राजस्थान न्यूज़: नागौर। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा व्यवस्था में राज्य सरकार ने बदलाव किया है। जयपुर पुलिस कमिश्नरेट से तैनात तीन पीएसओ को उनकी सुरक्षा ड्यूटी से हटा दिया गया है। अब उनकी सुरक्षा मुख्य रूप से नागौर जिला पुलिस के जवानों के जिम्मे रहेगी। सुरक्षा व्यवस्था में किए गए इस बदलाव के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। सुरक्षा में कटौती को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि उन्होंने कभी अतिरिक्त सुरक्षा की मांग नहीं की थी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हजारों युवा और समर्थक हमेशा उनके साथ खड़े रहते हैं और वही उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं। बेनीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक कारणों से इस तरह के फैसले ले रही है। गौरतलब है कि करीब एक वर्ष पहले खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट और सुरक्षा संबंधी अलर्ट के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ाई गई थी। उसी दौरान जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के पीएसओ उनकी सुरक्षा में लगाए गए थे। अब इन अधिकारियों को हटाए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में इस निर्णय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल ही में भैराणा धाम आंदोलन के दौरान दिए गए बेनीवाल के बयानों और सरकार के साथ बढ़ते टकराव के बीच इस फैसले को देखा जा रहा है। बिचून रीको औद्योगिक क्षेत्र के विरोध में आयोजित "रीको भगाओ, भैराणा धाम बचाओ" आंदोलन के दौरान बेनीवाल ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पर तीखे हमले किए थे, जिसके बाद भाजपा और आरएलपी के बीच बयानबाजी और अधिक तेज हो गई थी। भैराणा धाम में आयोजित महापंचायत के दौरान बेनीवाल ने भाजपा सरकार पर साधु-संतों की उपेक्षा का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि सनातन संस्कृति और संत समाज के नाम पर राजनीति करने वाली सरकार संतों की मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। उनके बयानों को लेकर भाजपा नेताओं ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और राजनीतिक मर्यादाओं के उल्लंघन का आरोप लगाया था। सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के बाद अब यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्षी दल इसे सरकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।
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राजस्थान न्यूज़: राजसमंद। बदलते दौर में जहां आधुनिक जीवनशैली ने पारंपरिक जीवन मूल्यों को पीछे छोड़ दिया है, वहीं एक पुराने मिट्टी के चूल्हे ने वर्षों बाद अपनी मां की यादों से जुड़े भावनात्मक संसार को फिर जीवंत कर दिया। लेखक मधुप्रकाश लड्ढा ने अपने संस्मरणात्मक आलेख ‘चूल्हा : मां के स्पर्श का मर्म’ में 25 वर्षों बाद पैतृक घर लौटने पर अनुभव की गई भावनाओं को अत्यंत संवेदनशीलता से व्यक्त किया है। लेखक बताते हैं कि वर्षों बाद जब उन्होंने पुराने घर की दहलीज पर कदम रखा तो बचपन की स्मृतियां चलचित्र की तरह आंखों के सामने तैरने लगीं। कभी माता-पिता की उपस्थिति, प्रेम और आत्मीयता से भरा रहने वाला घर अब केवल ईंट-पत्थरों का मकान बनकर रह गया था। मां की मखमली आवाज और पिता के स्नेहिल अनुशासन की अनुपस्थिति ने घर की आत्मा को जैसे मौन कर दिया हो। आलेख का केंद्र बिंदु वह मिट्टी का चूल्हा है, जिसे वर्षों पहले उनकी मां ने अपने हाथों से बनाया और संभाला था। समय के लंबे अंतराल के बावजूद चूल्हा आज भी उसी स्थान पर सुरक्षित है। उसके साथ जुड़े चकला-बेलन, संडासी, जाली और अन्य घरेलू उपकरण भी मानो बीते समय की गवाही दे रहे हैं। लेखक के अनुसार, चूल्हे के बाहरी आवरण पर आज भी मां की उंगलियों के निशान मौजूद हैं, जिन्हें स्पर्श करते ही उन्हें मां के स्नेह और आलिंगन का अनुभव हुआ। लेख में आधुनिक समाज और बदलते पारिवारिक रिश्तों पर भी गहरी टिप्पणी की गई है। लेखक लिखते हैं कि बेजान चूल्हा तो मौसमों की मार सहकर भी नहीं बदला, लेकिन इंसान बदल गए। कभी छोटे घरों में बड़े दिल बसते थे, आज बड़े घरों में रिश्तों की गर्माहट कम होती जा रही है। यह तुलना वर्तमान सामाजिक संरचना और पारिवारिक विघटन की ओर संकेत करती है। भावनात्मक शैली में लिखे गए इस आलेख में मां को त्याग, समर्पण और प्रेम की प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। लेखक याद करते हैं कि कैसे मां ने तपती गर्मी और कठिन परिस्थितियों में स्वयं कष्ट सहकर परिवार की भूख मिटाई। उनके अनुसार वह चूल्हा अब सिर्फ रसोई का साधन नहीं, बल्कि मां के प्रेम, श्रम और त्याग की जीवित स्मृति बन चुका है। आलेख का अंतिम हिस्सा समय के बदलाव और नई पीढ़ी की जीवनशैली पर केंद्रित है। लेखक मानते हैं कि आने वाले समय में नए चूल्हे तो बनेंगे, लेकिन उनमें मिट्टी की सोंधी खुशबू, मां की उंगलियों के निशान और भावनाओं की वह गर्माहट शायद नहीं होगी, जो कभी संयुक्त परिवारों और पारंपरिक जीवन में महसूस की जाती थी। यह आलेख केवल एक संस्मरण नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक परिवेश, पारिवारिक मूल्यों और मां के अमिट प्रेम को समर्पित एक भावपूर्ण अभिव्यक्ति है, जो पाठकों को अपनी स्मृतियों और रिश्तों के महत्व पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करती है।
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राजस्थान न्यूज़: राजस्थान में सहकारिता राज्यमंत्री गौतम दक के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद विवाद और गहरा गया है। सामने आई एफआईआर रिपोर्ट के अनुसार मंत्री पर पुलिस अधिकारियों को गालियां देने, धमकाने और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह मामला चित्तौड़गढ़ जिले के डूंगला थाना क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। एफआईआर के अनुसार थाना डूंगला में दर्ज एक प्रकरण की जांच के दौरान आरोपी धरराज खारोल को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। जांच के दौरान आरोपी ने कथित रूप से कहा कि यदि उसके बेटे या अन्य लोगों को थाने बुलाया गया तो मंत्री गौतम दक कार्रवाई करवाएंगे। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि इसके बाद मंत्री की ओर से पुलिस अधिकारियों को फोन किए गए। एफआईआर में थाना अधिकारी शैतान सिंह ने आरोप लगाया है कि मंत्री गौतम दक ने उन्हें फोन पर अपशब्द कहे और दबाव बनाने की कोशिश की। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बाद में मंत्री थाने के बाहर पहुंचे, जहां कथित रूप से पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। दस्तावेज के अनुसार मंत्री पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस रिपोर्ट में सरकारी कार्य में बाधा, धमकी और अभद्र भाषा के प्रयोग का उल्लेख किया गया है। मामले की जांच उच्च अधिकारियों की निगरानी में की जा रही है। वहीं दूसरी ओर सहकारिता राज्यमंत्री गौतम दक ने वायरल ऑडियो और आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि ऑडियो को एडिट कर गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। मामले के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस प्रकरण को लेकर सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है, जबकि पुलिस विभाग पूरे मामले की तकनीकी और कानूनी जांच में जुटा हुआ है।
Read more 29th May 2026
अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
Read more 31st Aug 2022
राष्ट्रीय न्यूज़: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बेंगलुरु में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि पार्टी हाईकमान जब भी कहेगा, वे पद छोड़ देंगे। सिद्धारमैया ने कहा कि बुधवार को हाईकमान ने इस्तीफा देने के लिए कहा और आज उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया। सिद्धारमैया ने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल थावरचंद गहलोत के सचिव को सौंपा है। राज्यपाल फिलहाल पारिवारिक कारणों से बेंगलुरु से बाहर बताए जा रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी मौजूद रहे। हालांकि प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अगले मुख्यमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा नहीं की गई, लेकिन राजनीतिक हलकों में डीके शिवकुमार का नाम लगभग तय माना जा रहा है। इससे पहले सिद्धारमैया ने अपने आवास पर मंत्रियों के साथ बैठक कर फैसले की जानकारी दी। बैठक के दौरान भावुक दृश्य भी देखने को मिला, जब डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छुए और दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया। इसे कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के दौरान एकजुटता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। वहीं राज्य सरकार में मंत्री एच.के. पाटिल ने संकेत दिए कि डीके शिवकुमार के नाम पर सहमति बन चुकी है और वही कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री होंगे। हालांकि पार्टी हाईकमान की औपचारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनावों और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव कर रही है। सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद अब पूरे देश की नजर कांग्रेस नेतृत्व के अगले फैसले पर टिकी हुई है
Read more 28th May 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को नीट पेपर लीक प्रकरण से आहत होकर आत्महत्या करने वाले छात्र प्रदीप मेघवाल के परिवार से मुलाकात की। इस दौरान राहुल गांधी ने परिवार को सांत्वना दी और कहा कि प्रदीप की मौत केवल एक आत्महत्या नहीं बल्कि देश की भ्रष्ट और टूटी हुई परीक्षा व्यवस्था का परिणाम है। राहुल गांधी ने कहा कि एक माँ-बाप ने अपना बेटा खो दिया, जबकि उनका कोई दोष नहीं था। उन्होंने कहा कि देश के लाखों विद्यार्थी पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य के दबाव के बीच संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में जब पेपर लीक जैसी घटनाएं होती हैं, तो केवल परीक्षा प्रणाली ही नहीं टूटती, बल्कि छात्रों के सपने और पूरे परिवार की उम्मीदें भी बिखर जाती हैं। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने परीक्षा प्रणाली को माफियाओं के हवाले कर दिया और आज भी सत्ता से चिपके हुए हैं, उन्हें इस परिवार के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने में विफल रही है। मुलाकात के दौरान परिवार का दर्द और भावुक माहौल साफ दिखाई दिया। राहुल गांधी ने परिवार को भरोसा दिलाया कि विद्यार्थियों के हितों और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी। इस मामले को लेकर देशभर में छात्रों और युवाओं के बीच लगातार नाराजगी देखी जा रही है। नीट पेपर लीक प्रकरण को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है और परीक्षा प्रणाली में सुधार, दोषियों पर सख्त कार्रवाई तथा छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहा है।
Read more 27th May 2026
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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