राजस्थान न्यूज़: झुंझुनूं। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज होती जा रही है। इसी क्रम में कांग्रेस ने झुंझुनूं जिले की नवलगढ़ और डूंडलोद नगरपालिका के लिए अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है।कांग्रेस ने नवलगढ़ नगरपालिका के 45 वार्डों में से 37 वार्डों के लिए उम्मीदवार घोषित किए हैं। वहीं डूंडलोद नगरपालिका के 20 वार्डों में से 19 वार्डों के प्रत्याशियों के नाम सामने आए हैं। डूंडलोद के वार्ड नंबर 12 पर फिलहाल पार्टी ने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। नवलगढ़ में 37 वार्डों पर कांग्रेस ने खोले पत्ते नवलगढ़ नगरपालिका चुनाव के लिए कांग्रेस ने 37 प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया है। पार्टी की सूची नवलगढ़ के कांग्रेस प्रभारी किशन सिंह चौहान की ओर से जारी की गई। नवलगढ़ नगरपालिका में कुल 45 वार्ड हैं। ऐसे में अभी 8 वार्डों के प्रत्याशियों के नाम घोषित नहीं किए गए हैं। शेष वार्डों में टिकट को लेकर स्थानीय स्तर पर मंथन जारी रहने की संभावना है। इन सीटों पर एक से अधिक मजबूत दावेदार होने या सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों के कारण पार्टी अंतिम फैसला रोक सकती है। सूची जारी होते ही बढ़ी राजनीतिक हलचल नवलगढ़ में कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चुनावी हलचल तेज हो गई है। घोषित प्रत्याशियों ने अपने-अपने वार्डों में जनसंपर्क और चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं।वहीं जिन आठ वार्डों में उम्मीदवार घोषित नहीं हुए हैं, वहां टिकट के दावेदारों और उनके समर्थकों की नजर पार्टी के अगले फैसले पर टिकी हुई है। कांग्रेस की कोशिश ऐसे प्रत्याशियों को मैदान में उतारने की है, जिनकी वार्ड में स्थानीय पकड़ मजबूत हो और जीत की संभावना अधिक हो। डूंडलोद में 20 में से 19 उम्मीदवार घोषित कांग्रेस ने डूंडलोद नगरपालिका के लिए भी लगभग पूरी प्रत्याशी सूची जारी कर दी है।नगरपालिका के कुल 20 वार्डों में से 19 वार्डों के उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया गया है। केवल वार्ड नंबर 12 का प्रत्याशी अभी घोषित नहीं किया गया है। ऐसे में अब स्थानीय राजनीतिक नजरें इसी वार्ड पर टिकी हैं कि कांग्रेस यहां किस चेहरे पर दांव लगाती है। डूंडलोद में 10,047 मतदाता डूंडलोद नगरपालिका नवलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। यहां कुल 10,047 मतदाता हैं, जो आगामी निकाय चुनाव में अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे। स्थानीय स्तर पर वार्डवार समीकरण और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ चुनाव परिणाम में अहम भूमिका निभा सकती है। अध्यक्ष पद OBC के लिए आरक्षित डूंडलोद नगरपालिका का अध्यक्ष पद अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित है। इसके चलते पार्षद चुनाव के साथ ही अध्यक्ष पद को लेकर भी राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं।पार्टी इस बात का भी आकलन कर रही है कि किन वार्डों में ऐसे मजबूत उम्मीदवार उतारे जाएं, जो चुनाव जीतने के साथ बाद में बोर्ड गठन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
Read more 29th Aug 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया निर्णायक दौर में पहुंच गई है। 29 अगस्त को जयपुर और भरतपुर से जुड़े टिकटों पर होने वाले मंथन को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जयपुर उनकी राजनीतिक कर्मस्थली है, जबकि भरतपुर उनका गृह क्षेत्र होने के कारण दोनों जगह टिकट चयन पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।भाजपा मुख्यालय में वार्डवार फीडबैक, स्थानीय संगठन की राय और संभावित प्रत्याशियों की जीत की क्षमता को लेकर लगातार बैठकें चल रही हैं। पार्टी पहले ही साफ कर चुकी है कि टिकट वितरण में मेरिट, साफ छवि, संगठनात्मक सक्रियता और जीतने की क्षमता को आधार बनाया जाएगा और व्यक्तिगत सिफारिश को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।इसके बावजूद जयपुर के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में टिकट के दावेदारों के बीच अपने-अपने समर्थकों को पैनल में जगह दिलाने की होड़ ने चयन प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। सांगानेर के टिकटों पर सबसे ज्यादा नजर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वयं सांगानेर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। ऐसे में यहां के वार्डों में प्रत्याशी चयन को लेकर उनकी भूमिका और संगठन की राय दोनों महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।स्थानीय राजनीतिक हलकों में मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों की टिकट चयन में संभावित भूमिका को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि इन चर्चाओं और आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और भाजपा ने सार्वजनिक रूप से प्रत्याशी चयन को संगठनात्मक प्रक्रिया तथा मेरिट से जोड़कर ही पेश किया है। पार्टी के लिए चुनौती यह होगी कि टिकटों को लेकर ऐसा संदेश न जाए जिससे लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा हो। पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार करने की आशंका से बढ़ सकता है असंतोष सांगानेर सहित जयपुर के कई क्षेत्रों में पुराने और अनुभवी कार्यकर्ता टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। ऐसे में यदि किसी वार्ड में स्थानीय संगठन की पसंद और प्रभावशाली नेताओं की पसंद अलग-अलग होती है तो बगावत की स्थिति पैदा हो सकती है।नगर निकाय चुनाव में वार्ड स्तर पर प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ महत्वपूर्ण होती है। इसलिए टिकट से वंचित मजबूत दावेदार यदि निर्दलीय मैदान में उतरते हैं तो पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं। भाजपा नेतृत्व इसी कारण वार्डवार विस्तृत फीडबैक लेने के बाद ही अंतिम नाम तय करने की रणनीति अपना रहा है। जयपुर में बड़े नेताओं के क्षेत्रों पर भी नजर जयपुर में केवल सांगानेर ही नहीं, अन्य विधानसभा क्षेत्रों के टिकटों पर भी दिलचस्प मुकाबला है। उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़, सांसद मंजू शर्मा, मालवीय नगर से विधायक कालीचरण सराफ,हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य,बगरू से विधायक कैलाश वर्मा और सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने दावेदारी की है। स्वाभाविक रूप से स्थानीय विधायक और संगठन पदाधिकारी अपने क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण तथा दावेदारों को लेकर नेतृत्व के सामने फीडबैक रखेंगे। अंतिम फैसला करते समय पार्टी को स्थानीय विधायक की राय, संगठन के पैनल और प्रत्याशी की जीत की संभावना के बीच संतुलन बनाना होगा। भरतपुर भी मुख्यमंत्री के लिए महत्वपूर्ण मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का भरतपुर से पुराना राजनीतिक और सामाजिक जुड़ाव रहा है। इसी कारण भरतपुर नगर निगम में भाजपा प्रत्याशियों के चयन और पार्टी के प्रदर्शन को भी उनके लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।भाजपा की कोशिश होगी कि ऐसे उम्मीदवार मैदान में उतारे जाएं जो स्थानीय स्तर पर मजबूत हों और नगर निगम में पार्टी को बहुमत तक पहुंचाने की क्षमता रखते हों। भरतपुर के स्थानीय राजनीतिक समीकरण जयपुर से अलग हैं, इसलिए यहां प्रत्याशी चयन में स्थानीय जातीय, सामाजिक और संगठनात्मक संतुलन भी अहम रहने वाला है।
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राजस्थान न्यूज़: जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट से जुड़ी हालिया घटनाओं को लेकर गुरुवार को हाईकोर्ट की तीनों एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आपात बैठक की। बैठक में न्यायपालिका से संबंधित हाल में सामने आए घटनाक्रम पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई और मामले में तथ्यों का पूरी तरह अध्ययन करने के बाद ही आगे की रणनीति तय करने पर सहमति बनी।बैठक में पदाधिकारियों ने कहा कि मामला न्यायपालिका की संस्थागत गरिमा, स्वतंत्रता और आमजन के विश्वास से जुड़ा हुआ है। इसलिए किसी समाचार, आरोप या प्रारंभिक जानकारी के आधार पर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।तीनों एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से तय किया कि पूरे मामले से संबंधित उपलब्ध तथ्यों, परिस्थितियों और सामग्री का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद संयुक्त बैठक में आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए पत्रों पर हुई चर्चा बैठक के दौरान मीडिया में प्रकाशित उन रिपोर्ट्स पर भी चर्चा की गई, जिनमें कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को तीन पत्र भेजे हैं।मीडिया रिपोर्ट्स में इन पत्रों के माध्यम से राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की कार्यशैली को लेकर विभिन्न आपत्तियां और आरोप उठाए जाने का दावा किया गया है।हालांकि बैठक में पदाधिकारियों ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए किसी भी आरोप को सत्य मानकर तत्काल निष्कर्ष निकालने के बजाय तथ्यों की पूरी जानकारी हासिल करने पर जोर दिया। संस्थागत जांच की चर्चाओं को भी लिया गंभीरता से बैठक में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर संस्थागत स्तर पर जांच की मीडिया में चल रही चर्चाओं पर भी विचार किया गया।पदाधिकारियों का मानना रहा कि न्यायपालिका से जुड़े किसी भी गंभीर विषय पर प्रतिक्रिया देते समय संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और न्यायिक स्वतंत्रता को ध्यान में रखना आवश्यक है। इसी कारण एसोसिएशन की ओर से फिलहाल कोई अंतिम निर्णय या विस्तृत सार्वजनिक निष्कर्ष जारी नहीं किया गया है।‘तथ्यों के आधार पर ही लिया जाएगा निर्णय’ तीनों एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से कहा कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों की पूरी समीक्षा के बिना कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा। बैठक में यह भी तय किया गया कि दो दिन बाद तीनों एसोसिएशन के सभी पदाधिकारियों की संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में पूरे मामले से संबंधित उपलब्ध दस्तावेजों, मीडिया रिपोर्ट्स और अन्य तथ्यों पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके बाद ही एसोसिएशन की आगे की रणनीति निर्धारित की जाएगी। न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता को बताया महत्वपूर्ण आपात बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता केवल न्यायिक व्यवस्था के लिए ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और आम नागरिकों के न्याय पर विश्वास के लिए भी महत्वपूर्ण है।पदाधिकारियों का कहना रहा कि न्यायपालिका से जुड़े किसी भी संवेदनशील घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया संतुलित, तथ्यात्मक और जिम्मेदारीपूर्ण होनी चाहिए। इसी दृष्टिकोण से तीनों एसोसिएशन ने फिलहाल प्रतीक्षा करने और सभी उपलब्ध तथ्यों का अध्ययन करने का निर्णय लिया है।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
Read more 31st Aug 2022
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम: प्रतिभा, खूबसूरती और आत्मविश्वास का अनूठा संगम पेश करते हुए केरल की 19 वर्षीय लॉ स्टूडेंट और मॉडल कज़ियाह लिज़ मेजो (Kaziah Liz Mejo) ने 'मिस यूनिवर्स केरल 2026' का ताज अपने नाम कर लिया है। इस ऐतिहासिक जीत के बाद कज़ियाह अब राष्ट्रीय मंच पर आयोजित होने वाली 'मिस यूनिवर्स इंडिया 2026' प्रतियोगिता में अपने राज्य केरल का प्रतिनिधित्व करेंगी।महज 19 साल की उम्र में कानून की पढ़ाई (Law Student) के साथ-साथ मॉडलिंग और ब्यूटी पेजेंट में यह मुकाम हासिल कर कज़ियाह ने साबित कर दिया है कि लगन और मेहनत से हर सपना साकार किया जा सकता है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल केरल बल्कि देशभर के युवाओं में उत्साह है।
Read more 24th Aug 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय पहुंचे और पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम के पदाधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान संगठन की आगामी रणनीति, जनता से जुड़ाव और पार्टी को और मजबूत करने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बैठक की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि पार्टी के साथियों के साथ बैठक अच्छी रही और ऐसी बैठकें संगठन को मजबूत करने तथा जनता से जुड़ाव पर गहन विचार-विमर्श का मंच होती हैं। 17 अगस्त को घोषित हुई थी नई टीम भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा 17 अगस्त को की गई थी। 65 सदस्यीय टीम में कई नए और पुराने चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है।नई टीम में राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। संगठन और जनसंपर्क पर फोकस प्रधानमंत्री मोदी की नई टीम के साथ हुई मुलाकात को संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा का फोकस आने वाले समय में संगठन के विस्तार, युवाओं से संवाद और केंद्र सरकार की योजनाओं को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर रहेगा।नई राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद पीएम मोदी के साथ यह मुलाकात पार्टी की आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक दिशा के लिहाज से अहम मानी जा रही है।
Read more 23rd Aug 2026
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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