राजस्थान न्यूज़: कोटा/श्रीगंगानगर। राजस्थान के निकाय प्रमुख चुनावों में शुक्रवार को तीन और परिणाम सामने आए। कोटा नगर निगम में भाजपा प्रत्याशी अनुसुइया गोस्वामी मेयर निर्वाचित हुईं। उन्हें कुल 65 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता सुमन को 35 वोट मिले। इस तरह मेयर पद का फैसला 30 मतों के अंतर से हुआ। इसके अलावा श्रीगंगानगर जिले की श्रीविजयनगर नगरपालिका में कांग्रेस के सुशील कुमार मीढ़ा अध्यक्ष निर्वाचित हुए, जबकि कोटा जिले की सुकेत नगरपालिका में भाजपा के जितेंद्र चोपड़ा अध्यक्ष बने। कोटा में शुक्रवार सुबह से मेयर पद के लिए मतदान हुआ था। यहां भाजपा ने वार्ड नंबर 98 की पार्षद अनुसुइया गोस्वामी और कांग्रेस ने वार्ड नंबर 17 की पार्षद सुनीता सुमन को प्रत्याशी बनाया था। चुनाव से पहले 100 सदस्यीय कोटा नगर निगम में भाजपा के 57, कांग्रेस के 39 और चार निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए थे। कोटा में 65-35 रहा अंतिम स्कोर मतगणना पूरी होने के बाद अनुसुइया गोस्वामी को 65 और सुनीता सुमन को 35 मत मिले। चुनाव से पहले भाजपा के अपने 57 पार्षद थे। परिणाम के आंकड़ों के हिसाब से भाजपा प्रत्याशी को पार्टी की निर्वाचित संख्या से आठ वोट अधिक मिले। दूसरी ओर कांग्रेस के 39 पार्षद निर्वाचित हुए थे, जबकि उसकी प्रत्याशी को 35 मत मिले। हालांकि मतदान गुप्त होने के कारण यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता कि अतिरिक्त अथवा कम हुए मत किन पार्षदों के थे। परिणाम से केवल इतना स्पष्ट है कि अंतिम मतदान का आंकड़ा शुरुआती दलगत संख्या से अलग रहा। वार्ड 98 से पार्षद हैं अनुसुइया गोस्वामी भाजपा ने मेयर चुनाव के लिए नामांकन के अंतिम चरण में अनुसुइया गोस्वामी को प्रत्याशी घोषित किया था। वहीं कांग्रेस ने सुनीता सुमन को मैदान में उतारा था। दोनों के बीच सीधा मुकाबला था। कोटा के तीन वार्डों—11, 44 और 87—में ईवीएम से जुड़ी तकनीकी समस्या के कारण पहले चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई थी। पुनर्मतदान और परिणाम के बाद नगर निगम की पूरी 100 सदस्यीय तस्वीर स्पष्ट हुई और महापौर चुनाव 25 सितंबर को कराया गया। श्रीविजयनगर में कांग्रेस के सुशील मीढ़ा बने अध्यक्ष उधर श्रीगंगानगर जिले की श्रीविजयनगर नगरपालिका में कांग्रेस प्रत्याशी सुशील कुमार मीढ़ा अध्यक्ष निर्वाचित हुए। श्रीविजयनगर का चुनाव पहले से ही राजनीतिक और कानूनी विवादों के कारण चर्चा में रहा था।चुनाव से पहले तीन पार्षदों के कथित अपहरण को लेकर विवाद हुआ था। पुलिस ने बाद में पार्षदों को बरामद किया था, जबकि घटना से जुड़े कुछ आरोपों की पुलिस स्तर पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी। सुशील मीढ़ा ने इस चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामले में राजस्थान हाईकोर्ट का भी रुख किया था। हाईकोर्ट ने 21 सितंबर को आदेश देते हुए अध्यक्ष पद के चुनाव परिणाम को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखने को कहा था। सुकेत में भाजपा के जितेंद्र चोपड़ा बने पहले अध्यक्ष कोटा जिले की नवगठित सुकेत नगरपालिका में भाजपा के जितेंद्र चोपड़ा अध्यक्ष निर्वाचित हुए। यह सुकेत नगरपालिका का पहला अध्यक्ष चुनाव था।चुनाव से पहले सार्वजनिक आंकड़ों के अनुसार सुकेत में 25 वार्ड थे। कांग्रेस के 11, भाजपा के 10 और चार निर्दलीय पार्षद बताए गए थे। अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने जितेंद्र चोपड़ा और कांग्रेस ने उमरदीन खान को प्रत्याशी बनाया था। बहुमत के लिए 13 मत जरूरी थे, इसलिए मतदान से पहले निर्दलीय पार्षदों की भूमिका पर खास नजर थी। तीन अलग-अलग निकाय, अलग राजनीतिक नतीजे शुक्रवार के इन परिणामों में कोटा नगर निगम और सुकेत नगरपालिका में भाजपा प्रत्याशी निर्वाचित हुए, जबकि श्रीविजयनगर नगरपालिका अध्यक्ष पद कांग्रेस के खाते में गया। कोटा में मेयर चुनाव के बाद अब 26 सितंबर को डिप्टी मेयर पद का चुनाव निर्धारित है। राज्य निर्वाचन आयोग के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार जयपुर, जोधपुर और कोटा में महापौर चुनाव 25 सितंबर और उपमहापौर चुनाव अगले दिन होना है।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। जयपुर नगर निगम को शुक्रवार को नया महापौर मिल गया। मेयर पद के चुनाव में भाजपा के सुनील कोठारी ने कांग्रेस की सुनीता गुप्ता मावर को 29 मतों से हराया। ताजा घोषित परिणाम के अनुसार कोठारी को 89 वोट मिले, जबकि सुनीता मावर के पक्ष में 60 वोट पड़े। मतदान के बाद हुई मतगणना में कोठारी के पक्ष में बहुमत आने के साथ ही उनके महापौर निर्वाचित होने की घोषणा की गई। जयपुर नगर निगम में कुल 150 निर्वाचित पार्षद हैं। निकाय चुनाव में भाजपा के 78, कांग्रेस के 57 और 15 निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए थे। महापौर बनने के लिए 76 मतों की जरूरत थी। चुनाव से पहले इसी संख्या बल के कारण निर्दलीय पार्षदों की भूमिका पर सबसे ज्यादा नजर थी। महापौर चुनाव का परिणाम प्रत्याशी मत सुनील कोठारी (भाजपा) 89 सुनीता गुप्ता मावर (कांग्रेस) 60 जीत का अंतर 29 नगर निगम में दलीय स्थिति दल पार्षद भाजपा 78 कांग्रेस 57 निर्दलीय 15 कुल 150 बहुमत के लिए जरूरी 76 भाजपा के 78 पार्षद, कोठारी को मिले 89 वोट भाजपा के पास अपने 78 पार्षद थे, जबकि सुनील कोठारी को कुल 89 मत मिले। यानी भाजपा की मूल संख्या से उन्हें 11 वोट ज्यादा प्राप्त हुए। राजनीतिक गणित के आधार पर इसे निर्दलीय समर्थन से जोड़ा जा रहा है।हालांकि महापौर चुनाव का मतदान गुप्त होता है, इसलिए प्रत्येक निर्दलीय या किसी अन्य पार्षद का व्यक्तिगत वोट सार्वजनिक रूप से प्रमाणित नहीं किया जा सकता। परिणाम इतना जरूर दिखाता है कि कोठारी को भाजपा की अपनी निर्वाचित संख्या से 11 अधिक मत मिले। चुनाव से पहले नगर निगम में 15 निर्दलीय पार्षद थे, इसलिए उनके रुख को लेकर दोनों दल सक्रिय थे।कांग्रेस की नगर निगम में निर्वाचित संख्या 57 थी, जबकि सुनीता मावर को 60 मत मिले। यानी उनकी अंतिम मत संख्या भी कांग्रेस की अपनी संख्या से तीन अधिक रही। 89 बनाम 60, जीत का अंतर 29 वोट मतगणना में सुनील कोठारी और सुनीता मावर के बीच 29 वोट का अंतर रहा। दोनों प्रत्याशियों को मिलाकर 149 मत दर्ज हुए हैं। 150 सदस्यीय निगम में शेष एक मत की स्थिति — मतदान नहीं हुआ अथवा मत अमान्य रहा — इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक चुनाव विवरण से स्थिति स्पष्ट होगी।महापौर चुनाव शुक्रवार सुबह 10 बजे शुरू हुआ था। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के तहत मतदान दोपहर 2 बजे तक रखा गया था और इसके बाद तुरंत मतगणना कर परिणाम घोषित किया जाना था। वार्ड 112 से पार्षद हैं सुनील कोठारी सुनील कोठारी हाल में हुए नगर निगम चुनाव में वार्ड संख्या 112 से भाजपा प्रत्याशी के रूप में पार्षद निर्वाचित हुए थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी आशीष शर्मा को करीब 900 मतों के अंतर से हराया था। विभिन्न प्रकाशित परिणामों में जीत का अंतर 905-906 वोट के आसपास दर्ज किया गया है।महापौर चुनाव में कांग्रेस ने वार्ड संख्या 118 से निर्वाचित सुनीता गुप्ता मावर को अपना उम्मीदवार बनाया था। वह लंबे समय से नगर निगम की राजनीति से जुड़ी हैं और चौथी बार पार्षद निर्वाचित हुई हैं। नाम वापसी के बाद मेयर पद पर कोठारी और मावर के बीच सीधा मुकाबला रह गया था। भाजपा संगठन में कई जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं कोठारी सुनील कोठारी भाजपा संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वे पूर्व में भाजपा जयपुर शहर अध्यक्ष, प्रदेश सचिव और प्रदेश उपाध्यक्ष जैसी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं और वर्तमान में प्रदेश कार्यसमिति से भी जुड़े रहे हैं। उनके संगठनात्मक अनुभव को महापौर प्रत्याशी बनाए जाने के दौरान भी प्रमुख कारणों में गिना गया था। भाजपा ने कई दिनों के मंथन के बाद 19 सितंबर को उनके नाम पर मुहर लगाई थी। उसके बाद कोठारी ने नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर अपना नामांकन दाखिल किया था। कांग्रेस की ओर से सुनीता मावर ने भी उसी दिन नामांकन भरा था। निर्दलीयों के समर्थन ने बढ़ाया भाजपा का आंकड़ा नगर निगम चुनाव में भाजपा ने 150 में से 78 वार्ड जीते थे। बहुमत के लिए 76 का आंकड़ा जरूरी होने के कारण पार्टी के पास अपने दम पर बोर्ड बनाने की संख्या पहले से मौजूद थी। कांग्रेस को 57 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिली थीं। महापौर चुनाव में कोठारी का आंकड़ा बढ़कर 89 तक पहुंचने से यह साफ हुआ कि भाजपा प्रत्याशी को अपने निर्वाचित पार्षदों से बाहर भी समर्थन मिला। मतदान से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि गुप्त मतदान के कारण किस पार्षद ने किस उम्मीदवार को वोट दिया, इसे मतगणना से व्यक्तिगत स्तर पर निर्धारित नहीं किया जा सकता। चुनाव के दौरान निगम मुख्यालय के बाहर हुआ था विवाद महापौर चुनाव के दौरान शुक्रवार को नगर निगम मुख्यालय पर राजनीतिक हलचल भी रही। भाजपा के कई पार्षद समूह में बस से मतदान स्थल पहुंचे थे। वहीं कांग्रेस विधायक रफीक खान और अमीन कागजी ने प्रवेश व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि कुछ अनधिकृत लोगों को अंदर प्रवेश दिया गया, जबकि उन्हें रोका गया। प्रशासन का विस्तृत पक्ष उस समय सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया था।इस चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों ने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए राजनीतिक स्तर पर लगातार बैठकें की थीं। मेयर पद के लिए उम्मीदवारों की नाम वापसी पूरी होने के बाद केवल सुनील कोठारी और सुनीता मावर ही मैदान में रह गए थे। शाम 5 बजे पदभार ग्रहण करेंगे सुनील कोठारी नवनिर्वाचित महापौर सुनील कोठारी शुक्रवार शाम करीब 5 बजे जयपुर नगर निगम में पदभार ग्रहण करेंगे। जानकारी के अनुसार पदभार ग्रहण का समय पंडितों से निकलवाए गए मुहूर्त के आधार पर तय किया गया है। इसके बाद वे औपचारिक रूप से नगर निगम में महापौर की जिम्मेदारी संभालेंगे।महापौर चुनाव संपन्न होने के बाद अब नजर उपमहापौर चुनाव पर रहेगी। राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार जयपुर में उपमहापौर पद का निर्वाचन शनिवार, 26 सितंबर को होना है। सुनील कोठारी के पदभार संभालने के साथ ही नवगठित जयपुर नगर निगम में नई राजनीतिक व्यवस्था औपचारिक रूप से काम शुरू करेगी। इसके बाद शहर की सफाई, सीवरेज, सड़क, पार्किंग, अतिक्रमण, शहरी विकास और नगर निगम से संबंधित दूसरे मुद्दे नए बोर्ड के सामने प्रमुख प्रशासनिक विषय रहेंगे।
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राजस्थान न्यूज़: जोधपुर। जोधपुर नगर निगम के महापौर चुनाव का परिणाम घोषित हो गया है। भाजपा प्रत्याशी प्रसन्नचंद मेहता ने 53 वोट हासिल कर मेयर पद का चुनाव जीत लिया, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र सिंह सोलंकी को 47 वोट मिले। 100 सदस्यीय नगर निगम में महापौर बनने के लिए 51 मतों की आवश्यकता थी। इस तरह मेहता ने बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए 6 मतों के अंतर से चुनाव जीता।जोधपुर नगर निगम के हालिया चुनाव में भाजपा के 45, कांग्रेस के 44, 10 निर्दलीय और एक अन्य/RLP पार्षद निर्वाचित हुए थे। किसी भी दल को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला था, इसलिए चुनाव के बाद से ही निर्दलीय पार्षद महापौर पद के राजनीतिक गणित में महत्वपूर्ण बने हुए थे। भाजपा ने चुनाव से पहले कई निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिलने का दावा किया था। सार्वजनिक रिपोर्टों के मुताबिक सात निर्दलीयों के समर्थन से भाजपा ने अपनी समर्थित संख्या 52 बताई थी। महापौर चुनाव का परिणाम प्रत्याशी मत प्रसन्नचंद मेहता (भाजपा) 53 राजेंद्र सिंह सोलंकी (कांग्रेस) 47 जीत का अंतर 6 नगर निगम में दलीय स्थिति दल पार्षद भाजपा 45 कांग्रेस 44 निर्दलीय 10 अन्य / RLP 1 कुल 100 बहुमत के लिए जरूरी 51 53-47 रहा अंतिम परिणाम, सभी 100 वोट पड़े मतगणना में प्रसन्नचंद मेहता को 53 और राजेंद्र सोलंकी को 47 वोट मिले। दोनों प्रत्याशियों के मतों का कुल योग 100 है, यानी उपलब्ध परिणाम के अनुसार निगम के सभी 100 मत मेयर पद के दोनों प्रत्याशियों के खाते में दर्ज हुए।भाजपा के अपने 45 निर्वाचित पार्षद थे। पार्टी ने मतदान से पहले सात निर्दलीयों के समर्थन के आधार पर 52 पार्षदों का समर्थन होने का दावा किया था। अंतिम परिणाम में मेहता को 53 मत मिले। हालांकि मतदान गुप्त था, इसलिए यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि किस व्यक्तिगत पार्षद ने किस प्रत्याशी को वोट दिया या अतिरिक्त वोट किस खेमे से आया।इसी तरह कांग्रेस के अपने 44 पार्षद थे, जबकि उसके प्रत्याशी राजेंद्र सोलंकी को 47 वोट मिले। परिणाम से केवल दलगत मूल संख्या और अंतिम मतों के बीच अंतर स्पष्ट होता है; व्यक्तिगत मतदान की पहचान नहीं की जा सकती। वार्ड 82 से पार्षद हैं प्रसन्नचंद मेहता प्रसन्नचंद मेहता हालिया नगर निगम चुनाव में वार्ड संख्या 82 से भाजपा के पार्षद निर्वाचित हुए थे। उन्होंने अपने वार्ड में 3,270 वोट हासिल कर 486 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी।मेहता भाजपा संगठन में भी लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। उनके महापौर प्रत्याशी बनाए जाने से पहले भी संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालने का उल्लेख सार्वजनिक रिपोर्टों में किया गया था। भाजपा ने पार्टी पार्षदों से रायशुमारी के बाद उन्हें महापौर उम्मीदवार घोषित किया था। कांग्रेस ने उनके मुकाबले पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह सोलंकी को मैदान में उतारा था। सोलंकी ने इस बार पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा था और कांग्रेस ने महापौर चुनाव के लिए उन्हें प्रत्याशी बनाया था। दोनों के नामांकन पर लगाई गई आपत्तियां भी चुनाव से पहले रिटर्निंग अधिकारी ने खारिज कर दी थीं। बसों से निगम पहुंचे भाजपा-कांग्रेस के पार्षद शुक्रवार को मतदान से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों के पार्षद अलग-अलग बसों से नगर निगम मुख्यालय पहुंचे। भाजपा के साथ उसके समर्थक निर्दलीय पार्षद भी मौजूद रहे। मतदान समाप्त होने के बाद दोनों दलों के पार्षद बसों में बैठकर वहां से रवाना हो गए और इसके बाद मतगणना शुरू हुई।राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार महापौर पद के लिए मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक रखा गया था और मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद मतगणना कर उसी दिन परिणाम घोषित किया जाना था। चुनाव से पहले 45 बनाम 44 का था मुकाबला जोधपुर नगर निगम में शुरुआत से ही भाजपा और कांग्रेस के बीच बेहद करीबी संख्या बल था। भाजपा ने 45 वार्ड जीते थे, जबकि कांग्रेस के 44 पार्षद निर्वाचित हुए थे। इसके अलावा 10 निर्दलीय और एक अन्य प्रत्याशी विजयी हुआ था। इस कारण बहुमत के 51 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए दोनों दलों की नजर निर्दलीयों पर थी।चुनाव के बाद सात निर्दलीय पार्षदों के भाजपा को समर्थन देने की खबर सामने आई थी, जिसके बाद पार्टी ने अपने पक्ष में 52 सदस्यों का समर्थन होने का दावा किया। अंतिम मतदान में मेहता को इससे एक मत अधिक यानी 53 वोट मिले। मतपत्र के सीरियल नंबर पर कांग्रेस ने उठाया था सवाल मतदान के दौरान कांग्रेस नेता एवं पार्षद नरेश जोशी ने मतपत्र पर सीरियल नंबर दर्ज किए जाने को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका आरोप था कि इससे मतदान की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है और मतपत्र को किसी पार्षद से जोड़ने की संभावना पैदा हो सकती है।यह कांग्रेस पार्षद की ओर से लगाया गया आरोप है। निर्वाचन अधिकारियों की ओर से इस विशिष्ट आरोप पर विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण उपलब्ध होने पर ही यह स्पष्ट होगा कि सीरियल नंबर की व्यवस्था किस उद्देश्य से थी और मत की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी। निर्दलीय वोटों ने फिर निभाई महत्वपूर्ण भूमिका 100 सदस्यीय सदन में भाजपा और कांग्रेस में केवल एक पार्षद का अंतर होने के कारण निर्दलीय पहले दिन से निर्णायक स्थिति में थे। मेयर चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने समर्थन का दावा किया था।अब घोषित 53-47 के परिणाम ने राजनीतिक तस्वीर साफ कर दी है और भाजपा के प्रसन्नचंद मेहता जोधपुर नगर निगम के महापौर बन गए हैं। हालांकि गुप्त मतदान के कारण कौन से निर्दलीय या अन्य पार्षद किस प्रत्याशी के साथ गए, इसका व्यक्तिगत तौर पर निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। अब उपमहापौर चुनाव पर रहेगी नजर महापौर चुनाव पूरा होने के बाद अब नगर निगम में अगला महत्वपूर्ण चरण उपमहापौर पद का चुनाव होगा। पूर्व निर्धारित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार जयपुर, जोधपुर और कोटा में महापौर चुनाव 25 सितंबर को तथा उपमहापौर पद की प्रक्रिया अगले दिन रखी गई है।प्रसन्नचंद मेहता के महापौर निर्वाचित होने के साथ जोधपुर नगर निगम के नए बोर्ड का नेतृत्व तय हो गया है। अब निगम के भीतर समितियों, उपमहापौर चुनाव और शहर से जुड़े प्रशासनिक मुद्दों पर नए बोर्ड की भूमिका पर नजर रहेगी।
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राष्ट्रीय न्यूज़: मुंबई। बॉलीवुड के स्टार कपल दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के घर एक बार फिर खुशियों ने दस्तक दी है। दोनों शनिवार, 19 सितंबर 2026 को दूसरी बार माता-पिता बने हैं। दीपिका ने दूसरी बेटी को जन्म दिया है। कपल ने सोशल मीडिया पर एक बेहद प्यारा पोस्ट साझा कर अपने फैंस के साथ यह खुशखबरी शेयर की। दीपिका और रणवीर ने अपने संयुक्त इंस्टाग्राम पोस्ट में नवजात बच्ची के छोटे-छोटे फुटप्रिंट की तस्वीर शेयर की। इसके साथ उन्होंने लिखा—“Welcome baby girl! 19/9/2026. Dua, Deepika and Ranveer.” पोस्ट में नजर से बचाने वाला इमोजी भी लगाया गया है। हालांकि कपल ने फिलहाल अपनी दूसरी बेटी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। दुआ बनी बड़ी बहन दीपिका और रणवीर की पहली बेटी दुआ पादुकोण सिंह का जन्म 8 सितंबर 2024 को हुआ था। अब करीब दो साल बाद परिवार में दूसरी बेटी के आने से दुआ बड़ी बहन बन गई हैं। खास बात यह है कि दोनों बेटियों का जन्म सितंबर महीने में हुआ है। कपल की ओर से दूसरी बेटी के जन्म की घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और फैंस ने दोनों को शुभकामनाएं दीं और नए मेहमान का स्वागत किया। अप्रैल में की थी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा दीपिका और रणवीर ने इसी साल अप्रैल में अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की थी। उस समय उन्होंने एक खास पोस्ट के जरिए फैंस को बताया था कि उनका परिवार एक बार फिर बढ़ने वाला है। अब सितंबर में दूसरी बेटी के जन्म के साथ कपल के घर एक और नन्ही सदस्य आ गई है। शादी के छह साल बाद चार लोगों का हुआ परिवार दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने नवंबर 2018 में इटली में शादी की थी। शादी के करीब छह साल बाद सितंबर 2024 में दोनों पहली बार माता-पिता बने और बेटी दुआ का स्वागत किया। अब दूसरी बेटी के जन्म के बाद उनका परिवार चार सदस्यों का हो गया है। दीपिका और रणवीर अपने पारिवारिक जीवन को काफी निजी रखते हैं और दुआ की तस्वीरें भी सीमित मौकों पर ही साझा की हैं। दूसरी बेटी के जन्म की जानकारी भी उन्होंने बेहद सादगी से फुटप्रिंट वाली पोस्ट के जरिए दी है। राधाष्टमी के दिन आई नन्ही परी इस बार 19 सितंबर को राधाष्टमी का पर्व भी मनाया जा रहा है। ऐसे में दीपिका और रणवीर की दूसरी बेटी का जन्म इसी शुभ अवसर पर हुआ है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर फैंस लगातार कपल को बधाई दे रहे हैं। फिलहाल कपल ने नवजात बच्ची की तस्वीर या नाम साझा नहीं किया है। फैंस अब यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि दीपिका और रणवीर अपनी दूसरी बेटी का क्या नाम रखते हैं।
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राष्ट्रीय न्यूज़: तिरुपति/नई दिल्ली। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के प्रसिद्ध श्रीवारी लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी की कथित मिलावट के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। ED के मुताबिक मंगला को हैदराबाद जोनल कार्यालय ने 17 सितंबर को हिरासत में लिया था और शुक्रवार को जारी बयान में कार्रवाई की जानकारी दी गई। बाद में उन्हें विशाखापत्तनम की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। ED का आरोप है कि TTD को जिस सामग्री की आपूर्ति ‘एगमार्क स्पेशल ग्रेड काउ घी’ बताकर की गई, उसमें वास्तविक गाय के घी के स्थान पर रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल, पामोलिन और कई रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने MG-90, मोनोग्लिसराइड्स, Myvacet Soft 400 और acetic acid ester जैसे पदार्थों का भी उल्लेख किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन सामग्रियों को मिलाकर ऐसा उत्पाद तैयार किया गया जिसे रिकॉर्ड में शुद्ध गाय के घी के रूप में दिखाया गया। ₹230 करोड़ की कथित सप्लाई, ₹96 करोड़ का घी मंगला से जुड़ा ED की जांच के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच TTD को कथित रूप से करीब ₹230 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी सप्लाई किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इसमें लगभग ₹96 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी कैलाश चंद मंगला की इकाई में तैयार किया गया था। इसलिए ₹230 करोड़ की पूरी राशि को अकेले सुकृति फूड्स द्वारा तैयार घी की रकम मानना सही नहीं होगा; ED ने व्यापक कथित सप्लाई नेटवर्क के लिए ₹230 करोड़ और मंगला से जुड़े निर्माण के लिए करीब ₹96 करोड़ का आंकड़ा बताया है। जांच एजेंसी ने मंगला को इस कथित नेटवर्क का सह-साजिशकर्ता बताया है। ED का दावा है कि उन्होंने मिलावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जुटाने, अपने परिसर में कथित मिलावटी घी तैयार करने और इसे अलग-अलग कारोबारी इकाइयों के माध्यम से सप्लाई कराने में भूमिका निभाई। एजेंसी ने Sri Vyshnavi Dairy Specialities, Malganga Milk & Agro Products और A.R. Dairy Foods जैसी इकाइयों के जरिए सप्लाई समन्वय किए जाने का आरोप भी लगाया है।खरीद-बिक्री के फर्जी रिकॉर्ड बनाने का भी आरोप ED के मुताबिक कथित मिलावट को छिपाने के लिए घी और रिफाइंड पाम ऑयल की खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया। एजेंसी का आरोप है कि ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए जिनसे यह दिखाया जा सके कि उत्पादन और सप्लाई वास्तविक गाय के घी की थी, जबकि जांच में दूसरी सामग्री के उपयोग का दावा सामने आया। इन आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच तिरुपति ईस्ट पुलिस की उस FIR से जुड़ी है जिसमें कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार के जरिए TTD को मिलावटी घी सप्लाई करने के आरोप लगाए गए थे। उसी कथित अपराध से पैदा हुई रकम और वित्तीय लेन-देन की जांच ED PMLA के तहत कर रही है।इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी के प्रमोटर की भी गिरफ्तारी कैलाश चंद मंगला इस मामले में गिरफ्तार होने वाले पहले कारोबारी नहीं हैं। ED इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क से जुड़े प्रमोटर एवं निदेशक विपिन जैन को भी इसी जांच में गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी अब कथित सप्लाई चेन, भुगतान, विभिन्न कारोबारी संस्थाओं और घी के निर्माण एवं बिक्री रिकॉर्ड की जांच आगे बढ़ा रही है।‘पशु चर्बी’ के पुराने विवाद से अलग है ED का मौजूदा दावा तिरुपति लड्डू विवाद में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ED के मौजूदा बयान में कथित मिलावट के रूप में पाम आधारित तेल और रासायनिक पदार्थों का उल्लेख किया गया है; एजेंसी ने इस कार्रवाई में पशु चर्बी मिलने का दावा नहीं किया है। इससे पहले CBI द्वारा गठित SIT की जांच में जांचे गए नमूनों में पशु चर्बी की मौजूदगी स्थापित नहीं होने की रिपोर्ट सामने आई थी, हालांकि घी में अन्य प्रकार की मिलावट और खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच अलग विषय रही है।इसलिए मौजूदा ED कार्रवाई को सीधे पुराने “animal fat” आरोप की पुष्टि के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। ताजा कार्रवाई का केंद्र कथित रूप से पाम ऑयल, पामोलिन, पाम कर्नेल ऑयल तथा अन्य पदार्थों का इस्तेमाल कर गाय के घी के नाम पर उत्पाद तैयार करने और उसके वित्तीय लेन-देन पर है। रोज तैयार होते हैं 4 लाख से ज्यादा श्रीवारी लड्डू तिरुपति का श्रीवारी लड्डू दुनिया के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक प्रसादों में शामिल है। TTD की जून 2026 की आधिकारिक जानकारी के अनुसार मंदिर प्रशासन प्रतिदिन 4 लाख से अधिक लड्डू तैयार करता है। मई में औसतन करीब 4.08 लाख लड्डू प्रतिदिन बनाए गए थे। अकेले जून 2026 में रिकॉर्ड 1.26 करोड़ से अधिक लड्डुओं की बिक्री हुई।TTD के मुताबिक लड्डू निर्माण में रोजाना लगभग 16 टन घी सहित करीब 68 टन कच्ची सामग्री इस्तेमाल होती है। इतनी बड़ी मात्रा में प्रसाद तैयार होने के कारण घी की गुणवत्ता और सप्लाई चेन की निगरानी सीधे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और खाद्य गुणवत्ता से जुड़ा विषय है।अब मनी ट्रेल और सप्लाई नेटवर्क की जांच कैलाश चंद मंगला को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद ED की जांच अब कथित मिलावट से पैदा हुई आय, कारोबारी संस्थाओं के बीच हुए भुगतान और सप्लाई नेटवर्क पर केंद्रित है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित मिलावटी उत्पाद किन-किन संस्थाओं के जरिए TTD तक पहुंचा और इससे जुड़े वित्तीय लाभ का प्रवाह किस तरह हुआ। फिलहाल कैलाश चंद मंगला के खिलाफ लगाए गए ये सभी आरोप ED की जांच का हिस्सा हैं। गिरफ्तारी या एजेंसी का आरोप अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है और मामले की अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
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गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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