राजस्थान न्यूज़: ढाका के पिता को मिली 20 करोड़ की बजरी लीज पर उठाए सवाल, SIT से जांच कराने और जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने की मांग जयपुर। वरिष्ठ अध्यापक भर्ती पेपर लीक मामले ने राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर पेपर लीक प्रकरण के मुख्य आरोपी सुरेश ढाका, उसके कथित आर्थिक नेटवर्क और उसके पिता को मिली करीब 20 करोड़ रुपए की बजरी खनन लीज की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। डॉ. मीणा ने पत्र में कहा कि सुरेश ढाका वरिष्ठ अध्यापक भर्ती पेपर लीक मामले का मुख्य आरोपी है और 28 दिसंबर 2022 को जयपुर से फरार होने के बाद अब तक कानून की पकड़ से बाहर है। उन्होंने दावा किया कि ढाका के खिलाफ 10 से अधिक मामले दर्ज हैं। ऐसे में उसके आर्थिक नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन, सहयोगियों और उससे जुड़े प्रभावशाली लोगों की जांच स्वतंत्र एजेंसी या SIT के माध्यम से कराई जानी चाहिए। बजरी लीज पर उठाए सवाल पत्र में सुरेश ढाका के पिता को आवंटित बजरी खनन लीज को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने पूछा कि 10 से अधिक मामलों में वांछित व्यक्ति के परिवार को करीब 20 करोड़ रुपए की इतनी बड़ी लीज कैसे आवंटित हुई। उन्होंने मांग की कि इस लीज में निवेश की गई राशि के स्रोत, वित्तीय लेन-देन और संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच होनी चाहिए। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने यह भी कहा कि यदि सुरेश ढाका की गिरफ्तारी होती है, तो भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े कई बड़े और प्रभावशाली चेहरे सामने आ सकते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस मामले को केवल एक आरोपी तक सीमित न रखकर पूरे नेटवर्क के स्तर पर देखा जाए। स्पर्धा चौधरी की भूमिका की जांच की मांग कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने पत्र में स्पर्धा चौधरी की भूमिका, संपत्तियों और कथित संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जांच की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि पेपर लीक जैसे मामलों में केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि आरोपियों के आर्थिक स्रोत, संपत्ति निर्माण और सहयोगी नेटवर्क की गहराई से जांच जरूरी है। युवाओं के भविष्य से जुड़ा मामला बताया कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं प्रदेश के लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं की पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखने के लिए सरकार को पेपर लीक मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनानी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि संबंधित एजेंसियों को निष्पक्ष, समयबद्ध और सख्त जांच के निर्देश दिए जाएं। उन्होंने कहा कि जब तक पेपर लीक माफिया के आर्थिक आधार को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाएगा, तब तक भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करना कठिन होगा। SIT जांच की मांग कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने पूरे प्रकरण की SIT या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सुरेश ढाका के वित्तीय नेटवर्क, संपत्तियों, सहयोगियों, खनन लीज से जुड़े निवेश और भर्ती परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार की परतें खोलना जरूरी है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणाने पत्र में कहा कि राज्य के युवाओं का भरोसा तभी मजबूत होगा, जब पेपर लीक मामलों में शामिल हर व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून के दायरे में लाया जाए। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने की मांग की है। यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर पेपर लीक मामलों में युवाओं के भविष्य और भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता का प्रश्न जुड़ा है, वहीं दूसरी ओर आरोपी के परिवार को मिली कथित खनन लीज ने पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है।
Read more 13th Jul 2026
राजस्थान न्यूज़: भरतपुर: राजस्थान के भरतपुर में कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले शातिर बदमाशों के खिलाफ पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। शहर के एक बर्तन व्यापारी की गोली मारकर हत्या करने और लूट की वारदात को अंजाम देने वाले दो मुख्य आरोपियों की पुलिस ने शुक्रवार को भरे बाजार में परेड निकाली। पुलिस दोनों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच घटनास्थल पर लेकर पहुंची, जहां उनसे पूरी वारदात का 'सीन रिक्रिएट' (घटनाक्रम का दोहराव) कराया गया। इस दौरान दोनों आरोपी पैर में चोट होने के कारण बाजार में करीब 50 मीटर तक लंगड़ाते हुए चले। इस नजारे को बाजार से गुजर रहे सैकड़ों राहगीर और स्थानीय दुकानदार टकटकी लगाए देखते रहे। पुलिस की इस सख्त कार्रवाई से आमजन में सुरक्षा का भाव जगा है। जानिए क्या थी पूरी वारदात: 5 जुलाई को दो व्यापारियों पर हुआ था हमला भरतपुर शहर में बीती 5 जुलाई को बदमाशों ने ताबड़तोड़ दो बड़ी लूट की वारदातों को अंजाम देकर सनसनी फैला दी थी: किराना व्यापारी से लूट: पहली वारदात पुष्प वाटिका कॉलोनी में हुई थी, जहां बदमाशों ने किराना व्यापारी प्रमोद मित्तल को गोली मारकर उनसे 60 हजार रुपयों से भरा बैग लूट लिया था। बर्तन व्यापारी चंद्रभान की हत्या: इसके कुछ ही देर बाद दूसरी वारदात अखड्ड तिराहे पर हुई, जहां बर्तन व्यापारी चंद्रभान को निशाना बनाया गया। बदमाशों ने चंद्रभान से 5 लाख रुपए से भरा बैग लूटने का प्रयास किया। जब चंद्रभान ने हिम्मत दिखाते हुए बैग नहीं छोड़ा, तो बदमाशों ने उन्हें बेरहमी से गोली मार दी। इस घटना में गंभीर रूप से घायल चंद्रभान की मौत हो गई थी। यूपी के बुलंदशहर में छिपे थे आरोपी, मुठभेड़ के बाद हुई गिरफ्तारी वारदात की गंभीरता को देखते हुए भरतपुर पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी थी। मामले के जांच अधिकारी (IO) पवन यादव ने बताया कि इस हत्याकांड और लूट में बलराम और प्रवीण मुख्य आरोपी हैं। इससे पहले 8 जुलाई को पुलिस ने एक अन्य आरोपी महेश को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था, जिसके पैर में गोली लगी थी। इसके बाद 9 जुलाई को पुलिस को पुख्ता सूचना मिली कि मुख्य आरोपी प्रवीण और बलराम उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में छिपे हुए हैं। भरतपुर पुलिस की विशेष टीम ने तुरंत यूपी के बुलंदशहर में दबिश दी और दोनों को दबोच लिया। पुलिसकर्मी की पिस्टल छीनकर थानाधिकारी पर झोंक दिया था फायर दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस टीमें उन्हें यूपी से भरतपुर लेकर आ रही थीं, तब रास्ते में बदमाशों ने भागने की खतरनाक साजिश रची। चिकसाना थाना इलाके में आरोपी प्रवीण ने टॉयलेट जाने का बहाना बनाया। जैसे ही पुलिस ने गाड़ियां रोकीं, प्रवीण ने अचानक एक पुलिसकर्मी की सर्विस पिस्टल छीन ली और चिकसाना थाना अधिकारी (SHO) ब्रजेश मीणा पर जान से मारने की नीयत से ताबड़तोड़ दो फायर झोंक दिए। खुशकिस्मती से एक गोली थाना अधिकारी की बुलेटप्रूफ जैकेट पर जा लगी, जिससे उनकी जान बच गई। इसके बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दोनों को फिर से काबू किया। दुकान के पास ले गई पुलिस, जहां बदमाशों ने की थी रेकी आईओ पवन यादव ने बताया कि शुक्रवार दोपहर करीब 12:00 बजे दोनों आरोपियों बलराम और प्रवीण को भारी पुलिस जाब्ते के साथ वारदात स्थल पर ले जाया गया। पुलिस दोनों को मृतक बर्तन व्यापारी चंद्रभान की दुकान के पास भी लेकर गई, जहां इन बदमाशों ने वारदात से पहले पूरी रेकी (निगरानी) की थी। थानाधिकारी पर फायरिंग करने के मामले में भी दोनों के खिलाफ अलग से जांच जारी है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर: राजस्थान की कला, संस्कृति और रंगमंच का सबसे प्रमुख केंद्र माना जाने वाला जयपुर का ऐतिहासिक 'रवीन्द्र मंच' इन दिनों प्रशासनिक अनदेखी के कारण बदहाली के आंसू रो रहा है। सोमवार दोपहर करीब 12:15 बजे प्रदेश की उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) एवं कला-संस्कृति मंत्री दीया कुमारी जब औचक निरीक्षण करने रामनिवास बाग स्थित रवीन्द्र मंच पहुंचीं, तो वहां की जर्जर और खस्ताहाल व्यवस्थाओं को देखकर बेहद नाराज हुईं। मंच के भीतर 6 महीने से बंद पड़े एयर कंडीशनर (एसी), दर्शकों के बैठने के लिए टूटी हुई कुर्सियां, दीवारों से उखड़ता प्लास्टर और साफ-सफाई का अभाव देखकर डिप्टी सीएम का पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों की क्लास लगाते हुए कड़ी फटकार लगाई और जल्द से जल्द रवीन्द्र मंच का कायाकल्प (रिनोवेशन) करने के निर्देश दिए। केवल मरम्मत से काम नहीं चलेगा: भविष्य के लिए ठोस मेंटेनेंस नीति बनाने के निर्देश निरीक्षण के दौरान डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने साफ लहजे में अधिकारियों से कहा कि रवीन्द्र मंच की इस दयनीय स्थिति को सुधारने के लिए केवल एक बार की मरम्मत या पैचवर्क से काम नहीं चलने वाला है। इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर की गरिमा को वापस लौटाने के लिए एक नियमित और बेहतर मेंटेनेंस (रखरखाव) व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि रिनोवेशन की योजना इस तरह बनाई जाए ताकि भविष्य में कलाकारों और यहाँ आने वाले दर्शकों को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। 'सेल्फ सस्टेनेबल मॉडल' पर हो काम, ताकि आत्मनिर्भर बने सांस्कृतिक केंद्र डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने रवीन्द्र मंच के संचालन को लेकर अधिकारियों को एक नए विजन पर काम करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि रवीन्द्र मंच को एक ऐसे सक्रिय सांस्कृतिक केंद्र के रूप में पुनर्जीवित किया जाए, जहां सालभर नियमित रूप से नाटक, संगीत और कला से जुड़े कार्यक्रम आयोजित होते रहें। उन्होंने इसे एक 'सेल्फ सस्टेनेबल' (आत्मनिर्भर) मॉडल के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे केंद्र को लगातार बुकिंग मिले, राजस्व पैदा हो और यह अपने रखरखाव का खर्च खुद निकालने में सक्षम हो सके। करोड़ों खर्च होने के बाद भी दुर्दशा पर जताई चिंता: पहले के रिनोवेशन पर उठे सवाल निरीक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री ने इस बात पर भी गहरी चिंता और आश्चर्य व्यक्त किया कि कुछ ही वर्ष पहले इस परिसर के जीर्णोद्धार और आधुनिकरण पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे। बजट खर्च होने के बावजूद आज फिर से रवीन्द्र मंच की स्थिति इतनी बदतर कैसे हो गई? उन्होंने अधिकारियों से इस बात का जवाब मांगा कि इतने कम समय में व्यवस्थाएं दोबारा पूरी तरह क्यों ठप हो गईं और पूर्व में किए गए रिनोवेशन के बाद इसके रख-रखाव पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया।
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उदयपुर न्यूज़: शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला के हाथ से सोने की दो चूड़ियां पार होने का मामला सामने आया है। घटना कांता मारवाह मार्ग, पुलिस लाइन क्षेत्र की बताई जा रही है। पीड़िता के भतीजे ने सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट देकर बाइक सवार बदमाशों पर वारदात को अंजाम देने का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार कांता मारवाह मार्ग पुलिस लाइन अजमेर निवासी जितेन्द्र नारवानी पुत्र चिमनदास नारवानी ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट में बताया गया कि उनकी चाची मीना नारवानी उम्र 75 वर्ष घर से पीछे वाली गली में गाय को रोटी खिलाने के लिए निकली थीं। गली में गाय नहीं मिलने पर वे मुख्य सड़क की ओर पुलिस लाइन चौराहे की तरफ जाने लगीं। इसी दौरान बाइक सवार 2 से 3 युवक उनके पीछे चलने लगे। आरोप है कि इनमें से एक युवक बाइक से उतरकर बुजुर्ग महिला के साथ-साथ चलने लगा और उनसे बातचीत करने की कोशिश करने लगा। कुछ देर बाद महिला को ऐसा महसूस हुआ कि उनकी आंखें बंद हो रही हैं और उन्हें ठीक से कुछ याद नहीं रहा। करीब पांच मिनट बाद जब महिला को होश आया तो उनके हाथों में पहनी सोने की दोनों चूड़ियां गायब थीं। इसी बीच बाइक सवार युवक मौके से फरार हो चुके थे। घटना से घबराई बुजुर्ग महिला घर लौटीं और परिजनों को पूरी बात बताई। इसके बाद परिजनों ने सिविल लाइन थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में बाइक सवार युवकों पर सोने की चूड़ियां चोरी करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच एएसआई कैलाश चंद को सौंपी है। फिलहाल पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने और संदिग्ध युवकों की पहचान करने में जुटी है। बुजुर्ग महिला के साथ हुई इस घटना के बाद क्षेत्र में लोगों में चिंता का माहौल है। परिजनों ने पुलिस से जल्द आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी और चोरी हुई ज्वेलरी बरामद करने की मांग की है।
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उदयपुर न्यूज़: अजमेर के बोर्ड ऑफिस की गली स्थित ओला शोरूम पर गुरुवार को ग्राहकों ने जमकर हंगामा किया और विरोध प्रदर्शन करते हुए जल्द समाधान की मांग की। बड़ी संख्या में पहुंचे ग्राहकों, विशेषकर महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनकी इलेक्ट्रिक स्कूटी खराब होने के बाद सात महीने पहले सर्विस के लिए जमा कराई गई थी, लेकिन आज तक वाहन वापस नहीं मिला। उनका कहना है कि वे लगातार शोरूम के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन दिया जाता है। फोन करने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। प्रदर्शन के दौरान एक युवक ने आरोप लगाया कि उसके स्कूटर का स्टार्ट बटन बार-बार खराब हो जाता है। शिकायत करने पर केवल बटन बदल दिया जाता है, लेकिन मूल समस्या बनी रहती है। ग्राहकों का कहना है कि उन्होंने कंपनी के उच्च अधिकारियों से भी संपर्क किया, लेकिन वहां से भी कोई ठोस समाधान नहीं मिला। इससे नाराज ग्राहकों ने शोरूम के बाहर प्रदर्शन कर प्रबंधन के रवैये पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
Read more 2nd Jul 2026
अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
Read more 31st Aug 2022
अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़: ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वह दिसंबर में भारत से बांग्लादेश लौटेंगी और अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगी। Reuters को दिए इंटरव्यू में हसीना ने कहा कि उनके साथ अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी वापस लौटकर आत्मसमर्पण करेंगे। हसीना ने कहा कि अवामी लीग के लगभग सभी बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं और कई लोग छिपकर रहने को मजबूर हैं। हालांकि, उन्होंने बांग्लादेश लौटने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है। रिपोर्ट के अनुसार हसीना ने कहा कि वह स्वेच्छा से लौटेंगी और इसके लिए किसी पर्दे के पीछे की बातचीत की जरूरत नहीं है। शेख हसीना वर्ष 2024 में बांग्लादेश में सरकार विरोधी आंदोलन के बाद देश छोड़कर भारत आ गई थीं। इसके बाद उन्हें छात्र आंदोलन पर हुई कार्रवाई से जुड़े मामले में अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई। हसीना इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही हैं। हसीना ने कहा कि उन्होंने बांग्लादेश लौटने को लेकर मौजूदा सरकार से कोई बातचीत नहीं की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र, चुनाव, अवामी लीग के राजनीतिक अधिकार और न्याय जैसे मुद्दों पर पर्दे के पीछे कोई समझौता नहीं हो सकता। उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश सरकार उन्हें वापस भेजने के लिए भारत को लगातार पत्र लिख रही है। हसीना ने कहा कि उन्हें वापस लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि वह स्वयं लौटेंगी। हालांकि, हसीना के इस दावे पर बांग्लादेश सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भारत की ओर से भी फिलहाल इस नए बयान पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। इससे पहले भारत ने कहा था कि वह बांग्लादेश के प्रत्यर्पण अनुरोध पर विचार कर रहा है और नई सरकार के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। शेख हसीना की संभावित वापसी बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध, नेताओं पर दर्ज मामलों और आगामी चुनावी माहौल के बीच उनकी वापसी से देश में राजनीतिक हलचल और बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हसीना और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता एक साथ लौटकर आत्मसमर्पण करते हैं, तो इसका असर बांग्लादेश की अदालतों, चुनावी राजनीति, विपक्षी एकजुटता और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी पड़ सकता है।
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राष्ट्रीय न्यूज़: चमोली/देहरादून। बद्रीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी के मामले में चमोली पुलिस की SIT ने बद्री-केदार मंदिर समिति, BKTC, के निलंबित पर्सनल असिस्टेंट प्रमोद नौटियाल को गिरफ्तार कर लिया है। SIT ने उन्हें 12 जुलाई की रात करीब 10 बजे देहरादून के नेहरू कॉलोनी स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद प्रमोद नौटियाल को चमोली लाया गया, जहां बद्रीनाथ थाने में उनसे पूछताछ की जा रही है। इस मामले में मंदिर समिति के चार कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार SIT की टीम सादी वर्दी में देहरादून पहुंची थी और कार्रवाई को गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया। चमोली पुलिस के अनुसार 8 जुलाई को प्रभारी मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवाण की शिकायत पर बद्रीनाथ कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद SP सुरजीत सिंह पंवार के निर्देश पर SIT का गठन किया गया। SIT ने मामले में CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों की जांच की। जांच में आरोप है कि प्रमोद नौटियाल कई बार मंदिर की धनराशि और भेंट सामग्री को मोबाइल के नीचे छिपाकर तथा जेब में रखकर ले जाते हुए दिखाई दिए। पुलिस के अनुसार जांच के दौरान ₹500 के नोट, सोना-चांदी के सिक्कों के पैकेट, शालिग्राम शिला और केसर का पैकेट अवैध रूप से अपने कब्जे में लेने के तथ्य सामने आए हैं। पूछताछ के दौरान जब प्रमोद नौटियाल से पूछा गया कि क्या चढ़ावा चोरी के मामले में मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी भी शामिल हैं, तो उन्होंने सिर हिलाकर इससे इनकार किया। फिलहाल पुलिस इस पूरे प्रकरण में अन्य कर्मचारियों की भूमिका, बरामद सामग्री, CCTV रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों के आधार पर आगे की जांच कर रही है। बद्रीनाथ धाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल से जुड़े इस मामले को अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की पारदर्शी व्यवस्था को देखते हुए पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि कथित चोरी में आरोपी अकेले शामिल था या किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका रही है।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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