राजस्थान न्यूज़: जयपुर। बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने रविवार को जयपुर के सीतापुरा स्थित जेईसीसी में आयोजित BNI INC-2026 के दूसरे और अंतिम दिन अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कई प्रेरक बातें कहीं। उन्होंने कहा कि इस धरती पर ऐसा कोई नहीं जिसे आलोचना का सामना न करना पड़े, यहां तक कि भगवान को भी नहीं। उन्होंने कहा कि अगर अच्छा काम करने पर भी कोई बुरा लिखे तो हंसो और बुरा काम करने पर अच्छा लिखे तब भी हंसो। गलतियों से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि गलतियों से ही हम सीखते हैं। मां को रोज आई लव यू कहता हूं अनुपम खेर ने परिवार के महत्व पर बात करते हुए कहा कि उनकी मां रोज रात 8:30 बजे उन्हें फोन करती हैं और वे उन्हें आई लव यू कहते हैं, चाहे उन्हें समझ आए या न आए। उन्होंने ऑडियंस से पूछा कि उनमें से कितने लोग अपने माता-पिता को आई लव यू कहते हैं, जिस पर हॉल में तालियों की गड़गड़ाहट हुई। उन्होंने यह भी कहा कि वे बेहद अनुशासित और समयनिष्ठ हैं और रोज ईश्वर से प्रार्थना करते हैं। बच्चों को मोबाइल देना गलत अनुपम खेर ने बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे फोन में बहुत ज्यादा लगे रहते हैं और इसमें माता-पिता का भी कसूर है। उन्होंने कहा कि हमारे जमाने में चोट लगने पर मां दो थप्पड़ मारती थी, लेकिन आज दो साल के बच्चे के हाथ में केवल अपनी शांति के लिए मोबाइल पकड़ा दिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में अच्छाई कम होती जा रही है और वे ऐसी फिल्म बनाना चाहते हैं जिससे लोगों का अच्छाई पर दोबारा भरोसा हो सके। 3000 सदस्यों के साथ सम्मेलन का समापन दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का रविवार को समापन हुआ। BNI के डायरेक्टर अक्षय गोयल ने बताया कि देश के 100 शहरों से करीब 3000 सदस्यों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। बिजनेस नेटवर्किंग, लीडरशिप, प्रोफेशनल ग्रोथ और नए अवसरों पर कई विशेष सत्र आयोजित किए गए।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित जनसुनवाई में प्रदेशभर से आई महिलाओं, विशेष योग्यजन, वरिष्ठ नागरिकों एवं विभिन्न वर्गों के लोगों की समस्याएं संवेदनशीलता से सुनीं। अनेक प्रकरणों में अधिकारियों को निर्देश देकर मौके पर ही समाधान किया गया, जिससे परिवादी बेहद संतुष्ट नजर आए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसुनवाई आमजन और शासन के बीच विश्वास एवं संवाद का प्रभावशाली माध्यम है। उन्होंने कहा कि सरकार सुशासन के उच्च मानकों पर कार्य करते हुए अंतिम पंक्ति पर बैठे व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसुनवाई में आए सभी प्रकरणों की समय-समय पर मॉनिटरिंग की जाए और परिवादी को अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। साथ ही परिवेदनाओं के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले कार्मिकों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। ताराचंद को मिली ट्राई साइकिल, विशाल को छात्रवृत्ति जनसुनवाई में नागौर के विशेष योग्यजन ताराचंद माली ने स्कूटी और इलेक्ट्रिक ट्राई साइकिल न मिल पाने की पीड़ा मुख्यमंत्री के सामने रखी। मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए अधिकारियों को शीघ्र स्कूटी और इलेक्ट्रिक ट्राई साइकिल दिलाने के निर्देश दिए। वहीं करौली के विशाल कुमार मीणा ने बताया कि उन्हें उत्तर मेट्रिक छात्रवृत्ति योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा, जिससे आगे की पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल छात्रवृत्ति दिलाने के निर्देश दिए। दोनों ने मुख्यमंत्री का आभार जताया। जनसुनवाई में सामाजिक न्याय, ग्रामीण विकास, श्रम, कृषि, गृह, राजस्व, जेडीए, नगर निगम, शिक्षा, चिकित्सा और पेयजल सहित विभिन्न विभागों से जुड़ी परिवेदनाएं सुनी गईं। मुख्यमंत्री ने इस दौरान विभिन्न जनप्रतिनिधियों द्वारा लाए गए पोस्टरों का विमोचन भी किया।
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राजस्थान न्यूज़: अजमेर , 18 मई। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे और राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने सोमवार को राजस्थान विधानसभा के 75वें वर्ष पर जयपुर में विधान सभा के प्रतीक चिन्ह का विमोचन और विधानसभा के 13 द्वारों के नामकरण पट्टिका का अनावरण कर अमृत महोत्सव का उद्घोष किया। राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का पवित्र सदन है। राजस्थान विधानसभा का गौरवमय इतिहास रहा है। स्वतंत्र भारत में भले ही 1952 में विधानसभा गठित हुई परन्तु राजस्थान में 1913 में स्वतंत्रता से पूर्व ही महाराजा गंगा सिंह ने प्रतिनिधि सभा की स्थापना कर विधानसभा की शुरुआत कर दी थी। विधान सभा के अमृतकाल के अवसर पर प्रतीक चिन्ह का लोकार्पण महत्वपूर्ण हैं। राज्यपाल ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष श्री देवनानी की पहल पर तैयार लोगो राजस्थान के जन मानस की सोच का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने प्रतीक चिन्ह में सम्मिलित राज्य वृक्ष खेजड़ी और विधान सभा भवन की छवियों की चर्चा करते हुए कहा कि यह राजस्थान की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में भी उत्सवधर्मिता से जीवन जीने वाले लोगों की जीवटता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि खेजडी तो राजस्थान का कल्प वृक्ष है। खेजड़ी के लिए हुए बलिदान की वृक्ष संस्कृति की चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि ऊंट और गोडावन का समावेश समन्वय की संस्कृति का द्योतक है। राज्यपाल ने कहा कि देश शिक्षा से ही आगे बढ़ता है। बच्चों का टेलेंट प्रगति में सहयोगी होता है। शिक्षा को व्यवहार में लाने की जरूरत है। सभी स्कूल अच्छे कैसे हो, वहां व्यवहारिक शिक्षा कैसे मिले, इस पर सभी मिलकर सोचे। राज्यपाल ने महाराष्ट्र में विधानसभा अध्यक्ष रहने के अपने संस्मरण भी साझा किए और कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब हम अधिकारी के साथ कर्तव्य के प्रति भी सजग रहें। उन्होंने विधानसभा द्वारों के नामकरण के अंतर्गत राजस्थान की शौर्य और वीरता की धरती से जुड़े स्थानी के समावेश की सराहना की। राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि राजस्थान विधान सभा के अमृतकाल में हमारा संकल्प और भावी दृष्टिकोण जनता का अटूट विश्वास है। उन्होंने कहा कि राजस्थान विधान सभा देश की ऐसी विधान सभा बन गई है. जिसका प्रतीक चिन्ह (लोगो) बनाया गया है। लोकतंत्र, जनविश्वास और संवैधानिक मर्यादाओं की सतत साधना के गौरवपूर्ण इतिहास की साक्षी राजस्थान विधान सभा ने राजपूताना की रियासतों से निकलकर आधुनिक राजस्थान के निर्माण, लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना और जनप्रतिनिधित्व की परंपरा को सशक्त बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। विधानसभा भवन करोड़ों नागरिकों की आशाओं का पावन केंद्र:- श्री देवनानी ने कहा कि विधान सभा का लोगों यहां की 75 वर्षी की लोकतांत्रिक परंपरा, जनआकांक्षाओं और संवैधानिक गौरव का सजीव प्रतीक है। प्रतीक चिन्ह में अंकित विधानसभा भवन करोड़ी नागरिकों की आशाओं का केंद्र है। शीर्ष पर सुशोभित अशोक स्तंभ भारतीय राजधर्म, सत्य, न्याय और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। इसमें अंकित गोडावण राजस्थान की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक अस्मिता का प्रतिनिधित्व करता है. जबकि खेजड़ी का वृक्ष त्याग, धैर्य और लोकमंगल की परंपरा का संदेश देता है। वहीं ऊँट और गोडावण मरुधरा की सहनशीलता, संघर्ष और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि "राष्ट्राय धर्मनिष्ठा विधायिका राजस्थान विधान सभा द्वारा की जाने वाली जनसेवा और संवैधानिक मर्यादा का आत्म मंत्र है। राष्ट्र के लिए धर्मनिष्ठा, न्यायपूर्ण और कर्तव्यपरायण विधायिका, सत्य, न्याय, संतुलन और लोककल्याण के लिए कार्य करती है। लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति कर्तव्यों में ही होती है। श्री देवनानी ने कहा कि भारतीय दर्शन में धर्म का अर्थ सत्य, न्याय, कर्तव्य, संतुलन और लोक कल्याण है। विधान सभा सदन जनता की आंकाक्षाओं को संविधान की मर्यादाओं में रहकर पूरा करता है। द्वारों के नाम लोकतंत्र के मूल आदर्शों के प्रतीक स्पीकर श्री देवनानी ने विधानसभा भवन के विभिन्न द्वारों के नामकरण को भी ऐतिहासिक और मूल्यपरक निर्णय बताते हुए कहा कि द्वारों के नाम लोकतंत्र के मूल आदर्शों के प्रतीक हैं। इन द्वारों से प्रवेश करने वाला प्रत्येक व्यक्ति यह अनुभव करेगा कि वह केवल एक भवन में नहीं,बल्कि लोकतांत्रिक संस्कारों के पवित्र केंद्र में प्रवेश कर रहा है। श्री देवनानी ने कहा कि राजस्थान विधान सभा में उत्तरी द्वार (पीतल) जहां से राज्यपाल, स्पीकर, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष प्रवेश करते है उसे कर्तव्य द्वार, दक्षिणी द्वार जहां से विधायिका की असली शक्ति जनता का प्रवेश होता है उसे शक्ति द्वार, पश्चिमी द्वार जहां से विधायकगण प्रवेश करते है उसे सुशासन द्वार, पूर्वी द्वार जहां से अधिकारीगण प्रवेश करते है उसे संकल्प द्वार और उत्तरी द्वार (मंदिर) जहां से विशिष्ट व्यक्तियों का आगमन होता है उसे शौय द्वार नाम दिया गया है। विधान सभा भवन लोकतंत्र की जीवंत तस्वीर:- विधानसभा अध्यक्ष श्री देवनानी ने कहा कि विधान सभा भवन के बाहरी द्वारों को राजस्थान के अंचलो बृज, शेखावाटी, वागड़, हाड़ौती, मारवाड़, मेवाड़, मेरवाड़ा और ढूंढाड़ के नाम समर्पित कर, राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता, विरासत और लोकपरंपराओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़ने का अभिनव प्रयास है। उन्होंने कहा कि द्वार संख्या एक को बृज द्वार, दो को शेखावाटी द्वार, तीन को वागड़ द्वार, चार को मेवाड द्वार, पांच को मारवाड द्वारा, छः को हाड़ौती द्वार, सात को मेरवाडा द्वार और द्वार संख्या आठ को ढूंढाड द्वार नाम दिया गया है। बृज भक्ति व सांस्कृतिक मधुरता, शेखावाटी कला व उद्यमशीलता, वागड प्रकृति संगत आदिवासी चेतना, हाड़ौती साहित्यिक व स्थापत्य परम्परा, मारवाड संघर्षशीलता, मेवाड राष्ट्र गौरव व बलिदान, मेरवाडा संत परम्परा और ढूंढाड़ राजनीतिक व सांस्कृतिक ऊर्जा के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि यह सभी मिलकर राजस्थान की आत्मा का निर्माण करते हैं। आज यह विधान सभा भवन इन सभी सांस्कृतिक धाराओं को समाहित कर लोकतंत्र की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत कर रहा है। ऐतिहासिक निर्णयों की साक्षी विधान सभा:- नेता प्रतिपक्ष श्री टीकाराम जूली ने कहा कि राजस्थान विधानसभा के 75 वर्षों की यात्रा अनेक ऐतिहासिक निर्णयों और जनहितकारी कानूनों की साक्षी रही है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना करते हुए विधानसभा को पेपरलेस बनाने तथा सांस्कृतिक प्रतीकों को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़ने की पहल को प्रशंसनीय बताया। उन्होंने कहा कि गोडावण, खेजडी और ऊंट राजस्थान की संस्कृति और पहचान के प्रतीक है। विधान सभा में निरन्तर नवाचार से बढ़ा राज्य का गौरव:- संसदीय कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल ने कहा कि स्पीकर श्री देवनानी ने राजस्थान विधानसभा में निरंतर नवाचार कर राज्य का गौरव बढाया है। उन्होंने कहा कि प्रतीक चिन्ह राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करेगा। हमारा सदन अन्य विधान सभाओं से अधिक संचालित होता है और कार्य निष्पादन भी अन्य राज्यों से अधिक व तत्पर है। विभिन्न द्वारों के नाम नई पीढी को अपनी विरासत से जोड़ने का कार्य करेंगे और इन द्वारों से प्रवेश करने पर गौरव की अनुभूति करेगी। विधान सभा के बनाये गये नियम और कानून आमजन के लिए वर्षों तक लाभकारी रहते हैं। प्रतीक चिन्ह के अभिकल्पक श्री शेर सिंह का सम्मान:- समारोह में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे और स्पीकर श्री वासुदेव देवनानी ने राजस्थान विधान सभा के नव निर्मित प्रतीक चिन्ह के अभिकल्पक श्री शेर सिंह को प्रतीक चिन्ह की प्रतिकृति भेट कर सम्मानित किया। मंत्रीगण और विधायकगण रहे मौजूद:- समारोह में उप मुख्यमंत्री श्री प्रेमचंद बैरवा, मंत्रीगण श्रीमती मंजू बाघमार, श्री ओटाराम देवासी, कर्नल राज्यवर्धन राठौड़, श्री झाबर सिंह खर्रा,श्री जोराराम कुमावत, श्री के. के. विश्नोई, श्री गजेंद्र सिंह खींवसर, बड़ी संख्या में विधायकगण, प्रमुख सचिव श्री भारत भूषण शर्मा, विशिष्ट सहायक श्री के. के. शर्मा सहित विधानसभा के अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। समारोह का शुभारम्भ राज्यपाल और स्पीकर ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
Read more 31st Aug 2022
अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़: एम्स्टेलवीन (नीदरलैंड्स)। नीदरलैंड्स के एम्स्टेलवीन शहर स्थित विलेम-अलेक्जेंडर स्कूल में 13 मई को एक अनूठा और रंगारंग 'इंडिया कल्चर डे' आयोजित किया गया। इस खास दिन पूरा स्कूल परिसर भारतीय संस्कृति, परंपराओं और कलाओं के रंग में रंग गया। विद्यार्थियों को दक्षिण एशिया के इस समृद्ध देश की जीवंत विरासत से रूबरू कराया गया। यह कल्चर डे उत्साही भारतीय अभिभावकों के एक समूह ने स्कूल की नागरिकता कार्यकारी समिति के सहयोग से आयोजित किया। स्कूल का उद्देश्य बच्चों को विद्यार्थी समुदाय में मौजूद विविध सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से परिचित कराना है। इस वर्ष भारत को चुना गया, क्योंकि हर कक्षा में भारतीय मूल के मित्र हैं। सुबह से शाम तक भारतमय माहौल दिन की शुरुआत में भारतीय अभिभावकों ने कक्षाओं में जाकर प्रस्तुतियां दीं। दृश्य सामग्री और निजी अनुभवों के माध्यम से विद्यार्थियों को भारत के दैनिक जीवन, संस्कृति और इतिहास की जानकारी दी गई। इसके बाद रचनात्मक गतिविधियों का दौर शुरू हुआ, जिसमें बच्चों ने रंग-बिरंगी रंगोली बनाई और दीया सजाए। भारतीय शास्त्रीय नृत्य की मुद्राएं सीखने का अवसर भी मिला, जहां अभिभावकों और शिक्षकों के मार्गदर्शन में विभिन्न समूहों ने नृत्य का अभ्यास किया। बड़े विद्यार्थियों के लिए खेल और तकनीक भी कार्यक्रम का हिस्सा रही। उन्हें भारत के सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट से परिचित कराया गया। इसके अलावा एक फोटो बूथ भी लगाया गया, जहां बच्चे पारंपरिक भारतीय परिधान पहनकर तस्वीरें खिंचवा सकते थे और हाथ पर मेहंदी भी लगवा सकते थे। सभी कक्षाओं में भारतीय स्नैक्स का भी आनंद लिया गया। फैशन शो और नृत्य से हुआ समापन दोपहर में सभी विद्यार्थी बड़े व्यायामशाला में एकत्रित हुए, जहां एक भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया। इसमें बच्चों ने पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में फैशन शो प्रस्तुत किया। इसके बाद अभिभावकों ने शानदार नृत्य प्रस्तुति दी, जिसने पूरे कार्यक्रम को यादगार बना दिया। आयोजकों ने इस दिन को सफल बताते हुए कहा कि अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयास से पूरे स्कूल के लिए भारत को जीवंत रूप से महसूस किया जा सका। यह कल्चर डे स्कूल की नागरिकता शिक्षा का हिस्सा है, जो विविधता, आपसी समझ और एक-दूसरे की पृष्ठभूमि को जानने पर केंद्रित है।
Read more 17th May 2026
अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश यात्रा पर भारत सरकार द्वारा टैक्स, उपकर या अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की खबरों को पूरी तरह गलत बताया है। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस तरह की खबरों में जरा भी सच्चाई नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में लिखा कि विदेश यात्रा पर किसी प्रकार की पाबंदी लगाने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार नागरिकों के लिए कारोबार करने में सुगमता और जीवन को आसान बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री का यह बयान उन मीडिया रिपोर्ट्स के बाद आया, जिनमें दावा किया गया था कि सरकार विदेश यात्रा पर टैक्स, उपकर या अतिरिक्त शुल्क लगाने पर विचार कर रही है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया था कि इस विषय पर उच्च स्तर पर चर्चा चल रही है। हालांकि प्रधानमंत्री ने इन खबरों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। हाल के दिनों में ईंधन बचत और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर सरकार की ओर से कई अपीलें की गई थीं। इसी बीच विदेश यात्राओं पर संभावित शुल्क बढ़ाने की चर्चाएं भी सामने आई थीं, लेकिन प्रधानमंत्री के बयान के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह बयान निवेश, पर्यटन और आम नागरिकों के बीच पैदा हुई आशंकाओं को दूर करने के उद्देश्य से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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अग्निवीर सेना भर्ती रैली, 20 जून के अभ्यर्थी देंगे 26 जून को रिपोर्ट
अग्निवीर सेना भर्ती रैली, 0 जून के अभ्यर्थी देंगे 26 जून को रिपोर्ट अजमेर, 19 जून। सेना भर्ती कार्यालय जोधपुर के निदेशक (भर्ती) कर्नल दीपांकर बसु ने बताया कि अजमेर में चक्रवात के कारण हुई अतिवृष्टि से अग्निवीर सेना भर्ती रैली के कार्यक्रम में परिवर्तन किया गया है। इसके कारण 20 जून को कायड़ विश्राम स्थली में रिपोर्ट करने वाले अभ्यर्थी अब 26 जून को प्रातः 2 बजे कायड़ विश्राम स्थली पर रिपोर्ट करेंगे।
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