राजस्थान न्यूज़: सीकर। खाटूश्यामजी नगर पालिका में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का चुनाव सोमवार को दिनभर चले सियासी घटनाक्रम के बाद देर रात विवाद में फंस गया। वार्ड नंबर 10 से कांग्रेस पार्षद लक्ष्मी देवी के मतदान के लिए नहीं पहुंचने के कारण चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। निर्वाचन अधिकारियों ने उनके मतदान के लिए समय बार-बार बढ़ाया, लेकिन देर रात तक उनके नहीं पहुंचने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद की चुनाव प्रक्रिया आगामी आदेश तक स्थगित कर दी गई। दिन में शुरू हुआ विवाद रात करीब एक बजे तक चलता रहा। लक्ष्मी देवी के मतदान केंद्र नहीं पहुंचने के बाद पहले निर्धारित मतदान अवधि बढ़ाई गई। इसके बाद अलग-अलग समय पर चार बार अवधि बढ़ाते हुए रात करीब 11:30 बजे तक उन्हें मतदान का अवसर दिए जाने की बात सामने आई। जब वे तब भी मतदान के लिए नहीं पहुंचीं तो देर रात मतपत्र और चुनाव से संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। करीब एक बजे रिटर्निंग अधिकारी ने चुनाव स्थगित किए जाने की जानकारी दी। भाजपा-कांग्रेस 8-8 पर, इसलिए एक-एक वोट अहम खाटूश्यामजी नगर पालिका में कुल 20 पार्षद हैं। वार्ड चुनाव के नतीजों में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने 8-8 सीटें जीती हैं, जबकि तीन निर्दलीय और एक आरएलपी पार्षद निर्वाचित हुआ है। अध्यक्ष बनने के लिए 11 मतों की जरूरत है। इसी बराबरी के कारण हर पार्षद का वोट निर्णायक माना जा रहा है।वार्ड नंबर 10 से लक्ष्मी देवी कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुई थीं। अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस ने विनीता पूनिया और भाजपा ने प्रेम देवी को प्रत्याशी बनाया है। उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड के मुताबिक लक्ष्मी देवी के मतदान नहीं करने से दोनों पक्षों के बीच मुकाबले की स्थिति और पेचीदा हो गई। पार्षद को लेकर दोनों दलों के अलग-अलग आरोप लक्ष्मी देवी के मतदान के लिए नहीं पहुंचने के बाद उनके परिजनों की ओर से उनके लापता होने और कथित अपहरण की आशंका जताई गई। पुलिस को भी मामले की रिपोर्ट दी गई। इसके बाद भाजपा नेता और समर्थक नगर पालिका परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जानबूझकर अपनी ही पार्षद को मतदान से दूर रखा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामला पुलिस व चुनाव अधिकारियों के स्तर पर जांच का विषय है।दूसरी ओर कांग्रेस ने मतदान का समय बार-बार बढ़ाए जाने पर सवाल उठाए। विधायक वीरेंद्र सिंह, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनीता गिठाला और पूर्व प्रधान भंवरलाल वर्मा सहित कांग्रेस नेताओं ने जिला कलेक्टर को शिकायत देकर मतदान की अवधि लगातार बढ़ाने पर आपत्ति दर्ज कराई। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि चुनाव प्रक्रिया निर्धारित नियमों और समयसीमा के अनुसार पूरी की जानी चाहिए। देर रात आयोग के निर्देश पर चुनाव स्थगित लगातार चले विवाद के बीच रिटर्निंग अधिकारी कपिल उपाध्याय ने देर रात बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर खाटूश्यामजी नगर पालिका के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद की चुनाव प्रक्रिया आगामी आदेश तक स्थगित कर दी गई है। इसके बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों पक्षों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।अब तक हुए मतदान से संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया की जा रही है। दोनों राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों की मौजूदगी में मतदान रिकॉर्ड को सील कर खाटू थाने में सुरक्षित रखवाने की तैयारी है, ताकि आगे निर्वाचन आयोग के निर्देश मिलने पर प्रक्रिया वहीं से आगे बढ़ाई जा सके और रिकॉर्ड को लेकर कोई विवाद न हो।दोनों पक्षों ने जिला निर्वाचन अधिकारी को अपनी-अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन भी सौंपे हैं। भाजपा नेताओं की ओर से मुख्यमंत्री और राज्य निर्वाचन अधिकारियों को भी घटनाक्रम की जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है। कांग्रेस कोर्ट जाने की तैयारी में चुनाव स्थगित होने के बाद कांग्रेस की ओर से कानूनी विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मतदान हो चुका है तो चुनाव प्रक्रिया और उसके रिकॉर्ड के संबंध में नियमानुसार फैसला होना चाहिए। पार्टी परिणाम घोषित कराने अथवा चुनाव प्रक्रिया को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है। अंतिम निर्णय निर्वाचन आयोग के आगामी आदेश और किसी संभावित न्यायिक कार्यवाही पर निर्भर करेगा।खाटूश्यामजी में 20 वार्डों के चुनाव परिणाम आने के बाद से ही अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा था। भाजपा और कांग्रेस के 8-8 पार्षद होने के कारण तीन निर्दलीय और एक आरएलपी पार्षद की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। अब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव कब और किस प्रक्रिया से पूरा होगा, यह राज्य निर्वाचन आयोग के अगले आदेश के बाद स्पष्ट होगा।
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राजस्थान न्यूज़: जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनावों के बाद कांग्रेस ने आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। AICC के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने 21 सितंबर को जयपुर स्थित पीसीसी वॉर रूम में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में हालिया शहरी निकाय चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा के साथ आगामी पंचायतीराज चुनावों की तैयारियों और संगठन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। बैठक में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी सहित पार्टी के विधायक और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट भी के.सी. वेणुगोपाल को AICC का महासचिव (संगठन) बताती है, जबकि गोविंद सिंह डोटासरा वर्तमान राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं। बैठक में नगर निकाय चुनावों के परिणामों का क्षेत्रवार आकलन किया गया। पार्टी नेताओं ने अलग-अलग जिलों से प्राप्त फीडबैक और स्थानीय संगठन के कामकाज पर चर्चा की। इसके साथ ही उन क्षेत्रों पर भी मंथन हुआ जहां संगठन को आगामी चुनावों से पहले और मजबूत करने की जरूरत बताई गई। पंचायतीराज चुनाव की तैयारियों पर फोकस बैठक का एक प्रमुख विषय आगामी पंचायतीराज चुनाव रहा। संगठन को जिला, ब्लॉक और जमीनी स्तर तक सक्रिय करने, स्थानीय कार्यकर्ताओं से समन्वय बढ़ाने और चुनावी तैयारियों को समय रहते पूरा करने पर चर्चा की गई। वेणुगोपाल ने प्रदेश नेतृत्व के साथ चुनावी प्रदर्शन और संगठनात्मक तैयारियों की समीक्षा की।हालिया निकाय चुनावों को लेकर कांग्रेस नेताओं की ओर से पुलिस और प्रशासन के कथित दुरुपयोग के आरोप भी लगाए गए हैं। इन मुद्दों पर भी प्रदेश नेतृत्व ने अपनी बात केंद्रीय संगठन के सामने रखी।
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राजस्थान न्यूज़: सीकर। खाटूश्यामजी नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव में सोमवार से चल रहे सियासी घटनाक्रम में मंगलवार को नया मोड़ आ गया। मतदान के दौरान लापता हुई वार्ड-10 की कांग्रेस पार्षद लक्ष्मी देवी को पुलिस ने दस्तयाब कर लिया है। हालांकि उनके सामने आने के बावजूद अध्यक्ष पद के चुनाव की तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है। अब यह राज्य निर्वाचन आयोग को तय करना है कि लक्ष्मी को मतदान का अवसर दिया जाएगा या पहले हो चुके मतदान के आधार पर चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। खाटूश्यामजी में सोमवार को लक्ष्मी देवी के मतदान के लिए नहीं पहुंचने के बाद देर रात तक विवाद चलता रहा था। निर्वाचन अधिकारियों ने उन्हें मतदान का अवसर देने के लिए समय कई बार बढ़ाया, लेकिन उनके नहीं पहुंचने पर राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद की चुनाव प्रक्रिया आगामी आदेश तक स्थगित कर दी गई थी। मतदान से जुड़े रिकॉर्ड को भी सुरक्षित कर दिया गया। पति ने दी अपहरण की रिपोर्ट, कांग्रेस नेता पर लगाया आरोप मामले ने उस समय गंभीर मोड़ लिया जब लक्ष्मी देवी के पति हरलाल ने पुलिस अधिकारी राजेश जांगिड़ को लिखित शिकायत दी। शिकायत में उन्होंने कांग्रेस नेता श्याम सुंदर पूनिया पर अपनी पत्नी के अपहरण का आरोप लगाया। यह शिकायत और उसमें लगाए गए आरोप पुलिस जांच का विषय हैं और अभी इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।शिकायत की जानकारी सामने आने के बाद मौके पर राजनीतिक तनाव बढ़ गया था। भाजपा और कांग्रेस समर्थक आमने-सामने आ गए और दोनों पक्षों की ओर से नारेबाजी की गई। पहले से ही तनावपूर्ण चुनावी माहौल को देखते हुए मौके पर पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस ने अब लक्ष्मी देवी को दस्तयाब कर लिया है। हालांकि मंगलवार दोपहर तक पुलिस की ओर से सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि लक्ष्मी कहां मिलीं, वह वहां किस परिस्थिति में पहुंचीं और उनके लापता रहने के पीछे क्या कारण था। रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस उन्हें अदालत के समक्ष पेश करने की तैयारी कर रही है। भाजपा की मांग- लक्ष्मी को वोट डालने दिया जाए भाजपा नेताओं की ओर से लगातार मांग की जा रही है कि लक्ष्मी देवी को अध्यक्ष पद के चुनाव में मतदान करने का अवसर दिया जाए। भाजपा का कहना है कि निर्वाचित पार्षद के मतदान के अधिकार को प्रभावित नहीं होना चाहिए। सोमवार को लक्ष्मी के पति भी भाजपा नेताओं के साथ धरने पर बैठे थे। लक्ष्मी देवी और भाजपा की अध्यक्ष पद की प्रत्याशी के बीच रिश्तेदारी होने की जानकारी भी सामने आई है। इसी वजह से लक्ष्मी के वोट को लेकर दोनों राजनीतिक खेमों की निगाह बनी हुई है। हालांकि वह किस प्रत्याशी को वोट देंगी, इसे लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। कांग्रेस चाहती है पड़े हुए वोटों से घोषित हो परिणाम दूसरी तरफ कांग्रेस की मांग है कि सोमवार को जो मतदान हो चुका है, उसके आधार पर अध्यक्ष पद का परिणाम घोषित किया जाए। कांग्रेस नेताओं की ओर से इस मामले में कानूनी विकल्प अपनाने और अदालत जाने की तैयारी की बात भी कही गई है।कांग्रेस ने मतदान का समय बार-बार बढ़ाए जाने पर भी आपत्ति जताई थी। पार्टी नेताओं का कहना था कि चुनाव प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की जानी चाहिए। भाजपा का पक्ष इससे अलग है और वह लक्ष्मी को मतदान का अवसर देने की मांग कर रही है। ऐसे में अब दोनों पक्षों की मांगों पर अंतिम प्रशासनिक फैसला निर्वाचन आयोग के स्तर पर होना है। 20 सदस्यीय पालिका में बेहद करीबी संख्या-गणित खाटूश्यामजी नगर पालिका में कुल 20 पार्षद हैं। इनमें भाजपा और कांग्रेस के 8-8 पार्षद, तीन निर्दलीय और एक आरएलपी पार्षद निर्वाचित हुआ है। इसी करीबी संख्या-गणित के कारण एक-एक वोट का महत्व बढ़ गया है।वार्ड नंबर 10 से लक्ष्मी देवी कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित हुई थीं। उपलब्ध चुनाव परिणाम के अनुसार उन्होंने 172 वोट लेकर अपना वार्ड 37 मतों से जीता था। अब निर्वाचन आयोग के अगले आदेश पर नजर लक्ष्मी देवी के मिलने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल चुनाव प्रक्रिया को लेकर है। आयोग को यह तय करना होगा कि स्थगित प्रक्रिया में उन्हें मतदान का मौका दिया जाए, मतदान फिर से कराया जाए या पहले से डाले गए मतों पर आगे की कार्रवाई की जाए। मंगलवार दोपहर तक इस संबंध में आयोग का अंतिम आदेश सामने नहीं आया था।इसलिए खाटूश्यामजी नगर पालिका में अध्यक्ष कौन बनेगा, इसकी तस्वीर फिलहाल साफ नहीं हुई है। पुलिस जांच जहां लक्ष्मी के लापता होने और अपहरण के आरोपों पर आगे बढ़ रही है, वहीं चुनाव का अगला कदम राज्य निर्वाचन आयोग के आदेश पर निर्भर करेगा।
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अजमेर न्यूज़: 1100 वर्ष पूर्व स्थापित मंदिर की बड़ी है मान्यता, दूर दराज से पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
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अजमेर न्यूज़: 1968 से कस्बे की धार्मिक संस्था श्री ब्रह्म पुष्कर सेवा संघ कर रही है इस अनूठी परंपरा का निर्वहन
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अजमेर न्यूज़: 10 टीमें 8 - 8 वार्डो में जाकर घूम रही गायों का करेंगीं प्राथमिक उपचार
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राष्ट्रीय न्यूज़: मुंबई। बॉलीवुड के स्टार कपल दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के घर एक बार फिर खुशियों ने दस्तक दी है। दोनों शनिवार, 19 सितंबर 2026 को दूसरी बार माता-पिता बने हैं। दीपिका ने दूसरी बेटी को जन्म दिया है। कपल ने सोशल मीडिया पर एक बेहद प्यारा पोस्ट साझा कर अपने फैंस के साथ यह खुशखबरी शेयर की। दीपिका और रणवीर ने अपने संयुक्त इंस्टाग्राम पोस्ट में नवजात बच्ची के छोटे-छोटे फुटप्रिंट की तस्वीर शेयर की। इसके साथ उन्होंने लिखा—“Welcome baby girl! 19/9/2026. Dua, Deepika and Ranveer.” पोस्ट में नजर से बचाने वाला इमोजी भी लगाया गया है। हालांकि कपल ने फिलहाल अपनी दूसरी बेटी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। दुआ बनी बड़ी बहन दीपिका और रणवीर की पहली बेटी दुआ पादुकोण सिंह का जन्म 8 सितंबर 2024 को हुआ था। अब करीब दो साल बाद परिवार में दूसरी बेटी के आने से दुआ बड़ी बहन बन गई हैं। खास बात यह है कि दोनों बेटियों का जन्म सितंबर महीने में हुआ है। कपल की ओर से दूसरी बेटी के जन्म की घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और फैंस ने दोनों को शुभकामनाएं दीं और नए मेहमान का स्वागत किया। अप्रैल में की थी दूसरी प्रेग्नेंसी की घोषणा दीपिका और रणवीर ने इसी साल अप्रैल में अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की थी। उस समय उन्होंने एक खास पोस्ट के जरिए फैंस को बताया था कि उनका परिवार एक बार फिर बढ़ने वाला है। अब सितंबर में दूसरी बेटी के जन्म के साथ कपल के घर एक और नन्ही सदस्य आ गई है। शादी के छह साल बाद चार लोगों का हुआ परिवार दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने नवंबर 2018 में इटली में शादी की थी। शादी के करीब छह साल बाद सितंबर 2024 में दोनों पहली बार माता-पिता बने और बेटी दुआ का स्वागत किया। अब दूसरी बेटी के जन्म के बाद उनका परिवार चार सदस्यों का हो गया है। दीपिका और रणवीर अपने पारिवारिक जीवन को काफी निजी रखते हैं और दुआ की तस्वीरें भी सीमित मौकों पर ही साझा की हैं। दूसरी बेटी के जन्म की जानकारी भी उन्होंने बेहद सादगी से फुटप्रिंट वाली पोस्ट के जरिए दी है। राधाष्टमी के दिन आई नन्ही परी इस बार 19 सितंबर को राधाष्टमी का पर्व भी मनाया जा रहा है। ऐसे में दीपिका और रणवीर की दूसरी बेटी का जन्म इसी शुभ अवसर पर हुआ है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर फैंस लगातार कपल को बधाई दे रहे हैं। फिलहाल कपल ने नवजात बच्ची की तस्वीर या नाम साझा नहीं किया है। फैंस अब यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि दीपिका और रणवीर अपनी दूसरी बेटी का क्या नाम रखते हैं।
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राष्ट्रीय न्यूज़: तिरुपति/नई दिल्ली। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के प्रसिद्ध श्रीवारी लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी की कथित मिलावट के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। ED के मुताबिक मंगला को हैदराबाद जोनल कार्यालय ने 17 सितंबर को हिरासत में लिया था और शुक्रवार को जारी बयान में कार्रवाई की जानकारी दी गई। बाद में उन्हें विशाखापत्तनम की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। ED का आरोप है कि TTD को जिस सामग्री की आपूर्ति ‘एगमार्क स्पेशल ग्रेड काउ घी’ बताकर की गई, उसमें वास्तविक गाय के घी के स्थान पर रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल, पामोलिन और कई रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने MG-90, मोनोग्लिसराइड्स, Myvacet Soft 400 और acetic acid ester जैसे पदार्थों का भी उल्लेख किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन सामग्रियों को मिलाकर ऐसा उत्पाद तैयार किया गया जिसे रिकॉर्ड में शुद्ध गाय के घी के रूप में दिखाया गया। ₹230 करोड़ की कथित सप्लाई, ₹96 करोड़ का घी मंगला से जुड़ा ED की जांच के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच TTD को कथित रूप से करीब ₹230 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी सप्लाई किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इसमें लगभग ₹96 करोड़ मूल्य का मिलावटी घी कैलाश चंद मंगला की इकाई में तैयार किया गया था। इसलिए ₹230 करोड़ की पूरी राशि को अकेले सुकृति फूड्स द्वारा तैयार घी की रकम मानना सही नहीं होगा; ED ने व्यापक कथित सप्लाई नेटवर्क के लिए ₹230 करोड़ और मंगला से जुड़े निर्माण के लिए करीब ₹96 करोड़ का आंकड़ा बताया है। जांच एजेंसी ने मंगला को इस कथित नेटवर्क का सह-साजिशकर्ता बताया है। ED का दावा है कि उन्होंने मिलावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जुटाने, अपने परिसर में कथित मिलावटी घी तैयार करने और इसे अलग-अलग कारोबारी इकाइयों के माध्यम से सप्लाई कराने में भूमिका निभाई। एजेंसी ने Sri Vyshnavi Dairy Specialities, Malganga Milk & Agro Products और A.R. Dairy Foods जैसी इकाइयों के जरिए सप्लाई समन्वय किए जाने का आरोप भी लगाया है।खरीद-बिक्री के फर्जी रिकॉर्ड बनाने का भी आरोप ED के मुताबिक कथित मिलावट को छिपाने के लिए घी और रिफाइंड पाम ऑयल की खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया। एजेंसी का आरोप है कि ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए जिनसे यह दिखाया जा सके कि उत्पादन और सप्लाई वास्तविक गाय के घी की थी, जबकि जांच में दूसरी सामग्री के उपयोग का दावा सामने आया। इन आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच तिरुपति ईस्ट पुलिस की उस FIR से जुड़ी है जिसमें कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार के जरिए TTD को मिलावटी घी सप्लाई करने के आरोप लगाए गए थे। उसी कथित अपराध से पैदा हुई रकम और वित्तीय लेन-देन की जांच ED PMLA के तहत कर रही है।इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी के प्रमोटर की भी गिरफ्तारी कैलाश चंद मंगला इस मामले में गिरफ्तार होने वाले पहले कारोबारी नहीं हैं। ED इससे पहले भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क से जुड़े प्रमोटर एवं निदेशक विपिन जैन को भी इसी जांच में गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी अब कथित सप्लाई चेन, भुगतान, विभिन्न कारोबारी संस्थाओं और घी के निर्माण एवं बिक्री रिकॉर्ड की जांच आगे बढ़ा रही है।‘पशु चर्बी’ के पुराने विवाद से अलग है ED का मौजूदा दावा तिरुपति लड्डू विवाद में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ED के मौजूदा बयान में कथित मिलावट के रूप में पाम आधारित तेल और रासायनिक पदार्थों का उल्लेख किया गया है; एजेंसी ने इस कार्रवाई में पशु चर्बी मिलने का दावा नहीं किया है। इससे पहले CBI द्वारा गठित SIT की जांच में जांचे गए नमूनों में पशु चर्बी की मौजूदगी स्थापित नहीं होने की रिपोर्ट सामने आई थी, हालांकि घी में अन्य प्रकार की मिलावट और खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच अलग विषय रही है।इसलिए मौजूदा ED कार्रवाई को सीधे पुराने “animal fat” आरोप की पुष्टि के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। ताजा कार्रवाई का केंद्र कथित रूप से पाम ऑयल, पामोलिन, पाम कर्नेल ऑयल तथा अन्य पदार्थों का इस्तेमाल कर गाय के घी के नाम पर उत्पाद तैयार करने और उसके वित्तीय लेन-देन पर है। रोज तैयार होते हैं 4 लाख से ज्यादा श्रीवारी लड्डू तिरुपति का श्रीवारी लड्डू दुनिया के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक प्रसादों में शामिल है। TTD की जून 2026 की आधिकारिक जानकारी के अनुसार मंदिर प्रशासन प्रतिदिन 4 लाख से अधिक लड्डू तैयार करता है। मई में औसतन करीब 4.08 लाख लड्डू प्रतिदिन बनाए गए थे। अकेले जून 2026 में रिकॉर्ड 1.26 करोड़ से अधिक लड्डुओं की बिक्री हुई।TTD के मुताबिक लड्डू निर्माण में रोजाना लगभग 16 टन घी सहित करीब 68 टन कच्ची सामग्री इस्तेमाल होती है। इतनी बड़ी मात्रा में प्रसाद तैयार होने के कारण घी की गुणवत्ता और सप्लाई चेन की निगरानी सीधे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और खाद्य गुणवत्ता से जुड़ा विषय है।अब मनी ट्रेल और सप्लाई नेटवर्क की जांच कैलाश चंद मंगला को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद ED की जांच अब कथित मिलावट से पैदा हुई आय, कारोबारी संस्थाओं के बीच हुए भुगतान और सप्लाई नेटवर्क पर केंद्रित है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित मिलावटी उत्पाद किन-किन संस्थाओं के जरिए TTD तक पहुंचा और इससे जुड़े वित्तीय लाभ का प्रवाह किस तरह हुआ। फिलहाल कैलाश चंद मंगला के खिलाफ लगाए गए ये सभी आरोप ED की जांच का हिस्सा हैं। गिरफ्तारी या एजेंसी का आरोप अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है और मामले की अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
Read more 20th Sep 2026
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?...
गुप्त ध्वनि किरणों के साथ ओशो पर किसने हमला किया?... * ओशो के निजी दंत चिकित्सक देवगेट ओशो की मृत्यु से 4 दिन पहले हुई घटनाओं के बारे में बात करते हैं (शरीर को छोड़कर)... * 15 aजनवरी, 1990 को, मेरे जन्मदिन पर, मुझे शुन्यो से एक संदेश मिला: ओशो चाहते थे कि मैं उनके पेट का एक्स-रे ले। हम दंaत कक्ष में मिले। ओशो का शरीर पतला और बेकार लग रहा था, फिर भी मैंने उसे शक्तिशाली रूप से उपस्थित महसूस किया। मुझे शुन्यो से पता था कि वह हर दिन बीस घंटे से अधिक सो रहा था, हर शाम बुद्ध हॉल में कुछ क़ीमती मिनटों के लिए अपनी शारीरिक ऊर्जा को बचा रहा था। ओशो नेa मुझे बताया कि उसके हमलावरों की आवाज़ से उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया था। उन्होंने कहा कि उनमें से शायद तीन, दो पुरुष और एक महिला, ध्वनि तरंगों पर ध्यानaa केंद्रित करने और अपने शरीर को लक्षित करने के लिए एक विशेष गठन में बैठे थे। यहां भारत में प्राचीन योगिक प्रथाएं हैं जहां लोग कुछ ध्वनियों, कुछ मंत्रों को जानते हैं, जो लोगों को नुक़सान पहुंचाने के लिए ध्वनि को केंद्रित कर सकते हैं। लेकिन मुझ पर हमला करaaने वाले ये लोग भारतीय नहीं हैं। वे वही लोग हैं जिन्होंने अमेरिका में पहले मुझे मारने की कोशिश की थी। वे तब सफल नहीं हो सके, और अब वे जो शुरू किया उसे पूरा कर ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुझे बोलने से रोकने के लिए ज़हर की कोशिश की लेकिन मैं जारी रखने में कामयाब रहा। अब, पांच साल बाद वे वापस आ गए हैं। उन्होंने पहले बुद्ध हॉल में अपनी ध्वनि किरणों का उपयोग मेरे दिमाग़ पर हमला करने के लिए किया लेकिन मैं अपने दिमाग़ में नहीं हूं। मैं एक नो-मन हूं और उनकी आवाज़ का बहुत कम प्रभाव था। इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी, अब वे मेरे शरीर पर हमला कर रहे हैं। मेरे गरीब शरीर को उनकी किरणों से कोई सुरक्षा नहीं है। हर दिन यह कमजोर होता जाता है। वे मुझे मार नहीं सकते लेकिन वे मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचा सकते हैं। अभी मेरे जिगर के क्षेत्र में बहुत दर्द हो रहा है। क्या आप इसे एक्स-रे कर सकते हैं? दुख की बात है, मैंने समझाया कि मेरी दंत एक्स-रे मशीन शायद अपर्याप्त थी क्योंकि यह केवल दांतों और जबड़े की छोटी फिल्में ले सकती थी, लेकिन हम कोशिश कर सकते थे। अमृतो को हमारे पास सबसे बड़ी एक्स-रे फ़िल्म मिली, जबकि मैंने इसकी बीम को चौड़ा करने के लिए डेंटल एक्स-रे मशीन के साथ जिग्गल किया। मैंने वह करने की कोशिश की जो ओशो पूछ रहा था। मैंने उसके जिगर के क्षेत्र की एक तस्वीर ली और फिर दंत विकास में बड़ी फ़िल्म विकसित करने में कामयाब रहा टैंक जिसे छोटी इंट्रा-ओरल डेंटल फ़िल्मों के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन परिणामी छवि धुंधली और अस्पष्ट थी। यह आख़िरी बार था जब मैंने ओशो को उसके भौतिक शरीर में देखा था। 19 जनवरी को शाम 4:30 बजे थे: मैं अपनी प्रेमिका के साथ अपने कमरे में था जब दरवाजे पर एक ज़रूरी दस्तक हुई। मनीषा, पीला और तनावग्रस्त दिख रही थी, ने पूछा कि क्या वह मेरे कमरे के फ़ोन का उपयोग कर सकती है। मुझे पता था कि वह केवल पूछेगी कि क्या कुछ असामान्य हो रहा है। अस्थायी सचिव के रूप में कार्य करते हुए वह इनर सर्कल के सदस्यों को फ़ोन कर रही थी और उन्हें कृष्णा हाउस में एक असाधारण बैठक में तुरंत आने के लिए कह रही थी। ओशो ने पंद्रह महीने पहले इक्कीस लोगों की एक कम्यून प्रबंधन टीम की स्थापना की थी, इसे इनर सर्कल का नाम दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका काम कम्यून के दिन-प्रतिदिन चलने का प्रबंधन करना था। मैं मूल चयन में नहीं था, लेकिन कुछ महीने बाद मुझे शामिल होने के लिए कहा गया था। फ़ोन करने के बाद, मनीषा ने कहा, “गीट, तुमने सुना कि मैं दूसरों को क्या बता रहा था। बैठक कृष्णा हाउस की छत पर ब्लू रूम में है। क्या आप वहां तुरंत जा सकते हैं?” इससे पहले कि मैं कोई सवाल पूछ पाता, वह जल्दी से गलियारे में चली गई, स्पष्ट रूप से एक और महत्वपूर्ण कार्य में शामिल थी। मैंने दोपहर के अधिकांश समय अजीब तरह से विपुल महसूस किया था। बाहरी मामलों की उथल-पुथल के बावजूद मैं कई दिनों से उत्साहित महसूस कर रहा था। मेरे दिल में ख़ुशी का एक अकथनीय नृत्य था। अंदर से मुझे उत्साह, आनंद महसूस हुआ। ब्लू रूम में पहुंचने पर, मैंने देखा कि अधिकांश इनर सर्कल पहले से ही वहां इकट्ठा हो चुके थे। माहौल तनावपूर्ण और तनावपूर्ण था। मेरा अपना उत्साह जगह से बाहर लग रहा था। मैं बैठ गया और इंतज़ार किया। कुछ मिनटों के बाद जयेश ने अमृतो के साथ प्रवेश किया। यह देखने के लिए संक्षेप में चारों ओर देखते हुए कि हम सभी मौजूद हैं, उन्होंने एक दृढ़, हालांकि शांत आवाज़ में कहा, “मुझे लगता है कि इसे लपेटने का कोई तरीक़ा नहीं है। मैं आपको सीधे बताऊंगा। ओशो ने कुछ समय पहले लगभग 4:45 बजे अपना शरीर छोड़ दिया था दोपहर।” स्तब्ध, मैंने अपनी घड़ी को देखा। शाम के 5:15 बजे थे। उपस्थित दो या तीन लोग रोने लगे। जयेश ने जल्दी से बीच में टोका, “देखो, मुझे तुम्हारी सारी मदद की ज़रूरत है। कृपया अभी तक अलग न हों। मुझे आप सभी की ज़रूरत है कि ओशो के भेजने को उतना ही सुंदर बनाने में मदद करें जितना वह हकदार है। यह आख़िरी चीज है जो हम उसके लिए कर सकते हैं भौतिक शरीर, चलो इसे अद्भुत बनाते हैं। उसने मुझे ठीक से बताया कि वह कैसे चाहता है कि ऐसा हो। उसने मुझे हर चीज के लिए विस्तृत निर्देश दिए, लेकिन मुझे यहां हर किसी की मदद की ज़रूरत है।” जयेश के शब्दों को सुनकर मेरा पहले का उत्साह सदमे में बदल गया था, लेकिन मैंने ओशो को अपने लोगों के साथ अपने अंतिम उत्सव का आनंद लेने में सक्षम बनाने के लिए हमारी मदद के लिए जयेश की अपील को स्पष्ट रूप से सुना। जैसे ही मैंने ब्लू रूम छोड़ा, जयेश ने मुझे बताया कि ओशो ने अनुरोध किया था कि मैं उनके शरीर को जलते हुए घाटों तक ले जाने के लिए एक वाहक बनूं। गतिविधि और भ्रमित भावनाओं के एक धुंध में मुझे याद है कि ओशो के इस अंतिम उपहार के लिए बेहद आभारी महसूस कर रहा था। - स्वामी देवगीत पुस्तक : ओशो - द फर्स्ट बुद्ध इन द डेंटल चेयर अध्याय: 17 अध्याय का नाम: ओशो का अंतिम दंत नाटक: अधिनियम V अंतिम सुनहरी झलक
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