राजस्थान न्यूज़: जोधपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पत्नी सुनीता, बेटे वैभव और बहू हिमांशी गहलोत के साथ शुक्रवार, 11 सितंबर को जोधपुर में नगरीय निकाय चुनाव के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग किया। गहलोत अपने परिवार के साथ महामंदिर क्षेत्र स्थित वर्धमान जैन स्कूल मतदान केंद्र पहुंचे और वोट डाला। मतदान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों और जोधपुर के मतदाताओं से लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों को अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। जोधपुर नगर निगम के 100 वार्डों में शुक्रवार सुबह से मतदान जारी है। भाजपा और कांग्रेस के साथ निर्दलीय व अन्य दलों के प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं। मतदान को लेकर सुबह से ही शहर के विभिन्न मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की आवाजाही देखने को मिल रही है। राजस्थान में निकाय चुनाव के दूसरे चरण के तहत जोधपुर सहित छह प्रमुख नगर निगमों में 11 सितंबर को मतदान हो रहा है। परिवार के साथ मतदान केंद्र पहुंचे गहलोत अशोक गहलोत अपने परिवार के सदस्यों के साथ महामंदिर स्थित मतदान केंद्र पहुंचे। मतदान की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्होंने वोट डाला और मतदाताओं से भी घरों से निकलकर मतदान केंद्र पहुंचने की अपील की।जोधपुर अशोक गहलोत का गृह क्षेत्र है। निकाय चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में भी वे जोधपुर में सक्रिय रहे और कांग्रेस प्रत्याशियों के समर्थन में जनसभा को संबोधित किया था। 14 सितंबर को आएंगे नतीजे नगर निकाय चुनाव के दूसरे चरण की मतगणना 14 सितंबर को होगी। जोधपुर नगर निगम में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है, जबकि कई वार्डों में निर्दलीय और अन्य दलों के प्रत्याशी चुनाव को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बना रहे हैं। दूसरे चरण का मतदान 11 सितंबर को और मतगणना 14 सितंबर को निर्धारित है।
Read more 12th Sep 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजधानी जयपुर के करधनी इलाके में एक ही परिवार की चार महिलाओं की हत्या से सनसनी फैल गई। गोविंद वाटिका में पत्नी और तीन बेटियों की सिर और चेहरे पर भारी वस्तु से वार कर हत्या कर दी गई। पुलिस को घटनास्थल से वारदात में इस्तेमाल किया गया पत्थर भी मिला है। पुलिस को महिला के पति राहुल झा पर हत्या का संदेह है। वारदात के बाद से वह फरार है। पुलिस की अलग-अलग टीमें उसकी तलाश कर रही हैं। आरोपी अपना मोबाइल फोन भी घर पर ही बंद हालत में छोड़ गया। डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण के अनुसार शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे पुलिस को गोविंद वाटिका स्थित प्लॉट नंबर ए-169 में चार लोगों की हत्या की सूचना मिली थी। मृतकों की पहचान राहुल की पत्नी गीता झा (40) और बेटियों नंदिनी (22), राधिका (17) और गौरी के रूप में हुई है। पत्नी का शव पहली मंजिल पर, बेटियों के शव नीचे मिले पुलिस जब मकान में पहुंची तो अलग-अलग कमरों में चारों शव मिले। गीता झा का शव मकान की पहली मंजिल पर बने कमरे में मिला, जबकि तीनों बेटियों के शव ग्राउंड फ्लोर पर स्थित दो कमरों में पाए गए। चारों के सिर और चेहरे पर गंभीर चोट के निशान थे। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस को आशंका है कि गुरुवार रात जब परिवार के सदस्य सो रहे थे, उसी दौरान उन पर हमला किया गया। घटनास्थल से पुलिस ने एक भारी पत्थर बरामद किया है। पुलिस को संदेह है कि इसी से वार किए गए। फोरेंसिक टीम ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। हत्या के बाद सुबह दूध लिया, पिता को चाय पिलाई वारदात के बाद आरोपी के व्यवहार को लेकर भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे राहुल ने दूध वाले से दूध लिया। इसके बाद उसने घर में मौजूद अपने बुजुर्ग पिता लक्ष्मीनाथ झा को चाय बनाकर पिलाई। इसके बाद वह घर से निकल गया। जाते समय राहुल अपना मोबाइल फोन भी घर पर छोड़ गया, जिसे स्विच ऑफ किया हुआ था। सुबह दूध लेने के बाद उसके फरार होने की बात भी प्रारंभिक रिपोर्टों में सामने आई है। खून देखकर रोने लगे बुजुर्ग पिता राहुल के पिता लक्ष्मीनाथ झा भी उसी मकान में मौजूद थे। बताया जा रहा है कि शुक्रवार सुबह जब वे टॉयलेट से बाहर आए तो नीचे स्थित कमरे में खून देखा। कमरे का दृश्य देखकर वे घबरा गए और रोने लगे। उन्होंने आसपास के पड़ोसियों को इसकी सूचना दी। पड़ोसियों ने इसके बाद पुलिस को घटना की जानकारी दी। करीब सुबह 10 बजे सूचना मिलने पर करधनी थाना पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। कमरों की जांच करने पर गीता और उनकी तीनों बेटियों के शव मिले। घर में ब्यूटी पार्लर चलाती थीं गीता गीता झा घर की पहली मंजिल पर ब्यूटी पार्लर चलाती थीं। वहीं तीनों बेटियां पढ़ाई कर रही थीं। बड़ी बेटी नंदिनी पढ़ाई के साथ प्राइवेट नौकरी भी करती थी। राधिका 12वीं कक्षा की छात्रा थी, जबकि सबसे छोटी बेटी गौरी स्कूल में पढ़ रही थी। एक साथ मां और तीन बेटियों की हत्या की खबर सामने आने के बाद इलाके में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। तीन दिन पहले गुजरात से लौटा था राहुल पड़ोसियों के अनुसार राहुल झा शेयर ट्रेडिंग से जुड़ा काम करता था और घटना से करीब तीन दिन पहले ही गुजरात से जयपुर लौटा था। एक पड़ोसी महिला के मुताबिक राहुल ने हाल ही में उससे 50 हजार रुपए उधार मांगे थे। महिला का कहना है कि उसने राहुल को 25 हजार रुपए दिए थे। हालांकि इस लेन-देन और हत्या के बीच किसी तरह के संबंध की पुलिस ने फिलहाल पुष्टि नहीं की है। हत्या की वजह अभी साफ नहीं पुलिस ने मकान को सुरक्षित कर फोरेंसिक टीम से जांच करवाई है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। पति राहुल झा को पुलिस मामले में प्रमुख संदिग्ध मानकर तलाश कर रही है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार उसके खिलाफ तलाशी अभियान शुरू किया गया है, लेकिन हत्या के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। पुलिस परिवार की आर्थिक स्थिति, आपसी संबंध, हाल की गतिविधियों और राहुल के संपर्क में रहे लोगों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। आरोपी के पकड़े जाने और पूछताछ के बाद ही वारदात की वास्तविक वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव का मतदान समाप्त होते ही भाजपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी कर दी है। चुनाव परिणाम और निकाय अध्यक्ष पद के चुनाव के बीच सेंधमारी की आशंका को देखते हुए प्रत्याशियों को बाहरी संपर्क से दूर रखकर पर्यटन और धार्मिक स्थलों की यात्रा कराई जा रही है। भाजपा के प्रत्याशी उत्तराखंड के नैनीताल और आसपास के धार्मिक स्थलों का भ्रमण कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों को नीमराना क्षेत्र में ठहराया है। राजनीतिक गलियारों में इन यात्राओं को संभावित खरीद-फरोख्त और दल-बदल रोकने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। मतदान खत्म होते ही रात में रवाना हुए भाजपा प्रत्याशी विराटनगर, पावटा-प्रागपुरा और शाहपुरा नगर निकायों के कुल 83 भाजपा प्रत्याशी 9 सितंबर को मतदान समाप्त होने के बाद रात में ही रवाना हो गए थे। भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार बादलीवाल के नेतृत्व में गए प्रत्याशियों में विराटनगर के 25, पावटा-प्रागपुरा के 45 और शाहपुरा के 13 प्रत्याशी शामिल हैं। पावटा-प्रागपुरा नगर निकाय में कुल 45 वार्ड हैं और मतदान 9 सितंबर को हुआ था। यात्रा के दौरान शाहपुरा के प्रत्याशियों ने स्वीमिंग और फुटबॉल खेलकर समय बिताया। नैनीताल और आसपास के धार्मिक स्थलों के दर्शन कराने के बाद उन्हें जम्मू-कश्मीर ले जाने का कार्यक्रम भी बताया जा रहा है। मतगणना के समय भी क्षेत्र में नहीं रहेंगे प्रत्याशी इस राजनीतिक यात्रा की खास बात यह है कि भाजपा प्रत्याशी 14 सितंबर को होने वाली मतगणना के दौरान भी अपने-अपने क्षेत्रों में उपस्थित नहीं रहेंगे। भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार बादलीवाल के अनुसार प्रत्याशियों को 21 सितंबर तक साथ रखने का कार्यक्रम है। पार्टी इसे पर्यटन और धार्मिक स्थलों के दर्शन की यात्रा बता रही है। मतदान के बाद 14 सितंबर को परिणाम घोषित होंगे। इसके सात दिन बाद 21 सितंबर को निकाय अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होगा। अध्यक्ष चुनाव संपन्न होने के बाद ही संबंधित निकायों में बोर्ड गठन की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। सात दिन के अंतर ने बढ़ाई दोनों दलों की चिंता मतगणना और अध्यक्ष चुनाव के बीच सात दिन का अंतर होने के कारण भाजपा और कांग्रेस कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं। यदि किसी निकाय में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय अथवा दूसरे खेमे के पार्षद अध्यक्ष बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।इसी आशंका को देखते हुए दलों ने चुनाव परिणाम आने से पहले ही अपने प्रत्याशियों को एकजुट कर लिया है। नतीजे घोषित होने के बाद विजयी प्रत्याशियों को अध्यक्ष पद के मतदान तक साथ रखने की तैयारी है। कांग्रेस के करीब 70 प्रत्याशी नीमराना में भाजपा की तरह कांग्रेस ने भी विराटनगर और पावटा-प्रागपुरा क्षेत्र के अपने करीब 70 प्रत्याशियों को एक साथ रखा है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक इंद्राज गुर्जर के नेतृत्व में इन प्रत्याशियों को नीमराना क्षेत्र में ठहराया गया है। कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्हें आसपास के मंदिरों और धार्मिक स्थलों के दर्शन भी कराए जा रहे हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक इंद्राज गुर्जर के अनुसार कांग्रेस प्रत्याशी भी 14 सितंबर की मतगणना के लिए वापस नहीं लौटेंगे। सभी प्रत्याशियों को 21 सितंबर को अध्यक्ष पद का चुनाव संपन्न होने के बाद ही घर भेजने की योजना है। फिलहाल दोनों दल इन यात्राओं को सामान्य भ्रमण और धार्मिक दर्शन बता रहे हैं, लेकिन मतगणना से पहले शुरू हुई बाड़ाबंदी ने स्पष्ट कर दिया है कि अध्यक्ष पद और बोर्ड गठन को लेकर मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा है।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी बनाए जाने के बाद दिल्ली से लेकर पंजाब तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नई जिम्मेदारी मिलने के कुछ ही दिन बाद मंगलवार को पायलट ने दिल्ली स्थित 10 जनपथ पहुंचकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की।मुलाकात के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने पायलट को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। बैठक में वर्ष 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव, पार्टी के आगामी कार्यक्रमों और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व का फोकस चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और पार्टी के अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाने पर है।मुलाकात के बाद सचिन पायलट ने भी सोशल मीडिया के जरिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का पंजाब की जिम्मेदारी सौंपने के लिए आभार जताया। उन्होंने भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयास, मजबूत संगठन और कार्यकर्ताओं की ताकत के बल पर कांग्रेस पंजाब में सत्ता में वापसी के लिए पूरी मजबूती से चुनाव लड़ेगी। पंजाब में पायलट को मिला बड़ा राजनीतिक टास्क सचिन पायलट के लिए पंजाब की जिम्मेदारी केवल एक संगठनात्मक नियुक्ति नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रह चुके पायलट को अब ऐसे राज्य की जिम्मेदारी मिली है, जहां कांग्रेस के पास मजबूत राजनीतिक आधार तो है, लेकिन पार्टी लंबे समय से आंतरिक खींचतान से जूझ रही है। कांग्रेस ने 5 सितंबर को संगठनात्मक फेरबदल करते हुए भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का महासचिव प्रभारी बनाया था। बघेल को असम की जिम्मेदारी दी गई है। यह फेरबदल पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले किया गया है। गुटबाजी खत्म करना होगी सबसे बड़ी चुनौती पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल के रूप में दोबारा सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। लेकिन चुनावी लड़ाई से पहले पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने ही संगठन के भीतर अलग-अलग नेताओं और गुटों को साथ लाने की होगी।पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सहित कई वरिष्ठ नेताओं के अपने-अपने राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र हैं। हाल के समय में पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। पायलट की नियुक्ति को इसी अंदरूनी खींचतान को नियंत्रित करने और चुनाव से पहले एकजुट संगठन खड़ा करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। पायलट के पक्ष में यह बात मानी जा रही है कि वे राजस्थान में लंबे समय तक संगठन की कमान संभाल चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच लगातार सक्रियता बनाए रखी थी। अब पंजाब में उनके सामने यही मॉडल स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक लागू करने की चुनौती होगी। पहले ही शुरू किया नेताओं से संवाद नई जिम्मेदारी मिलने के बाद पायलट ने पंजाब कांग्रेस के नेताओं से संपर्क और बैठकों का सिलसिला भी शुरू कर दिया है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग उनसे दिल्ली में मुलाकात कर चुके हैं। बैठक में विधानसभा चुनाव की तैयारियों, संगठन और चुनावी रणनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। पायलट के जल्द पंजाब दौरे पर जाने की भी संभावना जताई गई है। सफल हुए तो राष्ट्रीय राजनीति में और बढ़ सकता है कद पंजाब की जिम्मेदारी को सचिन पायलट के लिए कांग्रेस आलाकमान के भरोसे की बड़ी परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है। पंजाब उन राज्यों में है जहां कांग्रेस अभी भी सत्ता की प्रमुख दावेदार पार्टियों में शामिल है। ऐसे में यदि पायलट पार्टी की गुटबाजी पर काबू पाकर संगठन को एकजुट करने और चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कराने में कामयाब रहते हैं, तो राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।राजनीतिक जानकारों के लिहाज से यह जिम्मेदारी पायलट के लिए बड़ा अवसर भी है। पंजाब में सफलता उन्हें राजस्थान की राजनीति से आगे कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व और चुनावी रणनीति में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका दिला सकती है।फिलहाल पायलट की पहली परीक्षा चुनाव प्रचार से पहले पंजाब कांग्रेस के नेताओं को एक मंच पर लाने की है। 2027 के चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी हद तक इस बात पर भी निर्भर करेगा कि नई जिम्मेदारी संभालने के बाद पायलट संगठन की अंदरूनी खींचतान को कितनी जल्दी चुनावी ताकत में बदल पाते हैं।
Read more 8th Sep 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। कांग्रेस ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट को पंजाब का AICC प्रभारी महासचिव नियुक्त किया है। पंजाब की जिम्मेदारी संभाल रहे पूर्व छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अब असम का प्रभार दिया गया है। सचिन पायलट अब तक छत्तीसगढ़ के प्रभारी महासचिव थे। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से बदलावों की घोषणा की गई। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब पंजाब कांग्रेस आंतरिक खींचतान से गुजर रही है और अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी तेज हो रही हैं। पार्टी नेतृत्व के सामने प्रदेश संगठन को एकजुट कर चुनावी रणनीति तैयार करने की बड़ी चुनौती है। पंजाब में पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती- गुटबाजी खत्म करना पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ समय से प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से जुड़े खेमों के बीच मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। टिकट वितरण और संगठनात्मक फैसलों को लेकर भी नेताओं के बीच बयानबाजी हुई है। ऐसे में सचिन पायलट की पहली बड़ी जिम्मेदारी अलग-अलग खेमों के बीच समन्वय स्थापित करना और विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट करना होगी। पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं, इसलिए कांग्रेस हाईकमान के इस फैसले को चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी सुखदेव भगत को सचिन पायलट के पंजाब जाने के बाद सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया है। वहीं भूपेश बघेल को पंजाब से हटाकर असम भेजा गया है। इसके साथ ही कांग्रेस ने अन्य राज्यों के संगठनात्मक प्रभार में भी बदलाव किए हैं। डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद को महाराष्ट्र और पी.वी. मोहन को आंध्र प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है। गुजरात में भी बदलाव कांग्रेस ने गुजरात के संगठनात्मक प्रभार में भी बदलाव किया है। मुकुल वासनिक से गुजरात की जिम्मेदारी वापस लिए जाने और रणदीप सिंह सुरजेवाला को नया प्रभार दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सुरजेवाला कांग्रेस के प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में शामिल हैं और कर्नाटक संगठन से भी जुड़े रहे हैं। इस बदलाव को भी आने वाले चुनावी और संगठनात्मक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पंजाब में चुनाव से पहले नया प्रयोग सचिन पायलट का पंजाब प्रभारी बनना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पायलट राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रहने के अलावा लंबे समय से राष्ट्रीय संगठन में सक्रिय हैं। अब तक उनके पास छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी थी। कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर फेरबदल से पहले उन्हें छत्तीसगढ़ और भूपेश बघेल को पंजाब का प्रभारी दर्ज किया गया था।पंजाब में उनकी नियुक्ति को हाईकमान की ओर से चुनाव से पहले संगठन में संतुलन बनाने और अलग-अलग नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी पंजाब से हटाए गए भूपेश बघेल को असम कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया है। असम में विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद संगठनात्मक बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी असम के तत्कालीन प्रभारी जितेंद्र सिंह ने 4 मई 2026 को चुनावी हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसलिए उन्हें इस ताजा फेरबदल में “हटाया गया” कहना सटीक नहीं होगा; उनका इस्तीफा कई महीने पहले ही आ चुका था।छह राज्यों की जिम्मेदारियों में बदलाव कांग्रेस के इस संगठनात्मक फेरबदल में मुख्य रूप से पंजाब, असम, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों के प्रभार में बदलाव सामने आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी मिलने की हो रही है, क्योंकि पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को संगठनात्मक खींचतान खत्म करने और भाजपा, आम आदमी पार्टी तथा शिरोमणि अकाली दल के मुकाबले मजबूत चुनावी रणनीति तैयार करनी होगी। पायलट की नियुक्ति के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि वे पंजाब कांग्रेस के अलग-अलग गुटों के बीच किस तरह तालमेल स्थापित करते हैं और चुनाव से पहले संगठन को कितना एकजुट कर पाते हैं।
Read more 6th Sep 2026
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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