राजस्थान न्यूज़: जयपुर। प्रदेश के 273 नगरीय निकायों में सोमवार, 21 सितंबर को महापौर, सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए मतदान होगा। वोटिंग सुबह 10 बजे शुरू होकर दोपहर 2 बजे तक चलेगी। मतदान समाप्त होते ही मतगणना शुरू होगी और संबंधित निकायों के परिणाम उसी दिन घोषित किए जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार सोमवार के चुनाव में 592 उम्मीदवार मैदान में हैं। प्रदेश के कुल 309 नगरीय निकायों में पार्षदों के चुनाव 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में कराए गए थे। जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम तथा सुकेत नगरपालिका में पुनर्मतदान के कारण प्रमुख पदों का चुनाव 25 सितंबर तक स्थगित कर दिया गया। इसलिए 21 सितंबर की प्रक्रिया 305 निकायों के लिए तय हुई थी। इनमें से 32 जगह प्रमुख पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। 273 निकायों में 21 सितंबर को मतदान उपलब्ध आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम के आधार पर आज मतदान वाले निकायों की संख्या 273 है। गणित भी यही है—305 निकायों में 32 प्रमुख निर्विरोध चुने जा चुके हैं, यानी शेष 273 में मतदान होगा। इसलिए 227 का आंकड़ा सही नहीं है। इसी तरह सीधे भाजपा-कांग्रेस या दो उम्मीदवारों के मुकाबले वाले निकायों का राज्य निर्वाचन विभाग आधारित प्रकाशित आंकड़ा 201 है, 231 नहीं। इनमें 172 नगरपालिकाएं, 24 नगर परिषद और पांच नगर निगम शामिल हैं। बाकी निकायों में तीन या उससे अधिक उम्मीदवार होने से मुकाबला बहुकोणीय है। पांच नगर निगमों में आज मेयर का फैसला सोमवार को पांच नगर निगमों में महापौर पद के लिए मतदान होगा। इनमें उदयपुर, बीकानेर, अलवर, पाली और अजमेर नगर निगम शामिल हैं। इन सभी जगह भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी सीधे आमने-सामने हैं। उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी और कांग्रेस की डॉ. पूनम कंवर, बीकानेर में भाजपा के सुरेंद्र सिंह और कांग्रेस के अनिल कल्ला, अलवर में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल और कांग्रेस की कमलेश शर्मा के बीच मुकाबला है। पाली में भाजपा की नमिता बुबकिया और कांग्रेस की सुमित्रा जैन, जबकि अजमेर में भाजपा की अनामिका शर्मा और कांग्रेस की किरण गढ़वाल मैदान में हैं। 32 निकायों में मतदान से पहले ही फैसला राज्य में 32 निकाय प्रमुख निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। इनमें भाजपा के 28, कांग्रेस के दो और दो निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं। भरतपुर और भीलवाड़ा नगर निगम में भी महापौर का चुनाव मतदान तक नहीं पहुंचा और उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। इसके अलावा छह नगर परिषद और 24 नगरपालिकाओं में भी अध्यक्ष पद का फैसला निर्विरोध हो चुका है। इस कारण सोमवार को इन निकायों में प्रमुख पद के लिए मतदान नहीं होगा। कई निकायों में निर्दलीय तय करेंगे बोर्ड का समीकरण वार्ड चुनाव के परिणामों में बड़ी संख्या में निर्दलीय पार्षद जीतकर आए हैं। कई नगर परिषदों और नगरपालिकाओं में भाजपा या कांग्रेस में से किसी भी दल के पास अकेले स्पष्ट बहुमत नहीं है। ऐसे निकायों में निर्दलीय पार्षदों के वोट महापौर, सभापति या अध्यक्ष के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। राजस्थान के हालिया वार्ड नतीजों में भाजपा सबसे बड़ा दल रही, लेकिन अनेक निकायों में निर्दलीयों ने बोर्ड गठन का गणित बदल दिया। इसी कारण मतदान से पहले भाजपा और कांग्रेस ने प्रदेश के कई हिस्सों में अपने पार्षदों को होटल, रिसॉर्ट या अन्य स्थानों पर एक साथ रखा है। कई जगह पार्षदों पर दबाव, बाड़ेबंदी और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए हैं। सुरक्षा बढ़ाई, RAC-STF की अतिरिक्त तैनाती निकाय प्रमुखों के चुनाव से पहले राज्य में कई संवेदनशील स्थानों पर पुलिस सुरक्षा बढ़ाई गई है। अतिरिक्त पुलिस बल के साथ RAC और STF की कंपनियों की तैनाती की गई है। अधिकारियों को मतदान केंद्रों और निकाय कार्यालयों के आसपास कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा निर्वाचित पार्षदों को निर्बाध मतदान सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। पिछले कुछ दिनों में कई जिलों से पार्षदों के परिवारों की शिकायतें, राजनीतिक बाड़ेबंदी और दबाव के आरोप सामने आने के बाद प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है। इन आरोपों की स्थिति अलग-अलग मामलों में अलग है और संबंधित प्रशासनिक या पुलिस जांच के आधार पर ही उनकी पुष्टि हो सकती है। जयपुर-जोधपुर-कोटा का फैसला 25 सितंबर को जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम तथा कोटा जिले की सुकेत नगरपालिका में आज प्रमुख पद का चुनाव नहीं होगा। इन चार निकायों में कुछ वार्डों में पुनर्मतदान के कारण निर्वाचन कार्यक्रम आगे बढ़ाना पड़ा था। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 25 सितंबर को मेयर या अध्यक्ष और 26 सितंबर को उपमहापौर या उपाध्यक्ष का चुनाव होगा। जयपुर में भाजपा के सुनील कोठारी और कांग्रेस की सुनीता मावर, जोधपुर में भाजपा के प्रसन्न चंद मेहता और कांग्रेस के राजेंद्र सोलंकी तथा कोटा में भाजपा की अनुसुईया गोस्वामी और कांग्रेस की सुनीता सुमन मैदान में हैं। दोपहर 2 बजे के बाद खुलना शुरू होगा परिणामों का पिटारा मतदान सुबह 10 बजे शुरू होगा और दोपहर 2 बजे समाप्त होगा। इसके बाद मतों की गिनती होगी। अधिकांश निकायों में परिणाम उसी दिन कुछ समय के भीतर सामने आ जाएंगे। इस चुनाव में आम मतदाता सीधे वोट नहीं डालते। संबंधित नगर निगम, नगर परिषद या नगरपालिका के निर्वाचित पार्षद अपने निकाय प्रमुख का चुनाव करते हैं। इसलिए वार्ड चुनाव के बाद बने संख्या समीकरण, निर्दलीयों का समर्थन और वास्तविक मतदान ही तय करेंगे कि किस निकाय की कमान किस उम्मीदवार को मिलेगी।
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राजस्थान न्यूज़: केकड़ी। नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव से ठीक पहले केकड़ी की राजनीति में कथित तौर पर 51 लाख रुपए में वोट हासिल करने के प्रयास का मामला सामने आया है। वार्ड संख्या 34 से निर्वाचित भाजपा पार्षद राजेंद्र कुमार चौधरी ने कांग्रेस के अध्यक्ष प्रत्याशी अनिल मित्तल पर अपने पक्ष में मतदान करने के लिए धन का प्रस्ताव देने का आरोप लगाया है। चौधरी ने इस संबंध में कथित कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य सामग्री के साथ जिला निर्वाचन अधिकारी से शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय रिपोर्टों ने शिकायत और कथित ऑडियो के सामने आने की पुष्टि की है, लेकिन रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता तथा उसमें सुनाई देने वाली आवाजों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।मामला ऐसे समय सामने आया है जब केकड़ी नगर पालिका के 40 सदस्यीय बोर्ड में किसी दल के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है। कांग्रेस ने 20, भाजपा ने 18 और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने दो वार्ड जीते हैं। अध्यक्ष बनने के लिए 21 वोट चाहिए। कांग्रेस की ओर से वार्ड 25 से निर्वाचित अनिल मित्तल और भाजपा की ओर से वार्ड 37 से निर्वाचित विनीत अध्यक्ष पद के चुनाव में आमने-सामने हैं। कथित बातचीत में पहले 31 लाख, फिर 51 लाख की बात भाजपा पक्ष के अनुसार रविवार रात करीब 8 बजे अनिल मित्तल की ओर से राजेंद्र कुमार चौधरी को फोन किया गया। शिकायत में आरोप है कि बातचीत के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी ने उन्हें अपने पक्ष में मतदान करने के बदले आर्थिक प्रस्ताव दिया।सामने आई कथित रिकॉर्डिंग के बारे में भाजपा का दावा है कि बातचीत पहले करीब 31 लाख रुपए के प्रस्ताव से शुरू हुई। इसके जवाब में चौधरी की ओर से अधिक रकम की बात कही गई और बाद में कथित तौर पर 51 लाख रुपए तक देने की पेशकश सामने आई। वायरल सामग्री में भाजपा के अन्य पार्षदों और एक आरएलपी पार्षद के समर्थन को लेकर भी दावा किया गया बताया जा रहा है। इन दावों की निर्वाचन प्रशासन या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी ने अभी पुष्टि नहीं की है, इसलिए इन्हें रिकॉर्डिंग में किए गए कथित दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। -34 से भाजपा के ही पार्षद हैं राजेंद्र चौधरी इस पूरे घटनाक्रम में नाम को लेकर भ्रम की संभावना भी है, क्योंकि केकड़ी में राजेंद्र कुमार चौधरी नाम के एक से अधिक निर्वाचित पार्षद हैं। निर्वाचन परिणाम के अनुसार वार्ड संख्या 34 से राजेंद्र कुमार चौधरी भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीते हैं, जबकि वार्ड संख्या 16 से इसी नाम के एक अन्य राजेंद्र कुमार चौधरी आरएलपी के पार्षद हैं। कथित धन प्रस्ताव की शिकायत करने वाले पार्षद को स्थानीय रिपोर्टों ने भाजपा पार्षद बताया है।इसलिए आरएलपी पार्षद राजेंद्र चौधरी की कांग्रेस प्रत्याशी के साथ पहले सामने आई तस्वीरों और मौजूदा शिकायत करने वाले भाजपा पार्षद को एक ही व्यक्ति मानना सही नहीं होगा। वार्ड परिणाम दोनों अलग निर्वाचित प्रतिनिधियों की पुष्टि करते हैं। विधायक शत्रुघ्न गौतम भाजपा पार्षदों के साथ पहुंचे कथित ऑडियो सामने आने के बाद केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम भाजपा के निर्वाचित पार्षदों के साथ जिला निर्वाचन अधिकारी के पास पहुंचे। भाजपा की ओर से दिए गए ज्ञापन में रिकॉर्डिंग और उपलब्ध अन्य सामग्री की निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाएं तो चुनाव कानूनों के तहत कार्रवाई करने की मांग की गई है। शिकायत में चुनाव स्थगित करने अथवा संबंधित प्रत्याशी की पात्रता पर कार्रवाई की मांग भी रखी गई।स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार शिकायत देते समय भाजपा के 18 निर्वाचित पार्षद विधायक के साथ मौजूद थे। पार्टी का कहना है कि किसी निर्वाचित पार्षद को धन का प्रलोभन देकर उसके मत को प्रभावित करने का प्रयास स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के विपरीत होगा। गौतम बोले- ‘लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित करने का प्रयास’ शत्रुघ्न गौतम ने कांग्रेस प्रत्याशी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि किसी निर्वाचित पार्षद को धन देकर उसके वोट को प्रभावित करने की कोशिश हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने भाजपा के सभी 18 पार्षदों के एकजुट होने का दावा किया और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की।गौतम ने अपने बयान में अनिल मित्तल पर तीखा राजनीतिक हमला भी किया और कथित खरीद-फरोख्त को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध बताया। ये भाजपा विधायक के आरोप और राजनीतिक टिप्पणियां हैं; कथित ऑडियो तथा आरोपों पर अंतिम तथ्य जांच के बाद ही स्थापित होंगे। अनिल मित्तल पहले भाजपा में, चुनाव से पहले कांग्रेस में हुए शामिल इस चुनाव की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी दिलचस्प है। अनिल मित्तल पूर्व में भाजपा से जुड़े रहे हैं और केकड़ी नगर पालिका के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2026 के निकाय चुनाव से ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और वार्ड 25 से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया।भाजपा ने वार्ड संख्या 37 से निर्वाचित विनीत को अपना अध्यक्ष प्रत्याशी बनाया है। अलग-अलग स्थानीय रिपोर्टों में उनके नाम के साथ ‘जैन’ और ‘चोरड़िया’ दोनों उपनाम प्रकाशित हुए हैं, जबकि निर्वाचन रिकॉर्ड उन्हें केवल विनितके रूप में दर्ज करता है। 40 सदस्यीय बोर्ड में एक-एक वोट बेहद अहम केकड़ी नगर पालिका में कांग्रेस 20 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल है। भाजपा के 18 और आरएलपी के दो पार्षद हैं। बहुमत के लिए 21 मत जरूरी होने के कारण कांग्रेस को केवल एक अतिरिक्त मत चाहिए, जबकि भाजपा को तीन अतिरिक्त पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा।आरएलपी ने चुनाव से पहले अपने दोनों पार्षदों के मतदान को लेकर कोई औपचारिक सार्वजनिक घोषणा नहीं की थी। हालांकि वार्ड 16 के आरएलपी पार्षद राजेंद्र चौधरी की कांग्रेस प्रत्याशी अनिल मित्तल के साथ तस्वीरें और नामांकन के दौरान मौजूदगी सामने आई थीं। इससे राजनीतिक अटकलें जरूर बढ़ीं, लेकिन वास्तविक मतदान किस पक्ष में हुआ या होगा, यह औपचारिक मतगणना से ही तय होता है। ‘चार भाजपा और एक RLP पार्षद’ वाले कथित दावे की पुष्टि नहीं वायरल रिकॉर्डिंग को लेकर भाजपा की ओर से यह भी दावा किया गया है कि बातचीत में अनिल मित्तल की आवाज बताए जा रहे व्यक्ति ने चार भाजपा पार्षदों और एक आरएलपी पार्षद के अपने पक्ष में आने की बात कही। फिलहाल इस कथित दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी पार्षद के वोट, समर्थन या कथित आर्थिक लेन-देन के बारे में बिना जांच के निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।खास तौर पर मतदान गुप्त होने के कारण किसी पार्टी के दावे या किसी कथित बातचीत से यह निश्चित नहीं किया जा सकता कि संबंधित पार्षद वास्तव में किस उम्मीदवार को वोट देंगे या उन्होंने किसी प्रकार का लाभ स्वीकार किया है। शिकायत में ऑडियो की फोरेंसिक जांच अहम अब मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कथित ऑडियो की प्रामाणिकता है। निर्वाचन अधिकारी या जांच एजेंसी को यह देखना होगा कि रिकॉर्डिंग वास्तविक है या नहीं, कॉल किस नंबर से हुई, आवाज किसकी है, ऑडियो में कोई एडिटिंग हुई या नहीं और पूरा संवाद किस संदर्भ में हुआ।भाजपा पार्षद ने शिकायत के साथ ऑडियो रिकॉर्डिंग देने का दावा किया है। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार निर्वाचन अधिकारी से रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है। आरोप सही हैं या नहीं, यह किसी सक्षम जांच के बाद ही तय होगा। कांग्रेस प्रत्याशी का पक्ष सामने आना बाकी उपलब्ध प्रकाशित रिपोर्टों में इस आरोप पर अनिल मित्तल की विस्तृत प्रतिक्रिया या रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता को लेकर उनका स्पष्ट पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में खबर में भाजपा की शिकायत को सिद्ध तथ्य के बजाय आरोप के रूप में ही प्रस्तुत करना जरूरी है।यदि मित्तल या कांग्रेस की ओर से रिकॉर्डिंग को लेकर कोई आधिकारिक जवाब, खंडन अथवा स्पष्टीकरण जारी किया जाता है तो वही इस विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष होगा। आज अध्यक्ष पद के लिए मतदान केकड़ी नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस के अनिल मित्तल और भाजपा के विनीत के बीच सीधा मुकाबला है। 40 पार्षदों वाले बोर्ड में बहुमत का आंकड़ा 21 है। कांग्रेस के पास 20 और भाजपा के पास 18 निर्वाचित पार्षद हैं, जबकि दो आरएलपी पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण है।मतदान से ठीक पहले सामने आए इस आरोप ने पहले से ही बेहद करीबी संख्या वाले केकड़ी अध्यक्ष चुनाव में नया विवाद जोड़ दिया है। फिलहाल राजनीतिक आरोपों से अलग अंतिम निर्णय निर्वाचित पार्षदों के मतदान और कथित ऑडियो के संबंध में होने वाली आधिकारिक जांच से ही सामने आएगा।
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राजस्थान न्यूज़: हनुमानगढ़। नगर परिषद सभापति चुनाव से ठीक पहले हनुमानगढ़ की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल को CID-CB और पुलिस की विशेष अपराध शाखा ने शनिवार देर रात बीकानेर क्षेत्र से हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद रविवार सुबह औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार कार्रवाई वर्ष 2003 में कथित रूप से जारी किए गए फर्जी भूमि पट्टों से जुड़े मामलों में की गई है। इसके बाद उन्हें हनुमानगढ़ जिले के पल्लू थाने ले जाया गया, जहां पूछताछ की गई। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब सोमवार, 21 सितंबर को हनुमानगढ़ नगर परिषद के सभापति पद के लिए मतदान होना है। इस कारण गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलकों में अलग बहस छेड़ दी है। बंसल के समर्थकों ने कार्रवाई की टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस सूत्र इसे पुराने मामलों में चल रही कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं। अभी किसी अदालत ने आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। 2003 के कथित फर्जी पट्टों से जुड़ा है मामला पुलिस से जुड़े सूत्रों और प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक बंसल के खिलाफ कार्रवाई करीब 23 साल पुराने भूमि-पट्टा प्रकरण से संबंधित है। आरोप है कि वर्ष 2003 के आसपास सरकारी जमीन या भूमि आवंटन से जुड़े कुछ पट्टे कथित रूप से गलत तरीके से जारी किए गए थे। मामले में बंसल के अलावा उनकी पत्नी संतोष बंसल, तत्कालीन नगर निकाय अधिकारी और अन्य लोगों के नाम भी रिपोर्टों में सामने आए हैं। यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि कथित घटनाक्रम वर्ष 2003 का है, लेकिन उससे जुड़े दो नए आपराधिक प्रकरण हाल ही में हनुमानगढ़ जंक्शन थाने में दर्ज किए गए हैं। इसलिए इसे केवल “23 साल पुरानी FIR” कहना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा; आरोप पुराने घटनाक्रम से जुड़े हैं, जबकि वर्तमान FIR हाल में दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। शनिवार रात हिरासत, रविवार सुबह गिरफ्तारी पुलिस सूत्रों के मुताबिक गणेशराज बंसल शनिवार देर रात हनुमानगढ़ और बीकानेर के बीच यात्रा कर रहे थे, तभी CID-CB और विशेष अपराध शाखा की संयुक्त टीम ने उन्हें रोका। प्रारंभिक पूछताछ के बाद उन्हें हिरासत में लेकर पल्लू थाने ले जाया गया। रविवार सुबह गिरफ्तारी की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने शुरुआत में कार्रवाई के विस्तृत कारणों पर सार्वजनिक रूप से बहुत कम जानकारी दी। हालांकि बाद की मीडिया रिपोर्टों में गिरफ्तारी को कथित फर्जी पट्टा और सरकारी जमीन से जुड़े मामलों से जोड़ा गया। पहले भी जारी किया था नोटिस दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार CID-CB के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने इससे पहले बंसल को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था। बाद में पूछताछ और अन्य जांच प्रक्रिया के बाद गिरफ्तारी की गई।इससे पुलिस पक्ष यह संकेत देता है कि कार्रवाई अचानक शुरू नहीं हुई थी। दूसरी ओर बंसल समर्थक यह सवाल उठा रहे हैं कि इतने पुराने मामले में सभापति चुनाव के ठीक पहले गिरफ्तारी क्यों की गई। इन दोनों पक्षों का अंतिम परीक्षण जांच रिकॉर्ड और अदालत में होगा। 60 वार्डों में 34 निर्दलीय बंसल खेमे से हनुमानगढ़ नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। चुनाव परिणामों में भाजपा ने 15, कांग्रेस ने 10 और माकपा ने एक सीट जीती है, जबकि 34 निर्दलीय पार्षद बंसल समर्थक खेमे से जुड़े बताए जा रहे हैं। इस संख्या के आधार पर उनका समूह नगर परिषद के बोर्ड गठन में सबसे बड़ा ब्लॉक है। सभापति के लिए सामान्य बहुमत का आंकड़ा 31 है। इस लिहाज से यदि बंसल समर्थक सभी 34 पार्षद एकसाथ मतदान करते हैं तो उनके खेमे के पास संख्या के स्तर पर बहुमत है। हालांकि अंतिम परिणाम मतदान के बाद ही तय होगा और किसी पार्षद के वास्तविक वोट के बारे में पहले से निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। मंजू रणवां को बनाया गया सभापति प्रत्याशी प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार गणेशराज बंसल खेमे ने मंजू रणवां को सभापति पद का उम्मीदवार बनाया है। 34 निर्दलीय पार्षदों के समूह के कारण उनकी उम्मीदवारी को मजबूत संख्या समर्थन का दावा मिला है। लेकिन बंसल की गिरफ्तारी के बाद सवाल यह उठा कि क्या इससे उनके समर्थक पार्षदों के राजनीतिक समन्वय पर असर पड़ेगा। इसका कोई निश्चित निष्कर्ष अभी नहीं निकाला जा सकता। मतदान गुप्त प्रक्रिया के जरिए होगा और नतीजा वास्तविक वोटिंग पर निर्भर करेगा। समर्थकों ने किया विरोध प्रदर्शन बंसल की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए। हनुमानगढ़ में जंक्शन पुलिस थाने और अन्य स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया गया। समर्थकों ने आरोप लगाया कि नगर परिषद सभापति चुनाव से ठीक पहले कार्रवाई का उद्देश्य राजनीतिक दबाव बनाना है। ये आरोप बंसल समर्थकों के राजनीतिक दावे हैं। पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई को दर्ज आपराधिक मामलों और जांच प्रक्रिया से जुड़ा बताया है। इस स्तर पर गिरफ्तारी की टाइमिंग को राजनीतिक या गैर-राजनीतिक घोषित करना स्वतंत्र जांच या न्यायिक परीक्षण के बिना उचित नहीं होगा। पत्नी और तत्कालीन अधिकारियों के नाम भी रिपोर्टों में दोनों FIR से संबंधित मीडिया रिपोर्टों में विधायक गणेशराज बंसल के साथ उनकी पत्नी संतोष बंसल और तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी भंवरलाल सोनी समेत कुछ अन्य व्यक्तियों का भी उल्लेख है। आरोप जमीन आवंटन और पट्टा प्रक्रिया में कथित धोखाधड़ी एवं अनियमितता से संबंधित बताए गए हैं। इन सभी आरोपों की कानूनी स्थिति अभी जांच के अधीन है। FIR में नाम होना या गिरफ्तारी होना अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है। पहले से कुछ आपराधिक मामलों की जानकारी चुनावी शपथपत्र में गणेशराज बंसल के 2023 विधानसभा चुनाव के स्वघोषित हलफनामे में कुछ पुराने आपराधिक मामलों की जानकारी दर्ज थी, हालांकि इनमें मौजूदा फर्जी पट्टा प्रकरण अलग है। उपलब्ध चुनावी शपथपत्र के मुताबिक उस समय उनके खिलाफ कुछ मामले लंबित थे और किसी मामले में दोषसिद्धि दर्ज नहीं थी। यह चुनावी हलफनामा 2023 की स्थिति को दर्शाता है और मौजूदा 2026 की FIR के संबंध में अलग जांच चल रही है। गिरफ्तारी से सभापति चुनाव का समीकरण बदलेगा या नहीं? राजनीतिक चर्चा का सबसे बड़ा सवाल यही है कि विधायक की गिरफ्तारी से नगर परिषद के सभापति चुनाव में क्या असर पड़ेगा। बंसल स्वयं नगर परिषद के पार्षद नहीं हैं और सभापति का चुनाव 60 निर्वाचित पार्षद करेंगे। इसलिए कानूनी तौर पर उनकी गिरफ्तारी से पार्षदों का मतदान अधिकार स्वतः प्रभावित नहीं होता। हां, बंसल समर्थक 34 निर्दलीय पार्षदों के राजनीतिक समन्वय और चुनावी रणनीति पर इसका मनोवैज्ञानिक या राजनीतिक असर पड़ सकता है, लेकिन इसका कोई स्वतंत्र आकलन मतदान से पहले तथ्य के रूप में नहीं किया जा सकता। आज मतदान, नतीजे के बाद साफ होगी तस्वीर हनुमानगढ़ नगर परिषद में सभापति पद के लिए मतदान सोमवार, 21 सितंबर को होना है। बंसल खेमे की संख्या, भाजपा-कांग्रेस की स्थिति और गिरफ्तारी से पैदा हुई राजनीतिक हलचल के बीच अब सभी की निगाह वास्तविक मतदान पर है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि गणेशराज बंसल को 2003 के कथित फर्जी पट्टा मामलों से संबंधित जांच में गिरफ्तार किया गया है और कानूनी प्रक्रिया आगे जारी है। दूसरी ओर नगर परिषद सभापति का फैसला पार्षदों के मतों से अलग चुनावी प्रक्रिया में होगा।
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राष्ट्रीय न्यूज़: मुंबई। बॉलीवुड के स्टार कपल दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के घर एक बार फिर खुशियों ने दस्तक दी है। दोनों शनिवार, 19 सितंबर 2026 को दूसरी बार माता-पिता बने हैं। दीपिका ने दूसरी बेटी को जन्म दिया है। कपल ने सोशल मीडिया पर एक बेहद प्यारा पोस्ट साझा कर अपने फैंस के साथ यह खुशखबरी शेयर की। दीपिका और रणवीर ने अपने संयुक्त इंस्टाग्राम पोस्ट में नवजात बच्ची के छोटे-छोटे फुटप्रिंट की तस्वीर शेयर की। इसके साथ उन्होंने लिखा—“Welcome baby girl! 19/9/2026. Dua, Deepika and Ranveer.” पोस्ट में नजर से बचाने वाला इमोजी भी लगाया गया है। हालांकि कपल ने फिलहाल अपनी दूसरी बेटी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। दुआ बनी बड़ी बहन दीपिका और रणवीर की पहली बेटी दुआ पादुकोण सिंह का जन्म 8 सितंबर 2024 को हुआ था। अब करीब दो साल बाद परिवार में दूसरी बेटी के आने से दुआ बड़ी बहन बन गई हैं। खास बात यह है कि दोनों बेटियों का जन्म सितंबर महीने में हुआ है। कपल की ओर से दूसरी बेटी के जन्म की घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और फैंस ने दोनों को शुभकामनाएं दीं और नए मेहमान का स्वागत किया। अप्रैल में की थी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा दीपिका और रणवीर ने इसी साल अप्रैल में अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की थी। उस समय उन्होंने एक खास पोस्ट के जरिए फैंस को बताया था कि उनका परिवार एक बार फिर बढ़ने वाला है। अब सितंबर में दूसरी बेटी के जन्म के साथ कपल के घर एक और नन्ही सदस्य आ गई है। शादी के छह साल बाद चार लोगों का हुआ परिवार दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने नवंबर 2018 में इटली में शादी की थी। शादी के करीब छह साल बाद सितंबर 2024 में दोनों पहली बार माता-पिता बने और बेटी दुआ का स्वागत किया। अब दूसरी बेटी के जन्म के बाद उनका परिवार चार सदस्यों का हो गया है। दीपिका और रणवीर अपने पारिवारिक जीवन को काफी निजी रखते हैं और दुआ की तस्वीरें भी सीमित मौकों पर ही साझा की हैं। दूसरी बेटी के जन्म की जानकारी भी उन्होंने बेहद सादगी से फुटप्रिंट वाली पोस्ट के जरिए दी है। राधाष्टमी के दिन आई नन्ही परी इस बार 19 सितंबर को राधाष्टमी का पर्व भी मनाया जा रहा है। ऐसे में दीपिका और रणवीर की दूसरी बेटी का जन्म इसी शुभ अवसर पर हुआ है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर फैंस लगातार कपल को बधाई दे रहे हैं। फिलहाल कपल ने नवजात बच्ची की तस्वीर या नाम साझा नहीं किया है। फैंस अब यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि दीपिका और रणवीर अपनी दूसरी बेटी का क्या नाम रखते हैं।
Read more 20th Sep 2026
राष्ट्रीय न्यूज़: तिरुपति/नई दिल्ली। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के प्रसिद्ध श्रीवारी लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी की कथित मिलावट के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। ED के मुताबिक मंगला को हैदराबाद जोनल कार्यालय ने 17 सितंबर को हिरासत में लिया था और शुक्रवार को जारी बयान में कार्रवाई की जानकारी दी गई। बाद में उन्हें विशाखापत्तनम की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। ED का आरोप है कि TTD को जिस सामग्री की आपूर्ति ‘एगमार्क स्पेशल ग्रेड काउ घी’ बताकर की गई, उसमें वास्तविक गाय के घी के स्थान पर रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल, पामोलिन और कई रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने MG-90, मोनोग्लिसराइड्स, Myvacet Soft 400 और acetic acid ester जैसे पदार्थों का भी उल्लेख किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन सामग्रियों को मिलाकर ऐसा उत्पाद तैयार किया गया जिसे रिकॉर्ड में शुद्ध गाय के घी के रूप में दिखाया गया। ₹230 करोड़ की कथित सप्लाई, ₹96 करोड़ का घी मंगला से जुड़ा ED की जांच के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच TTD को कथित रूप से करीब ₹230 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी सप्लाई किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इसमें लगभग ₹96 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी कैलाश चंद मंगला की इकाई में तैयार किया गया था। इसलिए ₹230 करोड़ की पूरी राशि को अकेले सुकृति फूड्स द्वारा तैयार घी की रकम मानना सही नहीं होगा; ED ने व्यापक कथित सप्लाई नेटवर्क के लिए ₹230 करोड़ और मंगला से जुड़े निर्माण के लिए करीब ₹96 करोड़ का आंकड़ा बताया है। जांच एजेंसी ने मंगला को इस कथित नेटवर्क का सह-साजिशकर्ता बताया है। ED का दावा है कि उन्होंने मिलावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जुटाने, अपने परिसर में कथित मिलावटी घी तैयार करने और इसे अलग-अलग कारोबारी इकाइयों के माध्यम से सप्लाई कराने में भूमिका निभाई। एजेंसी ने Sri Vyshnavi Dairy Specialities, Malganga Milk & Agro Products और A.R. Dairy Foods जैसी इकाइयों के जरिए सप्लाई समन्वय किए जाने का आरोप भी लगाया है।खरीद-बिक्री के फर्जी रिकॉर्ड बनाने का भी आरोप ED के मुताबिक कथित मिलावट को छिपाने के लिए घी और रिफाइंड पाम ऑयल की खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया। एजेंसी का आरोप है कि ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए जिनसे यह दिखाया जा सके कि उत्पादन और सप्लाई वास्तविक गाय के घी की थी, जबकि जांच में दूसरी सामग्री के उपयोग का दावा सामने आया। इन आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच तिरुपति ईस्ट पुलिस की उस FIR से जुड़ी है जिसमें कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार के जरिए TTD को मिलावटी घी सप्लाई करने के आरोप लगाए गए थे। उसी कथित अपराध से पैदा हुई रकम और वित्तीय लेन-देन की जांच ED PMLA के तहत कर रही है।इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी के प्रमोटर की भी गिरफ्तारी कैलाश चंद मंगला इस मामले में गिरफ्तार होने वाले पहले कारोबारी नहीं हैं। ED इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क से जुड़े प्रमोटर एवं निदेशक विपिन जैन को भी इसी जांच में गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी अब कथित सप्लाई चेन, भुगतान, विभिन्न कारोबारी संस्थाओं और घी के निर्माण एवं बिक्री रिकॉर्ड की जांच आगे बढ़ा रही है।‘पशु चर्बी’ के पुराने विवाद से अलग है ED का मौजूदा दावा तिरुपति लड्डू विवाद में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ED के मौजूदा बयान में कथित मिलावट के रूप में पाम आधारित तेल और रासायनिक पदार्थों का उल्लेख किया गया है; एजेंसी ने इस कार्रवाई में पशु चर्बी मिलने का दावा नहीं किया है। इससे पहले CBI द्वारा गठित SIT की जांच में जांचे गए नमूनों में पशु चर्बी की मौजूदगी स्थापित नहीं होने की रिपोर्ट सामने आई थी, हालांकि घी में अन्य प्रकार की मिलावट और खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच अलग विषय रही है।इसलिए मौजूदा ED कार्रवाई को सीधे पुराने “animal fat” आरोप की पुष्टि के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। ताजा कार्रवाई का केंद्र कथित रूप से पाम ऑयल, पामोलिन, पाम कर्नेल ऑयल तथा अन्य पदार्थों का इस्तेमाल कर गाय के घी के नाम पर उत्पाद तैयार करने और उसके वित्तीय लेन-देन पर है। रोज तैयार होते हैं 4 लाख से ज्यादा श्रीवारी लड्डू तिरुपति का श्रीवारी लड्डू दुनिया के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक प्रसादों में शामिल है। TTD की जून 2026 की आधिकारिक जानकारी के अनुसार मंदिर प्रशासन प्रतिदिन 4 लाख से अधिक लड्डू तैयार करता है। मई में औसतन करीब 4.08 लाख लड्डू प्रतिदिन बनाए गए थे। अकेले जून 2026 में रिकॉर्ड 1.26 करोड़ से अधिक लड्डुओं की बिक्री हुई।TTD के मुताबिक लड्डू निर्माण में रोजाना लगभग 16 टन घी सहित करीब 68 टन कच्ची सामग्री इस्तेमाल होती है। इतनी बड़ी मात्रा में प्रसाद तैयार होने के कारण घी की गुणवत्ता और सप्लाई चेन की निगरानी सीधे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और खाद्य गुणवत्ता से जुड़ा विषय है।अब मनी ट्रेल और सप्लाई नेटवर्क की जांच कैलाश चंद मंगला को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद ED की जांच अब कथित मिलावट से पैदा हुई आय, कारोबारी संस्थाओं के बीच हुए भुगतान और सप्लाई नेटवर्क पर केंद्रित है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित मिलावटी उत्पाद किन-किन संस्थाओं के जरिए TTD तक पहुंचा और इससे जुड़े वित्तीय लाभ का प्रवाह किस तरह हुआ। फिलहाल कैलाश चंद मंगला के खिलाफ लगाए गए ये सभी आरोप ED की जांच का हिस्सा हैं। गिरफ्तारी या एजेंसी का आरोप अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है और मामले की अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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