राजस्थान न्यूज़: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति, बढ़ते कर्ज और विकास कार्यों पर घटते खर्च को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए, ताकि जनता को वास्तविक हालात की जानकारी मिल सके। नेता प्रतिपक्ष जूली ने कहा कि विधानसभा में उन्होंने लगातार जिन मुद्दों को उठाया था, अब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने उन पर पूरी तरह मुहर लगा दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने पांच साल और दो साल की तुलना को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की, लेकिन अब सच्चाई सामने आ चुकी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान आज विकास में नहीं बल्कि कर्ज लेने में सबसे आगे पहुंच गया है। कैग की रिपोर्ट सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन को उजागर कर रही है। जूली के अनुसार राज्य सरकार विकास के दावों के बावजूद पूंजीगत खर्च करने में विफल रही है। नेता प्रतिपक्ष जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपने विकास बजट का केवल 51.82 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च कर पाई है। उन्होंने कहा कि जब अस्पताल, स्कूल और सड़कें नहीं बनेंगी तो युवाओं को रोजगार कैसे मिलेगा। उनके अनुसार प्रदेश में विकास कार्य पूरी तरह ठप हो चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष जूली ने दावा किया कि सरकार ने बजट अनुमान से 65 प्रतिशत अधिक यानी करीब 71 हजार 261 करोड़ रुपए का अतिरिक्त कर्ज लिया है, जो प्रदेश के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों जैसे तेलंगाना और कर्नाटक विकास खर्च के मामले में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि राजस्थान को कर्ज के बोझ में धकेला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने राजकोषीय घाटा कम दिखाने के लिए पूंजीगत खर्च में लगभग 28 प्रतिशत की कटौती कर दी। उनके अनुसार इससे भविष्य की आधारभूत संरचनाओं और विकास परियोजनाओं का निर्माण प्रभावित होगा और इसका असर लंबे समय तक प्रदेश को भुगतना पड़ेगा। नेता प्रतिपक्ष जूली ने कहा कि सरकार बड़े-बड़े विकास दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की गति धीमी पड़ चुकी है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार आर्थिक स्थिति और कर्ज प्रबंधन को लेकर पूरी पारदर्शिता बरते और जनता के सामने वास्तविक आंकड़े रखे।
Read more 20th May 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर में मंगलवार को पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा की अध्यक्षता में प्रदेशभर के रेंज महानिरीक्षक, पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों की अपराध समीक्षा बैठक आयोजित की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस बैठक में कानून-व्यवस्था, संगठित अपराध, साइबर अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक के दौरान पुलिस अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए गए। बैठक में डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार अवैध खनन, बजरी परिवहन और भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाने, पुलिस की फील्ड विजिबिलिटी बढ़ाने और हर स्तर पर सतर्कता बनाए रखने पर जोर दिया। डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगले तीन महीने में उनके स्तर पर एक साल से अधिक लंबित कोई भी प्रकरण नहीं रहना चाहिए। उन्होंने झूठे मुकदमों के खिलाफ भी प्रभावी कार्रवाई करने को कहा। बैठक में राजस्थान पुलिस की प्राथमिकताओं के आधार पर संगठित अपराध, गैंगस्टर्स के खिलाफ चल रही कार्रवाई और विभिन्न गंभीर आपराधिक मामलों की समीक्षा की गई। डीजीपी ने प्रभावित जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर फोकस्ड कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने अपराध से अर्जित संपत्ति की कुर्की और जब्ती की कार्रवाई तेज करने को भी कहा।इसके साथ ही नए आपराधिक कानूनों में सूचना और संचार तकनीक के उपयोग, ई-सम्मन और वारंट की तामील तथा ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। बैठक में डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के साथ अनिल पालीवाल, आनंद श्रीवास्तव, वी. के. सिंह, बिपीन कुमार पांडे, प्रशाखा माथुर, बीजू जॉर्ज जोसफ तथा लता मनोज कुमार सहित पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। केस ऑफिसर स्कीम में शामिल होंगे महत्वपूर्ण प्रकरण डीजीपी शर्मा ने जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि महत्वपूर्ण प्रकरणों को केस ऑफिसर स्कीम में शामिल कर गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक में रेंजवार एरिया डोमिनेशन अभियान और मालखानों में जब्त सामान के निस्तारण की भी समीक्षा की गई। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने पर जोर बैठक में सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी गई। भीलवाड़ा और उदयपुर क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं में अधिक मृत्यु दर पर चिंता जताते हुए संबंधित जिला पुलिस अधीक्षकों को विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए गए। डीजीपी ने हाईवे और ग्रामीण क्षेत्रों में हेलमेट के अनिवार्य उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक सप्ताह दो दिन विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने इंटरसेप्टर और ब्रेथ एनलाइजर के अधिकतम उपयोग के जरिए प्रभावी चेकिंग करने को कहा। साथ ही पुलिसकर्मियों द्वारा बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने पर रोक लगाने के लिए पुलिस लाइन और कार्यालय परिसरों में विशेष व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए। साइबर अपराध नियंत्रण पर विशेष फोकस बैठक में साइबर अपराधों की रोकथाम और बेहतर अनुसंधान की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर प्राप्त, निस्तारित और लंबित शिकायतों की समीक्षा करते हुए सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए। डीजीपी ने कहा कि पुलिस थानों पर आने वाले परिवादियों को ऑनलाइन परिवाद दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि उन्हें अपने मामलों की कार्रवाई की नियमित जानकारी मिलती रहे और समीक्षा प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी हो सके।
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राजस्थान न्यूज़: जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) मामले में एसीबी मामलों की विशेष अदालत ने पूर्व मंत्री महेश जोशी, पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल सहित 13 आरोपियों की न्यायिक हिरासत अवधि 1 जून तक बढ़ा दी है। अदालत ने यह आदेश वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी के दौरान जारी किया। जिन आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई है, उनमें महेश जोशी, सुबोध अग्रवाल, दिनेश गोयल, कृष्णदीप गुप्ता, शुभांशु दीक्षित, सुशील शर्मा, विशाल सक्सेना, अरुण श्रीवास्तव, डी. के. गौड़, महेंद्र प्रकाश सोनी, मुकेश पाठक, निरिल कुमार और संजय बड़ाया शामिल हैं। वहीं मामले में फरार चल रहे आरोपी जितेंद्र शर्मा, मुकेश गोयल और संजीव गुप्ता को अदालत पहले ही भगोड़ा घोषित कर चुकी है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस मामले में प्रारंभिक जांच के बाद 30 अक्टूबर 2024 को मुकदमा दर्ज किया था। जांच में आरोप सामने आए कि वर्ष 2021 में जल जीवन मिशन के तहत श्री श्याम ट्यूबवेल और श्री गणपति ट्यूबवेल के संचालकों ने कथित रूप से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर करोड़ों रुपए के सरकारी टेंडर हासिल किए थे। मामला सामने आने के बाद एसीबी ने विस्तृत जांच शुरू की थी। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी धनशोधन से जुड़े पहलुओं को लेकर अलग से मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। जांच एजेंसी ने पूर्व मंत्री महेश जोशी और संजय बड़ाया सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, पूर्व मंत्री महेश जोशी को बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। मामले की जांच अभी जारी है और एजेंसियां कथित वित्तीय अनियमितताओं, टेंडर प्रक्रिया और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही हैं।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
Read more 31st Aug 2022
राष्ट्रीय न्यूज़: दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े कथित शराब घोटाला मामले में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। अब इस मामले से संबंधित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय की याचिकाओं की सुनवाई मनोज जैन करेंगे। इन मामलों को 19 मई 2026 की कार्यसूची में शामिल किया गया है। यह बदलाव पिछले सप्ताह जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा द्वारा खुद को मामले की सुनवाई से अलग करने के फैसले के बाद हुआ। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा न्यायपालिका और न्यायाधीशों के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने मुख्य मामले को दूसरी पीठ को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आए हैं। अदालत ने सोशल मीडिया पर न्यायपालिका के खिलाफ कथित टिप्पणियों को गंभीर विषय माना है। जस्टिस मनोज जैन इससे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील मामलों की सुनवाई कर चुके हैं। वे राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादवऔर उनके परिवार से जुड़े कथित जमीन के बदले नौकरी मामले की सुनवाई कर रहे हैं। इसी वर्ष मार्च में उन्होंने इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सरकारी गवाहों के बयान दर्ज करने से अस्थायी रोक लगाई थी। इसके अलावा वे रॉबर्ट वाड्रा की उस याचिका पर भी सुनवाई कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने कथित धन शोधन मामले में अपने खिलाफ तय आरोपों और समन को चुनौती दी है। जस्टिस मनोज जैन उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली खंडपीठ का हिस्सा भी रह चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और अधिवक्ता जय अनंत देहाद्रई के बीच विवाद सहित कई चर्चित मामलों की सुनवाई की है। जस्टिस मनोज जैन ने वर्ष 1986 में पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से विधि की डिग्री प्राप्त की थी। वर्ष 1992 में वे दिल्ली न्यायिक सेवा में शामिल हुए और बाद में दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नत हुए। उन्होंने दिल्ली न्यायिक अकादमी में निदेशक और दिल्ली हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार जनरल जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर भी कार्य किया है। मई 2023 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था, जबकि जुलाई 2024 में उन्होंने स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जस्टिस मनोज जैन की पीठ में इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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राष्ट्रीय न्यूज़: कोलकाता। पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में कई बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए। सरकार ने ममता बनर्जी के कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार और महिला उत्पीड़न के मामलों की जांच के लिए दो अलग-अलग आयोग गठित करने का ऐलान किया है। दोनों आयोगों की अध्यक्षता कलकत्ता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। सरकार ने इमाम, मुअज्जिन और पुजारियों को दिए जाने वाले मानदेय को 1 जून से बंद करने का निर्णय लिया है। यह फैसला राज्य में लंबे समय से विवाद का विषय रहा था। महिलाओं और युवाओं के लिए बड़ी घोषणाएं कैबिनेट बैठक में महिलाओं को अन्नपूर्णा योजना के तहत हर महीने 3000 रुपए देने और मुफ्त बस यात्रा शुरू करने का ऐलान किया गया। युवाओं को राहत देते हुए राज्य सरकार की नौकरियों के लिए अधिकतम आयु सीमा में पांच साल की बढ़ोतरी का निर्णय लिया गया। इसके अलावा सातवां वेतन आयोग गठित करने और ओबीसी सूची में बदलाव जैसे अहम निर्णय भी लिए गए, जो राज्य के कर्मचारियों और पिछड़े वर्ग के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
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अग्निवीर सेना भर्ती रैली, 20 जून के अभ्यर्थी देंगे 26 जून को रिपोर्ट
अग्निवीर सेना भर्ती रैली, 0 जून के अभ्यर्थी देंगे 26 जून को रिपोर्ट अजमेर, 19 जून। सेना भर्ती कार्यालय जोधपुर के निदेशक (भर्ती) कर्नल दीपांकर बसु ने बताया कि अजमेर में चक्रवात के कारण हुई अतिवृष्टि से अग्निवीर सेना भर्ती रैली के कार्यक्रम में परिवर्तन किया गया है। इसके कारण 20 जून को कायड़ विश्राम स्थली में रिपोर्ट करने वाले अभ्यर्थी अब 26 जून को प्रातः 2 बजे कायड़ विश्राम स्थली पर रिपोर्ट करेंगे।
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