोध बोर्डों की संख्या को लेकर रिपोर्टों में मामूली अंतर भी सामने आया है। एक चुनावी रिपोर्ट में 32 निकाय प्रमुख सीधे निर्विरोध निर्वाचित बताए गए हैं—इनमें भाजपा के 30 और कांग्रेस के 2 प्रत्याशी शामिल हैं। दूसरी रिपोर्टें एक अतिरिक्त भाजपा समर्थित बोर्ड को जोड़ते हुए कुल संख्या 33 बता रही हैं। इसलिए 33 का आंकड़ा बताते समय यह अंतर स्पष्ट रखना जरूरी है। इस लिहाज से भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचन का सत्यापित प्रकाशित आंकड़ा 30 है। भीलवाड़ा और भरतपुर जैसे बड़े निकायों सहित कई नगर परिषदों और नगरपालिकाओं में भाजपा प्रत्याशी के सामने अंतिम रूप से कोई दूसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं रहा। 309 निकायों में हुए चुनाव, 10 नगर निगम भी शामिल राजस्थान में इस बार प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद कुल 309 नगरीय निकायों में चुनाव कराए गए। इनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगरपालिकाएं शामिल थीं। वार्ड सदस्यों के लिए मतदान 9 और 11 सितंबर को हुआ और मतगणना 14 सितंबर को कराई गई। वार्ड स्तर पर भाजपा राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई, लेकिन कई निकायों में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और बड़ी संख्या में निर्दलीय पार्षद चुने गए। यही कारण है कि वार्डों का चुनाव परिणाम और बाद में बनने वाला बोर्ड कई जगह अलग राजनीतिक तस्वीर पेश कर रहा है। भरतपुर-डीग में सबसे दिलचस्प रहा चुनावी गणित मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर और पड़ोसी डीग में चुनाव परिणाम खास तौर पर दिलचस्प रहे। यहां वार्ड चुनाव में भाजपा से ज्यादा मजबूत प्रदर्शन निर्दलीय प्रत्याशियों ने किया था। दोनों जिलों के 13 नगरीय निकायों के 415 वार्डों में निर्दलीयों ने 262 सीटें यानी करीब 63.1 प्रतिशत वार्ड जीते। भाजपा को 131 वार्ड और कांग्रेस को 19 वार्ड मिले। भरतपुर जिले के सात निकायों में निर्दलीयों ने 235 में से 152 वार्ड जीते, जबकि डीग जिले में 180 में से 110 वार्ड निर्दलीयों के खाते में गए। यानी वार्ड परिणामों के आधार पर यह क्षेत्र भाजपा की एकतरफा जीत नहीं था। हालांकि मेयर और अध्यक्ष पद की चुनावी प्रक्रिया आते-आते समीकरण बदल गए। प्रकाशित रिपोर्टों में दावा किया गया है कि निर्दलीय पार्षदों के समर्थन और राजनीतिक समझौतों के बाद भरतपुर-डीग क्षेत्र की करीब 90 प्रतिशत नगरपालिकाओं में भाजपा या भाजपा समर्थित बोर्ड बनने की स्थिति बनी। वार्ड में निर्दलीय जीते, बोर्ड बनाने में भाजपा को मिला समर्थन भरतपुर-डीग का उदाहरण यह भी बताता है कि किसी निकाय में किस पार्टी के कितने पार्षद जीते और आखिर में किस दल का बोर्ड बना—दोनों आंकड़ों को अलग-अलग समझना जरूरी है।उदाहरण के लिए भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों में निर्दलीय 36 सीटों पर जीते, जबकि भाजपा के 20 और कांग्रेस के 7 पार्षद निर्वाचित हुए। इसके बावजूद बाद की राजनीतिक प्रक्रिया में निर्दलीय पार्षदों के समर्थन ने बोर्ड गठन का समीकरण बदल दिया।इसी तरह डीग, कामां, पहाड़ी, सीकरी, नदबई, रूपवास, उच्चैन और बयाना सहित कई निकायों में बड़ी संख्या में निर्दलीय पार्षद चुने गए थे। बाद में इनमें से कई स्थानों पर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में समर्थन बनने की खबरें सामने आईं। भाजपा इसे सरकार के प्रति समर्थन बता रही भाजपा नेताओं ने 30 निकाय प्रमुखों के निर्विरोध निर्वाचन को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की रणनीति, पार्टी संगठन और राज्य सरकार के कामकाज के प्रति समर्थन के रूप में पेश किया है। कुछ भाजपा नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शर्मा के नेतृत्व में जनता के विश्वास का संकेत बताया है। यह भाजपा का राजनीतिक आकलन है। इसके विपरीत केवल निर्विरोध निर्वाचन के आंकड़े के आधार पर इसे सीधे पूरे राज्य के मतदाताओं का सरकार के कामकाज पर फैसला मानना सावधानी से देखा जाना चाहिए। कई निकायों में निर्विरोध प्रमुख का चुनाव वार्ड नतीजों के बाद पार्षदों और निर्दलीयों के समर्थन से तय हुआ है, जबकि वार्ड चुनावों में मतदाताओं ने अलग-अलग दलों और बड़ी संख्या में निर्दलीयों को चुना। भरतपुर-डीग में ही करीब दो-तिहाई वार्ड निर्दलीयों ने जीते थे। पिछली गहलोत सरकार में 11 निर्विरोध बोर्ड 2018 से 2023 तक कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को लेकर उपलब्ध प्रकाशित तुलना के मुताबिक कुल 11 स्थानीय निकायों में बोर्ड या निकाय प्रमुख बिना मुकाबले तय हुए थे। इनमें कांग्रेस के 6, भाजपा के 3 और निर्दलीय खेमे के 2 बोर्ड बताए गए हैं।वर्तमान चुनाव में सीधे भाजपा के 30 प्रत्याशियों का निर्विरोध चुना जाना इस संख्या से काफी अधिक है। हालांकि दोनों अवधियों की सीधी तुलना करते समय यह भी ध्यान रखना होगा कि इस बार एक साथ 309 निकायों में चुनाव हुआ, जबकि पिछली अवधि में चुनावों की संख्या और चरण अलग थे। इसलिए राजनीतिक दल इसे अपने-अपने तरीके से व्याख्यायित कर रहे हैं। 21 सितंबर को बाकी निकायों में होगा शक्ति परीक्षण जहां प्रमुख पद निर्विरोध तय नहीं हुए हैं, वहां अब मतदान से फैसला होगा। कई नगर निगमों, नगर परिषदों और नगरपालिकाओं में भाजपा, कांग्रेस तथा निर्दलीय प्रत्याशी आमने-सामने हैं। इन चुनावों में निर्वाचित पार्षद मतदान करेंगे और उसके बाद मेयर, सभापति तथा नगरपालिका अध्यक्ष तय होंगे।ऐसे में 30 भाजपा प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचन ने पार्टी को शुरुआती बढ़त जरूर दी है, लेकिन राजस्थान के सभी निकायों की अंतिम राजनीतिक तस्वीर शेष प्रमुख पदों के चुनाव पूरे होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
Read more 20th Sep 2026
राजस्थान न्यूज़: बारां। बारां जिले के प्रशासनिक महकमे से बड़ा मामला सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने अंता के उपखंड अधिकारी (SDM) हवाई सिंह यादव के खिलाफ रिश्वत मांगने के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। मामला जमीन से जुड़ी दो अलग-अलग कार्यवाहियों से संबंधित है। परिवादी का आरोप है कि एक प्लानिंग की जमीन पर पूर्व उपखंड अधिकारी द्वारा लगाई गई आपत्ति हटाने और दूसरी जमीन के एग्रीमेंट पर लगे स्थगन आदेश को हटाने के बदले उससे लाखों रुपए की रिश्वत मांगी जा रही थी। एसीबी की ओर से कराए गए गोपनीय सत्यापन में एक मामले में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद मुकदमा दर्ज किया गया है। दो जमीनों का मामला, परिवादी ने लगाया 5.50 लाख मांगने का आरोप मामले की शुरुआत तब हुई जब एक परिवादी ने कोटा एसीबी इकाई के समक्ष शिकायत पेश की। शिकायत में उसने बताया कि उसकी एक प्लानिंग वाली भूमि पर पूर्व उपखंड अधिकारी की ओर से आपत्ति लगाई गई थी। परिवादी ने आरोप लगाया कि इस आपत्ति को हटाने के लिए वर्तमान एसडीएम हवाई सिंह यादव द्वारा उससे 5 लाख रुपए रिश्वत के रूप में मांगे जा रहे थे। शिकायत में एक दूसरी प्लानिंग वाली जमीन का भी उल्लेख किया गया। इस जमीन से संबंधित एग्रीमेंट पर स्थगन आदेश लगा हुआ था। परिवादी का आरोप था कि इस स्टे को हटाने के बदले उससे अलग से 50 हजार रुपए मांगे गए। इस प्रकार शिकायत में दोनों मामलों को मिलाकर कुल 5 लाख 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया। एसीबी ने कराया गोपनीय सत्यापन शिकायत मिलने के बाद एसीबी की कोटा इकाई ने आरोपों की गोपनीय रूप से जांच शुरू की। प्रकाशित जानकारी के अनुसार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय स्वर्णकार के निर्देशन में रिश्वत की मांग का सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान एग्रीमेंट पर लगे स्टे को हटाने के बदले 50 हजार रुपए की मांग सामने आने की बात एसीबी ने कही है। एसीबी के सत्यापन में सामने आया कि परिवादी ने रिश्वत की रकम कम करने की बात कही, जिसके बाद कथित तौर पर 50 हजार रुपए की मांग 45 हजार रुपए पर तय हुई। अधिकारी की ओर से यह राशि एक कथित बिचौलिए को देने की बात कहे जाने का भी उल्लेख रिपोर्टों में किया गया है। इसी सत्यापन को आगे की कानूनी कार्रवाई का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया। ट्रैप की तैयारी हुई, लेकिन नहीं हो सका रुपयों का लेन-देन रिश्वत की मांग का सत्यापन होने के बाद एसीबी ने कथित रूप से अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए ट्रैप कार्रवाई की तैयारी की। हालांकि कार्रवाई पूरी होने से पहले ही ट्रैप की जानकारी संबंधित अधिकारी तक पहुंच जाने की बात सामने आई। इसके चलते कथित रिश्वत राशि का वास्तविक लेन-देन नहीं हो सका और एसीबी अधिकारी को रकम लेते हुए पकड़ नहीं पाई।इसके बावजूद एसीबी ने यह माना कि सत्यापन के दौरान रिश्वत की मांग से संबंधित पर्याप्त तथ्य सामने आए हैं। इसके बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए हवाई सिंह यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया। अब मामले में आगे की जांच एसीबी स्तर पर की जाएगी। 5 लाख की मांग और 45 हजार के सत्यापन में अंतर समझना जरूरी इस मामले में दो अलग-अलग तथ्यों को स्पष्ट रूप से समझना महत्वपूर्ण है। परिवादी ने अपनी शिकायत में पहली जमीन से आपत्ति हटाने के बदले 5 लाख रुपए मांगे जाने का आरोप लगाया था। वहीं दूसरी जमीन के एग्रीमेंट पर लगे स्टे को हटाने के लिए 50 हजार रुपए मांगने की शिकायत की गई थी।एसीबी के गोपनीय सत्यापन में जिस मांग की पुष्टि होने की बात सामने आई है, वह दूसरी जमीन के मामले से संबंधित 50 हजार रुपए की रकम है, जो कथित बातचीत के बाद 45 हजार रुपए पर तय हुई। इसलिए कुल 5.50 लाख रुपए की राशि परिवादी द्वारा लगाए गए आरोप का हिस्सा है, जबकि 45 हजार रुपए की मांग के संबंध में एसीबी सत्यापन की बात प्रकाशित रिपोर्टों में स्पष्ट रूप से दर्ज है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में मामला एसीबी ने एसडीएम हवाई सिंह यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। यह धारा लोक सेवक द्वारा अपने सार्वजनिक कर्तव्य से जुड़े कार्य के संबंध में अनुचित लाभ अथवा रिश्वत स्वीकार करने, प्राप्त करने का प्रयास करने या उसकी मांग से संबंधित प्रावधानों को कवर करती है।इस मामले में किसी अधिकारी को ट्रैप के दौरान रिश्वत की रकम के साथ गिरफ्तार किए जाने की सूचना नहीं है। प्रकरण रिश्वत मांगने के कथित सत्यापन के आधार पर दर्ज किया गया है और आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति जांच तथा आगे की न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी। अब आगे की जांच पर नजर मामला दर्ज होने के बाद अब एसीबी रिश्वत की कथित मांग, परिवादी की शिकायत, सत्यापन के दौरान सामने आए तथ्यों और किसी कथित बिचौलिए की भूमिका सहित विभिन्न पहलुओं की जांच करेगी। जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जमीन से संबंधित दोनों मामलों की प्रशासनिक फाइलों पर क्या कार्रवाई लंबित थी और शिकायत में लगाए गए आरोपों से उनका क्या संबंध है। अंता जैसे महत्वपूर्ण उपखंड के एसडीएम के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत प्रकरण दर्ज होने के बाद यह मामला प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा में आ गया है। हालांकि आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
Read more 19th Sep 2026
अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
Read more 31st Aug 2022
राष्ट्रीय न्यूज़: मुंबई। बॉलीवुड के स्टार कपल दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के घर एक बार फिर खुशियों ने दस्तक दी है। दोनों शनिवार, 19 सितंबर 2026 को दूसरी बार माता-पिता बने हैं। दीपिका ने दूसरी बेटी को जन्म दिया है। कपल ने सोशल मीडिया पर एक बेहद प्यारा पोस्ट साझा कर अपने फैंस के साथ यह खुशखबरी शेयर की। दीपिका और रणवीर ने अपने संयुक्त इंस्टाग्राम पोस्ट में नवजात बच्ची के छोटे-छोटे फुटप्रिंट की तस्वीर शेयर की। इसके साथ उन्होंने लिखा—“Welcome baby girl! 19/9/2026. Dua, Deepika and Ranveer.” पोस्ट में नजर से बचाने वाला इमोजी भी लगाया गया है। हालांकि कपल ने फिलहाल अपनी दूसरी बेटी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। दुआ बनी बड़ी बहन दीपिका और रणवीर की पहली बेटी दुआ पादुकोण सिंह का जन्म 8 सितंबर 2024 को हुआ था। अब करीब दो साल बाद परिवार में दूसरी बेटी के आने से दुआ बड़ी बहन बन गई हैं। खास बात यह है कि दोनों बेटियों का जन्म सितंबर महीने में हुआ है। कपल की ओर से दूसरी बेटी के जन्म की घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और फैंस ने दोनों को शुभकामनाएं दीं और नए मेहमान का स्वागत किया। अप्रैल में की थी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा दीपिका और रणवीर ने इसी साल अप्रैल में अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की थी। उस समय उन्होंने एक खास पोस्ट के जरिए फैंस को बताया था कि उनका परिवार एक बार फिर बढ़ने वाला है। अब सितंबर में दूसरी बेटी के जन्म के साथ कपल के घर एक और नन्ही सदस्य आ गई है। शादी के छह साल बाद चार लोगों का हुआ परिवार दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने नवंबर 2018 में इटली में शादी की थी। शादी के करीब छह साल बाद सितंबर 2024 में दोनों पहली बार माता-पिता बने और बेटी दुआ का स्वागत किया। अब दूसरी बेटी के जन्म के बाद उनका परिवार चार सदस्यों का हो गया है। दीपिका और रणवीर अपने पारिवारिक जीवन को काफी निजी रखते हैं और दुआ की तस्वीरें भी सीमित मौकों पर ही साझा की हैं। दूसरी बेटी के जन्म की जानकारी भी उन्होंने बेहद सादगी से फुटप्रिंट वाली पोस्ट के जरिए दी है। राधाष्टमी के दिन आई नन्ही परी इस बार 19 सितंबर को राधाष्टमी का पर्व भी मनाया जा रहा है। ऐसे में दीपिका और रणवीर की दूसरी बेटी का जन्म इसी शुभ अवसर पर हुआ है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर फैंस लगातार कपल को बधाई दे रहे हैं। फिलहाल कपल ने नवजात बच्ची की तस्वीर या नाम साझा नहीं किया है। फैंस अब यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि दीपिका और रणवीर अपनी दूसरी बेटी का क्या नाम रखते हैं।
Read more 20th Sep 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: तिरुपति/नई दिल्ली। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के प्रसिद्ध श्रीवारी लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी की कथित मिलावट के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। ED के मुताबिक मंगला को हैदराबाद जोनल कार्यालय ने 17 सितंबर को हिरासत में लिया था और शुक्रवार को जारी बयान में कार्रवाई की जानकारी दी गई। बाद में उन्हें विशाखापत्तनम की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। ED का आरोप है कि TTD को जिस सामग्री की आपूर्ति ‘एगमार्क स्पेशल ग्रेड काउ घी’ बताकर की गई, उसमें वास्तविक गाय के घी के स्थान पर रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल, पामोलिन और कई रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने MG-90, मोनोग्लिसराइड्स, Myvacet Soft 400 और acetic acid ester जैसे पदार्थों का भी उल्लेख किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन सामग्रियों को मिलाकर ऐसा उत्पाद तैयार किया गया जिसे रिकॉर्ड में शुद्ध गाय के घी के रूप में दिखाया गया। ₹230 करोड़ की कथित सप्लाई, ₹96 करोड़ का घी मंगला से जुड़ा ED की जांच के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच TTD को कथित रूप से करीब ₹230 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी सप्लाई किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इसमें लगभग ₹96 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी कैलाश चंद मंगला की इकाई में तैयार किया गया था। इसलिए ₹230 करोड़ की पूरी राशि को अकेले सुकृति फूड्स द्वारा तैयार घी की रकम मानना सही नहीं होगा; ED ने व्यापक कथित सप्लाई नेटवर्क के लिए ₹230 करोड़ और मंगला से जुड़े निर्माण के लिए करीब ₹96 करोड़ का आंकड़ा बताया है। जांच एजेंसी ने मंगला को इस कथित नेटवर्क का सह-साजिशकर्ता बताया है। ED का दावा है कि उन्होंने मिलावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जुटाने, अपने परिसर में कथित मिलावटी घी तैयार करने और इसे अलग-अलग कारोबारी इकाइयों के माध्यम से सप्लाई कराने में भूमिका निभाई। एजेंसी ने Sri Vyshnavi Dairy Specialities, Malganga Milk & Agro Products और A.R. Dairy Foods जैसी इकाइयों के जरिए सप्लाई समन्वय किए जाने का आरोप भी लगाया है।खरीद-बिक्री के फर्जी रिकॉर्ड बनाने का भी आरोप ED के मुताबिक कथित मिलावट को छिपाने के लिए घी और रिफाइंड पाम ऑयल की खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया। एजेंसी का आरोप है कि ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए जिनसे यह दिखाया जा सके कि उत्पादन और सप्लाई वास्तविक गाय के घी की थी, जबकि जांच में दूसरी सामग्री के उपयोग का दावा सामने आया। इन आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच तिरुपति ईस्ट पुलिस की उस FIR से जुड़ी है जिसमें कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार के जरिए TTD को मिलावटी घी सप्लाई करने के आरोप लगाए गए थे। उसी कथित अपराध से पैदा हुई रकम और वित्तीय लेन-देन की जांच ED PMLA के तहत कर रही है।इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी के प्रमोटर की भी गिरफ्तारी कैलाश चंद मंगला इस मामले में गिरफ्तार होने वाले पहले कारोबारी नहीं हैं। ED इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क से जुड़े प्रमोटर एवं निदेशक विपिन जैन को भी इसी जांच में गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी अब कथित सप्लाई चेन, भुगतान, विभिन्न कारोबारी संस्थाओं और घी के निर्माण एवं बिक्री रिकॉर्ड की जांच आगे बढ़ा रही है।‘पशु चर्बी’ के पुराने विवाद से अलग है ED का मौजूदा दावा तिरुपति लड्डू विवाद में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ED के मौजूदा बयान में कथित मिलावट के रूप में पाम आधारित तेल और रासायनिक पदार्थों का उल्लेख किया गया है; एजेंसी ने इस कार्रवाई में पशु चर्बी मिलने का दावा नहीं किया है। इससे पहले CBI द्वारा गठित SIT की जांच में जांचे गए नमूनों में पशु चर्बी की मौजूदगी स्थापित नहीं होने की रिपोर्ट सामने आई थी, हालांकि घी में अन्य प्रकार की मिलावट और खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच अलग विषय रही है।इसलिए मौजूदा ED कार्रवाई को सीधे पुराने “animal fat” आरोप की पुष्टि के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। ताजा कार्रवाई का केंद्र कथित रूप से पाम ऑयल, पामोलिन, पाम कर्नेल ऑयल तथा अन्य पदार्थों का इस्तेमाल कर गाय के घी के नाम पर उत्पाद तैयार करने और उसके वित्तीय लेन-देन पर है। रोज तैयार होते हैं 4 लाख से ज्यादा श्रीवारी लड्डू तिरुपति का श्रीवारी लड्डू दुनिया के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक प्रसादों में शामिल है। TTD की जून 2026 की आधिकारिक जानकारी के अनुसार मंदिर प्रशासन प्रतिदिन 4 लाख से अधिक लड्डू तैयार करता है। मई में औसतन करीब 4.08 लाख लड्डू प्रतिदिन बनाए गए थे। अकेले जून 2026 में रिकॉर्ड 1.26 करोड़ से अधिक लड्डुओं की बिक्री हुई।TTD के मुताबिक लड्डू निर्माण में रोजाना लगभग 16 टन घी सहित करीब 68 टन कच्ची सामग्री इस्तेमाल होती है। इतनी बड़ी मात्रा में प्रसाद तैयार होने के कारण घी की गुणवत्ता और सप्लाई चेन की निगरानी सीधे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और खाद्य गुणवत्ता से जुड़ा विषय है।अब मनी ट्रेल और सप्लाई नेटवर्क की जांच कैलाश चंद मंगला को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद ED की जांच अब कथित मिलावट से पैदा हुई आय, कारोबारी संस्थाओं के बीच हुए भुगतान और सप्लाई नेटवर्क पर केंद्रित है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित मिलावटी उत्पाद किन-किन संस्थाओं के जरिए TTD तक पहुंचा और इससे जुड़े वित्तीय लाभ का प्रवाह किस तरह हुआ। फिलहाल कैलाश चंद मंगला के खिलाफ लगाए गए ये सभी आरोप ED की जांच का हिस्सा हैं। गिरफ्तारी या एजेंसी का आरोप अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है और मामले की अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
Read more 20th Sep 2026
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved