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June 15, 2022
14 जून का दिन विश्व रक्तदाता दिवस के नाम से जाना जाता है. बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने इस दिन को रक्तदाता दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। साल 2004 में इस दिन की स्थापना इसलिए की गई थी। जिससे लोगों को रक्तदान के लिए प्रोत्साहित करना और रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। ऐसे में लोगों को रक्तदान के बारे में मोटिवेट किया जा सके। ब्लड मोटिवेशनल स्पीकर एन. एस. नेगी जो स्वयं 40 बार स्वेच्छिक रक्तदान कर चुके कई नेशनल ओर इंटरनेशनल अवार्ड से जिनको नवाजा गया। ब्लड मोटिवेशनल स्पीकर नेगी ने कहा कि रक्तदान करने के बाद शरीर मे नए रक्त का निर्माण होता है। जिससे स्वास्थ्य को नई ऊर्जा प्रदान होती है। नेगी ने देश के सभी युवाओ को रक्तदान के क्षेत्र में समाजसेवा हेतु कार्य करने के 6 चरण बताये।
प्रथम चरण- समाजसेवा यदि रक्तदान में आपको करनी है तो सबसे पहले आपको डोनर बनने के लिए विचार करना पड़ेगा।
दूसरा चरण- जो लोग स्वेच्छा से रक्तदान कर रहे है उन्हें देखकर मोटीवेट होकर विचार बनाकर आपको ब्लड डोनर बनना पड़ेगा ।
तीसरा चरण- नियमित स्वेच्छिक रक्तदान के बाद आपको वॉलेंटियर बनना पड़ेगा ।
वॉलेंटियर्स का कार्य शिविर में रक्तदाताओं के आने से लेकर जाने तक की गतिविधि जैसे फार्म भरवाने में मदद, पानी पिलाने, काफी व रिफ्रेशमेंट करवाने से लेकर प्रशस्ति पत्र व रक्तदाताओ की हर एक छोटी बड़ी जरूरत को पूरा करना है।
चौथा चरण- एक स्वेच्छिक रक्तदान शिविर में 5-10 वॉलेंटियर्स को जो हैंडल कर सके
हम कॉर्डिनेटर कह सकते है। रक्तदान नियमावली के बारे में जो जानते है, जो रक्त की जरूरत पड़ने पर रक्तदान शिविर में रक्तदान दाताओ को जरूरत पड़ने पर रक्त दिलवा सके।
पांचवे चरण-किसी भी रक्तदान शिविर को पूर्ण रूप से मैनेज करने के लिए या ये कहे कि कार्यक्रम के संयोजक की भूमिका अदा ओर जिन्हें लगभग 2-3 साल का कोर्डिनेटर का अनुभव ओर बहुत से कॉर्डिनेटरो पर जो कमांड बनाये रखे उन्हें प्रोग्रामर कहा जा सकता है, जो ब्लड बैंक से जुड़े हुए रहते है ।
छठा चरण-प्रोग्रामर भी अपने क्षेत्र में ही कार्यक्रम करवा सकते है परंतु यदि कार्यक्रम या ये कहे कि बहुत से रक्तदान शिविर आपने करवाये है उनसे प्राप्त अनुभव आपको मोटिवेटर की श्रेणी में ले जाते है और आप कही भी, किसी भी क्षेत्र में मोटिवेट करके कोई भी कार्यक्रम करवा सकते है , उन्हें हम मोटिवेशनल स्पीकर भी कह सकते है और यदि जब बात ब्लड की आये तो हम उन्हें ब्लड मोटीवेशनल स्पीकर भी कह सकते है ।
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