राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान विधानसभा के नए सत्र की तैयारियों के बीच राज्य के कई ऐसे कानून चर्चा में हैं, जिन्हें विधानसभा और राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद भी अब तक प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा सका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऐसे कुल 9 कानून हैं, जिनमें से 5 मौजूदा सरकार और 3 पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल से जुड़े हैं, जबकि एक कानून वर्ष 2015 से लंबित है।इनमें से छह कानून ऐसे बताए जा रहे हैं, जिन्हें लागू करने के लिए संबंधित विभागों को केवल प्रभावी तारीख अधिसूचित करनी है। इसके बावजूद अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। 2015 से लंबित मुकदमेबाजी निवारण कानून राजस्थान तंग करने वाली मुकदमेबाजी (निवारण) अधिनियम, 2015 उन मामलों पर रोक लगाने के उद्देश्य से बनाया गया था, जिनमें बार-बार या बेवजह मुकदमे दायर कर अदालतों का समय खराब किया जाता है। कानून बनने के बावजूद इसके प्रभावी क्रियान्वयन की स्थिति अब तक लंबित बताई जा रही है। स्वास्थ्य का अधिकार कानून भी पूरी तरह प्रभावी नहीं राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम, 2022 प्रदेशवासियों को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा कानूनी अधिकार देने के उद्देश्य से लाया गया था। इसे व्यापक सामाजिक सुरक्षा कानून के रूप में पेश किया गया था, लेकिन इसके पूर्ण प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। न्यूनतम आय गारंटी कानून लागू होने का इंतजार राजस्थान न्यूनतम आय गारंटी अधिनियम, 2023 मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा पेंशन के माध्यम से न्यूनतम आय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया था। कानून पारित होने के बाद भी इसे प्रभावी करने की प्रक्रिया लंबित बताई जा रही है। गिग वर्कर्स कल्याण कानून भी अटका राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर (रजिस्ट्रीकरण और कल्याण) अधिनियम, 2023 ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए काम करने वाले गिग वर्कर्स को पंजीकरण और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए लाया गया था। यह कानून भी अब तक पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर पाया है।
Read more 8th Aug 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम यानी रीको को राज्य सरकार ने बड़े अधिकार दिए हैं। अब रीको आवासीय कॉलोनी, स्पेशल इकनॉमिक जोन (SEZ), फूड पार्क, हैंडीक्राफ्ट पार्क और इंडस्ट्रियल पार्क जैसे विशेष क्षेत्र विकसित कर सकेगा। राज्य सरकार ने नगरीय निकायों, यूआईटी और विकास प्राधिकरणों की तर्ज पर रीको को इन क्षेत्रों की योजना बनाने और विकास से जुड़े अधिकार प्रदान किए हैं। प्लानिंग से लेकर भूखंड आवंटन तक रीको करेगा नई व्यवस्था के तहत विशेष जोन की पूरी प्लानिंग, बिल्डिंग प्लान की मंजूरी और भूखंडों का आवंटन सहित संबंधित विकास कार्य रीको के जरिए किए जाएंगे। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से रीको को सीधे जमीन आवंटित की जाएगी। राजस्व विभाग ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर राजस्थान भू-राजस्व (रीको में भूमि का अधिकार होना और निस्तारण) नियम-2026 लागू किए हैं। अब तक जमीन अवाप्ति पर निर्भर था रीको अब तक रीको औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए मुख्य रूप से जमीन के अधिग्रहण यानी अवाप्ति की प्रक्रिया अपनाता था। इसके तहत किसानों या काश्तकारों से जमीन ली जाती थी और बदले में विकसित जमीन अथवा नकद मुआवजा दिया जाता था। यह प्रक्रिया लंबी होने और कानूनी अड़चनों के कारण कई बार नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास में देरी होती थी। सरकारी जमीन सीधे मिल सकेगी नई व्यवस्था में सरकार ने सिवायचक सहित सरकारी जमीन को सीधे रीको को आवंटित करने का रास्ता खोल दिया है। इससे जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज होने और नए औद्योगिक तथा विशेष विकास क्षेत्रों को जल्द विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। यूआईटी-जेडीए जैसी व्यवस्था अभी तक जब कोई ग्रामीण क्षेत्र जेडीए, यूआईटी या अन्य विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में शामिल होता है तो वहां की सरकारी जमीन संबंधित प्राधिकरण के नियंत्रण में आ जाती है। इसके बाद वही संस्था उस जमीन पर आवासीय योजना या अन्य विकास परियोजनाएं तैयार करती है। अब इसी तरह के अधिकार रीको को भी दिए गए हैं।
Read more 7th Aug 2026
राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा के निर्देशों के तहत प्रदेश में संगठनात्मक मजबूती की दिशा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता प्रकोष्ठ का पुनर्गठन किया गया है। प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष विक्रम स्वामी ने नई प्रदेश कार्यकारिणी के साथ 11 जिलों के नए जिलाध्यक्षों के नामों की आधिकारिक घोषणा की है। कांग्रेस का दावा है कि इस पुनर्गठन के जरिए सामाजिक न्याय, वर्ग-संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए संगठन को और सक्रिय बनाने की कोशिश की गई है। प्रदेश कार्यकारिणी का भी पुनर्गठन नई सूची में सिर्फ जिलाध्यक्षों के नाम ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता प्रकोष्ठ की प्रदेश कार्यकारिणी में भी बदलाव किए गए हैं। इस कवायद का उद्देश्य विभिन्न सामाजिक वर्गों से जुड़े मुद्दों को पार्टी संगठन के माध्यम से अधिक प्रभावी तरीके से उठाना और जिला स्तर पर सक्रिय नेटवर्क तैयार करना बताया जा रहा है। 11 जिलों को मिले नए अध्यक्ष प्रकोष्ठ ने 11 जिलों में नए जिलाध्यक्ष नियुक्त किए हैं। इन नियुक्तियों के बाद संबंधित जिलों में स्थानीय सामाजिक मुद्दों, अधिकारों और जनसमस्याओं को लेकर अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में नियुक्त किए गए सभी 11 जिलाध्यक्षों के नामों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। डोटासरा के निर्देशों पर संगठन सक्रिय करने की कवायद राजस्थान कांग्रेस आगामी संगठनात्मक चुनौतियों के साथ स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों से पहले अपने विभिन्न मोर्चों और प्रकोष्ठों को सक्रिय करने में जुटी है। इसी क्रम में पीसीसी अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा की सहमति के बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता प्रकोष्ठ के पुनर्गठन को अंतिम रूप दिया गया। स्थानीय स्तर पर अभियान की तैयारी नई कार्यकारिणी के बाद प्रकोष्ठ की ओर से सामाजिक न्याय, अधिकारों और विभिन्न वर्गों से जुड़े मुद्दों पर जिला और ब्लॉक स्तर तक गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी है। पार्टी संगठन का फोकस स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने और सामाजिक समूहों के साथ संवाद मजबूत करने पर रहेगा।
Read more 7th Aug 2026
अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
Read more 31st Aug 2022
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक ढांचे में इस बार भी राजस्थान के नेताओं की भूमिका अहम रहने वाली है। कांग्रेस ने यूपी में प्रभारी महासचिव के साथ जुड़े 6 पुराने AICC सचिवों को हटाकर नई टीम का गठन किया है। इनमें राजस्थान से पायलट समर्थक माने जाने वाले धीरज गुर्जर को सहप्रभारी-सचिव की जिम्मेदारी से हटाया गया है, जबकि उनकी जगह सादुलशहर के पूर्व विधायक जगदीश जांगिड़ को AICC सचिव बनाकर यूपी की जिम्मेदारी दी गई है। धीरज गुर्जर करीब सात साल से उत्तर प्रदेश संगठन में काम कर रहे थे। अब राजस्थान के ही एक नेता को हटाकर दूसरे नेता को यह भूमिका सौंपे जाने को कांग्रेस की नई संगठनात्मक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सात साल बाद बदली यूपी की टीम कांग्रेस ने यूपी प्रभारी महासचिव के साथ जुड़े छह पुराने AICC सचिवों में बदलाव किया है। धीरज गुर्जर भी लंबे समय से इसी टीम का हिस्सा थे। उनके हटाए जाने के पीछे लंबे कार्यकाल के साथ यूपी के बदलते राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को भी एक कारण माना जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से व्यक्तिगत रूप से किसी नेता को हटाने का विस्तृत आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। जगदीश जांगिड़ को मिली यूपी की जिम्मेदारी सादुलशहर से पूर्व विधायक जगदीश चंद्र जांगिड़ को AICC सचिव बनाया गया है और उन्हें उत्तर प्रदेश के प्रभारी महासचिव के साथ अटैच किया गया है। जांगिड़ राजस्थान कांग्रेस के प्रमुख OBC चेहरों में गिने जाते हैं। वे दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक हैं और पेशे से वकील भी रहे हैं। OBC चेहरे के रूप में प्रमोशन की चर्चा राजनीतिक हलकों में जगदीश जांगिड़ की नियुक्ति को OBC नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। वे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक माने जाते हैं। यूपी की राजनीति में OBC मतदाताओं की बड़ी भूमिका को देखते हुए कांग्रेस की यह नियुक्ति सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश के रूप में भी देखी जा रही है। हालांकि यह राजनीतिक आकलन है; पार्टी ने नियुक्ति को किसी विशेष जातीय रणनीति से आधिकारिक रूप से नहीं जोड़ा है। प्रियंका गांधी से मिले राजस्थान के सीमावर्ती जिलों के नेता इधर दिल्ली में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी से राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों के कई नेताओं ने भी मुलाकात की। इस मुलाकात में पूर्व कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद, बाड़मेर कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष गफूर अहमद, पूर्व जिलाध्यक्ष फतेह खान और शेर मोहम्मद शामिल रहे। उम्मेदाराम के आवास पर डिनर डिप्लोमेसी बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम के दिल्ली स्थित आवास पर भी कांग्रेस नेताओं की बैठक और डिनर हुआ। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित अन्य नेता शामिल हुए। इन मुलाकातों को राजस्थान कांग्रेस के संगठनात्मक समीकरणों और आगामी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि बैठकों में हुई विस्तृत चर्चा को लेकर आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।
Read more 8th Aug 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: नई दिल्ली। चूरू से कांग्रेस सांसद राहुल कस्वां के दिल्ली स्थित आवास पर गुरुवार को राजस्थान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता पहुंचे और उनकी स्वास्थ्य संबंधी कुशलक्षेम जानी। इस दौरान राजस्थान प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और सांसद हरीश मीना ने राहुल कस्वां से मुलाकात की। स्वास्थ्य की जानकारी ली मुलाकात के दौरान कांग्रेस नेताओं ने राहुल कस्वां के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और उनके शीघ्र स्वस्थ रहने की कामना की। बैठक का माहौल सौहार्दपूर्ण रहा और नेताओं के बीच संगठन तथा प्रदेश से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत हुई। राजस्थान के विभिन्न विषयों पर चर्चा मुलाकात के दौरान राजस्थान की मौजूदा राजनीतिक और संगठनात्मक परिस्थितियों सहित विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। हालांकि चर्चा के विशिष्ट बिंदुओं और किसी संभावित राजनीतिक निर्णय को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
Read more 7th Aug 2026
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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