राजस्थान न्यूज़: चित्तौड़गढ़। निम्बाहेड़ा नगर परिषद चुनाव के बाद शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। कोतवाली थाने में 16 सितंबर को हुए घटनाक्रम को लेकर पुलिस ने राजस्थान के पूर्व सहकारिता मंत्री एवं कांग्रेस नेता उदयलाल आंजना समेत 13 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि थाने में पहुंचे लोगों ने सरकारी कार्य में बाधा डाली और पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। यह पूरा विवाद नगर परिषद चुनाव के मतदान के बाद वार्ड संख्या 19 में हुई कथित मारपीट की घटना से जुड़ा है। 11 सितंबर को मतदान के बाद एक व्यक्ति के साथ मारपीट का मामला सामने आया था। पुलिस ने इस मामले में 16 सितंबर को कुछ लोगों को हिरासत में लिया और उन्हें कानूनी कार्रवाई के लिए कोतवाली थाने लाया। इसकी जानकारी मिलने के बाद पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ थाने पहुंचे। हिरासत में लिए लोगों को छोड़ने की मांग पर बढ़ा विवाद प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार आंजना और उनके समर्थकों ने हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और उन्हें छोड़ने की मांग की। इसके बाद पुलिस अधिकारियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच बहस तथा नोकझोंक की स्थिति बनी। यह घटनाक्रम करीब तीन घंटे तक चलता रहा। बाद में पुलिस उपाधीक्षक शिवप्रकाश टेलर ने मौके पर बातचीत कर कहा कि मामले में नियमानुसार जांच और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद मामला शांत हुआ और आंजना अपने समर्थकों के साथ थाने से लौट गए। पुलिस की ओर से उस समय कहा गया था कि वार्ड 19 में हुई मारपीट से जुड़े लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। दूसरी ओर कांग्रेस पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। अब थाने में हुए इसी घटनाक्रम को लेकर अलग से FIR दर्ज किए जाने के बाद विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। उदयलाल आंजना समेत इन 13 लोगों को किया नामजद पुलिस की ओर से दर्ज प्रकरण में पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना के अलावा रवि सोनी, बंटी पारख, जावेद खान, गोपाल आंजना, बाबूलाल धाकड़, दिनेश धाकड़, रोमिल चौधरी, मोहम्मद कुरैशी, उस्मान उर्फ कालू, लियाकत खान, जाकिर हुसैन और साजिद अली को नामजद किया गया है। इस तरह मामले में कुल 13 लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं। FIR में लगाए गए आरोप अभी पुलिस जांच के अधीन हैं। किसी भी नामजद व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी जांच और बाद की न्यायिक प्रक्रिया में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।लोक सेवक के काम में बाधा और धमकी जैसे आरोप पुलिस की ओर से दर्ज मामले में आरोपियों पर गैरकानूनी रूप से एकत्र होने, लोक सेवक को उसके सरकारी कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने के लिए कथित रूप से आपराधिक बल का इस्तेमाल करने, धमकी देने और जानबूझकर अपमान करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों के आधार पर BNS की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। अब जांच अधिकारी थाने के घटनाक्रम के दौरान मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों के बयान, उपलब्ध वीडियो या CCTV फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों को देख सकते हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों के समर्थन में क्या सामग्री सामने आती है। वार्ड 19 की मारपीट से शुरू हुआ था पूरा घटनाक्रम निम्बाहेड़ा में विवाद की शुरुआत 11 सितंबर को नगर परिषद चुनाव के मतदान के बाद हुई थी। वार्ड संख्या 19 में एक व्यक्ति के साथ मारपीट की शिकायत सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। 16 सितंबर को मामले से जुड़े कुछ लोगों को पूछताछ और आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस ने हिरासत में लिया था। एक रिपोर्ट के अनुसार उन्हें शांतिभंग की कार्रवाई के सिलसिले में उपखंड कार्यालय ले जाया जा रहा था, लेकिन बाद में वापस थाने लाया गया। इसी कार्रवाई की जानकारी मिलने पर कांग्रेस नेता और समर्थक कोतवाली पहुंचे और पुलिस कार्रवाई पर विरोध दर्ज कराया। उस दिन बातचीत के बाद मामला शांत हो गया था, लेकिन अब पुलिस ने उसी घटनाक्रम को आधार बनाकर अलग आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। निकाय चुनाव के बीच बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी नगर परिषद चुनाव के बाद निम्बाहेड़ा में राजनीतिक गतिविधियां पहले से तेज हैं। ऐसे समय में पूर्व मंत्री और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने से स्थानीय राजनीति में मामला और गर्म हो गया है। हालांकि पुलिस कार्रवाई को चुनावी राजनीति से जोड़कर कोई निष्कर्ष निकालने से पहले जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों को देखना आवश्यक होगा। फिलहाल पुलिस का पक्ष यह है कि मामला 16 सितंबर को कोतवाली थाने में हुए घटनाक्रम और वहां कथित रूप से सरकारी काम में बाधा डालने से संबंधित है। कांग्रेस या नामजद लोगों की ओर से FIR के आरोपों पर विस्तृत औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर प्रकरण की दूसरी तरफ की तस्वीर भी स्पष्ट होगी। जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस मामले में साक्ष्य जुटाएगी और नामजद लोगों की कथित भूमिका की जांच करेगी। जरूरत पड़ने पर घटनास्थल से जुड़े CCTV फुटेज, मोबाइल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।कानूनी रूप से FIR में किसी व्यक्ति का नाम दर्ज होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं होता। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होती है। इसलिए इस स्तर पर सभी आरोप पुलिस के कथन और दर्ज प्रकरण तक सीमित हैं
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) में करीब 20 दिन से प्रबंध निदेशक का पद खाली रहने के बीच प्रशासनिक कामकाज और अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। तत्कालीन प्रबंध निदेशक एवं आईएएस अधिकारी श्रुति भारद्वाज 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो गई थीं, लेकिन 20 सितंबर तक राज्य सरकार की ओर से किसी अधिकारी को नियमित रूप से RCDF के एमडी का प्रभार सौंपे जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। उनकी सेवानिवृत्ति के कुछ दिन बाद भी पद खाली रहने की बात सार्वजनिक रिपोर्टों में दर्ज की गई थी। एमडी नहीं होने के बीच अब फेडरेशन के अंदर अलग-अलग शाखाओं से जुड़े प्रशासनिक आदेशों को लेकर भी विवाद की स्थिति बनी है। ताजा मामला कार्मिक एवं प्रशासन शाखा के प्रभार से जुड़ा है। 16 सितंबर को महाप्रबंधक मार्केटिंग संतोष शर्मा की ओर से एक आदेश जारी कर केसी मीना के स्थान पर वित्तीय सलाहकार को कार्मिक एवं प्रशासन शाखा का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी आदेश को लेकर यह सवाल उठाया जा रहा है कि एमडी का पद रिक्त होने की स्थिति में किस अधिकारी के पास ऐसा प्रशासनिक आदेश जारी करने की सक्षम शक्ति थी। कार्मिक शाखा का चार्ज बदलने वाले आदेश पर सवाल RCDF के प्रशासनिक ढांचे में कार्मिक एवं प्रशासन शाखा कर्मचारियों की पदस्थापना, कार्य-विभाजन, अतिरिक्त प्रभार और दूसरे आंतरिक प्रशासनिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में इस शाखा का प्रभार किसी अन्य अधिकारी को सौंपने वाला आदेश स्वयं फेडरेशन की प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। उपलब्ध आंतरिक जानकारी के मुताबिक 16 सितंबर को जारी आदेश में केसी मीना के स्थान पर वित्तीय सलाहकार को कार्मिक एवं प्रशासन का प्रभार सौंपा गया। आदेश महाप्रबंधक मार्केटिंग संतोष शर्मा की ओर से जारी होने के कारण यह चर्चा शुरू हुई है कि क्या उन्हें इस स्तर का आदेश जारी करने के लिए सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति या विधिवत प्रत्यायोजित अधिकार प्राप्त थे। इस संबंध में RCDF की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इसलिए आदेश की वैधानिक या प्रशासनिक स्थिति पर अंतिम निष्कर्ष तभी निकाला जा सकता है, जब संबंधित स्वीकृति, प्राधिकरण अथवा फेडरेशन के लागू नियम सामने आएं। वित्तीय सलाहकार को दिया गया कार्मिक एवं प्रशासन का प्रभार राज्य सरकार के राजकाज रिकॉर्ड में RCDF में वित्त एवं लेखा से संबंधित वित्तीय सलाहकार का पद अलग प्रशासनिक जिम्मेदारी के रूप में दर्ज है। अगस्त 2026 के सरकारी रिकॉर्ड में RCDF की वित्त एवं लेखा शाखा के अंतर्गत वित्तीय सलाहकार पद का उल्लेख भी मौजूद है।ऐसे में वित्तीय सलाहकार को कार्मिक एवं प्रशासन जैसे अलग कार्यक्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने से कार्य-विभाजन पर भी चर्चा हुई है। सवाल यह नहीं है कि किसी अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकता है या नहीं, बल्कि यह है कि ऐसा आदेश किस सक्षम स्तर से और किस प्रक्रिया के तहत जारी होना चाहिए था। यदि यह आदेश किसी सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति पर जारी किया गया है तो उस स्वीकृति का रिकॉर्ड स्थिति स्पष्ट कर सकता है। दूसरी ओर, यदि ऐसी स्वीकृति नहीं थी तो प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र से जुड़ा विवाद और गहरा सकता है। श्रुति भारद्वाज के रिटायरमेंट के बाद खाली हुई कुर्सी आईएएस अधिकारी श्रुति भारद्वाज RCDF की प्रबंध निदेशक थीं और 31 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्त हो गईं। उनकी सेवानिवृत्ति से पहले ही नए पूर्णकालिक एमडी की आवश्यकता को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी। उस समय RCDF सरस ब्रांड के विस्तार और डेयरी नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों पर काम कर रहा था।5 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी बताया गया था कि उनकी सेवानिवृत्ति के चार दिन बाद तक किसी अधिकारी को RCDF के एमडी का चार्ज नहीं दिया गया था। उस समय श्रुति भारद्वाज को ही सेवानिवृत्ति के बाद दोबारा जिम्मेदारी दिए जाने के प्रस्ताव की चर्चा थी, लेकिन आदेश तकनीकी कारणों से लंबित बताया गया था।इसके बाद 13 सितंबर की एक अन्य रिपोर्ट में भी उनकी संभावित पुनर्नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया अंतिम चरण में बताए जाने के बावजूद औपचारिक आदेश लंबित होने की बात सामने आई। रिपोर्ट में सेवानिवृत्त अधिकारी को वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियां दिए जाने से जुड़े तकनीकी पहलुओं को देरी की वजह बताया गया था। एमडी नहीं होने से नीतिगत फैसलों पर असर का दावा RCDF से जुड़े कर्मचारी और डेयरी क्षेत्र के संगठनों ने भी एमडी का पद लंबे समय तक रिक्त रहने पर चिंता जताई है। डेयरी अधिकारी-कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन और अजमेर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ की ओर से राज्य सचिवालय को भेजे गए पत्र का उल्लेख करते हुए प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया कि नियमित एमडी नहीं होने से रूटीन और नीतिगत कामकाज प्रभावित हो रहा है। RCDF केवल एक प्रशासनिक संस्था नहीं बल्कि राजस्थान के सहकारी डेयरी नेटवर्क की शीर्ष संस्था है। इसका काम दूध उत्पादन, खरीद, प्रसंस्करण और सरस ब्रांड के तहत दुग्ध उत्पादों के विपणन से जुड़ा है। इसलिए एमडी के स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय सीधे जिला दुग्ध संघों और डेयरी संचालन से जुड़े हो सकते हैं। निगम चुनाव की आचार संहिता के बीच आदेश पर भी चर्चा 16 सितंबर का आदेश उस समय जारी किया गया जब प्रदेश में नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया और संबंधित आचार संहिता प्रभावी थी। इसी कारण आदेश की टाइमिंग भी चर्चा में है। हालांकि केवल आचार संहिता लागू होने भर से हर विभागीय या नियमित प्रशासनिक आदेश स्वतः प्रतिबंधित नहीं हो जाता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आदेश की प्रकृति क्या थी, क्या वह नियमित प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा था और क्या उसके लिए निर्वाचन संबंधी किसी अनुमति की आवश्यकता थी।इसलिए इस पहलू पर भी अंतिम निष्कर्ष आदेश की प्रकृति और सक्षम अधिकारियों की स्वीकृति देखने के बाद ही निकाला जा सकता है। सवाल—जब MD नहीं तो अंतिम प्रशासनिक अधिकार किसके पास? पूरे घटनाक्रम ने RCDF में नेतृत्व के खालीपन की समस्या को फिर सामने ला दिया है। सामान्य परिस्थितियों में किसी संस्था के प्रमुख के स्तर पर महत्वपूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय निर्णयों के लिए जिम्मेदारी स्पष्ट रहती है। लेकिन लंबे समय तक एमडी का पद खाली रहने पर अलग-अलग वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा काम संभालने की स्थिति बन सकती है।इसी वजह से अब तीन सवाल प्रमुख हैं—16 सितंबर के आदेश को जारी करने की स्वीकृति किस स्तर से मिली, महाप्रबंधक मार्केटिंग को कार्मिक एवं प्रशासन शाखा से जुड़ा आदेश जारी करने की शक्ति किस आदेश या प्रत्यायोजन से मिली और सरकार नियमित अथवा कार्यवाहक एमडी की नियुक्ति कब करेगी। इन सवालों पर RCDF या राज्य सरकार का औपचारिक स्पष्टीकरण सामने आने से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। सरस जैसे बड़े नेटवर्क के लिए पूर्णकालिक नेतृत्व महत्वपूर्ण RCDF राजस्थान के सहकारी डेयरी ढांचे की शीर्ष संस्था है और सरस ब्रांड के संचालन व विस्तार से जुड़ी है। पूर्व एमडी श्रुति भारद्वाज के कार्यकाल के दौरान सरस ब्रांड के विस्तार और डेयरी नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दिया गया था। उनके रिटायरमेंट के समय भी पूर्णकालिक और प्रभावी एमडी की जरूरत को लेकर सार्वजनिक रूप से चर्चा हुई थी।करीब 20 दिन बाद भी एमडी का पद खाली रहने और इसी बीच महत्वपूर्ण शाखाओं के प्रभार में बदलाव जैसे आदेश सामने आने से अब फेडरेशन की प्रशासनिक निरंतरता पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार की ओर से नया एमडी या कार्यवाहक प्रभार तय होने के बाद ही इस असमंजस के खत्म होने की उम्मीद है।
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राजस्थान न्यूज़: कोटा। नगर निगम कोटा के महापौर चुनाव की तस्वीर नामांकन के आखिरी दिन साफ हो गई। भारतीय जनता पार्टी ने लंबे मंथन के बाद वार्ड संख्या 98 से निर्वाचित पार्षद अनुसुईया गोस्वामी को महापौर पद का प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस की ओर से वार्ड संख्या 17 की पार्षद सुनीता सुमन ने नामांकन दाखिल किया है। दोनों दलों की ओर से प्रत्याशी मैदान में आने के बाद अब महापौर पद पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला बन गया है। महापौर का मतदान 25 सितंबर को होगा।भाजपा ने अपने प्रत्याशी के नाम को नामांकन की अंतिम समय-सीमा तक सार्वजनिक नहीं किया था। शनिवार को दोपहर करीब 2:40 बजे भाजपा शहर जिलाध्यक्ष राकेश जैन नगर निगम पहुंचे और इसके बाद अनुसुईया गोस्वामी का नामांकन दाखिल कराया गया। नाम घोषित करने में हुई देरी के सवाल पर राकेश जैन ने कहा कि “सस्पेंस बड़ी चीज है, बना रहना चाहिए।” पार्टी की ओर से प्रत्याशी का नाम सामने आने के तुरंत बाद नामांकन की प्रक्रिया पूरी की गई। आखिरी मिनटों में सामने आया अनुसुईया का नाम भाजपा में महापौर प्रत्याशी को लेकर पिछले कुछ दिनों से कई नाम चर्चा में थे। सीमा चौधरी और प्रतिभा सुमन सहित अन्य महिला पार्षदों के नाम भी दावेदारी में बताए जा रहे थे। अंतिम चरण में अनुसुईया गोस्वामी के नाम पर सहमति बनी और पार्टी ने उन्हें अधिकृत प्रत्याशी बनाया।अनुसुईया गोस्वामी वार्ड संख्या 98 से भाजपा के टिकट पर पार्षद निर्वाचित हुई हैं। वह पहली बार पार्षद बनी हैं, लेकिन भाजपा संगठन में पहले से सक्रिय रही हैं। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार वह भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष रहने के साथ प्रदेश स्तर पर भी संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं।भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश जैन ने कहा कि अनुसुईया गोस्वामी के नाम पर संगठन ने सहमति से फैसला किया है। उन्होंने पार्टी में किसी तरह की फूट से इनकार किया और कहा कि महापौर तथा उपमहापौर चुनाव को लेकर भाजपा पार्षद एकजुट हैं। यह भाजपा नेतृत्व का राजनीतिक दावा है। कांग्रेस ने एक दिन पहले ही तय कर लिया था सुनीता सुमन का नाम दूसरी ओर कांग्रेस ने भाजपा से पहले अपना महापौर प्रत्याशी तय कर लिया था। कांग्रेस ने वार्ड संख्या 17 से निर्वाचित पार्षद सुनीता सुमन को मैदान में उतारा है। उनका नाम शुक्रवार रात ही तय कर लिया गया था और शनिवार को उन्होंने नगर निगम पहुंचकर अपना नामांकन दाखिल किया।नामांकन के दौरान शहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राखी गौतम, कांग्रेस पार्षद और पार्टी के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। रिपोर्टों के अनुसार सुनीता सुमन ने दोपहर करीब एक बजे अपना पर्चा दाखिल किया। राखी गौतम ने कहा कि कांग्रेस चुनाव मैदान में है और अंतिम परिणाम 25 सितंबर के मतदान में तय होगा। उन्होंने भाजपा की ओर से पार्षदों को एक साथ रखे जाने पर भी राजनीतिक टिप्पणी की। उनके बयान को कांग्रेस के पक्ष के रूप में देखा जाना चाहिए।भाजपा के 57, कांग्रेस के 39 पार्षद कोटा नगर निगम में कुल 100 वार्ड हैं। अंतिम परिणामों के अनुसार भाजपा के 57, कांग्रेस के 39 और चार निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए हैं। सामान्य बहुमत का आंकड़ा 51 है, इसलिए भाजपा के पास अपने निर्वाचित पार्षदों के आधार पर सदन में बहुमत है।हालांकि महापौर का औपचारिक निर्वाचन पार्षदों के मतदान से होगा। इसलिए किसी प्रत्याशी को मतदान से पहले निर्वाचित घोषित नहीं किया जा सकता। 25 सितंबर को मतदान और मतगणना के बाद ही आधिकारिक परिणाम सामने आएगा। भाजपा पार्षदों को चित्तौड़गढ़ ले जाने की भी रही चर्चा महापौर प्रत्याशी घोषित होने से पहले भाजपा पार्षदों को एक साथ चित्तौड़गढ़ ले जाया गया था। रिपोर्टों के अनुसार पार्टी में महापौर और उपमहापौर के नामों को लेकर आंतरिक विचार-विमर्श चल रहा था और अलग-अलग क्षेत्रों के पार्षदों को एक साथ रखा गया। वहां कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा, लाडपुरा विधायक कल्पना देवी और भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश जैन भी मौजूद बताए गए।महापौर प्रत्याशी घोषित होने के बाद अब भाजपा के भीतर उपमहापौर पद को लेकर चर्चा जारी है। अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से प्रतिनिधित्व के सवाल पर भी पार्टी के अंदर विचार चल रहा है। अभी उपमहापौर प्रत्याशी का अंतिम नाम सामने आना बाकी है। नामांकन की जांच 21 सितंबर को निर्धारित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार महापौर पद के लिए दाखिल नामांकन पत्रों की जांच 21 सितंबर को होगी। प्रत्याशी 22 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद अंतिम उम्मीदवार सूची स्पष्ट होगी। मतदान 25 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक कराया जाएगा और उसी दिन मतगणना के बाद परिणाम घोषित किया जाएगा।इस तरह कोटा में फिलहाल मुख्य राजनीतिक मुकाबला भाजपा की अनुसुईया गोस्वामी और कांग्रेस की सुनीता सुमन के बीच है। दोनों ही निर्वाचित महिला पार्षद हैं और अब 25 सितंबर को नगर निगम के निर्वाचित पार्षद महापौर का चयन करेंगे।
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राष्ट्रीय न्यूज़: मुंबई। बॉलीवुड के स्टार कपल दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के घर एक बार फिर खुशियों ने दस्तक दी है। दोनों शनिवार, 19 सितंबर 2026 को दूसरी बार माता-पिता बने हैं। दीपिका ने दूसरी बेटी को जन्म दिया है। कपल ने सोशल मीडिया पर एक बेहद प्यारा पोस्ट साझा कर अपने फैंस के साथ यह खुशखबरी शेयर की। दीपिका और रणवीर ने अपने संयुक्त इंस्टाग्राम पोस्ट में नवजात बच्ची के छोटे-छोटे फुटप्रिंट की तस्वीर शेयर की। इसके साथ उन्होंने लिखा—“Welcome baby girl! 19/9/2026. Dua, Deepika and Ranveer.” पोस्ट में नजर से बचाने वाला इमोजी भी लगाया गया है। हालांकि कपल ने फिलहाल अपनी दूसरी बेटी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। दुआ बनी बड़ी बहन दीपिका और रणवीर की पहली बेटी दुआ पादुकोण सिंह का जन्म 8 सितंबर 2024 को हुआ था। अब करीब दो साल बाद परिवार में दूसरी बेटी के आने से दुआ बड़ी बहन बन गई हैं। खास बात यह है कि दोनों बेटियों का जन्म सितंबर महीने में हुआ है। कपल की ओर से दूसरी बेटी के जन्म की घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और फैंस ने दोनों को शुभकामनाएं दीं और नए मेहमान का स्वागत किया। अप्रैल में की थी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा दीपिका और रणवीर ने इसी साल अप्रैल में अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की थी। उस समय उन्होंने एक खास पोस्ट के जरिए फैंस को बताया था कि उनका परिवार एक बार फिर बढ़ने वाला है। अब सितंबर में दूसरी बेटी के जन्म के साथ कपल के घर एक और नन्ही सदस्य आ गई है। शादी के छह साल बाद चार लोगों का हुआ परिवार दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने नवंबर 2018 में इटली में शादी की थी। शादी के करीब छह साल बाद सितंबर 2024 में दोनों पहली बार माता-पिता बने और बेटी दुआ का स्वागत किया। अब दूसरी बेटी के जन्म के बाद उनका परिवार चार सदस्यों का हो गया है। दीपिका और रणवीर अपने पारिवारिक जीवन को काफी निजी रखते हैं और दुआ की तस्वीरें भी सीमित मौकों पर ही साझा की हैं। दूसरी बेटी के जन्म की जानकारी भी उन्होंने बेहद सादगी से फुटप्रिंट वाली पोस्ट के जरिए दी है। राधाष्टमी के दिन आई नन्ही परी इस बार 19 सितंबर को राधाष्टमी का पर्व भी मनाया जा रहा है। ऐसे में दीपिका और रणवीर की दूसरी बेटी का जन्म इसी शुभ अवसर पर हुआ है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर फैंस लगातार कपल को बधाई दे रहे हैं। फिलहाल कपल ने नवजात बच्ची की तस्वीर या नाम साझा नहीं किया है। फैंस अब यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि दीपिका और रणवीर अपनी दूसरी बेटी का क्या नाम रखते हैं।
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राष्ट्रीय न्यूज़: तिरुपति/नई दिल्ली। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के प्रसिद्ध श्रीवारी लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी की कथित मिलावट के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। ED के मुताबिक मंगला को हैदराबाद जोनल कार्यालय ने 17 सितंबर को हिरासत में लिया था और शुक्रवार को जारी बयान में कार्रवाई की जानकारी दी गई। बाद में उन्हें विशाखापत्तनम की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। ED का आरोप है कि TTD को जिस सामग्री की आपूर्ति ‘एगमार्क स्पेशल ग्रेड काउ घी’ बताकर की गई, उसमें वास्तविक गाय के घी के स्थान पर रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल, पामोलिन और कई रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने MG-90, मोनोग्लिसराइड्स, Myvacet Soft 400 और acetic acid ester जैसे पदार्थों का भी उल्लेख किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन सामग्रियों को मिलाकर ऐसा उत्पाद तैयार किया गया जिसे रिकॉर्ड में शुद्ध गाय के घी के रूप में दिखाया गया। ₹230 करोड़ की कथित सप्लाई, ₹96 करोड़ का घी मंगला से जुड़ा ED की जांच के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच TTD को कथित रूप से करीब ₹230 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी सप्लाई किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इसमें लगभग ₹96 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी कैलाश चंद मंगला की इकाई में तैयार किया गया था। इसलिए ₹230 करोड़ की पूरी राशि को अकेले सुकृति फूड्स द्वारा तैयार घी की रकम मानना सही नहीं होगा; ED ने व्यापक कथित सप्लाई नेटवर्क के लिए ₹230 करोड़ और मंगला से जुड़े निर्माण के लिए करीब ₹96 करोड़ का आंकड़ा बताया है। जांच एजेंसी ने मंगला को इस कथित नेटवर्क का सह-साजिशकर्ता बताया है। ED का दावा है कि उन्होंने मिलावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जुटाने, अपने परिसर में कथित मिलावटी घी तैयार करने और इसे अलग-अलग कारोबारी इकाइयों के माध्यम से सप्लाई कराने में भूमिका निभाई। एजेंसी ने Sri Vyshnavi Dairy Specialities, Malganga Milk & Agro Products और A.R. Dairy Foods जैसी इकाइयों के जरिए सप्लाई समन्वय किए जाने का आरोप भी लगाया है।खरीद-बिक्री के फर्जी रिकॉर्ड बनाने का भी आरोप ED के मुताबिक कथित मिलावट को छिपाने के लिए घी और रिफाइंड पाम ऑयल की खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया। एजेंसी का आरोप है कि ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए जिनसे यह दिखाया जा सके कि उत्पादन और सप्लाई वास्तविक गाय के घी की थी, जबकि जांच में दूसरी सामग्री के उपयोग का दावा सामने आया। इन आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच तिरुपति ईस्ट पुलिस की उस FIR से जुड़ी है जिसमें कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार के जरिए TTD को मिलावटी घी सप्लाई करने के आरोप लगाए गए थे। उसी कथित अपराध से पैदा हुई रकम और वित्तीय लेन-देन की जांच ED PMLA के तहत कर रही है।इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी के प्रमोटर की भी गिरफ्तारी कैलाश चंद मंगला इस मामले में गिरफ्तार होने वाले पहले कारोबारी नहीं हैं। ED इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क से जुड़े प्रमोटर एवं निदेशक विपिन जैन को भी इसी जांच में गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी अब कथित सप्लाई चेन, भुगतान, विभिन्न कारोबारी संस्थाओं और घी के निर्माण एवं बिक्री रिकॉर्ड की जांच आगे बढ़ा रही है।‘पशु चर्बी’ के पुराने विवाद से अलग है ED का मौजूदा दावा तिरुपति लड्डू विवाद में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ED के मौजूदा बयान में कथित मिलावट के रूप में पाम आधारित तेल और रासायनिक पदार्थों का उल्लेख किया गया है; एजेंसी ने इस कार्रवाई में पशु चर्बी मिलने का दावा नहीं किया है। इससे पहले CBI द्वारा गठित SIT की जांच में जांचे गए नमूनों में पशु चर्बी की मौजूदगी स्थापित नहीं होने की रिपोर्ट सामने आई थी, हालांकि घी में अन्य प्रकार की मिलावट और खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच अलग विषय रही है।इसलिए मौजूदा ED कार्रवाई को सीधे पुराने “animal fat” आरोप की पुष्टि के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। ताजा कार्रवाई का केंद्र कथित रूप से पाम ऑयल, पामोलिन, पाम कर्नेल ऑयल तथा अन्य पदार्थों का इस्तेमाल कर गाय के घी के नाम पर उत्पाद तैयार करने और उसके वित्तीय लेन-देन पर है। रोज तैयार होते हैं 4 लाख से ज्यादा श्रीवारी लड्डू तिरुपति का श्रीवारी लड्डू दुनिया के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक प्रसादों में शामिल है। TTD की जून 2026 की आधिकारिक जानकारी के अनुसार मंदिर प्रशासन प्रतिदिन 4 लाख से अधिक लड्डू तैयार करता है। मई में औसतन करीब 4.08 लाख लड्डू प्रतिदिन बनाए गए थे। अकेले जून 2026 में रिकॉर्ड 1.26 करोड़ से अधिक लड्डुओं की बिक्री हुई।TTD के मुताबिक लड्डू निर्माण में रोजाना लगभग 16 टन घी सहित करीब 68 टन कच्ची सामग्री इस्तेमाल होती है। इतनी बड़ी मात्रा में प्रसाद तैयार होने के कारण घी की गुणवत्ता और सप्लाई चेन की निगरानी सीधे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और खाद्य गुणवत्ता से जुड़ा विषय है।अब मनी ट्रेल और सप्लाई नेटवर्क की जांच कैलाश चंद मंगला को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद ED की जांच अब कथित मिलावट से पैदा हुई आय, कारोबारी संस्थाओं के बीच हुए भुगतान और सप्लाई नेटवर्क पर केंद्रित है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित मिलावटी उत्पाद किन-किन संस्थाओं के जरिए TTD तक पहुंचा और इससे जुड़े वित्तीय लाभ का प्रवाह किस तरह हुआ। फिलहाल कैलाश चंद मंगला के खिलाफ लगाए गए ये सभी आरोप ED की जांच का हिस्सा हैं। गिरफ्तारी या एजेंसी का आरोप अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है और मामले की अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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